PSPCL Assets Sale Stayed by High Court: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट (Punjab and Haryana High Court) ने पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PSPCL) की संपत्तियों की बिक्री पर फिलहाल रोक लगा दी है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि अगला आदेश आने तक निगम की कोई भी संपत्ति नहीं बेची जाएगी। यह आदेश एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए दिया गया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि वित्तीय दबाव कम करने के लिए सार्वजनिक संपत्तियों को बेचा जा रहा है।
याचिका में कहा गया है कि पंजाब सरकार के विभिन्न विभागों पर PSPCL का करीब 2,582 करोड़ रुपये का बिजली बिल बकाया है। इसके अलावा, सरकार द्वारा 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक की बिजली सब्सिडी भी अभी तक निगम को नहीं दी गई है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि इस भारी वित्तीय दबाव को कम करने के लिए निगम की कीमती सार्वजनिक संपत्तियां बेचने की तैयारी की जा रही है, जो जनता के हित में नहीं है।
किन विभागों पर है सबसे ज्यादा बकाया?
याचिका में बताया गया कि सबसे अधिक बकाया राशि निम्नलिखित विभागों पर है:
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वाटर सप्लाई एवं सेनिटेशन विभाग
स्थानीय निकाय विभाग
ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग
स्वास्थ्य विभाग
हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जब तक अगला आदेश नहीं आता, तब तक PSPCL की किसी भी संपत्ति की बिक्री नहीं होगी।
सख्त कार्रवाई की मांग
याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से यह भी मांग की है कि जिन सरकारी विभागों ने बिजली बिल नहीं चुकाया है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने मांग की है कि जरूरत पड़ने पर इन विभागों के बिजली कनेक्शन काटे जाएं और सरकार को बकाया राशि तुरंत देने का आदेश दिया जाए।
अगली सुनवाई 16 मार्च को
अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 मार्च की तारीख तय की है। उस दिन राज्य सरकार को अपनी पूरी स्थिति अदालत के सामने रखनी होगी और स्पष्ट करना होगा कि वह इस वित्तीय संकट से कैसे निपटने की योजना बना रही है और बकाया राशि का भुगतान कब तक किया जाएगा।
विश्लेषण: सार्वजनिक संपत्तियों का संरक्षण बनाम सरकारी बकाया
यह मामला कई मायनों में महत्वपूर्ण है। एक तरफ यह सवाल उठता है कि जब सरकारी विभाग ही अपने बिजली के बिल नहीं चुका रहे हैं, तो वे आम जनता से बकाया वसूली की मांग कैसे कर सकते हैं। दूसरी तरफ, PSPCL जैसे सार्वजनिक उपक्रम को अपनी कीमती संपत्तियां बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जो कि एक गंभीर वित्तीय प्रबंधन की कमी को दर्शाता है। हाईकोर्ट का यह आदेश सार्वजनिक संपत्तियों के संरक्षण की दिशा में एक अहम कदम है। अब सरकार को न केवल अपने विभागों से बकाया वसूली के लिए ठोस कदम उठाने होंगे, बल्कि PSPCL को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए भी एक रणनीति बनानी होगी। 16 मार्च को होने वाली सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि सरकार इस दिशा में क्या कदम उठाने जा रही है।
मुख्य बातें (Key Points)
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने PSPCL की संपत्तियों की बिक्री पर रोक लगा दी है।
याचिका में आरोप है कि सरकारी विभागों पर 2,582 करोड़ रुपये का बिजली बिल बकाया है।
सरकार ने 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक की बिजली सब्सिडी भी नहीं दी है।
वाटर सप्लाई, स्थानीय निकाय, पंचायत और स्वास्थ्य विभाग पर सबसे ज्यादा बकाया है।
अगली सुनवाई 16 मार्च को होगी, सरकार को जवाब देना होगा।








