ICC T20 World Cup 2026 Super 8 Controversy: आईसीसी (ICC) को टी20 वर्ल्ड कप 2026 के सुपर-8 फॉर्मेट को लेकर जमकर आलोचना झेलनी पड़ रही है। दरअसल, प्री-सीडिंग की वजह से सभी ग्रुप की टॉप टीमें एक ही ग्रुप में पहुंच गई हैं, जिससे एक असंतुलित और कठिन ग्रुप बन गया है। क्रिकेट फैंस और एक्सपर्ट्स इसे ‘ग्रुप ऑफ डेथ’ का नाम दे रहे हैं और आईसीसी के इस फैसले की जमकर ट्रोलिंग हो रही है।
दरअसल, इस बार का टूर्नामेंट भारत और श्रीलंका की संयुक्त मेजबानी में खेला जा रहा है। ऐसे में लॉजिस्टिक्स और यात्रा कार्यक्रम को ध्यान में रखते हुए फिक्स्चर पहले से तय किए गए थे। सबसे बड़ी वजह पाकिस्तान का भारत आने से इनकार करना रहा, जिसके चलते उनके सभी मैच श्रीलंका में रखे गए। इसी सेट पैटर्न के चलते यह स्थिति बनी कि ग्रुप स्टेज में टॉप करने वाली सभी टीमें सुपर-8 के एक ही ग्रुप में आ गईं।
क्या है पूरा मामला? क्यों हो रही है आलोचना?
आमतौर पर किसी भी टूर्नामेंट में यह देखा जाता है कि एक ग्रुप की टॉप टीम का मुकाबला दूसरे ग्रुप की दूसरे नंबर की टीम से होता है, जिससे एक संतुलित नॉकआउट राउंड बनता है। लेकिन इस बार सुपर-8 में यह ‘क्रॉस’ पैटर्न नहीं बल्कि ‘सीधा’ पैटर्न अपनाया गया है। यानी सभी ग्रुप विनर आपस में भिड़ेंगे और सभी ग्रुप में दूसरे स्थान पर रहने वाली टीमें आपस में भिड़ेंगी।
इसका नतीजा यह हुआ कि ग्रुप वन में अब भारत, दक्षिण अफ्रीका , वेस्टइंडीज़ और जिम्बाब्वे जैसी टीमें हैं, जबकि ग्रुप टू में पाकिस्तान, श्रीलंका, इंग्लैंड और न्यूजीलैंड हैं। ग्रुप वन को देखते हुए इसे ‘ग्रुप ऑफ डेथ’ का टैग दिया जा रहा है, क्योंकि टॉप टीम होने के बावजूद उनके सामने कोई कमजोर टीम नहीं है और उन्हें एक-दूसरे को हराकर ही सेमीफाइनल में जगह बनानी होगी।
संयुक्त मेजबानी और पाकिस्तान का फैक्टर
क्रिकेट विशेषज्ञों के मुताबिक, आईसीसी के पास इसके अलावा कोई और विकल्प नहीं था। संयुक्त मेजबानी में टीमों के यात्रा कार्यक्रम, प्रैक्टिस और मैचों के बीच आराम का समय पहले से तय करना जरूरी होता है। चूंकि पाकिस्तान ने भारत में खेलने से मना कर दिया, इसलिए उनके सभी मैच श्रीलंका में रखे गए। इसी कारण अन्य टीमों के लिए भी फिक्स्चर इसी तरह सेट हो गए कि जो टीमें भारत में खेल रही थीं, वे सुपर-8 में भी भारत में ही खेलेंगी और जो श्रीलंका में थीं, वे वहीं खेलेंगी। इसी का नतीजा है कि ग्रुप स्टेज के टॉपर (जिनमें भारत और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं) एक ही ग्रुप में आ गए।
भारत के सामने दक्षिण अफ्रीका की चुनौती
भारत का पहला सुपर-8 मैच 22 फरवरी को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ है। यह मुकाबला काफी रोमांचक होने वाला है। दक्षिण अफ्रीका ने भी अपने ग्रुप में शानदार प्रदर्शन किया है और उसके पास एडेन मार्कराम और डेवाल्ड ब्रेविस जैसे आक्रामक बल्लेबाज हैं। भारत के लिए चिंता का विषय सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा का खराब फॉर्म है, जो लगातार रन बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में यह मैच दोनों टीमों के लिए अहम होगा और इससे यह भी तय होगा कि आगे किसे खिलाया जाए।
विश्लेषण: क्या यह फॉर्मेट सही है या गलत?
एक तरफ जहां आलोचक इसे अनफेयर बता रहे हैं, वहीं कुछ का मानना है कि इससे टूर्नामेंट और रोमांचक हो गया है। अब हर मैच ‘करो या मरो’ वाला होगा और टीमों को अपनी चैंपियन क्षमता साबित करनी होगी। लेकिन जो टीमें ग्रुप स्टेज में शानदार प्रदर्शन करके टॉप पर रहीं, उनके लिए यह थोड़ा निराशाजनक है कि उन्हें कोई आसान मुकाबला नहीं मिल रहा। फिलहाल, सुपर-8 के मुकाबले 1 मार्च तक चलेंगे और यही तय करेंगे कि सेमीफाइनल में कौन पहुंचेगा।
मुख्य बातें (Key Points)
ICC के सुपर-8 फॉर्मेट की आलोचना, सभी ग्रुप विनर एक ही ग्रुप में।
संयुक्त मेजबानी (भारत-श्रीलंका) और पाकिस्तान के भारत न आने से बना यह अजीब समीकरण।
ग्रुप वन: भारत , दक्षिण अफ्रीका , वेस्टइंडीज़, जिम्बाब्वे। ग्रुप टू: पाकिस्तान, श्रीलंका, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड।
भारत का पहला सुपर-8 मैच 22 फरवरी को दक्षिण अफ्रीका से।
अभिषेक शर्मा की खराब फॉर्म भारत के लिए चिंता का विषय।








