Shankaracharya FIR: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ बड़ी कानूनी कार्रवाई हुई है। पॉक्सो अदालत के आदेश पर झूसी थाने में उनके खिलाफ FIR दर्ज की गई है। उन पर 2025 के महाकुंभ और 2026 के माघ मेले के दौरान दो नाबालिग बटुकों के यौन शोषण का आरोप लगा है। FIR में शंकराचार्य के अलावा उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी और अन्य लोगों के नाम शामिल हैं।
यह विवाद 18 जनवरी को मौनी अमावस्या पर संगम तट पर स्नान विवाद से शुरू हुआ था, जो अब संगीन आरोपों और राजनीतिक घमासान तक पहुंच गया है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने सरकार पर राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप लगाते हुए शंकराचार्य के समर्थन में मोर्चा खोल दिया है।
क्या है पूरा मामला?
18 जनवरी को मौनी अमावस्या के अवसर पर संगम तट पर स्नान को लेकर विवाद हुआ था। इसके बाद से ही शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच तल्खी बढ़ गई थी। शंकराचार्य ने सीएम योगी आदित्यनाथ पर कई आरोप लगाए थे।
इस बीच, आशुतोष ब्रह्मचारी नाम के एक व्यक्ति ने 24 जनवरी को पहली बार प्रयागराज पुलिस में शिकायत दी। 25 जनवरी को पुलिस उच्चाधिकारियों को ईमेल, 27 जनवरी को डाक से शिकायत भेजी गई, लेकिन मुकदमा नहीं दर्ज हुआ। इसके बाद 28 जनवरी को अदालत का दरवाजा खटखटाया गया। अदालत ने पुलिस से रिपोर्ट मांगी और 7 फरवरी को एसीपी की रिपोर्ट के बिना ही अदालत ने मुकदमा दर्ज कर जांच के आदेश दे दिए।
22 फरवरी को पॉक्सो अदालत के आदेश के बाद झूसी थाने में FIR दर्ज की गई। पुलिस ने पॉक्सो एक्ट की धारा 3, 4, 6, 16 और 17 के अलावा बीएनएस की धारा 351(3) के तहत मुकदमा दर्ज किया है।
राजनीति ने भी खोला मोर्चा
इस पूरे मामले में राजनीति भी खुलकर अखाड़े में आ चुकी है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने सरकार पर हमला बोलते हुए इसे राजनीतिक साजिश करार दिया है।
कांग्रेस: प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर केंद्रीय एजेंसी या स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग की है। उनका कहना है कि उत्तर प्रदेश पुलिस पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
समाजवादी पार्टी: सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि रामभद्राचार्य पर धोखाधड़ी का केस वापस करके उनसे गलती हो गई। उन्होंने कहा कि अगर आशुतोष ब्रह्मचारी रामभद्राचार्य का शिष्य है तो उन्हें जेल भेज देना चाहिए था।
क्या कहते हैं शंकराचार्य और आशुतोष?
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने सभी आरोपों को झूठा और सियासी साजिश बताया है। उनका कहना है, “हमारे गुरुकुल में वे लड़के कभी प्रविष्ट ही नहीं हुए। उनका हमसे कोई लेना-देना नहीं है। वह हरदोई के विद्यालय के छात्र हैं, जैसा कि उनकी मार्कशीट से पता चलता है।” उन्होंने यूपी पुलिस पर अविश्वास जताते हुए गैर-भाजपा शासित राज्य की पुलिस से जांच की मांग की है।
वहीं आशुतोष ब्रह्मचारी का दावा है कि उनके पास आरोपों को सिद्ध करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं। उन्होंने कहा, “तो हमें पता चला है, रात दोनों मिलके रोए हैं। क्योंकि अब उनको दिख रहा है कि सारी सीढ़ियां सामने आएंगी। वो सब नंग प्रदर्शन जो है, वो हम जल्द ही पुलिस को देने जा रहे हैं।”
रामभद्राचार्य कनेक्शन
इस पूरे विवाद में एक नाम और जुड़ गया है – जगतगुरु रामभद्राचार्य। आशुतोष ब्रह्मचारी के 2022 में रामभद्राचार्य के शिष्य बनने का दावा किया जा रहा है। अखिलेश यादव ने इसी मुद्दे को उठाते हुए कहा कि रामभद्राचार्य पर 400 करोड़ का धोखाधड़ी का मुकदमा वापस लेना गलती थी।
शंकराचार्य ने भी इस मुद्दे पर तंज कसा, “आदरणीय रामभद्राचार्य जी के बारे में बोलना नहीं चाहिए, लेकिन अगर उनका यह चेला है तो मुझसे गलती हुई है। हमने कभी उन पर 400 करोड़ का मुकदमा था, वो वापस लिया था, मुझे उन्हें जेल भेज देना चाहिए था।”
क्या है पृष्ठभूमि?
यह विवाद 18 जनवरी को मौनी अमावस्या पर संगम तट पर स्नान को लेकर शुरू हुआ था। शंकराचार्य ने सरकारी प्रबंधन पर सवाल उठाए थे। इसके बाद उन्होंने सीएम योगी के हिंदू होने पर सवाल उठाया, गौ हत्या पर सवाल उठाए और गौ रक्षा को लेकर अल्टीमेटम दिया। अब यह लड़ाई यौन उत्पीड़न के संगीन आरोपों तक पहुंच गई है।
राजनीति के रंग
यह पूरा मामला अब सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक और धार्मिक रंग ले चुका है। एक तरफ कांग्रेस और सपा शंकराचार्य के समर्थन में खड़ी हैं, तो दूसरी तरफ रामभद्राचार्य जैसे संत उनके रुख का विरोध कर रहे हैं। संतों की पीठ पर सियासत का अखाड़ा सज चुका है। इस पूरे मामले में ब्राह्मण वोट बैंक से लेकर यूपी की सियासत तक, कई समीकरण छिपे हुए हैं। अब देखना होगा कि यह मामला किस दिशा में जाता है।
मुख्य बातें (Key Points)
प्रयागराज की पॉक्सो अदालत के आदेश पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों के खिलाफ FIR दर्ज।
आरोप- 2025 महाकुंभ और 2026 माघ मेले में दो नाबालिग बटुकों का यौन शोषण किया गया।
कांग्रेस और सपा ने सरकार पर राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप लगाते हुए शंकराचार्य का समर्थन किया।
शंकराचार्य ने आरोपों को झूठा बताया, वहीं आशुतोष ब्रह्मचारी ने सबूत पेश करने का दावा किया।








