Donald Trump on Tariffs: अमेरिका से आई इस बड़ी खबर ने दुनिया की ट्रेड पॉलिटिक्स में भूचाल ला दिया है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को टैरिफ के मुद्दे पर जोरदार झटका दे दिया। कोर्ट ने उनके द्वारा इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर एक्ट (IEEPA) के तहत लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ को गैरकानूनी करार दे दिया। लेकिन फैसले के कुछ ही घंटों बाद ट्रंप ने पलटवार करते हुए नया टैरिफ बम फोड़ दिया। उन्होंने पूरी दुनिया पर 10% ग्लोबल टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इसका भारत पर क्या असर होगा? क्या अब 18% या उससे ज्यादा की जगह सिर्फ 10% टैरिफ देना होगा? आइए समझते हैं इस ग्लोबल ट्रेड वॉर के नए चैप्टर को।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल ट्रंप ने पिछले साल अप्रैल 2025 में ‘लिबरेशन डे’ के नाम पर 10% से लेकर 50% तक के रेसिप्रोकल टैरिफ का ऐलान किया था। उन्होंने यह कदम 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर एक्ट (IEEPA) के तहत उठाया था। इसी के तहत भारत समेत कई देशों पर भारी टैरिफ लगाए गए थे। लेकिन अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि यह कानून केवल असली आपातकालीन हालात के लिए है और राष्ट्रपति इस तरह व्यापक व्यापारिक टैरिफ लगाने के लिए इसका इस्तेमाल नहीं कर सकते। कोर्ट ने इसे पावर का ओवरयूज बताया।
ट्रंप का पलटवार: 10% ग्लोबल टैरिफ
सुप्रीम कोर्ट का फैसला आते ही ट्रंप के तेवर गर्म हो गए। उन्होंने तुरंत 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 122 के तहत एक नया कार्यकारी आदेश साइन कर दिया और दुनिया के सभी देशों से आयात पर 10% ग्लोबल टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया। वाइट हाउस के एक अधिकारी के मुताबिक, यह आदेश करीब 150 दिनों यानी लगभग 5 महीनों के लिए लागू रहेगा। जब तक कोई नया प्राधिकरण या सिस्टम लागू नहीं होता, तब तक यही 10% टैरिफ लागू रहेगा। यानी फिलहाल भारत समेत सभी देशों पर यही दर प्रभावी रहेगी।
क्या अब 18% टैरिफ से मिली राहत?
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या इसका मतलब यह है कि पहले जो 18% या उससे ज्यादा टैरिफ की बात हो रही थी, वो खत्म हो गई? मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, IEEPA के तहत लगाए गए टैरिफ की जगह अब यह 10% ग्लोबल टैरिफ लेगा। यानी पुराने रेसिप्रोकल टैरिफ हट जाएंगे और उनकी जगह यह नई दर लागू होगी। हालांकि, खुद ट्रंप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में संकेत दिया है कि 10% सिर्फ शुरुआती दर है। आगे जांच के बाद इसे बढ़ाया भी जा सकता है। यानी फिलहाल राहत है, लेकिन खतरा टला नहीं है।
भारत पर क्या होगा असर?
अब सबसे अहम सवाल भारत पर इसका क्या असर होगा? बता दें कि भारत अमेरिका को टेक्सटाइल, ऑटोपार्ट्स, फार्मा, स्टील और इंजीनियरिंग गुड्स बड़े पैमाने पर एक्सपोर्ट करता है।
पहले की स्थिति: अगर IEEPA के तहत लगाए गए 18% या उससे ज्यादा के टैरिफ जारी रहते, तो भारतीय निर्यातकों पर भारी दबाव पड़ता। उनके माल अमेरिका में महंगे हो जाते और प्रतिस्पर्धा कमजोर होती।
अब की स्थिति: 10% की दर फिलहाल पहले के मुकाबले कम झटका मानी जा सकती है। यह भारतीय निर्यातकों के लिए राहत की बात है। हालांकि, 10% का अतिरिक्त शुल्क भी भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता को प्रभावित करेगा, लेकिन यह 18% से बेहतर है।
क्या है ट्रंप की रणनीति?
ग्लोबल लेवल पर देखें तो ट्रंप का यह कदम उनके संरक्षणवादी एजेंडे का हिस्सा है। वाइट हाउस का कहना है कि यह भुगतान संतुलन की समस्या और अनुचित व्यापार प्रथाओं से निपटने के लिए उठाया गया कदम है। साथ ही सभी ट्रेड पार्टनर्स को ट्रेड डील्स का पालन करने की सलाह भी दी गई है। ट्रंप लंबे समय से ‘अमेरिका फर्स्ट’ की नीति पर चल रहे हैं और टैरिफ को अमेरिका में निवेश बढ़ाने, फैक्ट्रियां वापस लाने और नौकरियां पैदा करने का हथियार मानते हैं।
क्या नया आदेश भी होगा कानूनी चुनौती का सामना?
यह भी एक बड़ा सवाल है कि क्या यह नया आदेश भी कानूनी चुनौती का सामना करेगा? क्योंकि सुप्रीम कोर्ट का संदेश साफ है कि राष्ट्रपति को असीमित व्यापारिक शक्तियां नहीं दी जा सकतीं। ऐसे में आने वाले महीनों में अमेरिका की ट्रेड पॉलिसी एक बार फिर अदालतों और राजनीतिक गलियारों में घिर सकती है। ट्रंप ने 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 122 का इस्तेमाल किया है, जो भुगतान संतुलन की समस्या से निपटने के लिए अस्थायी टैरिफ की अनुमति देती है। यह देखना होगा कि इस नए आदेश की कानूनी वैधता को अदालत में कितनी चुनौती मिलती है।
आगे क्या?
तो कुल मिलाकर तस्वीर यह है कि कोर्ट ने रोका, ट्रंप ने रास्ता बदला। टैरिफ की दर घटी है, लेकिन खेल अभी खत्म नहीं हुआ है। अब सबकी निगाहें इस पर रहेंगी कि 150 दिनों बाद क्या होता है? क्या 10% स्थायी रहेगा? बढ़ेगा या फिर एक नया ट्रेड तूफान खड़ा होगा? फिलहाल के लिए दुनिया को 10% ग्लोबल टैरिफ के साथ ही आगे बढ़ना होगा। भारत के लिए यह राहत की खबर है, लेकिन आने वाले दिनों में अमेरिकी नीतियों पर लगातार नजर बनाए रखनी होगी।
मुख्य बातें (Key Points)
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के IEEPA टैरिफ को अवैध करार दिया।
ट्रंप ने पलटवार करते हुए 1974 के ट्रेड एक्ट के तहत दुनिया के सभी देशों पर 10% ग्लोबल टैरिफ लगाया।
पहले 18% या उससे ज्यादा के टैरिफ की जगह अब 10% की दर लागू होगी, जो भारत के लिए राहत भरी है।
यह नया टैरिफ अगले 150 दिनों (करीब 5 महीने) के लिए लागू रहेगा।
भारतीय निर्यातकों को 10% के अतिरिक्त शुल्क का सामना करना पड़ेगा, जो पहले के मुकाबले कम बोझिल है।








