Lok Sabha Speaker No Confidence Motion: भारत की संसदीय इतिहास में एक अभूतपूर्व स्थिति पैदा हो गई है। लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi को बार-बार बोलने से रोका जा रहा है। और जब उन्होंने पूर्व सेना प्रमुख General MM Naravane की एक अप्रकाशित किताब से हवाला देने की कोशिश की, तो सदन में हंगामा मच गया। रक्षा मंत्री Rajnath Singh, गृह मंत्री Amit Shah, और संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju ने आपत्ति जताई। Speaker Om Birla ने राहुल गांधी को चुप करा दिया।
परिणाम? 10 फरवरी 2026 को विपक्ष ने लोकसभा Speaker के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव (no-confidence motion) पेश कर दिया। कुल 118 सांसदों ने इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, DMK, Left parties, RJD, Shiv Sena (UBT) और NCP (SP) ने समर्थन दिया है। हालांकि TMC ने इससे किनारा कर लिया है।
1985 के बाद पहली बार Speaker पर अविश्वास प्रस्ताव
लोकसभा Speaker के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव 1985 के बाद पहली बार लाया गया है। इससे पहले 1985, 1966 और 1954 में ऐसे प्रस्ताव लाए गए थे। लेकिन यह पहली बार है कि विपक्ष के नेता को इस तरह बार-बार बोलने से रोका जा रहा है।
कांग्रेस के Chief Whip K Suresh ने लोकसभा सचिवालय को यह नोटिस सौंपा। विपक्ष ने आरोप लगाया है कि Speaker Om Birla ने लगातार पक्षपातपूर्ण आचरण किया है। उन्होंने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव (Motion of Thanks) की बहस के दौरान Rahul Gandhi को बोलने का मौका नहीं दिया, 8 विपक्षी सांसदों को निलंबित कर दिया, और महिला सांसदों के प्रति अनुचित टिप्पणी की।
General Naravane की किताब का विवाद
यह पूरा मामला शुरू हुआ पूर्व सेना प्रमुख General Manoj Mukund Naravane की अप्रकाशित autobiography “Four Stars of Destiny” से। यह किताब अभी तक प्रकाशित नहीं हुई है, लेकिन The Caravan magazine ने फरवरी 2026 में इस किताब के अंश प्रकाशित किए।
किताब में सबसे विवादास्पद प्रसंग 31 अगस्त 2020 की रात का है। उस रात पूर्वी लद्दाख में Rechin La की तरफ चार Chinese tanks पैदल सैनिकों के साथ आगे बढ़ रहे थे। Northern Command के प्रमुख Lt Gen Yogesh Joshi ने रात 8:15 बजे Army Chief General Naravane को सूचित किया। Naravane ने तुरंत स्थिति की गंभीरता को समझा।
Naravane ने अपनी किताब में लिखा है कि उन्होंने रक्षा मंत्री Rajnath Singh, NSA Ajit Doval, Chief of Defence Staff General Bipin Rawat, और विदेश मंत्री S Jaishankar को फोन किया। उन्होंने सभी से एक ही सवाल पूछा – “What are my orders?” लेकिन कोई स्पष्ट निर्देश नहीं मिला।
रात 9:10 बजे Lt Gen Joshi ने फिर फोन किया – Chinese tanks आगे बढ़ रहे थे और अब pass से 1 किलोमीटर से भी कम दूरी पर थे। रात 9:25 बजे Naravane ने फिर से Rajnath Singh को फोन किया और “स्पष्ट निर्देश” मांगे। फिर भी कोई निर्देश नहीं आया।
Indian soldiers ने एक illuminating round (चेतावनी फायर) किया। लेकिन Chinese tanks रुके नहीं। अंततः Naravane ने अपने विवेक से फैसला लिया और escalation से बचने के लिए पहले गोली नहीं चलाई। Eventually, Chinese tanks रुक गए। संकट टल गया। लेकिन यह सवाल रह गया – संकट के समय political leadership ने military को स्पष्ट निर्देश क्यों नहीं दिए?
Galwan की पृष्ठभूमि
यह घटना June 2020 के Galwan Valley clash के दो महीने बाद की है। 15-16 जून 2020 की रात को Galwan Valley में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई, जिसमें 20 भारतीय सैनिकों की मौत हुई। China ने केवल 4 सैनिकों की मौत स्वीकार की, लेकिन India का मानना है कि Chinese casualties बहुत अधिक थीं।
यह 1975 के बाद Line of Actual Control (LAC) पर पहली बार हुई fatal confrontation थी। इसने India-China संबंधों को fundamental रूप से बदल दिया।
31 अगस्त 2020 को Indian forces ने एक bold operation किया था – उन्होंने Kailash Range पर कई महत्वपूर्ण heights पर कब्जा कर लिया, जो नीचे Chinese deployments को command करती थीं। यह 1962 के बाद पहली बार था जब Indian troops ने इन heights पर कब्जा किया। Chinese tanks की advancement इसी operation के जवाब में थी।
किताब क्यों नहीं छप रही?
General Naravane की किताब “Four Stars of Destiny” को अप्रैल 2024 में प्रकाशित होना था, लेकिन Defence Ministry से clearance नहीं मिली। Penguin Random House India publisher है। Senior military officials की किताबों को प्रकाशित होने से पहले Defence Ministry की clearance चाहिए होती है ताकि sensitive defence और operational details publicly disclose न हों।
General Naravane ने 2025 में एक Hindi YouTube channel को बताया था कि Penguin Random House और Defence Ministry के बीच clearance को लेकर चर्चा चल रही है। उन्होंने कहा, “मेरा काम किताब लिखना और publisher को देना था, अब इसे आगे बढ़ाना उनका काम है।”
किताब में Galwan clash, August 2020 की Rechin La incident, Agniveer recruitment scheme, और India की defence planning जैसे sensitive topics पर General Naravane के विचार हैं।
Parliament में हंगामा
2 फरवरी 2026 को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की बहस के दौरान Rahul Gandhi ने General Naravane की किताब के अंशों को quote करने की कोशिश की। उन्होंने कहा – “यह उस समय की बात है जब चार Chinese tanks भारतीय क्षेत्र में प्रवेश कर रहे थे।”
Defence Minister Rajnath Singh ने तुरंत आपत्ति जताई। उन्होंने Rahul Gandhi से पूछा कि क्या यह किताब प्रकाशित हो चुकी है। Rahul Gandhi ने कहा कि उनका source authentic है और वे इससे पढ़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें यह मुद्दा उठाने का इरादा नहीं था, लेकिन जब BJP सांसद Tejasvi Surya ने Congress की देशभक्ति पर सवाल उठाया, तो उन्होंने यह मुद्दा उठाया।
Rajnath Singh ने कहा – “Rahul Gandhi को सदन के सामने वह किताब पेश करनी चाहिए जिससे वे quote कर रहे हैं, क्योंकि जिस किताब का वे जिक्र कर रहे हैं वह प्रकाशित नहीं हुई है।”
Speaker Om Birla ने procedural rules का हवाला देते हुए कहा कि सांसद अप्रकाशित किताबों से नहीं पढ़ सकते। Sदन में शोर-शराबा बढ़ गया और सदन को स्थगित कर दिया गया। अगले दिन भी जब Rahul Gandhi ने फिर से यह मुद्दा उठाने की कोशिश की, तो उन्हें रोक दिया गया। 8 Congress सांसदों को अव्यवस्थित आचरण के लिए suspend कर दिया गया।
Rahul Gandhi ने दिखाई किताब
बाद में Rahul Gandhi ने Parliament परिसर में reporters को किताब की printed copy दिखाई। उन्होंने कहा – “यहां General Naravane का एक tweet है जिसमें लिखा है ‘Hello friends, my book is available now. Just follow the link. Happy Reading. Jai Hind.'”
Rahul Gandhi ने कहा – “मेरा मुद्दा यह है कि या तो General Naravane झूठ बोल रहे हैं या Penguin झूठ बोल रहा है। मैं Army Chief पर विश्वास करता हूं। मुझे नहीं लगता कि वे झूठ बोलेंगे। Penguin कह रहा है किताब प्रकाशित नहीं हुई है, लेकिन किताब Amazon पर उपलब्ध है। General Naravane ने अपनी किताब में कुछ ऐसे statements दिए हैं जो भारत सरकार और प्रधानमंत्री के लिए inconvenient हैं।”
BJP सांसद Nishikant Dubey ने पलटवार किया – “Penguin ने statement जारी कर कहा है कि किताब छपी या जारी नहीं हुई है, और वे कार्रवाई करेंगे। इस संसद में नियम हैं, और कोई इसे mislead नहीं कर सकता। अगर publisher कह रहा है कि किताब प्रकाशित नहीं हुई है, तो वे कौन सी किताब दिखा रहे हैं?”
विपक्ष का आरोप – Modi सरकार डर गई
विपक्ष का आरोप है कि Modi सरकार Rahul Gandhi को बोलने से इसलिए रोक रही है क्योंकि General Naravane की किताब से कई बड़े सवाल उठते हैं:
- China crisis management: 2020 में जब Chinese tanks आगे बढ़ रहे थे, तो political leadership ने Army को स्पष्ट निर्देश क्यों नहीं दिए?
- US trade deal और Russia oil: White House की fact sheet में साफ लिखा है कि भारत ने Russia से oil नहीं खरीदने की commitment दी है। लेकिन भारत सरकार के मंत्री इसे स्वीकार नहीं कर रहे। Foreign Secretary Vikram Misri से जब सवाल पूछा गया, तो उन्होंने सीधा जवाब नहीं दिया।
- China के साथ economic dependence: भारत का China के साथ व्यापारिक घाटा $110 billion से अधिक हो गया है। “Make in India” के नारे के बावजूद China पर निर्भरता बढ़ती जा रही है।
- Epstein Files: जनवरी 2026 में जारी Epstein Files में Prime Minister Modi, पेट्रोलियम मंत्री Hardeep Singh Puri, और industrialist Anil Ambani के नाम आए हैं। क्या यही कारण है कि सरकार defensive mode में है?
Modi की छवि का सवाल
पिछले 11 वर्षों में PM Modi ने एक मजबूत, decisive leader की छवि बनाई है। उन्होंने बार-बार कहा कि:
- वे tough decisions लेते हैं (surgical strike, Balakot)
- India की sovereignty कभी compromise नहीं होगी
- China और Pakistan के खिलाफ वे सख्त रुख रखते हैं
- भारत अब किसी के सामने नहीं झुकता
लेकिन अब सवाल उठ रहे हैं:
- अगर General Naravane की किताब सच कह रही है, तो August 2020 में जब Chinese tanks आगे बढ़ रहे थे, तो political leadership ने clear orders क्यों नहीं दिए?
- America से trade deal में भारत ने Russia से oil नहीं खरीदने की गारंटी दे दी, यह sovereignty की रक्षा है या समर्पण?
- Trump के Executive Order में लिखा है कि अमेरिकी मंत्री “भारत पर निगरानी” रखेंगे – यह कैसी स्वतंत्रता है?
Russia की चेतावनी
Russia के राष्ट्रपति Vladimir Putin और उनके विदेश मंत्री ने खुलकर कहा है कि अमेरिका दबाव डालकर भारत को Russia से तेल खरीदना बंद करवाना चाहता है। उन्होंने कहा – “अगर भारत Russia से तेल खरीदना बंद करता है, तो भारत को $9-10 billion का तुरंत नुकसान होगा। मुझे विश्वास है PM Modi cooperation जारी रखेंगे।”
लेकिन भारत सरकार के मंत्री न तो यह कह पा रहे हैं कि हम Russia से तेल खरीदते रहेंगे, न यह कह पा रहे हैं कि हमने commitment दे दी है। यह ambiguity क्यों?
Agniveer, Defence Deals के सवाल
General Naravane की किताब में सिर्फ China crisis ही नहीं, बल्कि:
- Agniveer recruitment scheme की आलोचना
- Defence procurement में delays
- Doklam और Galwan के lessons
- Civil-military relations में tensions
ये सभी मुद्दे Modi सरकार के लिए असुविधाजनक हैं। इसीलिए किताब को Defence Ministry से clearance नहीं मिल रही।
Nehru पर हमला क्यों?
जब Rahul Gandhi ने General Naravane की किताब का मुद्दा उठाया, तो सत्ता पक्ष ने तुरंत बात को Nehru पर ले जाना शुरू कर दिया। BJP के मंत्री Parliament में Nehru की तस्वीरें लेकर घूम रहे हैं और कह रहे हैं कि “Nehru ने भी अंग्रेजों के सामने surrender किया था।”
यह deflection की रणनीति है। जब current performance को defend नहीं कर सकते, तो past को attack करो। जब 2020 की China crisis पर जवाब नहीं दे सकते, तो 1947-1962 की बात करो।
RSS-BJP का relationship
RSS प्रमुख Mohan Bhagwat ने हाल ही में कहा कि “BJP के अच्छे दिन RSS की वजह से आए।” यह statement भी significant है। इसका मतलब है कि BJP को याद दिलाया जा रहा है कि असली ताकत कहां से आती है।
लेकिन सच यह भी है कि पिछले 11 वर्षों में RSS के कई senior स्वयंसेवकों को सरकार में पद मिले हैं, सुविधाएं मिली हैं। पुराना त्याग और सादगी का दौर नहीं रहा। अब power के साथ comfort भी है।
विपक्ष की रणनीति
Congress अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने कहा – “पहले कहा गया कि joint statement में Russia की बात नहीं, लेकिन अब fact sheet में Russia की बात लिख दी गई है। इसी तरह joint statement में pulses का जिक्र नहीं था, अब fact sheet में आ गया। क्या अगले दस्तावेज में dairy और poultry का भी अचानक प्रवेश होगा?”
Youth Congress ने PM Modi के घर की तरफ march निकाला, Epstein Files का मुद्दा उठाया। Rahul Gandhi ने एक poster दिखाया जिसमें लिखा था – “यह US के साथ trade deal इसी कारण हुई है” (Epstein Files का इशारा)।
आगे क्या होगा?
Speaker के खिलाफ no-confidence motion का notice दिया जा चुका है। Rule 94C के अनुसार, 14 दिनों के बाद इस पर चर्चा शुरू होगी। यानी Budget Session की दूसरी phase में यह मुद्दा उठेगा।
लेकिन असली सवाल यह है – क्या Rahul Gandhi इस बार Modi सरकार की छवि को seriously challenge कर पाएंगे? General Naravane की किताब, Epstein Files, US trade deal की controversial शर्तें, Russia oil commitment – ये सब मिलकर एक बड़ा narrative बना रहे हैं।
Modi सरकार के लिए challenge यह है कि:
- General Naravane एक respected Army Chief हैं – उन पर झूठ का आरोप नहीं लगाया जा सकता
- Epstein Files अमेरिकी सरकार ने जारी किए हैं – इन्हें “fake news” नहीं कहा जा सकता
- White House की fact sheet publicly available है – इसे deny नहीं किया जा सकता
इसलिए सरकार की strategy यह है कि Rahul Gandhi को बोलने ही मत दो। अगर वे Parliament में systematic तरीके से ये सभी मुद्दे उठाएंगे, तो international media में भी यह मुद्दा बनेगा। और तब defend करना मुश्किल हो जाएगा।
मुख्य बातें (Key Points):
-118 सांसदों ने Lok Sabha Speaker Om Birla के खिलाफ no-confidence motion में हस्ताक्षर किए (Rahul Gandhi ने नहीं किया)
-यह 1985 के बाद पहली बार है जब Speaker के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया
-मुद्दा: Rahul Gandhi को General MM Naravane की अप्रकाशित किताब “Four Stars of Destiny” से quote करने से रोका गया
-किताब में दावा: August 31, 2020 को जब Chinese tanks आगे बढ़ रहे थे, तो General Naravane को political leadership से clear orders नहीं मिले
-किताब Defence Ministry से clearance के लिए 1 साल से pending है (April 2024 में publish होनी थी)
-विपक्ष का आरोप: Modi सरकार Rahul Gandhi को बोलने से रोक रही है क्योंकि किताब inconvenient सवाल उठाती है
-Galwan clash (June 2020) में 20 भारतीय सैनिकों की मौत हुई थी, August 2020 incident उसके 2 महीने बाद का है
-विपक्ष ने Speaker पर “persistent bias” और parliamentary convention को undermine करने का आरोप लगाया








