Acne Treatment: पिंपल्स, एक्ने, डार्क सर्कल्स, पिगमेंटेशन – स्किन की ये आम समस्याएं लगभग हर किसी को परेशान करती हैं। डॉ. दीपाली भारद्वाज, सेलिब्रिटी डर्मेटोलॉजिस्ट, फाउंडर एंड चेयरपर्सन, स्किन एंड हेयर क्लीनिक, नई दिल्ली और सीनियर कंसल्टेंट, डर्मेटोलॉजी, मैक्स हॉस्पिटल, नई दिल्ली ने द लल्लनटॉप के सेहत इंटरव्यू में बताया कि दानों से लेकर एंटी-एजिंग तक हर स्किन प्रॉब्लम का सही इलाज क्या है। उन्होंने कहा कि सबसे फेवरेट नुस्खा सुबह-शाम चेहरा धोना है – एक टाइम एक्ने वाला फेस वॉश और एक टाइम नॉर्मल फेस वॉश यूज करें।
डॉ. भारद्वाज ने बताया कि शाम को चेहरा बिना धोए सोना दानों को खुद इनविटेशन देने जैसा है। उन्होंने Instagram रील्स पर मिलने वाले टिप्स को लेकर चेतावनी दी और कहा कि बिना डॉक्टर की सलाह के 20% नियासनामाइड जैसे स्ट्रॉन्ग एक्टिव्स यूज करने से स्किन जल सकती है और नई बीमारियां पैदा हो सकती हैं।
दाने क्यों निकलते हैं? जानें मुख्य कारण
डॉ. दीपाली ने बताया कि दाने बेसिकली एक तरह का बैक्टीरियल इंफेक्शन है। जब धूल, मिट्टी, ह्यूमिडिटी स्किन के पोर्स में रुक जाती है, तो अंदर सेबेशियस ग्लैंड में बैक्टीरियल इंफेक्शन हो जाता है जो बाहर से दाने के रूप में दिखता है।
दानों के तीन मुख्य कारण हैं: हार्मोनल (पीरियड्स से पहले लड़कियों में या पुरुषों में टेस्टोस्टेरॉन बढ़ने से), ह्यूमिडिटी और बैक्टीरिया, और लैक ऑफ हाइजीन। प्रोफेशन रिलेटेड भी दाने होते हैं – जैसे डॉक्टर्स जो बहुत ज्यादा मास्क पहनते हैं, उन्हें मास्क के टाइट हिस्से पर इंफेक्शन हो सकता है।
पुरुषों में पिंपल्स की खास वजहें
जिम जाने वाले लड़कों में प्रोटीन पाउडर लेने से फ्री टेस्टोस्टेरॉन लेवल बढ़ने की वजह से चेस्ट, बैक पर दाने देखे जाते हैं। स्टेरॉइड सप्लीमेंट्स लेने वालों में भी यही समस्या होती है। लैक ऑफ हाइजीन दूसरी बड़ी वजह है – कभी जिम में नहा लिए, कभी घर पर, और सिंथेटिक कपड़े पहनने से भी समस्या बढ़ती है।
डॉ. दीपाली ने कहा कि खाने से दाने साइंटिफिकली इंड्यूस नहीं होते, लेकिन जब दाने आ जाएं तो शुगर, मिल्क और मिल्क प्रोडक्ट्स अवॉयड करना जरूरी है। दही और पनीर ले सकते हैं पर दूध डायरेक्टली न लें। स्ट्रेस सबसे बुरी चीज है क्योंकि स्किन अंदर की बात बाहर दिखाती है।
सबसे फेवरेट घरेलू नुस्खा: मुल्तानी मिट्टी
डॉ. भारद्वाज ने अपना सबसे फेवरेट नुस्खा बताया – एक चम्मच मुल्तानी मिट्टी, एक चम्मच सफेद सैंडलवुड, एक चम्मच लाल सैंडलवुड का मिक्सचर बनाएं। इसमें नींबू का रस मिलाकर जहां-जहां दाने हैं वहां रात भर लगाकर सो सकते हैं।
अगर तीनों इंग्रेडिएंट नहीं हैं तो एक से ही काम चल जाएगा। अगर नींबू से जलन हो तो खाली पानी और मुल्तानी मिट्टी से भी काम हो जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि टूथपेस्ट या गाय की पूंछ के बाल से दाने बांधने जैसे नुस्खे बिल्कुल न करें।
Instagram रील्स से सावधान रहें
डॉ. दीपाली ने कहा कि आजकल युवा Instagram रील्स से सीखकर नियासनामाइड 20% तक खरीद कर लगा रहे हैं। अमेरिका और डेवलप्ड नेशंस में 3-5% तक ही ओवर द काउंटर मिलता है, लेकिन इंडिया में 20% तक खरीद सकते हैं। इससे चेहरे पर हर वक्त जलन रहती है और नई बीमारियां पैदा हो रही हैं – रोजेशिया, सेंसिटिव स्किन, एलर्जीज।
पिंपल और एक्ने में फर्क
मेडिकली दोनों को एक्ने वेलगैरिस ही कहा जाता है। लोअर फेस पर महिलाओं को आए तो यह मेनली हार्मोनल होता है। माथे पर आए तो डैंड्रफ की वजह से या सिर पर तेल लगाने की वजह से देखा जाता है। गालों पर आए तो लैक ऑफ हाइजीन ज्यादा होता है क्योंकि यहां दिन भर की धूल, मिट्टी, धूप की किरणें ज्यादा होती हैं।
एक्ने का इलाज: माइंड कंट्रोल करना जरूरी
डॉ. भारद्वाज ने बताया कि सारे हार्मोनल इश्यूज माइंड में कंट्रोल हो रहे हैं। अगर स्ट्रेस कंट्रोल कर सकें, कोई हॉबी पाल सकें तो बहुत मदद मिलती है। उन्होंने अपना उदाहरण देते हुए कहा कि वे रोज 10-15 मिनट म्यूजिक सुनती हैं और गाती हैं, इससे स्ट्रेस कंट्रोल होता है।
महिलाओं और लड़कियों के लिए 15 साल की उम्र से ही एक्टिव रहना बहुत जरूरी है। हार्मोनल को बैलेंस रखने के लिए कार्डियो एक्टिविटी 15-20 मिनट रोजाना करनी चाहिए। रेस्टिंग हार्ट रेट 80-90 को 150-160 पर लाना चाहिए, 10 मिनट के लिए रोजाना।
सनस्क्रीन: 25 एसपीएफ काफी है
डॉ. दीपाली ने कहा कि सनस्क्रीन का एसपीएफ 25 अबव बहुत है। यह मत सोचिए कि बहुत महंगा सनस्क्रीन चाहिए। 50-100 एसपीएफ एक गिमिक है कंपनियों का अपना प्रोडक्ट महंगा बेचने के लिए।
कोई भी सनस्क्रीन हर 3 घंटे में लगाना है अगर धूप में हैं। डेढ़ फिंगर टिप यूनिट चाहिए एडल्ट के लिए पूरे फेस और नेक के लिए। रात को एक्टिव इंग्रेडिएंट्स लगाएं तो सुबह सनस्क्रीन जरूर लगाएं वरना स्किन जल सकती है।
भारतीयों में अब स्किन कैंसर बढ़ रहा है। ग्रीन हाउस इफेक्ट, पोल्यूशन और LED लाइट्स की वजह से सनस्क्रीन जरूरी हो गया है। 10-12 साल के बच्चे के लिए सिंपल एलोवेरा जेल भी सनस्क्रीन की तरह काम करता है।
पिंपल फोड़ने से बचें
डॉ. भारद्वाज ने कहा कि ब्यूटी पार्लर्स वाले भी कह देते हैं कि हम आपका एक्ने निकाल देते हैं। फिर इतने बड़े-बड़े धब्बे रह जाते हैं कि लाखों रुपए और बहुत समय खर्च करना पड़ता है लेजर कराकर गड्ढे ठीक करने में।
दानों को अपना नेचुरल कोर्स करने दीजिए। त्वचा सिर्फ 200 माइक्रोमीटर की है। दाना किसी भी लेयर में आ सकता है पहली चार लेयर्स में। जब छेड़ते हैं तो पूरी स्किन इरिटेट हो जाती है। इससे स्कार और पिगमेंटेशन होने के चांसेस तीन-चार गुना बढ़ जाते हैं।
एक्ने स्कार्स का इलाज
डॉ. दीपाली ने कहा कि उन्होंने एक्ने स्कार्स पर एक साल लगाया है और यह उनका फेवरेट है। लेकिन वे सिर्फ 70-80% ठीक कर पाती हैं। 15-20% हमेशा रह जाता है। दुनिया की कोई क्रीम स्कार पर काम नहीं करेगी – सिर्फ लेजर काम करता है या डर्मा रोलर अंडर डॉक्टर सुपरविजन।
उन्होंने चेतावनी दी कि Instagram से सीखकर ग्वाशा और डर्मा रोलर घर पर करने से बचें। एक मरीज को पैरोटिड ग्लैंड में इंफेक्शन हो गई और तीन-चार दिन हॉस्पिटल में एडमिट रहना पड़ा।
पिगमेंटेशन का सबसे सरल इलाज
पिगमेंटेशन के लिए डॉ. भारद्वाज की खुद की ट्राइड एंड टेस्टेड होम रेमेडी है – सिंपल ग्लिसरीन और रोज वाटर हफ्ते में एक या दो दिन लगाना चाहिए। लेकिन हर ट्रीटमेंट के साथ सुबह अच्छा सनस्क्रीन जरूर लगाना चाहिए।
अंदर से सनस्क्रीन खाने का मतलब है – लाल, पीला, जामुनी और हरा। यह चारों रंग डाइट में रोजाना होने चाहिए। बेक्ड, बॉयल्ड या ग्रिल्ड फॉर्म में। ब्लूबेरी, पर्पल सैलेड लीफ, जामुन, कैप्सिकम (तीनों रंग) खाएं।
होठों के पिगमेंटेशन का नुस्खा
होठों के लिए सिंपल ग्लिसरीन और कपूर लगाकर टूथब्रश के पीछे वाले दानों से घिसें। हफ्ते में दो दिन एक्सफोलिएशन करें, बहुत फर्क आ जाता है। अगर जेनेटिक है और 10-12 साल की उम्र से है तो सिर्फ लेजर से ठीक होगा। स्मोकिंग और बहुत ज्यादा टी-कॉफी पीने से भी लिप्स में पिगमेंटेशन होता है।
टैनिंग दूर करने का घरेलू टिप
डॉ. दीपाली का ट्राइड एंड टेस्टेड है फ्रेश टोमेटो रस। टोमेटो का स्लाइस पिचकाएं, जो बच गया वो खा लें (फाइबर है)। उसके जूस में लाल और सफेद चंदन पाउडर डालें। बिना चेहरा धोए भी लगा सकते हैं। 5-10 मिनट रखें और पानी से धो डालें।
अगर स्किन ड्राई है तो इसी कॉकटेल में कच्चा दूध बिना बॉइल के डालें। कच्चे दूध में लैक्टिक एसिड होता है जिससे टैनिंग जल्दी उतरती है।
आसान स्किन केयर रूटीन
डॉ. भारद्वाज ने कहा – लेस इज मोर। एक फेस वॉश सुबह का (अच्छा एक्सफोलिएटिंग), एक रात का (जेंटल)। सुबह सनस्क्रीन जरूर लगाएं। अगर स्किन पर कोई प्रॉब्लम है तो पहले विटामिन सी या नियासनामाइड सीरम लगाएं, फिर सनस्क्रीन।
रात को जो लगाते हैं वो त्वचा का फूड है। ड्राई स्किन है तो हफ्ते में दो-तीन दिन सिंपल घी, ग्लिसरीन या एप्रिकॉट/बादाम तेल (दो-तीन बूंद पानी के साथ) लगाएं। कोकोनट ऑयल से दाने निकलते हैं।
स्किन टाइप के अनुसार बेस्ट एसिड्स
ड्राई स्किन: हायलोरोनिक एसिड, स्क्वलीन, पेप्टाइड्स, मॉइस्चराइजिंग क्रीम। हफ्ते में एक दिन कोकोनट ऑयल या ग्लिसरीन गीले हाथों से गीली स्किन पर लगा सकते हैं।
ऑयली स्किन: जेल बेस्ड मॉइस्चराइजर रात को जरूरी है। विटामिन सी, एजेलिक एसिड, टार्टरिक एसिड जो स्किन पर ग्लो लाते हैं।
सेंसिटिव स्किन: दही लगाना और दही रोज खाना चाहिए। प्रोबायोटिक से स्किन का pH बैलेंस होता है। स्टेरॉइड क्रीम (नाम के एंड में ‘VATE’ हो) बिल्कुल न लगाएं।
एंटी-एजिंग क्रीम्स काम नहीं करतीं
डॉ. भारद्वाज ने साफ कहा – बिग नो। एंटी-एजिंग के लिए सबसे जरूरी है – क्या खा रहे हैं, लाइफस्टाइल कैसी है, सुबह सनस्क्रीन लगा रहे हैं कि नहीं। रोजाना 15-20 मिनट कार्डियो करें। पानी पिएं। डाइट में ओमेगा 3-6-9 और चारों रंग (लाल, पीला, हरा, जामुनी) होने चाहिए।
वंस इन थ्री मंथ्स मेडिकल फेशियल कराएं। बहुत ज्यादा फेशियल मसाज नहीं करनी चाहिए। अगर ट्रेनिंग अच्छी नहीं है तो मसल्स खिंचने से स्किन और लटक जाती है। साल में दो-तीन बारी मेडिकल फेशियल बहुत है।
चेहरे पर बिल्कुल न लगाएं ये चीजें
मेकअप के साथ सोना सबसे हानिकारक है। आठ स्टेप कोरियन रेजिमेन की जरूरत नहीं – लेस इज मोर। स्टेरॉयड बेस्ड क्रीम्स और बहुत स्ट्रॉन्ग केमिकल्स (20% नियासनामाइड) बिना डॉक्टर की सलाह के न लगाएं। फेयरनेस क्रीम्स में आर्सेनिक और स्टेरॉइड हो सकते हैं।
ब्लैकहेड्स-व्हाइटहेड्स का इलाज
स्किन को एक्सफोलिएशन करना सबसे इजी है। दो तरह के फेस वॉश यूज करें – एक एक्सफोलिएटिंग, एक जेंटल। मुल्तानी मिट्टी और चंदन का मिक्सचर जहां ब्लैकहेड-व्हाइटहेड है वहां घिसें। बेसिक ब्लैकहेड-व्हाइटहेड स्ट्रिप्स भी काम करती हैं।
डार्क सर्कल्स के कारण और इलाज
डार्क सर्कल्स के तीन मुख्य कारण: जेनेटिक (आंख का गड्ढा डीप है), आयरन या B12 की कमी, कंप्यूटर पर बहुत देर बैठना। मिनिमम 6 घंटे की नींद बहुत जरूरी है। जेनेटिक डार्क सर्कल्स में हायलोरोनिक एसिड फिलर लगाकर गड्ढा भर देते हैं, लेकिन यह डेढ़ साल तक ही रहता है।
मुख्य बातें (Key Points)
- सबसे फेवरेट नुस्खा: सुबह-शाम चेहरा धोएं, एक टाइम एक्ने वाला फेस वॉश, एक टाइम नॉर्मल फेस वॉश।
- मुल्तानी मिट्टी, सफेद-लाल चंदन, नींबू का मिक्सचर रात भर दानों पर लगाएं – यह दादी-मां का नुस्खा कभी फेल नहीं होता।
- सनस्क्रीन 25 एसपीएफ काफी है, हर 3 घंटे में लगाएं। Instagram रील्स से 20% नियासनामाइड न लगाएं।
- जो प्रोडक्ट महंगा है ऐसा नहीं कि वो ज्यादा इफेक्टिव है – बहुत सारे सस्ते नुस्खे बहुत काम करते हैं।








