Union Budget 2026 India: केंद्र सरकार ने बजट 2026 में शेयर बाजार के ट्रेडर्स को बड़ा झटका दिया है। फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग पर लगने वाले सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में भारी बढ़ोतरी कर दी गई है। इस फैसले से रिटेल ट्रेडर्स को हर महीने ₹1000 से ₹1500 तक का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ेगा।
फ्यूचर्स और ऑप्शंस में कितना बढ़ा टैक्स?
सरकार ने फ्यूचर्स ट्रेडिंग पर STT को 0.02% से बढ़ाकर 0.05% कर दिया है। इसका मतलब यह हुआ कि अगर कोई ट्रेडर ₹10 लाख का फ्यूचर ट्रेड करता था, तो पहले उसे ₹200 टैक्स देना पड़ता था।
अब उसे ₹500 देने होंगे। यानी सीधे-सीधे ढाई गुना बढ़ोतरी।
वहीं ऑप्शंस ट्रेडिंग में भी STT को 0.1% से बढ़ाकर 0.15% कर दिया गया है। ऑप्शन एक्सरसाइज और ऑप्शन प्रीमियम दोनों पर अब एक समान 0.15% टैक्स लगेगा।
आम ट्रेडर की जेब पर कितना असर?
एक औसत ट्रेडर जो ₹1 से ₹2 लाख की पूंजी लगाकर सक्रिय ट्रेडिंग करता है, वह महीने भर में उसी पैसे को घुमाते हुए लगभग ₹15 से ₹20 लाख का ट्रेडिंग वॉल्यूम बना लेता है।
बाजार महीने में करीब 20-22 दिन खुलता है, शनिवार-रविवार बंद रहता है। ऐसे में अगर कोई ट्रेडर ₹20 लाख का मासिक टर्नओवर करता है, तो उसे अब हर महीने ₹1000 से ₹1500 तक अतिरिक्त खर्च करना होगा।
सरकार का मकसद क्या है?
इस कदम के पीछे सरकार की मंशा रिटेल ट्रेडर्स को F&O ट्रेडिंग से दूर रखना है। आंकड़े बताते हैं कि 95% से 97% रिटेल F&O ट्रेडर्स घाटे में रहते हैं।
सरकार चाहती है कि छोटे निवेशक ट्रेडिंग की जगह लॉन्ग टर्म इन्वेस्टिंग करें। यह टैक्स बढ़ोतरी एक तरह से रिटेल ट्रेडर्स को सुरक्षा देने का प्रयास है।
स्टॉक एक्सचेंज और ब्रोकरेज कंपनियों पर असर
इस घोषणा के बाद BSE और NSE जैसे स्टॉक एक्सचेंजों के शेयरों में गिरावट देखी गई। ब्रोकरेज कंपनियों के शेयर भी इस खबर से प्रभावित हुए।
हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि यह शॉर्ट टर्म रिएक्शन है। लॉन्ग टर्म में वॉल्यूम फिर से सामान्य हो जाएगा, जैसा कि हर साल सिगरेट पर टैक्स बढ़ने के बाद होता है।
टैक्स विवाद में राहत: 20% से घटकर 10% हुई डिपॉजिट रिक्वायरमेंट
बजट में एक अच्छी खबर भी आई है। अगर किसी टैक्सपेयर का इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से विवाद होता है, तो पहले अपना पक्ष रखने के लिए विवादित राशि का 20% जमा करना पड़ता था।
मान लीजिए आपने ₹1 लाख टैक्स भरा और विभाग ने कहा कि आपको ₹2 लाख भरना चाहिए था। तो ₹1 लाख के विवाद पर ₹20,000 डिपॉजिट करने पड़ते थे।
अब यह 20% की जगह 10% कर दिया गया है। इससे आम टैक्सपेयर्स को कैश क्रंच से राहत मिलेगी और वे आसानी से अपना केस लड़ सकेंगे।
बायबैक पर टैक्सेशन में बड़ा बदलाव
बजट 2026 में शेयर बायबैक पर टैक्सेशन का नियम बदल दिया गया है। पहले बायबैक में मिली पूरी रकम पर टैक्स लगता था।
उदाहरण से समझिए: अगर आपने ₹100 में 100 शेयर खरीदे (₹10,000 की लागत) और कंपनी ने ₹300 में बायबैक किया तो आपको ₹30,000 मिले। पहले पूरे ₹30,000 पर आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स देना होता था।
अब सिर्फ प्रॉफिट यानी ₹20,000 पर ही 12.5% लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगेगा (अगर शेयर 1 साल से ज्यादा रखा है)।
रिटेल इन्वेस्टर को कितना फायदा?
पुराने नियम में अगर कोई 30% टैक्स स्लैब में था, तो उसे ₹30,000 पर 30% यानी ₹9,000 टैक्स देना पड़ता था।
नए नियम में सिर्फ ₹20,000 के प्रॉफिट पर 12.5% यानी ₹2,500 टैक्स देना होगा। इस तरह ₹6,500 की सीधी बचत हुई।
यह बदलाव माइनॉरिटी शेयरहोल्डर्स के लिए बेहद फायदेमंद है।
प्रमोटर्स के लिए अलग नियम
हालांकि अगर कंपनी का प्रमोटर खुद बायबैक में हिस्सा लेता है, तो उस पर 30% फ्लैट टैक्स लगेगा। यह इसलिए किया गया ताकि प्रमोटर इस रास्ते से टैक्स बचाकर कंपनी से पैसा न निकाल सकें।
बायबैक का मकसद माइनॉरिटी शेयरहोल्डर्स को फायदा पहुंचाना होना चाहिए, न कि प्रमोटर की जेब भरना।
विश्लेषण: बजट कैसा रहा?
कुल मिलाकर यह बजट “ठीक-ठाक” कहा जा सकता है। कोई बड़ी आपदा नहीं हुई, लेकिन बड़े सुधारों की गुंजाइश अभी भी बनी हुई है।
देश का बजट जैसे-जैसे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे उम्मीदें भी बढ़ रही हैं। ज्यादा फंड्स का मतलब है ज्यादा क्रिएटिव तरीके से लोगों तक फायदा पहुंचाने की संभावना।
आम आदमी पर असर
- F&O ट्रेडर्स को हर महीने ₹1000-1500 का अतिरिक्त खर्च
- टैक्स विवाद में लड़ने के लिए कम पैसे जमा करने होंगे
- बायबैक से मिलने वाले पैसे पर टैक्स का बोझ घटेगा
- लॉन्ग टर्म इन्वेस्टर्स को फायदा, ट्रेडर्स को नुकसान
मुख्य बातें (Key Points)
- STT में बढ़ोतरी: फ्यूचर्स पर 0.02% से 0.05% और ऑप्शंस पर 0.1% से 0.15%
- टैक्स विवाद राहत: डिपॉजिट रिक्वायरमेंट 20% से घटकर 10% हुई
- बायबैक टैक्स: अब सिर्फ प्रॉफिट पर 12.5% LTCG टैक्स, पहले पूरी रकम पर स्लैब के हिसाब से लगता था
- प्रमोटर पर शिकंजा: बायबैक में हिस्सा लेने पर 30% फ्लैट टैक्स








