US Action On Iran को लेकर पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने अमेरिका और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को साफ चेतावनी दी है कि ईरान किसी भी सूरत में ताकत की भाषा बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि अगर सम्मान से बात होगी, तो ईरान भी सम्मान से जवाब देगा, लेकिन हुक्म देने की कोशिश को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
यह बयान ऐसे वक्त आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु वार्ता का दूसरा दौर अगले हफ्ते ओमान में होने वाला है। दोनों देशों के बीच बढ़ती तल्खी ने एक बार फिर क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति की चिंता बढ़ा दी है।
परमाणु वार्ता से पहले सख्त संदेश
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने स्पष्ट किया कि ईरान अपने परमाणु अधिकारों पर कोई समझौता नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि नॉन-प्रोलिफरेशन ट्रीटी (NPT) के तहत यूरेनियम संवर्धन ईरान का वैध अधिकार है और इसे छोड़ा नहीं जाएगा।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि ईरान की परमाणु नीति अंतरराष्ट्रीय संधियों में दिए गए अधिकारों पर आधारित है। ईरान बातचीत के पक्ष में है, लेकिन दबाव और धमकी के माहौल में कोई समझौता संभव नहीं है।
अमेरिकी सैन्य गतिविधियों से बढ़ा तनाव
ईरान का यह बयान ऐसे समय में आया है जब खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका अपनी सैन्य मौजूदगी लगातार बढ़ा रहा है। अमेरिकी प्रशासन ईरान के परमाणु कार्यक्रम और आंतरिक हालात को लेकर दबाव बना रहा है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने माना है कि अमेरिका क्षेत्र में अपनी सैन्य तैनाती मजबूत कर रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी साफ कहा कि ईरान इस सैन्य दबाव से डरने वाला नहीं है और अपनी नीति पर कायम रहेगा।
खाड़ी में अमेरिकी ताकत का प्रदर्शन
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने जनवरी के अंत में यूएसएस इब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट कैरियर को अरब सागर में तैनात किया। इसके अलावा दर्जन भर एफ-15 फाइटर जेट, एमक्यू-9 रीपर ड्रोन और ए-10 थंडरबोल्ट विमान जॉर्डन के साल्टी एयरबेस पर पहुंचाए गए हैं।
इसके साथ ही अमेरिकी नौसेना का यूएसएस डेलबर्ट डी ब्लैक जहाज स्वेज नहर से होते हुए लाल सागर की ओर बढ़ रहा है। एमक्यू-4सी ट्राइटन ड्रोन खाड़ी क्षेत्र में निगरानी कर रहा है। यह तमाम गतिविधियां इस ओर इशारा करती हैं कि अमेरिका किसी भी स्थिति के लिए खुद को तैयार रखे हुए है।
ईरान का साफ रुख
ईरानी विदेश मंत्री ने दो टूक कहा कि ईरान यूरेनियम संवर्धन नहीं छोड़ेगा, चाहे उस पर युद्ध की धमकी ही क्यों न दी जाए। तेहरान फोरम में उन्होंने कहा कि ईरान पर दबाव डालकर उसकी नीति नहीं बदली जा सकती।
ईरान का कहना है कि उसने हमेशा बातचीत का रास्ता खुला रखा है, लेकिन अगर बातचीत सम्मानजनक नहीं होगी, तो वह अपने राष्ट्रीय हितों से पीछे नहीं हटेगा।
मानवाधिकार मुद्दे पर अमेरिका का दबाव
इन सबके बीच अमेरिका ने ईरान में हालिया विरोध प्रदर्शनों पर सरकार की कार्रवाई की निंदा भी की है। अमेरिका ने तीन सुधारवादी नेताओं की गिरफ्तारी और नोबेल पुरस्कार विजेता नरगिस को दी गई सजा को लेकर कड़ा रुख अपनाया है।
ईरान इसे आंतरिक मामला बताते हुए खारिज करता रहा है। तेहरान का कहना है कि अमेरिका मानवाधिकार के मुद्दे को बहाना बनाकर राजनीतिक दबाव बनाना चाहता है।
आगे क्या होगा
ईरान और अमेरिका के बीच यह तनातनी आने वाले दिनों में और गहराने की आशंका जता रही है। ओमान में होने वाली परमाणु वार्ता इस बात का संकेत देगी कि दोनों देश टकराव की राह पर आगे बढ़ेंगे या बातचीत से समाधान निकालने की कोशिश करेंगे।
फिलहाल, ईरान के सख्त बयान ने यह साफ कर दिया है कि वह किसी भी सूरत में परमाणु अधिकारों और संप्रभुता पर समझौता करने के मूड में नहीं है।
मुख्य बातें (Key Points)
- ईरान ने ट्रंप और अमेरिका को ताकत की भाषा पर चेतावनी दी
- परमाणु वार्ता से पहले यूरेनियम संवर्धन पर अडिग रुख
- खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य तैनाती बढ़ी
- ईरान ने युद्ध की धमकी से डरने से इनकार किया








