Budget 2026 Expectations : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को देश का आम बजट पेश करेंगी। बजट आने में अब गिनती के दिन बचे हैं और इस बार चर्चा बड़े ऐलानों से ज्यादा रोजमर्रा की परेशानियों पर केंद्रित है। खासकर मिडिल क्लास और सैलरी वालों को उम्मीद है कि सरकार इस बजट में उन्हें कई सौगात देगी। आम करदाता जानना चाहता है कि नया साल टैक्स के मामले में कितना फायदेमंद रहेगा।
आर्थिक सर्वेक्षण से नहीं मिला संकेत
आर्थिक सर्वेक्षण भी पेश कर दिया गया, लेकिन इससे अंदाजा नहीं लगाया जा सकता कि टैक्स में क्या राहत मिलेगी। मिडिल क्लास के लिए क्या सौगात वित्त मंत्री लेकर आने वाली हैं, यह अभी तक सामने नहीं आया है।
फिलहाल अटकलें लगातार लगाई जा रही हैं। बाजार विशेषज्ञों और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ने अपने-अपने अनुमान लगाए हैं। लेकिन असली तस्वीर 1 फरवरी को ही साफ होगी।
1 अप्रैल से नया आयकर कानून भी होगा लागू
खास बात यह है कि 1 अप्रैल से नया आयकर कानून भी लागू हो रहा है, जिसमें नियमों में कई बदलाव देखने को मिलेंगे। लोग चाहते हैं कि अचानक नियम बदलने से उन्हें बार-बार परेशानी ना उठानी पड़े।
नए कानून के तहत सबसे बड़ा बदलाव टैक्स ईयर प्रणाली को अपनाना है। अब तक आय कमाने का साल और टैक्स भरने का साल अलग-अलग माना जाता था, जिससे अक्सर भ्रम की स्थिति बनी रहती थी।
नई व्यवस्था में यह समस्या खत्म हो जाएगी। करदाताओं के लिए टैक्स फाइलिंग आसान हो जाएगी।
टैक्स में बड़ी राहत की उम्मीद
लगातार लोग उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार टैक्स में बड़ी राहत दे ताकि उन्हें बड़ा आराम मिले और किसी परेशानी का सामना ना करना पड़े। आमतौर पर देखा जाता है कि देश में ज्यादातर लोग ईमानदारी से टैक्स भरते हैं।
लेकिन जब तारीख निकल जाती है और लोग समय पर टैक्स नहीं भर पाते, तो उन पर भारी-भरकम जुर्माना लगाया जाता है। यह मिडिल क्लास के लिए बड़ा बोझ बन जाता है।
करदाता चाहते हैं कि सरकार नियमों को सरल बनाए और जुर्माने की व्यवस्था में भी कुछ राहत दे।
स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाने की मांग
चार्टर्ड अकाउंटेंट साक्षी का कहना है कि मध्यम वर्ग को प्रतीकात्मक बदलाव नहीं, बल्कि वास्तविक राहत चाहिए। उन्होंने स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाने की जरूरत बताई।
फिलहाल नई टैक्स रिजीम में स्टैंडर्ड डिडक्शन 75 हजार रुपए है। विशेषज्ञों की मांग है कि इसे बढ़ाकर कम से कम 1 लाख रुपए किया जाए।
इससे सैलरी वालों के हाथ में हर महीने कुछ हजार रुपए ज्यादा आएंगे, जो महंगाई के दौर में बड़ी राहत होगी।
होम लोन पर ब्याज छूट सालों से नहीं बदली
साक्षी ने यह भी कहा कि होम लोन पर 2 लाख रुपए की ब्याज छूट सीमा सालों से नहीं बदली, जिसे अब बढ़ाना चाहिए। प्रॉपर्टी की कीमतें कई गुना बढ़ गई हैं, लेकिन टैक्स छूट की सीमा वहीं की वहीं है।
विशेषज्ञों की मांग है कि इस सीमा को बढ़ाकर कम से कम 3 से 4 लाख रुपए किया जाए। इससे घर खरीदने वालों को बड़ी राहत मिलेगी।
मिडिल क्लास के लिए अपना घर खरीदना एक बड़ा सपना होता है। सरकार अगर होम लोन छूट बढ़ाती है तो यह सपना पूरा करना आसान हो जाएगा।
पति-पत्नी के लिए संयुक्त टैक्स की मांग
इसी के साथ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ने पति-पत्नी के लिए एक जॉइंट टैक्स रिटर्न की भी मांग की है, ताकि उन्हें टैक्स में बचत हो सके और उनका पैसा बच सके।
कई विकसित देशों में यह सुविधा पहले से उपलब्ध है। भारत में भी अगर यह लागू होता है तो कामकाजी जोड़ों को बड़ा फायदा होगा।
संयुक्त रिटर्न से टैक्स स्लैब का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा और परिवार की बचत बढ़ेगी।
कैपिटल गेन टैक्स बहुत जटिल
चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ने कैपिटल गेन टैक्स को भी जटिल बताया। उनका मानना है कि होल्डिंग पीरियड और टैक्स दरों को सरल बनाया जाना चाहिए।
फिलहाल शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन में अलग-अलग नियम हैं। प्रॉपर्टी, शेयर, म्यूचुअल फंड सबके लिए अलग-अलग होल्डिंग पीरियड और टैक्स रेट हैं।
यह व्यवस्था बहुत भ्रमित करने वाली है। सरकार को इसे सरल बनाना चाहिए।
TDS नियमों पर भी सवाल
विशेषज्ञों ने कई तरह के TDS (Tax Deducted at Source) नियमों पर भी सवाल उठाए। छोटी-छोटी रकम पर भी TDS काटा जाता है, जिससे लोगों को परेशानी होती है।
बैंक में FD पर, किराए पर, प्रोफेशनल फीस पर, हर जगह TDS की अलग-अलग सीमाएं हैं। लोग भ्रमित रहते हैं।
TDS नियमों को सरल बनाने और छूट की सीमा बढ़ाने की मांग लगातार उठ रही है।
हर महीने हाथ में कितना पैसा बचेगा?
नौकरी-पेशा लोगों के मन में सबसे अहम सवाल यही है कि हर महीने हाथ में कितना पैसा बचेगा? उनकी सैलरी में कितना फायदा होगा और सरकार उन्हें क्या राहत देगी?
महंगाई लगातार बढ़ रही है। खाने-पीने, शिक्षा, स्वास्थ्य, सब कुछ महंगा हो गया है। लेकिन सैलरी उसी रफ्तार से नहीं बढ़ रही।
ऐसे में अगर टैक्स में राहत मिलती है तो लोगों के हाथ में कुछ ज्यादा पैसा बचेगा। वे अपनी जरूरतें बेहतर तरीके से पूरी कर सकेंगे।
मिडिल क्लास की सीमित लेकिन साफ मांगें
नौकरी-पेशा वर्ग की उम्मीदें भले ही सीमित हों, लेकिन उनकी मांगें बिल्कुल साफ हैं। वे चाहते हैं:
- स्टैंडर्ड डिडक्शन में बढ़ोतरी
- होम लोन पर ब्याज छूट की सीमा बढ़े
- पति-पत्नी के लिए जॉइंट रिटर्न की सुविधा
- कैपिटल गेन टैक्स को सरल बनाया जाए
- TDS नियमों में राहत मिले
ये मांगें बहुत बड़ी या अव्यावहारिक नहीं हैं। सरकार अगर इन पर ध्यान देती है तो मिडिल क्लास को बड़ी राहत मिलेगी।
सरकार की प्राथमिकताएं क्या होंगी?
सवाल यह है कि सरकार की प्राथमिकताएं क्या होंगी। क्या वह मिडिल क्लास को राहत देगी या फिर अन्य क्षेत्रों पर ज्यादा फोकस करेगी?
आर्थिक विकास, रोजगार सृजन, इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, ये सब भी सरकार की प्राथमिकताओं में हैं। बजट में सबके लिए कुछ न कुछ होता है।
लेकिन मिडिल क्लास का कहना है कि वे ही सबसे ज्यादा ईमानदारी से टैक्स भरते हैं। उन्हें भी कुछ राहत मिलनी चाहिए।
1 फरवरी को होगा खुलासा
ये सवाल लगातार देश में गूंज रहे हैं, जिसका जवाब सिर्फ और सिर्फ 1 फरवरी को मिलेगा। जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सबके सामने बजट पेश करेंगी, तभी यह तस्वीर साफ होगी।
मिडिल क्लास से लेकर सैलरी-पेशा लोगों के लिए क्या सौगात आएगी, यह देखना होगा। पूरा देश बजट का बेसब्री से इंतजार कर रहा है।
अगले शनिवार, 1 फरवरी 2026 को दोपहर 11 बजे वित्त मंत्री संसद में बजट पेश करेंगी। उसके बाद ही सारे सवालों के जवाब मिलेंगे।
विपक्ष की भी नजर बजट पर
विपक्षी दलों ने भी अपनी-अपनी मांगें रखी हैं। वे चाहते हैं कि बजट में गरीबों, किसानों और मजदूरों के लिए भी कुछ खास हो।
कांग्रेस ने मिडिल क्लास को टैक्स राहत देने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि महंगाई के दौर में लोगों को कुछ राहत मिलनी चाहिए।
सभी दल अपने-अपने तरीके से सरकार पर दबाव बना रहे हैं। लेकिन अंतिम फैसला सरकार का ही होगा।
मुख्य बातें (Key Points)
- वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को बजट पेश करेंगी
- मिडिल क्लास को टैक्स में राहत की उम्मीद है
- स्टैंडर्ड डिडक्शन और होम लोन छूट बढ़ाने की मांग
- 1 अप्रैल से नया आयकर कानून भी लागू होगा
- सैलरी वालों को प्रतीकात्मक नहीं, वास्तविक राहत चाहिए








