Tarique Rahman Oath Ceremony के साथ ही बांग्लादेश में नई सरकार का गठन हो गया है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के प्रमुख तारिक रहमान ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। इस ऐतिहासिक मौके पर उनके मंत्रिमंडल में एक हिंदू मंत्री समेत दो अल्पसंख्यक नेताओं को शामिल किया गया है, जिससे भारत-बांग्लादेश संबंधों को लेकर नई उम्मीदें जगी हैं।
तारिक रहमान के बाद 13 कैबिनेट मंत्रियों ने शपथ ली। इनमें सबसे चर्चित नाम है निताई रॉय चौधरी का, जो बीएनपी के वरिष्ठ नेता और पार्टी के वाइस चेयरमैन हैं। वह पश्चिमी मगरा चुनाव क्षेत्र से बीएनपी के टिकट पर जीतकर आए हैं और उन्होंने जमात-ए-इस्लामी के उम्मीदवार को हराया है।
कौन हैं निताई रॉय चौधरी?
जनवरी 1949 में जन्मे निताई रॉय चौधरी बांग्लादेश के प्रतिष्ठित वकील और बीएनपी के टॉप लीडरशिप के सीनियर सलाहकार रहे हैं। वह पहले भी सांसद रह चुके हैं और हुसैन मोहम्मद इरशाद की सरकार में युवा एवं खेल मंत्री भी रह चुके हैं। बीएनपी की सेंट्रल कमेटी के वाइस चेयरमैन के रूप में वह पार्टी के रणनीतिकारों में गिने जाते हैं।
तारिक रहमान की कैबिनेट में दो अल्पसंख्यकों को जगह मिली है – एक हिंदू (निताई रॉय चौधरी) और एक बौद्ध नेता। यह कदम बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय के प्रति नई सरकार की सोच को दर्शाता है।
गंगा जल संधि पर बड़ा बयान
शपथ समारोह से पहले ही तारिक रहमान के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर ने एक बड़ा बयान दिया है। द हिंदू को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि 1996 की गंगा जल संधि के नवीनीकरण पर बांग्लादेश दिसंबर 2026 तक अपने राष्ट्रीय हित के आधार पर फैसला करेगा। उन्होंने कहा, “पहले भारतीय राज्यों के हितों को प्राथमिकता दी जाती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। हम ऐसे तरीके से आगे बढ़ेंगे जो हमारे राष्ट्रीय हित में हो।”
भारत की ओर से लोकसभा स्पीकर हुए शामिल
तारिक रहमान के शपथ समारोह के लिए बांग्लादेश ने 13 देशों को न्योता भेजा था, जिसमें भारत भी शामिल था। हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंपैक्ट एआई समिट और फ्रांसीसी राष्ट्रपति के भारत दौरे के चलते बांग्लादेश नहीं जा सके। उनकी जगह लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने भारत का प्रतिनिधित्व किया।
ममता बनर्जी ने भेजा फूल-मिठाई
बांग्लादेश में बीएनपी की जीत पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी खुशी जताई है। उन्होंने तारिक रहमान को फूल और मिठाई भेजकर जीत की बधाई दी है। यह कदम पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के बीच सांस्कृतिक और राजनीतिक रिश्तों को देखते हुए अहम माना जा रहा है।
हिंदू समुदाय के लिए उम्मीद की किरण?
शेख हसीना के जाने के बाद बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर हमलों की घटनाएं सामने आई थीं, जिससे भारत-बांग्लादेश के रिश्तों में खटास आ गई थी। एक कपड़ा फैक्ट्री के वर्कर दीपू चंद्रदास की लिंचिंग और एक चावल व्यापारी की हत्या जैसी घटनाओं ने तनाव बढ़ाया था। ऐसे में तारिक रहमान के मंत्रिमंडल में निताई रॉय चौधरी जैसे हिंदू नेता की एंट्री को भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में सुधार की उम्मीद के तौर पर देखा जा रहा है।
हालांकि, यह देखना अभी बाकी है कि तारिक रहमान की सरकार भारत के साथ संबंधों को किस दिशा में ले जाती है और अल्पसंख्यकों के मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है।
‘जानें पूरा मामला’
बांग्लादेश में हाल ही में हुए संसदीय चुनावों के बाद बीएनपी प्रमुख तारिक रहमान ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। उनके मंत्रिमंडल में 13 मंत्री शामिल किए गए, जिनमें हिंदू नेता निताई रॉय चौधरी और एक बौद्ध नेता प्रमुख हैं। चुनाव में चार अल्पसंख्यक उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की थी। तारिक रहमान के विदेश सलाहकार हुमायूं कबीर ने गंगा जल संधि पर बड़ा बयान देते हुए राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देने की बात कही। भारत की ओर से लोकसभा स्पीकर ओम बिरला समारोह में शामिल हुए। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तारिक रहमान को फूल-मिठाई भेजकर बधाई दी। निताई रॉय चौधरी की नियुक्ति को भारत-बांग्लादेश संबंधों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
मुख्य बातें (Key Points)
तारिक रहमान ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली, 13 मंत्रियों ने भी ली शपथ।
कैबिनेट में हिंदू नेता निताई रॉय चौधरी समेत दो अल्पसंख्यकों को जगह मिली।
गंगा जल संधि के नवीनीकरण पर बांग्लादेश राष्ट्रीय हित के आधार पर लेगा फैसला।
पीएम मोदी की अनुपस्थिति में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने भारत का प्रतिनिधित्व किया।
ममता बनर्जी ने तारिक रहमान को फूल-मिठाई भेजकर जीत की बधाई दी।








