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The News Air - Breaking News - Union Budget 2026: मार्केट क्रैश, 8 लाख करोड़ स्वाहा, निवेशकों में हड़कंप

Union Budget 2026: मार्केट क्रैश, 8 लाख करोड़ स्वाहा, निवेशकों में हड़कंप

बजट घोषणा के बाद सेंसेक्स 1000 अंक तक गिरा, PM Internship Scheme का बजट 95% घटा, विपक्ष ने बताया निराशाजनक

The News Air Team by The News Air Team
रविवार, 1 फ़रवरी 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, बिज़नेस, स्पेशल स्टोरी
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Union Budget 2026
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Union Budget 2026 India Market Crash: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को संसद में वित्त वर्ष 2025-26 का बजट पेश किया। बजट घोषणा के तुरंत बाद शेयर बाजार में भारी गिरावट देखी गई। सेंसेक्स 1000 अंक तक गिर गया और निवेशकों के करीब 8 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो गए। इस बजट में ‘कर्तव्य’ शब्द का खूब इस्तेमाल किया गया, लेकिन आम जनता और गरीबों के लिए ठोस राहत का अभाव दिखा।


‘कर्तव्य’ के नाम पर सजा बजट भाषण

इस बार के बजट में वित्त मंत्री ने तीन प्रकार के कर्तव्यों की बात की है। उन्होंने संसद में लंबा भाषण दिया जिसमें अलग-अलग सेक्टरों के लिए सरकार के विज़न की चर्चा हुई। पिछले कुछ सालों में आत्मनिर्भर भारत, अमृत भारत और विकसित भारत जैसे कई टेम्पलेट आए और अब ‘कर्तव्य’ की बारी आ गई है। वित्त मंत्री ने इस बजट को “2047 के विकसित भारत की ऊंची उड़ान का मजबूत आधार” बताया है। वित्त मंत्रालय जिस भवन में अब चला गया है उसका नाम भी ‘कर्तव्य भवन’ रख दिया गया है।


PM Internship Scheme को लगा 95% का बड़ा झटका

पिछले साल सरकार ने बड़े जोर-शोर से ऐलान किया था कि पीएम इंटर्नशिप योजना देश के युवाओं का भविष्य बदल देगी। लेकिन इस बार की हकीकत कुछ और ही है। इस योजना का बजट 95 फीसदी तक कम कर दिया गया है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए इस योजना का बजट अनुमान 10,830 करोड़ रुपये था, लेकिन रिवाइज्ड एस्टीमेट में यह घटकर मात्र 526 करोड़ रह गया है।

इस योजना की असफलता के आंकड़े भी चौंकाने वाले हैं। अक्टूबर 2024 में इस स्कीम के तहत देश की कंपनियों ने 16 लाख 65 हजार इंटर्नशिप ऑफर दिए थे। लेकिन इनमें से सिर्फ 33 हजार छात्रों ने ही ऑफर स्वीकार किए। इनमें से भी करीब 6,500 छात्र बीच में ही इंटर्नशिप छोड़कर चले गए। यह हाल है उस योजना का जिसे युवाओं के लिए गेमचेंजर बताया गया था।


सी-प्लेन परियोजना फिर से लौटी

इस बजट में सी-प्लेन का जिक्र एक बार फिर आ गया है। आपको याद दिला दें कि गुजरात विधानसभा चुनाव के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे बड़े धूमधाम से लॉन्च किया था। उस समय देश को बड़े-बड़े सपने दिखाए गए थे कि सी-प्लेन से टूरिज्म और कनेक्टिविटी में क्रांति आ जाएगी।

लेकिन हकीकत यह है कि 20 करोड़ की यह सी-प्लेन परियोजना 2021 के बाद से बंद पड़ी है। साबरमती रिवर फ्रंट पर यह सी-प्लेन उड़ी नहीं और अब सरकार वहां एयर टैक्सी लाने की बात कर रही है। एक बार फेल हो चुकी इस योजना को फिर से बजट में लाना सवाल खड़े करता है।


अमृत सरोवर और स्मार्ट सिटी का क्या हुआ?

बजट में अमृत सरोवरों को मछली पालन के रूप में विकसित करने की घोषणा की गई है। सुनने में यह बहुत अच्छा लगता है। लेकिन जरा अपने जिले में जाकर अमृत सरोवरों का हाल देख लीजिए। साल 2020 में बड़े जोर-शोर से घोषणा हुई थी कि हर जिले में तालाबों का सुधार होगा और 75 नए तालाब बनाए जाएंगे। आज 2026 में इन तालाबों की क्या हालत है यह सबके सामने है।

इसी तरह स्मार्ट सिटी योजना भी फेल हो चुकी है। अब उसकी जगह ‘सिटी इकोनॉमिक ज़ोन’ का नया नाम दे दिया गया है। राजधानी दिल्ली जैसा शहर ही जब दम तोड़ रहा है तो सिटी इकोनॉमिक ज़ोन कैसे बनेंगे यह सवाल है। सरकार लेबल बदलने और नए-नए नाम चिपकाने में माहिर है।


मैन्युफैक्चरिंग में चीन से कितना पीछे है भारत?

इस बजट में मैन्युफैक्चरिंग के लिए सात कर्तव्यों की बात की गई है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि 2014 के ‘मेक इन इंडिया’ और 2015 के ‘स्किल इंडिया’ का इस बजट में कोई जिक्र तक नहीं हुआ। वित्त मंत्री स्किल इंडिया का नाम लेना ही भूल गईं। पीएम इंटर्नशिप योजना का भी कोई जिक्र नहीं आया। लगता है सरकार मान चुकी है कि ये सब स्लोगन थे और इनका कोई नतीजा नहीं निकला।

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आंकड़े बताते हैं कि साल 2006-07 में देश की जीवीए यानी ग्रॉस वैल्यू एडेड में मैन्युफैक्चरिंग का हिस्सा 19 फीसदी था। आज यह घटकर सिर्फ 14 फीसदी रह गया है। मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में भारत का स्थान पूरे एशिया में छठे नंबर पर है। चीन का मुकाबला करने के लिए भारत ने इस सेक्टर में अब तक कुछ खास नहीं किया है। कोई ऐसा प्रोडक्ट नहीं बना जिससे चीन के पसीने छूटे हों।


कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग: भारत 3,000 बनाम चीन 50 लाख

वित्त मंत्री ने कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग के लिए अगले 5 साल में 10,000 करोड़ रुपये देने का ऐलान किया है। सुनने में यह बड़ी घोषणा लगती है, लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां करती है।

दुनिया में जितने भी कंटेनर बनते हैं उसका 95 फीसदी अकेला चीन बनाता है। भारत साल भर में सिर्फ 3,000 कंटेनर बनाता है जबकि चीन हर साल 50 लाख कंटेनर बनाता है। चीन की एक कंपनी ‘चाइना इंटरनेशनल मरीन कंटेनर ग्रुप’ अकेले साल में 20 लाख कंटेनर बना लेती है।

कंटेनर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया भारत सरकार की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी है जो 1988 में बनी थी। इसकी वेबसाइट के मुताबिक आत्मनिर्भर भारत के तहत अब तक सिर्फ 2,959 कंटेनर बनाए गए हैं। दुनिया के पांच बड़े ग्लोबल कंटेनर पोर्ट में से चार चीन के पास हैं। ऐसे में 10,000 करोड़ से कंटेनर का इकोसिस्टम बना पाना एक बड़ा सवाल है।


नदी जलमार्ग: 111 में से सिर्फ 29 चालू

वित्त मंत्री ने अगले 5 सालों में 20 नए राष्ट्रीय जलमार्गों के संचालन की घोषणा की है। सुनने में लगता है कि नदियों की तरफ सरकार का ध्यान जा रहा है और कोई बड़ी बात होने वाली है। लेकिन सच्चाई कुछ और है।

मोदी सरकार अब तक 111 नदी राष्ट्रीय जलमार्गों की घोषणा कर चुकी है। लेकिन जून 2025 में जहाजरानी मंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने खुद संसद में बताया कि इन 111 जलमार्गों में से सिर्फ 29 ही काम कर रहे हैं।

साल 2023 की संसद की स्थाई समिति की रिपोर्ट में साफ लिखा गया था कि 63 राष्ट्रीय जलमार्गों को शुरू नहीं किया जा सका क्योंकि न तो पैसा था और न ही स्टाफ। समिति ने तो यहां तक कहा था कि इन 63 जलमार्गों पर काम शुरू ही न किया जाए।

जनवरी 2023 में गंगा विलास नाम का एक बड़ा जहाज चलाने की खबर आई थी। बनारस से कोलकाता क्रूज का सपना दिखाया गया। लेकिन वो जहाज कहां गया कोई नहीं जानता। गुजरात में साबरमती में भी पानी का बड़ा जहाज चलाया गया था जो अब 35 करोड़ के घाटे में है और पानी कम होने के कारण चल नहीं पा रहा।


लिफ्ट मैन्युफैक्चरिंग में भी पिछड़ा भारत

सरकार ने लिफ्ट के क्षेत्र में भी जोर देने की बात कही है। लेकिन इस सेक्टर में भी चीन और दूसरे देश भारत से बहुत आगे हैं। अमेरिका की ओटिस, स्विट्जरलैंड की सिंडलर, फिनलैंड की कोन, जापान की हिताची और मिसुबिशी जैसी बड़ी कंपनियां लिफ्ट बनाती हैं।

ये कंपनियां भारत में भी लिफ्ट बनाती हैं, लेकिन इनके कई बड़े प्लांट चीन में हैं। ओटिस के पांच प्लांट और कोन का सबसे बड़ा प्रोडक्शन प्लांट चीन में है। इसी कारण लिफ्ट के उत्पादन और निर्यात में चीन दुनिया का लीडर बन चुका है। भारत का रियल एस्टेट सेक्टर इतना आगे आ गया है, लेकिन लिफ्ट के मामले में कोई बड़ा भारतीय ब्रांड नहीं बन पाया।


टैक्स में हुए बदलाव

इस बजट में कुछ टैक्स संबंधी राहतें दी गई हैं। मोटर दुर्घटना ट्रिब्यूनल से जो मुआवजा मिलता है अब उस पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। अगर किसी को एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल से ब्याज मिलता है तो उस पर न तो इनकम टैक्स लगेगा और न ही टीडीएस कटेगा।

31 मार्च तक इनकम टैक्स का रिवीजन मामूली जुर्माने के साथ फाइल किया जा सकेगा। ITR-1 और ITR-2 का फॉर्म 31 जुलाई तक भरना होगा। जिन बिजनेस की ऑडिट नहीं होती वे 31 अगस्त तक रिटर्न दाखिल कर सकेंगे। विदेशी यात्राओं, शिक्षा और मेडिकल रेमिटेंस पर TCS भी कम कर दी गई है।

एक बड़ा बदलाव यह है कि 1 अप्रैल 2026 से नया आयकर कानून लागू होगा और आयकर का फॉर्म पूरी तरह बदल जाएगा।


विदेशी संपत्ति खुलासा योजना

जिन लोगों के पास विदेशों में संपत्तियां हैं उन्हें सरकार 6 महीने का मौका देने जा रही है ताकि वे अपनी इनकम और एसेट्स का खुलासा कर सकें। यह स्कीम छात्रों, युवा प्रोफेशनल्स, टेक कर्मचारियों और एनआरआई के लिए है।

याद रहे कि मोदी सरकार पहले भी काले धन वालों को राहत देने के लिए ऐसी ही वॉलंटरी डिस्क्लोजर स्कीम ला चुकी है। साल 2016 में इस स्कीम के तहत 50 फीसदी जुर्माना देकर लोग अपना काला धन घोषित कर सकते थे। उस समय 65,250 करोड़ के काले धन का सरेंडर हुआ था। उसके कुछ समय बाद ही काला धन मिटाने के नाम पर नोटबंदी भी आई थी।


AVGC सेक्टर को मिलेगा बढ़ावा

एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स यानी AVGC सेक्टर को बढ़ावा देने की घोषणा हुई है। सरकार का कहना है कि 15,000 सेकेंडरी स्कूलों और 500 कॉलेजों में इसकी लैब बनाई जाएंगी।

लेकिन सवाल यह है कि जिसे सीखना है वो तो खुद ही सीख रहा है। जिसे रील बनानी है वो रील बना रहा है। ऐसे में सरकार इस क्षेत्र में क्या कर लेगी? जिस देश में खुलकर वीडियो बनाने पर धर्म के नाम पर गुंडे धमक आते हों और एफआईआर हो जाती हो, वह देश वीडियो क्रिएशन में कैसे आगे बढ़ेगा यह सोचने वाली बात है।


विपक्ष ने बजट पर साधा निशाना

विपक्ष ने इस बजट की जमकर आलोचना की है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह बजट गरीब, किसान और युवा विरोधी है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बजट को “दिशाहीन, मिशनहीन और एक्शनलेस” बताया है।

उन्होंने कहा कि यह बजट SC, ST और OBC विरोधी है। शिक्षा का फंड घटा है, सोशल सिक्योरिटी सब्सिडी कम हुई है और फर्टिलाइजर सब्सिडी में भी कटौती की गई है। उन्होंने कहा कि बंगाल को एक पैसा भी नहीं दिया गया, बस GST के जरिए पैसे लिए जा रहे हैं।

विपक्षी नेताओं ने यह भी कहा कि महंगाई कंट्रोल करने के लिए सरकार के पास कोई रोडमैप नहीं है। सोना-चांदी कितना महंगा हो गया, दवाइयों के दाम आसमान छू रहे हैं, लेकिन बजट में इसका कोई समाधान नहीं।


कॉर्पोरेट को छूट, आम आदमी पर बोझ

एक अहम बात यह है कि 2019 से कॉर्पोरेट सेक्टर टैक्स में छूट का फायदा उठा रहा है। भारत सरकार के टैक्स कलेक्शन में कॉर्पोरेट का योगदान अब तीसरे नंबर पर आ गया है। डायरेक्ट टैक्स का संग्रह जरूर बढ़ा है, लेकिन उसमें 80 फीसदी हिस्सा आम जनता का है।

कॉर्पोरेट ने कम टैक्स दिया और निवेश भी कम किया। वित्त वर्ष 2026 में टैक्स संग्रह के 12.5 फीसदी बढ़ने का अनुमान था, लेकिन 4 फीसदी भी हासिल नहीं हुआ।


आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा?

इस बजट का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा। F&O ट्रेडर्स को पहले ही झटका लग चुका है। इंटर्नशिप योजना में भारी कटौती से युवाओं को निराशा हाथ लगी है। बीमा सेक्टर में 80D के तहत छूट बढ़ने की उम्मीद थी, वो भी पूरी नहीं हुई।

गरीब और मध्यम वर्ग के लिए इस बजट में कोई खास राहत नहीं है। किसानों के लिए ठोस घोषणाएं नहीं हुईं। महंगाई से निपटने का कोई रोडमैप नहीं है।


क्या है पूरा मामला?

साल 2014 से लगातार सत्ता में रहने के बाद मोदी सरकार ने कई महत्वाकांक्षी योजनाएं शुरू की थीं। मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया, स्मार्ट सिटी, अमृत सरोवर जैसी योजनाओं के बड़े-बड़े सपने दिखाए गए। लेकिन इन योजनाओं के नतीजे मिले-जुले रहे हैं। सीएजी ने बताया है कि स्किल इंडिया में हजारों करोड़ का घोटाला हुआ है।

अब इस बजट में ‘कर्तव्य’ थीम के साथ 2047 के विकसित भारत के विज़न की बात की जा रही है। लेकिन आज की समस्याओं का जवाब 2047 में मिलेगा यह कहना आम जनता को संतुष्ट नहीं करता। 12 साल की सत्ता के बाद भी मैन्युफैक्चरिंग में चीन से मुकाबला नहीं हो पा रहा, रोजगार की समस्या जस की तस है और महंगाई बढ़ती जा रही है।


मुख्य बातें (Key Points)

• मार्केट में भारी गिरावट: बजट के बाद सेंसेक्स 1000 अंक तक गिरा और निवेशकों के 8 लाख करोड़ रुपये डूब गए।

• इंटर्नशिप योजना में 95% कटौती: 10,830 करोड़ का बजट घटकर मात्र 526 करोड़ रह गया, 16 लाख ऑफर में से सिर्फ 33,000 स्वीकार हुए।

• कंटेनर में चीन का दबदबा: भारत साल में 3,000 कंटेनर बनाता है जबकि चीन 50 लाख बनाता है, दुनिया के 95% कंटेनर चीन में बनते हैं।

• जलमार्गों का हाल बेहाल: 111 घोषित जलमार्गों में से सिर्फ 29 चालू हैं, बाकी पैसे और स्टाफ की कमी से बंद पड़े हैं।

• मैन्युफैक्चरिंग में गिरावट: जीवीए में मैन्युफैक्चरिंग का हिस्सा 19% से घटकर 14% हो गया, एशिया में भारत छठे नंबर पर है।


FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: Budget 2026 के बाद शेयर बाजार कितना गिरा?

उत्तर: बजट की घोषणा के तुरंत बाद सेंसेक्स में करीब 1000 अंक की गिरावट आई और निवेशकों के लगभग 8 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

प्रश्न 2: PM Internship Scheme का बजट कितना कम किया गया?

उत्तर: इस योजना का बजट 95 फीसदी कम कर दिया गया। पहले 10,830 करोड़ का अनुमान था जो घटकर मात्र 526 करोड़ रह गया है।

प्रश्न 3: Budget 2026 में मैन्युफैक्चरिंग के लिए क्या घोषणाएं हुईं?

उत्तर: कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग के लिए 5 साल में 10,000 करोड़ और लिफ्ट, फायर फाइटिंग मशीन, बोरिंग मशीन जैसे सेक्टर पर फोकस की घोषणा हुई है।

प्रश्न 4: नया आयकर कानून कब से लागू होगा?

उत्तर: 1 अप्रैल 2026 से नया आयकर कानून लागू होगा और आयकर का फॉर्म भी पूरी तरह बदल जाएगा।

प्रश्न 5: विदेशी संपत्ति खुलासा स्कीम क्या है?

उत्तर: सरकार 6 महीने का मौका दे रही है जिसमें विदेशों में संपत्ति रखने वाले छोटे टैक्सपेयर्स जैसे छात्र, युवा प्रोफेशनल्स और एनआरआई अपनी इनकम और एसेट्स का खुलासा कर सकते हैं।

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