CGHS New Rates: केंद्रीय सरकारी स्वास्थ्य योजना (CGHS) के तहत केंद्र सरकार ने 42 लाख से अधिक लाभार्थियों को एक बड़ी राहत दी है। अब अगर किसी लाभार्थी के इलाज का खर्च 5 लाख से 10 लाख रुपये के बीच आता है, तो उसकी फाइल बिना किसी देरी के तुरंत स्वीकृत कर दी जाएगी। यह फैसला उन सभी केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए राहत भरी खबर है, जिन्हें अब तक इलाज के पैसे वापस पाने के लिए लंबी प्रक्रियाओं और भागदौड़ से गुजरना पड़ता था।
नए नियम के अनुसार, अब विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में कार्यरत विभागाध्यक्ष (HOD) ही इस राशि तक के इलाज की मंजूरी प्रदान कर सकेंगे। उन्हें अब इसके लिए संबंधित मंत्रालय या विभाग के आंतरिक वित्त प्रभाग (IFD) के पास फाइल नहीं भेजनी पड़ेगी। इससे न सिर्फ फाइलों के निपटारे में तेजी आएगी, बल्कि लाभार्थियों को अपनी फाइल की स्थिति जानने के लिए अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर लगाने से भी छुटकारा मिल जाएगा।
क्या था पुराना नियम और क्या है नया?
फिलहाल CGHS लाभार्थियों के लिए इलाज की सीमा 2 लाख से 5 लाख रुपये तक थी। यह बदलाव करीब 10 साल पहले किया गया था। अब सरकार ने इस सीमा को बढ़ाकर 5 लाख से 10 लाख रुपये कर दिया है। हालांकि, लाभार्थी को इलाज का खर्च पहले खुद से वहन करना होगा, लेकिन बाद में विभाग द्वारा उस राशि की तुरंत भरपाई (रीइम्बर्समेंट) कर दी जाएगी।
पहले CGHS में 5 लाख से अधिक के इलाज खर्च वाली फाइलों को विभागाध्यक्ष सीधे मंजूरी नहीं दे सकते थे। उनके लिए फाइल को पहले IFD के पास भेजना अनिवार्य था। IFD से मंजूरी मिलने में काफी देरी हो जाती थी, क्योंकि वहां मेडिकल बिल और अन्य दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जाती थी। अगर कुछ गलतियां निकलती थीं, तो उन्हें ठीक करने में और समय लग जाता था। इस देरी की वजह से कर्मचारियों को काफी परेशानी होती थी और उनका पैसा समय पर नहीं मिल पाता था।
लाभार्थियों को कैसे मिलेगा फायदा?
सरकार के इस फैसले से लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को सीधा लाभ मिलेगा। अब उन्हें 10 लाख रुपये तक के इलाज के लिए लंबी प्रशासनिक प्रक्रियाओं से नहीं गुजरना पड़ेगा। फाइल के IFD में अटके रहने की समस्या खत्म हो जाएगी। विभागाध्यक्ष को सीधे मंजूरी देने का अधिकार मिलने से प्रक्रिया तेज होगी और पैसा जल्दी मिलेगा। यह उन मरीजों और उनके परिवारों के लिए बड़ी राहत है, जो पहले से ही बीमारी से जूझ रहे होते हैं और उनके लिए पैसे का इंतजार करना एक अतिरिक्त बोझ होता था।
विश्लेषण: सुशासन की दिशा में एक कदम
केंद्र सरकार का यह कदम प्रशासनिक सुधार और सुशासन की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। विकेंद्रीकरण (डिसेंट्रलाइजेशन) के जरिए अधिकारियों को अधिकार देना और अनावश्यक नौकरशाही प्रक्रियाओं को खत्म करना न सिर्फ कर्मचारियों की कार्यकुशलता बढ़ाएगा, बल्कि आम लोगों को भी त्वरित न्याय और लाभ दिलाएगा। CGHS जैसी स्वास्थ्य योजना में इस तरह के बदलाव से पारदर्शिता आएगी और लाभार्थियों का विश्वास बढ़ेगा। यह फैसला दिखाता है कि सरकार कर्मचारियों की भलाई के प्रति संवेदनशील है और उनकी समस्याओं को समझती है।
मुख्य बातें (Key Points)
CGHS (Central Government Health Scheme) के तहत अब 5 से 10 लाख रुपये के इलाज की फाइल तुरंत मंजूर होगी।
यह मंजूरी अब विभागाध्यक्ष (HOD) खुद दे सकेंगे, उन्हें आंतरिक वित्त प्रभाग (IFD) के पास फाइल नहीं भेजनी होगी।
इससे 42 लाख से अधिक लाभार्थियों को राहत मिलेगी और उनकी भागदौड़ खत्म होगी।
पहले यह सीमा 2 से 5 लाख रुपये थी, जिसे बढ़ाकर 5 से 10 लाख रुपये किया गया है।
लाभार्थी को इलाज का खर्च खुद देना होगा, लेकिन उसकी भरपाई (रीइम्बर्समेंट) तुरंत कर दी जाएगी।








