Chandigarh Murder Case में एक दिल दहला देने वाले फैसले ने इंसाफ की मुहर लगा दी है। चंडीगढ़ के सेक्टर-22 में रक्षाबंधन के दिन दो सगी बहनों की बेरहमी से हत्या करने वाले आरोपी को जिला अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। 9 फरवरी को आए इस फैसले में कोर्ट ने साफ कहा कि यह मामला प्यार, शक और गुस्से से उपजे क्रूर अपराध का है, जिसमें दो निर्दोष जिंदगियां खत्म कर दी गईं।
इस दोहरे हत्याकांड में दोषी ठहराया गया आरोपी कुलदीप सिंह जीरकपुर का रहने वाला है और चंडीगढ़ पुलिस के एक रिटायर्ड इंस्पेक्टर का बेटा है। अदालत ने एक दिन पहले ही उसे दोषी करार दिया था और आज सजा का ऐलान किया गया।
शादी से इनकार बना हत्या की वजह
पुलिस जांच और अदालत में पेश सबूतों के मुताबिक कुलदीप सिंह और मनप्रीत कौर के बीच करीब 10 साल से दोस्ती थी। कुलदीप मनप्रीत से शादी करना चाहता था, लेकिन कुछ समय से मनप्रीत उससे दूरी बनाने लगी थी। वह न फोन कॉल उठा रही थी और न ही उसके मैसेज का जवाब दे रही थी।
कुलदीप को शक था कि मनप्रीत का किसी और के साथ संबंध है। यही शक धीरे-धीरे गुस्से और नफरत में बदल गया, जिसने अंततः एक खौफनाक अपराध का रूप ले लिया।
रक्षाबंधन की रात घटी दिल दहला देने वाली वारदात
15 अगस्त 2019 की तड़के, जब पूरा शहर त्योहार की नींद में था, कुलदीप सेक्टर-22 स्थित एक पीजी के पिछले दरवाजे से कमरे में दाखिल हुआ। उस वक्त दोनों बहनें गहरी नींद में थीं। कमरे में घुसते ही कुलदीप ने मनप्रीत कौर का मोबाइल फोन चेक करना शुरू किया।
मोबाइल की छेड़छाड़ से मनप्रीत की नींद खुल गई और वह जोर-जोर से चिल्लाने लगी। इसी दौरान कमरे में रखी एक टूटी कैंची कुलदीप के हाथ लग गई। गुस्से में आकर उसने मनप्रीत पर ताबड़तोड़ वार कर दिए।
बहन को बचाने आई राजवंत की भी गई जान
मनप्रीत की चीखें सुनकर उसकी बहन राजवंत कौर जाग गई। उसने अपनी बहन को बचाने की कोशिश की और आरोपी से लगातार मिन्नतें करती रही। वह कहती रही— “मेरी बहन को मत मारो”, लेकिन कुलदीप पर इसका कोई असर नहीं हुआ।
उसने राजवंत पर भी उसी कैंची से कई वार किए। कुछ ही पलों में दोनों बहनें लहूलुहान होकर जमीन पर गिर पड़ीं और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। यह दृश्य इतना भयावह था कि जांच अधिकारियों ने भी इसे बेहद क्रूर अपराध बताया।
कोर्ट में साबित हुआ पूरा घटनाक्रम
पुलिस ने मौके से सबूत जुटाए, पीजी में मौजूद लोगों के बयान दर्ज किए और मोबाइल व अन्य डिजिटल साक्ष्यों को कोर्ट में पेश किया। अभियोजन पक्ष ने यह साबित किया कि हत्या पूर्व नियोजित थी और आरोपी का इरादा जान लेने का ही था।
कोर्ट ने माना कि शादी से इनकार और शक के चलते किया गया यह अपराध किसी भी तरह से माफी के काबिल नहीं है। इसी आधार पर कुलदीप सिंह को उम्रकैद की सजा सुनाई गई।
समाज के लिए सख्त संदेश
इस फैसले को समाज के लिए एक सख्त संदेश माना जा रहा है। यह मामला दिखाता है कि प्यार के नाम पर जबरदस्ती, शक और अहंकार किस हद तक इंसान को अंधा बना सकता है। अदालत ने अपने फैसले के जरिए यह स्पष्ट किया कि महिलाओं की इच्छा और सम्मान से बड़ा कुछ नहीं है।
आम लोगों पर असर
यह फैसला उन परिवारों के लिए उम्मीद की किरण है, जो न्याय के लिए वर्षों इंतजार करते हैं। साथ ही यह चेतावनी भी है कि रिश्तों में हिंसा और दबाव को कानून किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेगा।
मुख्य बातें (Key Points)
- चंडीगढ़ के सेक्टर-22 में दो सगी बहनों की हत्या का मामला
- शादी से इनकार और शक के चलते आरोपी ने की वारदात
- कैंची से ताबड़तोड़ वार कर दोनों बहनों की हत्या
- कोर्ट ने दोषी कुलदीप सिंह को उम्रकैद की सजा सुनाई








