Online Shopping Fraud : उत्तर प्रदेश के टिकैतनगर में एक उपभोक्ता के साथ ऑनलाइन शॉपिंग के दौरान बिना अनुमति हुए लेन-देन के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने इस मामले में Flipkart और Axis Bank की लापरवाही को गंभीर मानते हुए उपभोक्ता को उसकी पूरी धनराशि 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाने का आदेश दिया है।
टिकैतनगर के मुख्य बाजार निवासी अजय कुमार इस मामले के केंद्र में हैं। अजय कुमार Flipkart के नियमित सदस्य हैं और उनका Axis Bank का क्रेडिट कार्ड Flipkart प्लेटफॉर्म से जुड़ा हुआ है। उनका सिबिल स्कोर भी अच्छी श्रेणी में दर्ज है, इसके बावजूद उनके खाते से बड़ा फर्जीवाड़ा हो गया।
31 मई की शाम कैसे हुआ पूरा फर्जीवाड़ा
31 मई की शाम अजय कुमार के Flipkart अकाउंट में किसी अज्ञात व्यक्ति ने लॉगिन किया और एक के बाद एक सात ऑर्डर प्लेस कर दिए। अजय को जैसे ही इसकी जानकारी मिली, उन्होंने तुरंत Flipkart के कस्टमर केयर पर फोन किया और ई-मेल के जरिए ऑर्डर कैंसिल करने की मांग की।
कैंसिल का विकल्प नहीं, बैंक को भी दी सूचना
अजय कुमार का कहना है कि उन्हें ऑर्डर कैंसिल करने का कोई विकल्प ही नहीं मिला। स्थिति को देखते हुए उन्होंने एहतियातन Axis Bank को भी सूचना दी कि इन ऑर्डर्स का भुगतान रोका जाए। इसके बावजूद क्रेडिट कार्ड से पूरी रकम कट गई।
डिलीवरी का दावा, लेकिन सामान नहीं मिला
इसी दिन रात करीब 8:15 बजे ई-मेल के जरिए यह पुष्टि कर दी गई कि सभी ऑर्डर डिलीवर हो चुके हैं। जबकि नियम के अनुसार डिलीवरी के समय ई-मेल पर भेजा गया कोड बताना जरूरी था। अजय कुमार को न तो कोई कोड मिला और न ही कोई सामान।
चार OTP आए, लेकिन सात ट्रांजैक्शन
पूरे मामले में चौंकाने वाली बात यह रही कि सात लेन-देन के लिए अजय कुमार के मोबाइल पर केवल चार OTP आए। न तो पूरा ट्रांजैक्शन विवरण ई-मेल पर भेजा गया और न ही भुगतान से जुड़ी कोई स्पष्ट जानकारी दी गई।
उपभोक्ता आयोग का सख्त फैसला
मामले की सुनवाई के बाद District Consumer Disputes Redressal Commission ने Flipkart और Axis Bank दोनों को दोषी माना। आयोग ने आदेश दिया कि उपभोक्ता की पूरी धनराशि 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ वापस की जाए।
इसके साथ ही मानसिक उत्पीड़न और समय बर्बाद करने के लिए Flipkart को ₹10,000 और खाते की सुरक्षा में चूक के लिए Axis Bank को भी ₹10,000 का मुआवजा देने का निर्देश दिया गया। इसके अलावा दोनों को ₹2,000 वाद व्यय भी अदा करना होगा।
विश्लेषण: ऑनलाइन शॉपिंग में जिम्मेदारी किसकी
यह मामला साफ तौर पर दिखाता है कि ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म और बैंक दोनों की जिम्मेदारी सिर्फ लेन-देन कराने तक सीमित नहीं है। उपभोक्ता की सुरक्षा, OTP सिस्टम की पारदर्शिता और डिलीवरी की पुष्टि जैसी प्रक्रियाओं में थोड़ी सी चूक भी बड़े नुकसान का कारण बन सकती है। आयोग का यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों के लिए नजीर बन सकता है।
आम उपभोक्ताओं पर असर
इस फैसले से आम ग्राहकों को यह भरोसा मिला है कि अगर उनके साथ ऑनलाइन फ्रॉड होता है, तो वे उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटा सकते हैं और उन्हें न्याय मिल सकता है।
जानें पूरा मामला
बिना अनुमति हुए सात ऑर्डर, भुगतान रोकने के बावजूद रकम कटना और डिलीवरी के नाम पर सामान न मिलना—इन सभी बिंदुओं ने Flipkart और Axis Bank की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए, जिस पर उपभोक्ता आयोग ने सख्त रुख अपनाया।
मुख्य बातें (Key Points)
- बिना अनुमति Flipkart अकाउंट से सात ऑर्डर किए गए
- Axis Bank को सूचना देने के बावजूद भुगतान नहीं रुका
- उपभोक्ता को 7% ब्याज सहित रकम लौटाने का आदेश
- Flipkart और Axis Bank पर कुल ₹22,000 का जुर्माना








