JD Vance Protest in Punjab : अमेरिका (America) के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) के भारत दौरे को लेकर विरोध की लहर पंजाब (Punjab) में तेज हो गई है। किसान मजदूर मोर्चा (Kisan Mazdoor Morcha) ने ऐलान किया है कि 23 और 24 अप्रैल को पूरे भारत (India) में केंद्र सरकार (Central Government) और अमेरिका के उपराष्ट्रपति के पुतले जलाए जाएंगे। इस विरोध का मुख्य कारण खेती क्षेत्र (Agriculture Sector) में भारत-अमेरिका (India-America) डील को लेकर किसानों में व्याप्त नाराजगी है।
किसान नेता सरवन सिंह पंधेर (Sarwan Singh Pandher) ने जानकारी दी कि अमेरिका भारत पर खेती, डेयरी (Dairy) और पोल्ट्री (Poultry) क्षेत्रों में सब्सिडी (Subsidy) समाप्त करने का दबाव बना रहा है। इसी के चलते भारत सरकार अमेरिका के साथ एक समझौते की ओर बढ़ रही है, जो किसानों के हितों के खिलाफ बताया जा रहा है। इस मुद्दे पर संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) (Sanyukt Kisan Morcha – Non-Political) जल्द ही अपने अगले कदम की घोषणा करेगा। इसके लिए आज शाम को अमृतसर (Amritsar) में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस रखी गई है।
सरवन सिंह पंधेर ने यह भी कहा कि पंजाब और हरियाणा (Haryana) के किसानों को हाल ही में ओलावृष्टि (Hailstorm) और फसलों में आग लगने के कारण भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने दोनों राज्यों की सरकारों से अपील की है कि किसानों को तत्काल मुआवजा (Compensation) दिया जाए। साथ ही गिरदावरी (Crop Damage Survey) का कार्य भी जल्द से जल्द शुरू करने की मांग रखी गई है।
पंधेर ने स्पष्ट किया कि जेडी वेंस (JD Vance) अपने 4 दिन के भारत दौरे (India Visit) पर पहुंच चुके हैं और अमेरिका लगातार भारत पर कृषि, डेयरी और पोल्ट्री क्षेत्र में सब्सिडी खत्म करने के लिए दबाव बना रहा है। किसान नेताओं का आरोप है कि सरकार जल्दबाजी में ऐसा कोई समझौता करने जा रही है जो किसानों के लिए नुकसानदेह साबित होगा। इसी वजह से किसान संगठनों, ट्रेड यूनियनों (Trade Unions) और व्यापार यूनियनों (Business Unions) से भी अपील की गई है कि वे इस विरोध में शामिल होकर इस डील का पुरजोर विरोध करें।
मौसम में आए अचानक बदलाव से फसलों को हुए नुकसान का जिक्र करते हुए पंधेर ने कहा कि किसानों को हुए भारी नुकसान की भरपाई करना अब सरकारों की जिम्मेदारी है। उन्होंने मांग की कि नुकसान का सही आकलन कर किसानों को यथाशीघ्र मुआवजा प्रदान किया जाए ताकि वे अपनी आजीविका को संभाल सकें।
किसानों के इस विरोध से साफ है कि अमेरिका और भारत के बीच संभावित कृषि समझौते को लेकर गहरी नाराजगी है और आने वाले दिनों में यह आंदोलन और तेज हो सकता है।








