Punjab Police Sanjh Website Down : पंजाब पुलिस (Punjab Police) की डिजिटल सेवा सांझ वेबसाइट (Saanjh Website – PPSaanjh.in) पिछले तीन दिनों से ठप पड़ी है, जिससे राज्य भर में पुलिस विभाग के कार्यों के साथ-साथ आम जनता को भी भारी असुविधा हो रही है। यह वेबसाइट गुरुवार सुबह से बंद है और अब तक इसकी बहाली नहीं हो पाई है।
सांझ पोर्टल (Saanjh Portal) पंजाब सरकार की एक प्रमुख डिजिटल पहल है, जिसका उपयोग नागरिक पुलिस वेरीफिकेशन, खोए हुए मोबाइल फोन और दस्तावेज़ों की रिपोर्टिंग, पासपोर्ट सत्यापन और अन्य नागरिक सेवाओं के लिए करते हैं। लेकिन पिछले तीन दिनों से यह पोर्टल पूरी तरह निष्क्रिय है, जिससे हजारों लोगों का काम अटक गया है।
लुधियाना (Ludhiana) के सिविल लाइंस क्षेत्र के निवासी मंजीत सिंह (Manjeet Singh) ने बताया कि ऑफिस जाते समय उनका पर्स खो गया, जिसमें ड्राइविंग लाइसेंस (Driving License), पैन कार्ड (PAN Card), आधार कार्ड (Aadhar Card) और बैंक कार्ड थे। उन्होंने तुरंत सांझ वेबसाइट पर रिपोर्ट दर्ज करनी चाही, लेकिन साइट बंद पाई। बाद में उन्होंने नजदीकी सांझ केंद्र (Saanjh Kendra) जाकर मदद मांगी, मगर वहां से भी यही जवाब मिला कि वेबसाइट चालू होने पर ही प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।

सिर्फ आम नागरिक ही नहीं, पुलिस विभाग भी इस तकनीकी खराबी से प्रभावित हो रहा है। एफआईआर (FIR), गुमशुदगी की रिपोर्ट, अज्ञात शवों की जानकारी जैसी जरूरी जानकारियां वेबसाइट पर अपलोड नहीं हो पा रही हैं। लुधियाना के एक पुलिस स्टेशन के एसएचओ (SHO) ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि “जब साइट दोबारा शुरू होगी, तब तक हमारा पेंडिंग काम कई गुना बढ़ जाएगा।”
इस तकनीकी क्रैश ने न सिर्फ आम लोगों को परेशान किया है, बल्कि पंजाब पुलिस की डिजिटल पहल की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। पूरे राज्य में पुलिस थानों और विभागीय शाखाओं का रोजमर्रा का कार्य प्रभावित हुआ है।
इस मुद्दे पर विशेष पुलिस महानिदेशक (Special DGP) गुरप्रीत कौर दियो (Gurpreet Kaur Deo) और एडीजीपी (ADGP) आधुनिकीकरण से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी। पंजाब पुलिस की तरफ से अब तक इस क्रैश के कारण या वेबसाइट के पुन: चालू होने की समय-सीमा पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
यह मामला न केवल तकनीकी स्तर पर एक बड़ी चूक की ओर इशारा करता है, बल्कि एक बार फिर से यह प्रश्न खड़ा करता है कि क्या हमारी डिजिटल पुलिसिंग व्यवस्था आपात स्थितियों में भी कार्यक्षम बनी रह सकती है?








