Mahinder Singh Randhawa Legacy : पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान (Bhagwant Singh Mann) ने चंडीगढ़ में आयोजित ‘महिंदर सिंह रंधावा साहित्य और कला उत्सव’ में शिरकत करते हुए एक बड़ा बयान दिया है। पंजाब कला परिषद द्वारा आयोजित इस भव्य समारोह में सीएम मान ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनकी सरकार राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को न केवल बचाएगी, बल्कि इसे आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए हर संभव प्रयास करेगी। मुख्यमंत्री ने इस मंच से महान प्रशासक और कला प्रेमी डॉ. महिंदर सिंह रंधावा को “आधुनिक पंजाब का निर्माता” बताकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
‘आधुनिक पंजाब के शिल्पकार: डॉ. रंधावा’
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि 1947 के विभाजन के बाद जिस शख्सियत ने पंजाब के लोगों के दिलों में उम्मीद की नई किरण जगाई, वह डॉ. महिंदर सिंह रंधावा थे। होशियारपुर जिले की मिट्टी से जुड़े डॉ. रंधावा केवल एक कुशल प्रशासक (Administrator) नहीं थे, बल्कि एक गहरे दार्शनिक भी थे। सीएम मान ने कहा कि डॉ. रंधावा ने पंजाब के पुनर्निर्माण में जो भूमिका निभाई, उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। जब भी हम पंजाब के किसानों, साहित्यकारों और विभाजन के दर्द को सहकर उठ खड़े होने वाले लोगों की बात करते हैं, तो डॉ. रंधावा का नाम सबसे ऊपर आता है।
‘पेट की भूख और आत्मा की तृप्ति का अनूठा संतुलन’
भगवंत मान ने डॉ. रंधावा की दूरदर्शी सोच का विश्लेषण करते हुए एक बहुत गहरी बात कही। उन्होंने कहा कि डॉ. रंधावा जानते थे कि “यदि किसी कौम का पेट खाली है तो वह लड़ नहीं सकती, लेकिन यदि उसकी आत्मा खाली है तो वह समाप्त हो जाएगी।” इसी फलसफे पर चलते हुए उन्होंने एक तरफ पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) की स्थापना कर लोगों के पेट भरने का इंतजाम किया, तो दूसरी तरफ चंडीगढ़ आर्ट गैलरी और सांस्कृतिक केंद्र बनाकर पंजाब की आत्मा को जिंदा रखा। यह संतुलन ही उन्हें एक महान युगपुरुष बनाता है।
‘हरित क्रांति के जनक और कला के संरक्षक’
मुख्यमंत्री ने पंजाब में आई हरित क्रांति (Green Revolution) का श्रेय भी डॉ. रंधावा को दिया। उन्होंने कहा कि उस दौर में डॉ. रंधावा की नीतियों ने ही भारत को अकाल जैसी विभीषिका से बचाया था। सीएम मान ने कहा कि हरित क्रांति का आधार ‘अनाज’ और ‘किसान’ हैं, और डॉ. रंधावा ने इन दोनों को मजबूत किया। साथ ही, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आज का यह समारोह कोई राजनीतिक मंच नहीं, बल्कि हमारी मातृभाषा और पंजाबी संस्कृति के उत्सव का दिन है।
‘मातृभाषा का सम्मान और दिग्गजों को नमन’
अपने भाषण के दौरान मुख्यमंत्री का शायराना और साहित्यिक अंदाज भी देखने को मिला। उन्होंने संत राम उदासी, दविंद्र सत्यार्थी, रसूल हम्ज़ातोज़, नरिंदर कपूर, कीट्स और शिव कुमार बटालवी (Shiv Kumar Batalvi) जैसे महान साहित्यकारों को याद किया। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी मातृभाषा को हर माध्यम से प्रोत्साहित करें। सीएम ने कहा कि हमें गर्व है कि हमें विरासत में कड़ी मेहनत के साथ-साथ एक अमीर संस्कृति भी मिली है, और इसे संभालना अब हमारी जिम्मेदारी है।
‘किसान और कलाकार का सेतु’
एक वरिष्ठ संपादक के नजरिए से देखें तो सीएम भगवंत मान का यह संबोधन पंजाब की राजनीति और संस्कृति के बीच के गहरे रिश्ते को रेखांकित करता है। डॉ. महिंदर सिंह रंधावा को याद करना केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि उस दौर को याद करना है जब प्रशासन (Bureaucracy) और संस्कृति (Culture) साथ-साथ चलते थे। अक्सर विकास की दौड़ में कला पीछे छूट जाती है, लेकिन सीएम मान ने ‘पेट की भूख’ और ‘आत्मा की तृप्ति’ का जो उदाहरण दिया, वह आज के भौतिकवादी दौर में बेहद प्रासंगिक है। यह दर्शाता है कि सरकार पंजाब की पहचान को सिर्फ खेती तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उसे बौद्धिक और सांस्कृतिक पटल पर भी मजबूत करना चाहती है।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने डॉ. महिंदर सिंह रंधावा को ‘आधुनिक पंजाब का निर्माता’ घोषित किया।
सीएम ने कहा कि सरकार पंजाब की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
डॉ. रंधावा ने पीएयू (कृषि) और आर्ट गैलरी (संस्कृति) दोनों की स्थापना कर समाज में संतुलन बनाया।
मुख्यमंत्री ने शिव कुमार बटालवी और संत राम उदासी जैसे साहित्यकारों को याद करते हुए मातृभाषा के प्रचार पर जोर दिया।













