संपत्तियों और मंदिरों के प्रबंधन में कोई रुचि या हिस्सेदारी नहीं
पीठ ने कहा, “याचिकाकर्ता का दावा है कि महंत माधव दासजी द्वारा प्रबंधक नियुक्त किए जाने के बाद से वह 21 जून 2010 से दोनों मंदिरों के मामलों का प्रबंधन कर रहा है। यह दावा किया गया है कि प्रतिवादी (जो मंदिरों की संपत्तियों से अपरिचित है) व्यस्त व्यक्ति है जिसकी संपत्तियों और मंदिरों के प्रबंधन में कोई रुचि या हिस्सेदारी नहीं है।”
दोनों मंदिरों और संपत्तियों जिला मजिस्ट्रेट के अधीन
न्यायालय ने अपने फैसले में कहा, “दोनों पक्षों द्वारा किए गए दावों को ध्यान में रखते हुए यह उचित होगा कि उक्त दोनों मंदिरों और उनसे जुड़ी संपत्तियों को अनंतनाग के उपायुक्त (जिला मजिस्ट्रेट) के प्रबंधन के अधीन रखा जाए।” पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता के साथ-साथ प्रतिवादी सिविल अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखने के लिए स्वतंत्र हैं।








