गुरूवार, 5 मार्च 2026
The News Air
No Result
View All Result
  • होम
  • राष्ट्रीय
  • पंजाब
  • राज्य
    • हरियाणा
    • चंडीगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • राजस्थान
  • अंतरराष्ट्रीय
  • सियासत
  • नौकरी
  • LIVE
  • बिज़नेस
  • काम की बातें
  • स्पेशल स्टोरी
  • टेक्नोलॉजी
  • खेल
  • लाइफस्टाइल
    • हेल्थ
    • धर्म
    • मनोरंजन
  • WEB STORIES
  • होम
  • राष्ट्रीय
  • पंजाब
  • राज्य
    • हरियाणा
    • चंडीगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • राजस्थान
  • अंतरराष्ट्रीय
  • सियासत
  • नौकरी
  • LIVE
  • बिज़नेस
  • काम की बातें
  • स्पेशल स्टोरी
  • टेक्नोलॉजी
  • खेल
  • लाइफस्टाइल
    • हेल्थ
    • धर्म
    • मनोरंजन
  • WEB STORIES
No Result
View All Result
The News Air
No Result
View All Result
Home NEWS-TICKER

Kapal Kriya का रहस्य – मृत्यु के बाद क्यों जरूरी है यह संस्कार?

हिंदू धर्म में कपाल क्रिया और कपाल पूजा का गहरा आध्यात्मिक महत्व है, जानिए अंतिम संस्कार और अघोरी साधना में इसकी भूमिका

The News Air Team by The News Air Team
शनिवार, 7 फ़रवरी 2026
A A
0
Kapal Kriya
105
SHARES
697
VIEWS
ShareShareShareShareShare
Google News
WhatsApp
Telegram

Kapal Kriya : कपाल यानी मानव खोपड़ी सिर्फ एक हड्डी नहीं बल्कि हिंदू दर्शन में जीवन के सबसे बड़े सत्य मृत्यु का प्रतीक है। श्मशान में भस्म में लिपटा साधु जो हाथ में मानव खोपड़ी लिए नजर आता है, वह कोई अंधविश्वास या काला जादू नहीं बल्कि एक गहरा आध्यात्मिक रहस्य है।

हिंदू धर्म ग्रंथों में कपाल का उल्लेख मुख्य रूप से दो जगहों पर मिलता है – पहला अंतिम संस्कार की कपाल क्रिया और दूसरा तांत्रिक और भैरव साधना में कपाल पूजा।

क्या होती है कपाल क्रिया?

वाराणसी के ज्योतिषाचार्य और काली मां के साधक अभिलेंदु नारायण दुबे के अनुसार, गरुड़ पुराण के अनुसार जब चिता जल रही होती है तब मुखाग्नि देने वाला व्यक्ति बांस की लकड़ी से सिर पर प्रहार करता है और इसे कहते हैं कपाल क्रिया।

इसे लेकर मान्यता है कि आत्मा ब्रह्म रंद्र से निकलती है और यह क्रिया आत्मा को पूर्ण मुक्ति देने का काम करती है। इसे मोक्ष का संस्कार कहा जाता है।

भगवान शिव और कपाल का संबंध

भगवान शिव की तस्वीरों में उन्हें भस्म, श्मशान और कभी-कभी कपाल धारण किए हुए नजर आते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि भगवान शिव को मृत्यु का स्वामी माना गया है। वह सिखाते हैं कि मृत्यु से डर गया वह जीवन नहीं जी सकता।

यह भी पढे़ं 👇

Aaj Ka Rashifal 5 March 2026

Aaj Ka Rashifal 5 March 2026: गुरुवार को किन राशियों पर बरसेगा धन?

गुरूवार, 5 मार्च 2026
Trump Iran War Crisis

Trump Iran War Crisis: व्हाइट हाउस में हड़कंप, सेनेटर्स बोले ‘कोई प्लान ही नहीं!’

बुधवार, 4 मार्च 2026
Cockroaches in Coffee

Cockroaches in Coffee: क्या सच में कॉफी में होते हैं कॉकरोच?

बुधवार, 4 मार्च 2026
Mojtaba Khamenei Iran New Supreme Leader

Mojtaba Khamenei Iran New Supreme Leader : अरबों के मालिक हैं ईरान के नए सुप्रीम लीडर

बुधवार, 4 मार्च 2026
साधुओं और बच्चों के साथ कपाल क्रिया क्यों नहीं?

साधु-सन्यासियों को जलाया नहीं जाता, उनकी समाधि होती है। इसके साथ ही छोटे बच्चे जिनकी अकाल मृत्यु होती है उनके साथ भी यह क्रिया नहीं की जाती है।

इसके पीछे का कारण यह है कि कपाल क्रिया मुख्यत: गृहस्थ व्यक्ति यानी सांसारिक जीवन जीने वाले लोगों के लिए की जाती है। गरुड़ पुराण के अनुसार यह क्रिया आत्मा को देह, मोह, माया से मुक्त करने के लिए होती है। जिनमें सांसारिक बंधन अधिक हो उनके लिए यह संस्कार आवश्यक माना गया है।

साधुओं की बात करें तो वह पहले से ही सन्यास ले चुके होते हैं। मोह-माया त्याग चुके होते हैं। जीवित रहते हुए ही वह वैराग्य को प्राप्त कर लेते हैं। इसलिए माना जाता है कि उन्हें मोक्ष के लिए अतिरिक्त संस्कार की आवश्यकता नहीं होती है।

कपालिक और अघोरी साधना

दूसरा प्रयोग कपाल का कपालिक और अघोरी साधना में होता है। पहले इस साधना को कपालिक संप्रदाय द्वारा किया जाता था जो नरमुंडों की मालाओं को धारण किया करते थे। अब इस संप्रदाय के सन्यासी कम ही नजर आते हैं। हालांकि कपाल की साधना अब अघोरी पंथ द्वारा आत्मसात कर ली गई है।

कपाल साधना के लिए श्मशान को चुना जाता है जहां भैरव और भैरवी की उपासना की जाती है। काली की उपासना की जाती है। इस साधना में कपाल को पात्र के रूप में भी प्रयोग किया जाता है। कुछ अघोरी इसमें भोजन और जल भी ग्रहण करते हैं।

तंत्र क्रिया का वास्तविक अर्थ

तंत्र क्रिया के अंदर जिन भी चीजों का प्रयोग किया जाता है उनका वास्तविक अर्थ कुछ अलग ही होता है:

• कपाल – मृत्यु बोध कराता है • श्मशान – दुनिया से वैराग्य का अनुभव कराता है
• भस्म – शरीर की नश्वरता का एहसास देती है • रक्त और खून – जीवन ऊर्जा के रूप में प्रयोग होता है

कपाल पूजा को लेकर भ्रांतियां

इसको लेकर कई प्रकार की भ्रांतियां भी फैली हुई हैं। जैसे काला जादू करने के लिए कपाल पूजा होती है। कहा जाता है कि अघोरी लोग इससे खून पीते हैं या कोई नकारात्मक साधना का तरीका है।

ऐसा नहीं है। यह अत्यंत वैराग्यपूर्ण और आध्यात्मिक मार्ग है। यह साधना बहुत कठिन होती है। मानसिक रूप से बहुत चुनौतीपूर्ण होना पड़ता है और गुरु की दीक्षा लिए बगैर इसको नहीं करना चाहिए।

सामान्य लोग क्या कर सकते हैं इसकी पूजा?

कई लोगों के मन में सवाल आता है कि सामान्य लोग क्या इसकी पूजा पद्धति का हिस्सा बन सकते हैं? इसका जवाब है बिल्कुल भी नहीं।

सामान्य व्यक्ति को इसे केवल प्रतीक के रूप में समझना चाहिए और अनुकरण नहीं करना चाहिए। यह साधना केवल दीक्षित और अनुभवी साधकों के लिए है।

कपाल का वास्तविक संदेश

सही मायनों में कहा जाए तो कपाल हमें डराता नहीं है बल्कि एक प्रकार से जगाता है। यह प्रतीकात्मक रूप से हमसे कहता है कि मृत्यु निश्चित है तो अहंकार क्यों? मोह क्यों? भय क्यों?

शिव का मार्ग हमें सिखाता है कि जो मृत्यु को स्वीकार कर लेता है वही सच में मुक्त हो जाता है। कपाल हमें याद दिलाता है कि शरीर नश्वर है, अहंकार अस्थाई है और अंत में सब भस्म हो जाना है।

जानें पूरा मामला

हिंदू धर्म में 16 संस्कार बताए गए हैं और सबसे अंतिम संस्कार अंत्येष्टि है। यह संस्कार केवल शरीर को नष्ट करने के लिए नहीं बल्कि आत्मा को मुक्ति देने के लिए है। कपाल क्रिया इस मुक्ति की यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

गरुड़ पुराण में स्पष्ट लिखा है – “अर्द्धे दग्धेथवा पूर्ण स्फोटयेत् तस्य मस्तकम्। गृहस्थानां तु काष्ठेन यतीनां श्रीफलेन।” अर्थात शव के आधे या पूरे जल जाने के बाद मस्तक का भेदन करना चाहिए। गृहस्थ का बांस की लकड़ी से और साधुओं का श्रीफल से कपाल क्रिया करनी चाहिए।

यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और इसका उद्देश्य मृत आत्मा को पूर्व जन्म की स्मृतियों से मुक्त करना है ताकि अगले जन्म में वह नई शुरुआत कर सके।

मुख्य बातें (Key Points)
  • कपाल क्रिया अंतिम संस्कार का अनिवार्य हिस्सा है जो आत्मा को मोक्ष देने के लिए की जाती है
  • साधुओं और छोटे बच्चों के साथ कपाल क्रिया नहीं की जाती क्योंकि वे पहले से ही सांसारिक बंधनों से मुक्त माने जाते हैं
  • अघोरी पंथ में कपाल का प्रयोग तांत्रिक साधना के लिए किया जाता है जो अत्यंत वैराग्यपूर्ण और आध्यात्मिक मार्ग है
  • सामान्य व्यक्ति को कपाल साधना नहीं करनी चाहिए, यह केवल गुरु की दीक्षा लेने के बाद ही संभव है
  • कपाल मृत्यु बोध का प्रतीक है और हमें सिखाता है कि अहंकार अस्थाई है
Previous Post

US Deal का सच – रूस को धोखा, भारत की संप्रभुता पर सवाल!

Next Post

War on Gangsters: 19वें दिन 584 ठिकानों पर रेड, 180 गिरफ्तार! Punjab Police Action

The News Air Team

The News Air Team

द न्यूज़ एयर टीम (The News Air Team) अनुभवी पत्रकारों, विषय विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं का एक समर्पित समूह है, जो पाठकों तक सटीक, निष्पक्ष और त्वरित समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी टीम राजनीति, सरकारी योजनाओं, तकनीक और जन-सरोकार से जुड़े मुद्दों पर गहराई से विश्लेषण कर तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग करती है। 'द न्यूज़ एयर' का मुख्य उद्देश्य डिजिटल पत्रकारिता के उच्चतम मानकों को बनाए रखना और समाज के हर वर्ग को जागरूक करना है। हम हर खबर को पूरी पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ आप तक पहुँचाते हैं, ताकि आपको मिले केवल भरोसेमंद जानकारी।

Related Posts

Aaj Ka Rashifal 5 March 2026

Aaj Ka Rashifal 5 March 2026: गुरुवार को किन राशियों पर बरसेगा धन?

गुरूवार, 5 मार्च 2026
Trump Iran War Crisis

Trump Iran War Crisis: व्हाइट हाउस में हड़कंप, सेनेटर्स बोले ‘कोई प्लान ही नहीं!’

बुधवार, 4 मार्च 2026
Cockroaches in Coffee

Cockroaches in Coffee: क्या सच में कॉफी में होते हैं कॉकरोच?

बुधवार, 4 मार्च 2026
Mojtaba Khamenei Iran New Supreme Leader

Mojtaba Khamenei Iran New Supreme Leader : अरबों के मालिक हैं ईरान के नए सुप्रीम लीडर

बुधवार, 4 मार्च 2026
Bihar Board 12th Result 2026

Bihar Board 12th Result 2026: मार्च के अंत तक आ सकता है रिजल्ट!

बुधवार, 4 मार्च 2026
Trump

US Iran War: ईरान के बाद Trump का Ecuador में नया ऑपरेशन शुरू!

बुधवार, 4 मार्च 2026
Next Post
War on Gangsters

War on Gangsters: 19वें दिन 584 ठिकानों पर रेड, 180 गिरफ्तार! Punjab Police Action

India US Trade Deal

India US Trade Deal: किसानों का सरकार पर हल्ला बोल, 12 फरवरी को होगा 'भारत बंद'!

0 0 votes
Rating
Subscribe
Notify of
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments
The News Air

© 2026 The News Air | सटीक समाचार। सर्वाधिकार सुरक्षित।

GN Follow us on Google News

  • About
  • Editorial Policy
  • Privacy & Policy
  • Disclaimer & DMCA Policy
  • Contact

हमें फॉलो करें

No Result
View All Result
  • प्रमुख समाचार
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • सियासत
  • राज्य
    • पंजाब
    • चंडीगढ़
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • महाराष्ट्र
    • पश्चिम बंगाल
    • उत्तर प्रदेश
    • बिहार
    • उत्तराखंड
    • मध्य प्रदेश
    • राजस्थान
  • काम की बातें
  • नौकरी
  • बिज़नेस
  • टेक्नोलॉजी
  • मनोरंजन
  • धर्म
  • हेल्थ
  • स्पेशल स्टोरी
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
  • WEB STORIES

© 2026 The News Air | सटीक समाचार। सर्वाधिकार सुरक्षित।