गुरूवार, 5 मार्च 2026
The News Air
No Result
View All Result
  • होम
  • राष्ट्रीय
  • पंजाब
  • राज्य
    • हरियाणा
    • चंडीगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • राजस्थान
  • अंतरराष्ट्रीय
  • सियासत
  • नौकरी
  • LIVE
  • बिज़नेस
  • काम की बातें
  • स्पेशल स्टोरी
  • टेक्नोलॉजी
  • खेल
  • लाइफस्टाइल
    • हेल्थ
    • धर्म
    • मनोरंजन
  • WEB STORIES
  • होम
  • राष्ट्रीय
  • पंजाब
  • राज्य
    • हरियाणा
    • चंडीगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • राजस्थान
  • अंतरराष्ट्रीय
  • सियासत
  • नौकरी
  • LIVE
  • बिज़नेस
  • काम की बातें
  • स्पेशल स्टोरी
  • टेक्नोलॉजी
  • खेल
  • लाइफस्टाइल
    • हेल्थ
    • धर्म
    • मनोरंजन
  • WEB STORIES
No Result
View All Result
The News Air
No Result
View All Result
Home Breaking News

India Action on Pakistan: बूंद-बूंद को तरसेगा पाक! Wullar Barrage से भारत की नई चाल

सिंधु जल संधि निलंबन के बाद चार दशक से रुकी वूलर बैराज परियोजना फिर शुरू, झेलम के पानी पर भारत की मजबूत पकड़

अभिनव कश्यप by अभिनव कश्यप
रविवार, 15 फ़रवरी 2026
A A
0
India Action on Pakistan
104
SHARES
695
VIEWS
ShareShareShareShareShare
Google News
WhatsApp
Telegram

Wullar Barrage Project : ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव अब सिर्फ सीमा पर गोलीबारी या बयानबाजी तक सीमित नहीं रह गया है। इस बार असर सीधे पानी पर दिखने लगा है। केंद्र सरकार ने दशकों पुरानी सिंधु जल संधि को निलंबित करने का ऐतिहासिक फैसला लिया और साफ शब्दों में कहा कि यह समझौता शांति के दौर के लिए था। जब शांति ही नहीं है, तो संधि की समीक्षा क्यों नहीं होनी चाहिए? इसी बदलते समीकरण के बीच जम्मू-कश्मीर से एक बड़ी खबर सामने आई है जो पाकिस्तान के लिए चिंता की घंटी बन सकती है।

चार दशक से बंद पड़ी वूलर बैराज परियोजना, जिसे तुलबुल नेविगेशन प्रोजेक्ट भी कहा जाता है, अब दोबारा शुरू होने जा रही है। यह वही परियोजना है जो झेलम नदी के जल प्रवाह को नियंत्रित करने और सर्दियों में पानी के स्तर को स्थिर रखने के लिए डिजाइन की गई थी। लेकिन 1980 के दशक में पाकिस्तान की आपत्तियों और सिंधु जल संधि के प्रावधानों के चलते इसे रोक दिया गया था। अब जब संधि निलंबित हो चुकी है, तो भारत ने इस रणनीतिक परियोजना को फिर से शुरू करने का फैसला किया है।

वूलर झील: एशिया का मीठे पानी का खजाना

वूलर झील एशिया की सबसे बड़ी मीठे पानी की झीलों में से एक है। इसकी खासियत यह है कि इसका क्षेत्रफल मौसम के अनुसार बदलता रहता है। कभी यह 20 वर्ग किलोमीटर तक सिकुड़ जाती है, तो कभी 190 वर्ग किलोमीटर तक फैल जाती है। यह झील जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा जिले में स्थित है और झेलम नदी इसी से होकर गुजरती है।

सर्दियों के महीनों में जब झेलम का प्रवाह घटता है, तो झील का आकार भी सिकुड़ जाता है। इसका सीधा असर पड़ता है बांदीपोरा और सोपोर के उन हजारों परिवारों पर जो मछली पकड़ने, सिंघाड़ा और कमल ककड़ी जैसे पारंपरिक व्यवसायों पर निर्भर हैं। जब झील का जल स्तर गिरता है, तो इन परिवारों की आजीविका पर सीधा असर पड़ता है।

तुलबुल परियोजना: समाधान और रणनीति का मिश्रण

अगर तुलबुल यानी वूलर बैराज परियोजना दोबारा शुरू होती है, तो झेलम के पानी को एक नियंत्रित स्तर तक रोका जा सकेगा। इससे न सिर्फ सर्दियों में जल स्तर स्थिर रहेगा, बल्कि नौवहन, सिंचाई और पर्यावरणीय संतुलन को भी बड़ा फायदा होगा। स्थानीय लोगों की आजीविका सुरक्षित होगी और झील का इको सिस्टम भी बेहतर तरीके से काम करेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि नियंत्रित जल प्रवाह से बाढ़ प्रबंधन में भी काफी मदद मिल सकती है। बरसात के समय जब अतिरिक्त पानी आता है, तो उसे बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सकेगा। इससे डाउनस्ट्रीम इलाकों में बाढ़ का खतरा कम होगा और जल संसाधनों का अधिकतम उपयोग संभव हो सकेगा।

उमर अब्दुल्ला का बड़ा ऐलान

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में साफ किया है कि राज्य सरकार दो बड़ी जल परियोजनाओं पर तेजी से काम कर रही है। पहली है अखनूर क्षेत्र में चेनाब नदी से जम्मू शहर तक जल आपूर्ति की नई योजना, जिससे बढ़ती आबादी को स्थाई पेयजल उपलब्ध कराया जा सके।

दूसरी और सबसे महत्वपूर्ण है झेलम पर तुलबुल परियोजना, जो दशकों से अटकी हुई थी। उमर अब्दुल्ला ने इस परियोजना को पुनर्जीवित करने की जोरदार वकालत की है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना क्षेत्र की जल सुरक्षा, नौवहन और बिजली उत्पादन के लिए बेहद जरूरी है, खासकर सर्दियों के महीनों में जब पानी की कमी होती है।

परियोजना का इतिहास: 1984 से 2026 तक का सफर

वूलर बैराज परियोजना का इतिहास काफी पुराना और उतार-चढ़ाव भरा है। इस परियोजना पर काम पहली बार 1984 में शुरू हुआ था। उस समय इसका उद्देश्य झेलम नदी पर एक बैराज बनाना था जो जल स्तर को नियंत्रित कर सके और नौवहन को साल भर संभव बना सके।

लेकिन 1989 में पाकिस्तान की तीखी आपत्तियों और कश्मीर में बढ़ती आतंकवादी गतिविधियों के कारण काम रोक दिया गया। पाकिस्तान का तर्क था कि यह परियोजना सिंधु जल संधि का उल्लंघन है क्योंकि यह भारत को झेलम के प्रवाह पर नियंत्रण देती है, जिससे डाउनस्ट्रीम में पाकिस्तान को बाढ़ या सूखे का खतरा हो सकता है।

2010 में एक बार फिर इस परियोजना को शुरू करने की कोशिश की गई, लेकिन 2012 में परियोजना स्थल पर एक आतंकवादी हमले के बाद निर्माण फिर से रोक दिया गया। तब से यह परियोजना ठंडे बस्ते में पड़ी रही। अब 2026 में, सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद, इसे दोबारा शुरू करने का निर्णय लिया गया है।

एशियाई विकास बैंक से फंडिंग की तैयारी

सूत्रों के अनुसार, इस प्रोजेक्ट के लिए पहले एशियाई विकास बैंक (ADB) से फंडिंग की प्रक्रिया भी शुरू हुई थी। लेकिन राजनीतिक और कूटनीतिक कारणों से काम आगे नहीं बढ़ पाया। अब जब सिंधु जल संधि निलंबित है और भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखेगा, तो केंद्र और प्रदेश सरकार के बीच समन्वय तेज हो गया है।

यह भी पढे़ं 👇

Aaj Ka Rashifal 5 March 2026

Aaj Ka Rashifal 5 March 2026: गुरुवार को किन राशियों पर बरसेगा धन?

गुरूवार, 5 मार्च 2026
Trump Iran War Crisis

Trump Iran War Crisis: व्हाइट हाउस में हड़कंप, सेनेटर्स बोले ‘कोई प्लान ही नहीं!’

बुधवार, 4 मार्च 2026
Cockroaches in Coffee

Cockroaches in Coffee: क्या सच में कॉफी में होते हैं कॉकरोच?

बुधवार, 4 मार्च 2026
Mojtaba Khamenei Iran New Supreme Leader

Mojtaba Khamenei Iran New Supreme Leader : अरबों के मालिक हैं ईरान के नए सुप्रीम लीडर

बुधवार, 4 मार्च 2026

दोनों सरकारें संयुक्त रूप से इस परियोजना को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं। तकनीकी सर्वेक्षण, पर्यावरणीय मूल्यांकन और वित्तीय योजना पर काम तेजी से चल रहा है। अगले कुछ महीनों में निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है।

पाकिस्तान की बौखलाहट और युद्ध की धमकी

सिंधु जल संधि के निलंबन और वूलर बैराज परियोजना की घोषणा पर पाकिस्तान पूरी तरह से बौखला गया है। इस्लामाबाद की ओर से कहा गया है कि अगर भारत पानी रोकता है, तो इसे युद्ध जैसा कदम माना जाएगा। पाकिस्तानी नेताओं और मीडिया ने इसे भारत की “जल आतंकवाद” की रणनीति करार दिया है।

लेकिन नई दिल्ली का रुख बिल्कुल साफ और मजबूत है। भारत सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने हिस्से के पानी के उपयोग का पूरा अधिकार रखता है और राष्ट्रीय हित सर्वोपरि है। विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि भारत सिंधु जल संधि के तहत अपने वैध अधिकारों का उपयोग कर रहा है और किसी भी तरह की धमकी से डरने वाला नहीं है।

सिंधु जल संधि: क्या हैं भारत के अधिकार?

सिंधु जल संधि 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई थी। इस संधि के तहत छह नदियों – सिंधु, झेलम, चेनाब, रावी, ब्यास और सतलुज – के पानी का बंटवारा किया गया था। भारत को पूर्वी नदियों यानी रावी, ब्यास और सतलुज पर पूरा अधिकार दिया गया। जबकि पश्चिमी नदियों – सिंधु, झेलम और चेनाब – का अधिकांश पानी पाकिस्तान को मिलता है।

हालांकि, भारत को पश्चिमी नदियों पर सीमित उपयोग की अनुमति है। इसमें नौवहन, सिंचाई और जल विद्युत परियोजनाएं शामिल हैं, बशर्ते वे पाकिस्तान के डाउनस्ट्रीम उपयोग को नुकसान न पहुंचाएं। अब जब हालात बदल चुके हैं और आतंकवाद का खतरा बना हुआ है, तो भारत ने अपने वैध अधिकारों के दायरे में रहते हुए परियोजनाओं को तेजी देने का संकेत दिया है।

स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा बूस्ट

वूलर बैराज परियोजना का सवाल सिर्फ कूटनीति या रणनीति का नहीं है। यह स्थानीय अर्थव्यवस्था और जल प्रबंधन का भी महत्वपूर्ण मुद्दा है। अगर यह बैराज बनता है, तो वूलर झील का इको सिस्टम स्थिर हो सकता है। झील में साल भर पानी का स्तर बना रहेगा, जिससे मछली पालन और अन्य जल आधारित व्यवसाय फलेंगे-फूलेंगे।

बांदीपोरा और सोपोर के हजारों परिवार जो मछली पकड़ने, सिंघाड़ा उगाने और कमल ककड़ी की खेती पर निर्भर हैं, उन्हें साल भर रोजगार मिल सकेगा। इससे स्थानीय लोगों की आमदनी में काफी सुधार होगा और क्षेत्र का आर्थिक विकास तेज होगा। पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा क्योंकि वूलर झील एक खूबसूरत पर्यटन स्थल है।

रणनीतिक महत्व: पानी नई कूटनीतिक भाषा

रणनीतिक दृष्टि से भी यह परियोजना भारत को एक मजबूत स्थिति देती है। झेलम नदी के प्रवाह पर नियंत्रण का मतलब है कि भारत पाकिस्तान को जल कूटनीति के माध्यम से दबाव में रख सकता है। यह कोई आक्रामक कदम नहीं है, बल्कि अपने वैध अधिकारों का उपयोग है।

विशेषज्ञों का मानना है कि 21वीं सदी में पानी नई कूटनीतिक भाषा बनने जा रहा है। जलवायु परिवर्तन के दौर में जल संसाधनों का महत्व और भी बढ़ गया है। जो देश अपने जल संसाधनों को बेहतर तरीके से मैनेज करेगा, वह क्षेत्रीय राजनीति में मजबूत स्थिति में होगा।

पर्यावरणीय लाभ भी महत्वपूर्ण

वूलर बैराज से पर्यावरणीय लाभ भी होंगे। झील का इको सिस्टम स्थिर होगा, जिससे जलीय जीवन और पक्षियों की विविधता बढ़ेगी। वूलर झील प्रवासी पक्षियों के लिए एक महत्वपूर्ण स्थल है। हर साल हजारों पक्षी यहां आते हैं। अगर जल स्तर स्थिर रहेगा, तो इन पक्षियों के लिए बेहतर आवास मिलेगा।

इसके अलावा, बाढ़ नियंत्रण से डाउनस्ट्रीम इलाकों में रहने वाले लोगों को भी फायदा होगा। हर साल बरसात के मौसम में झेलम नदी में बाढ़ आती है, जिससे श्रीनगर और अन्य इलाकों में भारी नुकसान होता है। बैराज के जरिए पानी के प्रवाह को नियंत्रित किया जा सकेगा, जिससे बाढ़ का खतरा कम होगा।

क्या है आगे का रोडमैप?

आने वाले दिनों में केंद्र और जम्मू-कश्मीर सरकार की संयुक्त पहल इस परियोजना को जमीन पर उतारने का काम करेगी। तकनीकी सर्वेक्षण पूरा होने के बाद निर्माण कार्य शुरू होगा। पर्यावरणीय मंजूरी और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं भी तेजी से पूरी की जा रही हैं।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस बार किसी भी तरह की बाधा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा ताकि 2012 जैसी आतंकवादी घटना दोबारा न हो। स्थानीय लोगों को भी परियोजना में शामिल किया जाएगा ताकि उन्हें रोजगार मिले और वे इसके मालिक बनें।

पानी की राजनीति: दक्षिण एशिया का नया मोर्चा

फिलहाल इतना तय है कि झेलम का पानी अब सिर्फ नदी का प्रवाह नहीं रह गया है। यह दक्षिण एशिया की राजनीति की धारा भी तय कर सकता है। भारत ने साफ संकेत दे दिया है कि अगर पाकिस्तान आतंकवाद का समर्थन करता रहेगा, तो भारत अपने सभी विकल्पों का उपयोग करेगा – चाहे वह सैन्य हो या जल कूटनीति।

वूलर बैराज परियोजना सिर्फ एक विकास परियोजना नहीं है। यह एक बड़ा रणनीतिक संदेश है कि भारत अब पुरानी नीतियों से बंधा नहीं रहेगा। राष्ट्रीय हित सर्वोपरि है और उसके लिए हर जरूरी कदम उठाया जाएगा। पाकिस्तान को यह समझना होगा कि अगर वह आतंकवाद का रास्ता नहीं छोड़ता, तो उसे पानी की हर बूंद के लिए तरसना पड़ सकता है।

मुख्य बातें (Key Points)
  • सिंधु जल संधि निलंबन के बाद चार दशक से रुकी वूलर बैराज परियोजना फिर शुरू होगी
  • यह परियोजना झेलम नदी के प्रवाह को नियंत्रित करेगी और वूलर झील का जल स्तर स्थिर रखेगी
  • 1984 में शुरू हुई यह परियोजना पाकिस्तान की आपत्तियों और आतंकवाद के कारण 1989 और 2012 में रुकी थी
  • मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में इस परियोजना को पुनर्जीवित करने की घोषणा की
  • स्थानीय अर्थव्यवस्था को बड़ा बूस्ट मिलेगा, हजारों परिवारों को रोजगार मिलेगा
  • पाकिस्तान ने इसे युद्ध जैसा कदम बताया, लेकिन भारत ने राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखा
  • यह परियोजना भारत को रणनीतिक और कूटनीतिक रूप से मजबूत स्थिति देगी
Previous Post

Diabetes Control: जानें शुगर के लक्षण, Diet Tips और कैसे करें परहेज

Next Post

BJP को बड़ा झटका: प्रदेश उपप्रधान Arvind Khanna ने छोड़ी पार्टी, Akali Dal में हुए शामिल

अभिनव कश्यप

अभिनव कश्यप

अभिनव कश्यप 'The News Air' के संस्थापक और मुख्य संपादक (Chief Editor) हैं। डिजिटल मीडिया में उनके अनुभव में ग्राउंड रिपोर्टिंग, न्यूज़ डेस्क ऑपरेशन और एडिटोरियल लीडरशिप शामिल है। वे हर खबर की फैक्ट-चेकिंग और संपादन की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करते हैं। राजनीति, चुनाव विश्लेषण, सामाजिक मुद्दे और डिजिटल मीडिया ट्रेंड्स उनकी विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र हैं। अभिनव का संपादकीय सिद्धांत है "सनसनी नहीं, सच्चाई; तेज़ी नहीं, तथ्य।"

Related Posts

Aaj Ka Rashifal 5 March 2026

Aaj Ka Rashifal 5 March 2026: गुरुवार को किन राशियों पर बरसेगा धन?

गुरूवार, 5 मार्च 2026
Trump Iran War Crisis

Trump Iran War Crisis: व्हाइट हाउस में हड़कंप, सेनेटर्स बोले ‘कोई प्लान ही नहीं!’

बुधवार, 4 मार्च 2026
Cockroaches in Coffee

Cockroaches in Coffee: क्या सच में कॉफी में होते हैं कॉकरोच?

बुधवार, 4 मार्च 2026
Mojtaba Khamenei Iran New Supreme Leader

Mojtaba Khamenei Iran New Supreme Leader : अरबों के मालिक हैं ईरान के नए सुप्रीम लीडर

बुधवार, 4 मार्च 2026
Bihar Board 12th Result 2026

Bihar Board 12th Result 2026: मार्च के अंत तक आ सकता है रिजल्ट!

बुधवार, 4 मार्च 2026
Trump

US Iran War: ईरान के बाद Trump का Ecuador में नया ऑपरेशन शुरू!

बुधवार, 4 मार्च 2026
Next Post
Arvind Khanna

BJP को बड़ा झटका: प्रदेश उपप्रधान Arvind Khanna ने छोड़ी पार्टी, Akali Dal में हुए शामिल

Punjab Border Farming Victory 2026

CM Bhagwant Mann अचानक Fortis Hospital पहुंचे: BP बढ़ने से हुए भर्ती, सुरक्षा बढ़ाई गई

0 0 votes
Rating
Subscribe
Notify of
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments
The News Air

© 2026 The News Air | सटीक समाचार। सर्वाधिकार सुरक्षित।

GN Follow us on Google News

  • About
  • Editorial Policy
  • Privacy & Policy
  • Disclaimer & DMCA Policy
  • Contact

हमें फॉलो करें

No Result
View All Result
  • प्रमुख समाचार
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • सियासत
  • राज्य
    • पंजाब
    • चंडीगढ़
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • महाराष्ट्र
    • पश्चिम बंगाल
    • उत्तर प्रदेश
    • बिहार
    • उत्तराखंड
    • मध्य प्रदेश
    • राजस्थान
  • काम की बातें
  • नौकरी
  • बिज़नेस
  • टेक्नोलॉजी
  • मनोरंजन
  • धर्म
  • हेल्थ
  • स्पेशल स्टोरी
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
  • WEB STORIES

© 2026 The News Air | सटीक समाचार। सर्वाधिकार सुरक्षित।