India AI Summit Cyber Attack Warning: इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 (India AI Impact Summit) में जहां एक तरफ एआई की ताकत और उससे होने वाले फायदों पर चर्चा हो रही थी, वहीं दूसरी तरफ एक गंभीर चेतावनी ने सबका ध्यान खींचा। सिंगापुर (Singapore) से आए साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट ने साफ किया कि एआई (AI) अब हैकर्स का सबसे बड़ा हथियार बन चुका है। फेक वॉइस कॉल, सुपर स्मार्ट फिशिंग ईमेल, डीपफेक वीडियो और ऑटोमेटेड अटैक के जरिए साइबर अपराधी आम लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि भारत सरकार और सुरक्षा एजेंसियां इन हमलों से निपटने के लिए क्या तैयारी कर रही हैं।
समिट में मौजूद साइबर सिक्योरिटी कंपनी ईसेट (ESET) के डायरेक्टर और प्रेसिडेंट ने दैनिक जागरण से खास बातचीत में इस खतरे की गंभीरता को समझाया। उन्होंने कहा कि तकनीक जब भी आती है, तो वो अच्छे हाथों में आती है, जिससे हम अपनी लाइफ इंप्रूव कर सकते हैं। लेकिन उसी समय बैड एक्टर्स (बुरे लोग) भी उसी तकनीक का इस्तेमाल मैलिशियस और बुरे कामों के लिए कर सकते हैं। उन्होंने कहा, “भारत समेत दुनिया के बहुत सारे देशों में स्किल गैप बहुत बड़ा है।” यानी लोगों को एआई के साथ-साथ उससे होने वाले खतरों की समझ भी उतनी ही जरूरी है।
कैसे एआई बन रहा है साइबर क्रिमिनल का हथियार?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, एआई ने साइबर अटैक के तरीके को पूरी तरह बदल कर रख दिया है। पहले हैकर्स को हर किसी को अलग-अलग मैसेज भेजने पड़ते थे, लेकिन अब एआई की मदद से वे पर्सनलाइज्ड फिशिंग ईमेल बना सकते हैं। आपकी आवाज की नकल करके एआई फेक कॉल कर सकता है और आपके चेहरे से डीपफेक वीडियो बनाकर आपको या आपके परिवार को ब्लैकमेल किया जा सकता है। ये अटैक इतने स्मार्ट हो गए हैं कि इन्हें पहचान पाना आम आदमी के लिए बेहद मुश्किल हो गया है।
इसी के साथ एक्सपर्ट्स ने बचाव के लिए कुछ जरूरी टिप्स भी दिए:
स्ट्रॉन्ग और अलग-अलग पासवर्ड (Strong and Different Passwords) का इस्तेमाल करें।
टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) ऑन करें।
अनजान कॉल्स या लिंक्स पर क्लिक न करें।
एंटीवायरस और एआई सिक्योरिटी टूल्स को अपडेट रखें।
फिशिंग ईमेल की पहचान करना सीखें।
डाटा प्राइवेसी सेटिंग्स को मजबूत रखें।
एआई टूल्स का इस्तेमाल करते समय सावधानी बरतें।
एआई से बचाव का सबसे अच्छा तरीका: एआई का ही इस्तेमाल!
एक्सपर्ट्स ने इस पर कहा, “एआई अटैक्स से बचने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि हम डिफेंस (बचाव) में भी एआई का इस्तेमाल करें।” उनकी कंपनी पिछले 40 सालों से फ्रॉड रिसर्च और फ्रॉड हंटिंग कर रही है। उन्होंने बताया कि हम रीयल-टाइम थ्रेट डिटेक्शन (तुरंत खतरे की पहचान) और ऑटो रिस्पॉन्स (स्वचालित जवाब) के जरिए हैकर्स से एक कदम आगे रह सकते हैं। उनके ग्लोबल रिसर्चर्स लगातार इन खतरों पर नजर रखे हुए हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि एआई तकनीक को अपनाने की जितनी तेजी है, सुरक्षा उसके पीछे रह जाती है। यह एक बड़ी चुनौती है। लेकिन वे इस नई तकनीक की सुरक्षा को हैंडल करने के लिए सही दिशा में काम कर रहे हैं।
भारत सरकार की तैयारी और युवाओं का उत्साह
समिट में मौजूद एक्सपर्ट ने यह भी कहा कि पिछले दो दिनों से वे यहां हैं और उन्होंने देखा है कि जेन जी (Gen Z) और युवा पीढ़ी कितनी एक्साइटेड है। वे एआई टूल्स के बारे में जानना चाहते हैं, डीप रिसर्च करना चाहते हैं और जॉब्स वगैरह के लिए ऑपॉर्चुनिटीज और कोर्सेज भी करना चाहते हैं। बड़ी-बड़ी कंपनियां यहां अपनी तकनीक दिखा रही हैं, जिससे युवाओं को एक्सपोजर मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार भी सिक्योरिटी को लेकर उतनी ही स्ट्रांग तरीके से काम कर रही है। सुरक्षा और विश्वास (सेफर एंड ट्रस्टेड एआई) इस समिट की मुख्य थीम में से एक है। ईसेट जैसी कंपनियां सरकार और दूसरे संगठनों के साथ मिलकर अपनी एक्सपर्टाइज और गाइडेंस दे रही हैं कि कैसे इन टूल्स को और ज्यादा सिक्योर बनाया जा सके। साथ ही, वे खुद भी साइबर क्राइम से लड़ने के लिए एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं।
मुख्य बातें (Key Points)
India AI Impact Summit 2026 में सिंगापुर (Singapore) के एक्सपर्ट ने बढ़ते साइबर अटैक (Cyber Attack) को लेकर चेतावनी दी है।
हैकर्स अब एआई का इस्तेमाल फेक कॉल, डीपफेक और स्मार्ट फिशिंग अटैक के लिए कर रहे हैं।
एक्सपर्ट के मुताबिक, इन हमलों से बचने का सबसे कारगर तरीका डिफेंस में भी एआई का इस्तेमाल करना है।
स्ट्रॉन्ग पासवर्ड, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) और सॉफ्टवेयर अपडेट जैसे बुनियादी उपाय बेहद जरूरी हैं।
सरकार और सुरक्षा एजेंसियां सेफर एंड ट्रस्टेड एआई को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम कर रही हैं।








