नई दिल्ली, 06 अगस्त (The News Air): देश भर की जेलों में कैदियों की भीड़ बढ़ती जा रही है, जिसके चलते उनके मानवाधिकारों का हनन हो रहा है। केंद्र सरकार के पास जेलों में रह रहे कैदियों से संबंधित संपूर्ण आंकड़े भी मौजूद नहीं हैं। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह द्वारा मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में देश भर की जेलों के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में केंद्रीय गृह मंत्रालय से मिले आंकड़े चिंताजनक स्थिति बयां कर रहे हैं। केंद्र से मिले जवाब के मुताबिक, देश भर की जेलों मे क्षमता से 31.4 फीसद अधिक कैदी रह रहे हैं। देश की जेलों में 436266 कैदियों को रखने की क्षमता है, लेकिन वर्तमान में 573220 कैदी बंद हैं। इसमें उत्तर प्रदेश की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक है। यूपी की जेलों में 67600 कैदी रखने की क्षमता हैं, लेकिन 121609 कैदी रह रहे हैं। यानि यूपी में कैदियों की संख्या जेलों की क्षमता से 79.9 फीसद अधिक है।
संसद के मॉनसून सत्र में ‘‘आप’’ सांसद ‘संजय सिंह’ द्वारा देश में जेलों की स्थिति के संबंध में पूछे गए अतारांकिक प्रश्न संख्या 1032 का जवाब केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दिया है। केंद्रीय गृहमंत्रालय के जवाब में देश की जेलों की गंभीर स्थिति उजागर हुई है। देश की जेलें अपनी क्षमता से 31.4 फीसद अधिक कैदियों से भरी हुई हैं, जो न केवल मानव अधिकार का उल्लंघन है, बल्कि न्याय के सुधार गृह सिद्धांत के आइने पर एक गंभीर प्रहार है। सांसद संजय सिंह द्वारा देश में जेलों की निर्धारित क्षमता और कुल कैदियों की संख्या के संबंध में पूछे गए प्रश्न पर केंद्र सरकार ने जवाब दिया है कि देश में जेलों की क्षमता 436266 कैदियों की है, जबकि वर्तमान में 573220 कैदी बंद हैं। वही, देश के सबसे बड़े राज्यों में से एक उत्तर प्रदेश में तो स्थिति और भी गंभीर है। 67,600 की क्षमता वाली जेलों में 1,21,609 कैदी हैं, जो की अपनी क्षमता से 79.9 फीसद अधिक है। ये भी एक चिंताजनक विषय है।
वही 2018-22 के बीच मात्र 68 नए जेल बनाए गए, जबकि इसी अवधि के दौरान देश में कैदियों की सख्या में 106418 की वृद्धि हुई। जेलों में अव्यवस्थाओं के कारण हुई मौत के संबंध में पूछे गए ‘‘आप’’ सांसद के प्रश्न पर सरकार ने जवाब दिया है कि जेलों में हुई हिंसा के कारण होने वाली मौतों के बारे में कोई विशिष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है। सरकार द्वारा आंकड़ों पर हमेशा से हीं गैर जिम्मेदारी दिखाई गई है। सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़े भी साल 2022 के हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि जेल के आंकड़ों को अपडेट करने में देरी हो रही है। अकेले 2022 में ही देश की जेलों में 159 अप्रकृतिक मौते हुई, जो कि चिंता का विषय है।








