World News 21 March 2026: मध्य पूर्व की जंग अब अपने 22वें दिन में दाखिल हो चुकी है और इसका दायरा हर गुजरते दिन के साथ खतरनाक रूप से बढ़ता जा रहा है। ईरान ने वैश्विक हमले की खुली चेतावनी देते हुए कह दिया है कि उसके दुश्मन दुनिया में कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं। ईरान ने हिंद महासागर में अमेरिका और ब्रिटेन के सैन्य अड्डे डिएगो गार्सिया पर भी मिसाइलें दागी हैं। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बैकफुट पर आ गए हैं। उन्होंने ईरानी तेल पर से प्रतिबंध हटाने का बड़ा यू-टर्न लिया और कहा कि अमेरिका अब मध्य पूर्व में अपने सैन्य अभियानों को धीरे-धीरे कम करने पर विचार कर रहा है।
ईरान की 70वीं हमले की लहर: 55 से ज्यादा ठिकाने तबाह
World News 21 March 2026 की सबसे बड़ी खबर मध्य पूर्व के युद्ध से जुड़ी है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बताया कि उन्होंने अमेरिकी और इजराइली हितों के खिलाफ हमलों की अपनी 70वीं लहर में मध्य पूर्व में 55 से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया है।
ईरान ने इजराइल के रिहाइशी और रणनीतिक इलाकों पर मिसाइलों की नई झड़ी लगा दी है। बीती रात इजराइल की राजधानी तेल अवीव और कब्जे वाले वेस्ट बैंक पर दर्जनों ईरानी मिसाइलें देखी गईं, जिससे पूरे क्षेत्र में सायरन गूंज उठे। यही नहीं, तेहरान ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के शहर रास अल खैमा को भी सीधे तौर पर निशाना बनाने की चेतावनी दी है।
Diego Garcia पर मिसाइल हमला: ईरान ने दिखाई ताकत
ईरान ने अब हिंद महासागर में मौजूद अमेरिका और ब्रिटेन के रणनीतिक सैन्य अड्डे डिएगो गार्सिया पर दो मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि दोनों मिसाइलें अपने लक्ष्य तक पहुंचने में विफल रहीं, लेकिन इतना साफ हो गया कि ईरान केवल धमकी नहीं दे रहा। वो जो कह रहा है, उसे करने का माद्दा भी रखता है।
ईरान का आरोप है कि खाड़ी में स्थित उसके रणनीतिक द्वीपों जैसे अबू मूसा और खार्ग द्वीप पर होने वाले हमलों के लिए UAE की जमीन का इस्तेमाल किया जा रहा है। ईरान ने चेतावनी देते हुए कहा है कि “अब से हमारे पास आपके बारे में जो भी जानकारी है, उसके आधार पर दुनिया में कहीं भी पार्क, मनोरंजन क्षेत्र और पर्यटन स्थल भी आपके लिए सुरक्षित नहीं रहेंगे।” यह बयान इस बात का संकेत है कि जंग का दायरा अब खाड़ी क्षेत्र से बहुत आगे बढ़ सकता है।
ईरान के विदेश मंत्री की ब्रिटेन को सीधी चेतावनी
इससे पहले ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराची ने ब्रिटेन को कड़ी चेतावनी दी थी। अराची ने कहा कि ब्रिटेन की ज्यादातर जनता ईरान के खिलाफ इजराइल और अमेरिका के इस युद्ध में किसी भी तरह से शामिल नहीं होना चाहती। अपनी ही जनता की अनदेखी करते हुए ब्रिटेन के सैन्य ठिकानों को ईरान के खिलाफ आक्रामकता के लिए इस्तेमाल करने की इजाजत देकर प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ब्रिटिश नागरिकों की जान खतरे में डाल रहे हैं।
ब्रिटेन ने पहले अमेरिका को अपने सैन्य बेस का इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं दी थी, लेकिन बाद में अमेरिकी दबाव में स्टार्मर झुक गए। इसके जवाब में ईरान ने भी ब्रिटिश ठिकानों पर कार्रवाई शुरू कर दी है।
Trump का बड़ा U-Turn: ईरानी तेल पर से हटाए प्रतिबंध, सैन्य अभियान घटाने पर विचार
World News 21 March 2026 में सबसे चौंकाने वाला घटनाक्रम यह रहा कि ईरान की ताकत के सामने अमेरिका भी बैकफुट पर नजर आया। ट्रंप प्रशासन ने एक बड़ा यू-टर्न लेते हुए घोषणा की कि ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों में 30 दिनों की छूट दी जा रही है। हालांकि यह छूट केवल उस तेल पर लागू होगी जो पहले से समुद्र में मौजूद है, नई खरीद या उत्पादन की इजाजत नहीं है।
दरअसल होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरानी हमलों ने दुनिया भर की ऊर्जा सप्लाई को बाधित कर दिया है। पूरी दुनिया में तेल की कीमतें उछाल मार रही हैं और महंगाई बढ़ गई है। भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है क्योंकि तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर पेट्रोल-डीजल और रोजमर्रा की चीजों पर पड़ता है।
Trump बोले: 4-6 हफ्तों में खत्म होगा युद्ध, ईरान ने दी वियतनाम की याद
राष्ट्रपति ट्रंप ने इस युद्ध की टाइमलाइन भी बता दी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका मध्य पूर्व में अपने सैन्य उद्देश्यों को प्राप्त करने के बेहद करीब पहुंच चुका है और ईरान के साथ चल रहा युद्ध अगले चार से छह हफ्तों में खत्म हो सकता है। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान की सैन्य क्षमता को काफी नुकसान पहुंचाया है और उसके परमाणु कार्यक्रम को भी कमजोर किया है।
लेकिन ईरानी विदेश मंत्री अराची ने ट्रंप के इन दावों की सारी हवा निकाल दी। उन्होंने कहा कि जिस तरह वियतनाम युद्ध के दौरान अमेरिकी नेतृत्व जमीन की हकीकत से अलग बयान देता था, वैसी ही स्थिति आज ईरान को लेकर भी दिख रही है। गौरतलब है कि वियतनाम युद्ध में अमेरिका के 58,000 से ज्यादा सैनिक मारे गए थे और कुल मिलाकर करीब 30 लाख लोगों की जान गई थी। अराची ने साफ कर दिया कि ईरान में भी अमेरिका की हालत वियतनाम जैसी ही होगी।
ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई का बड़ा दावा: अमेरिका-इजराइल पर जीत हासिल
ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई ने अमेरिका और इजराइल को आईना दिखाते हुए कहा कि ईरान ने अमेरिका और इजराइल पर जीत हासिल कर ली है। खामेनेई ने कहा कि देश के अंदर अलग-अलग विचारों के बावजूद लोगों की एकता से दुश्मन कमजोर पड़ा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजराइल को लगा था कि बड़े नेताओं को मारकर सरकार गिरा देंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
UN भी एक्शन में: होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने की पहल
ऊर्जा संकट को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र भी अब मैदान में उतर आया है। यूएन महासचिव एंटोनियो गुटरेस ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने में मदद करने के लिए तैयार है। गुटरेस ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र खाड़ी देशों और यूरोपीय परिषद से भी मौजूदा स्थिति पर बातचीत कर रहा है।
इसके बाद दक्षिण कोरिया ने भी घोषणा की कि वह ऊर्जा बाजारों को स्थिर करने की कोशिश में होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षा बहाल करने की मांग करने वाले कई यूरोपीय देशों और जापान के समूह में शामिल हो रहा है। इस बीच ईरान ने जापान को बड़ी राहत देते हुए कहा कि जापान के जहाज होर्मुज से गुजर सकते हैं।
NATO पर भड़के Trump: कहा अमेरिका के बिना कागजी शेर है NATO
World News 21 March 2026 का एक और बड़ा घटनाक्रम अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों के बीच बढ़ती दरार से जुड़ा है। राष्ट्रपति ट्रंप ने नाटो (NATO) पर भड़कते हुए कहा कि अमेरिका के बिना नाटो एक “कागजी शेर” है।
ट्रंप ने कहा कि नाटो के सदस्य परमाणु शक्ति संपन्न ईरान को रोकने की लड़ाई में शामिल नहीं होना चाहते थे। अब जब वह लड़ाई सैन्य रूप से जीत ली गई है तो वे तेल की ऊंची कीमतों की शिकायत कर रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि वे होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने में मदद नहीं करना चाहते, जो कि एक साधारण सैन्य कदम है। ट्रंप ने नाटो देशों को “कायर” तक कहा और धमकी दी कि “हम यह बात याद रखेंगे।”
यूरोप की सुरक्षा पर मंडराया खतरा: जर्मनी से Patriot मिसाइलें मध्य पूर्व भेजीं
ट्रंप के फैसलों का सबसे बड़ा असर यूरोप की सुरक्षा पर पड़ रहा है। अमेरिका ने ईरान युद्ध के बीच जर्मनी से दो पैट्रियट मिसाइल सिस्टम तुर्की के इंसर्लिक एयरबेस भेजे हैं। जिससे यूरोप में रूस के खिलाफ वायु सुरक्षा कमजोर होने का खतरा बढ़ गया है।
यूक्रेन युद्ध ने दिखाया था कि पैट्रियट सिस्टम हाइपरसोनिक और अन्य उच्च तकनीकी मिसाइलों के खिलाफ कितने प्रभावी हैं। ऐसे में अमेरिका का ये मिसाइल सिस्टम मध्य पूर्व भेजना यूरोप के लिए चिंता का बड़ा कारण है।
ट्रंप ने बीते दिनों में नाटो सहयोगियों के खिलाफ ही मोर्चा खोला हुआ है। उन्होंने डेनमार्क के स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड पर कब्जे की धमकी दी। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को सीधी धमकी दी कि “आप ज्यादा दिनों तक कुर्सी पर नहीं टिक पाएंगे।” ऐसे में फ्रांस ने अपनी नीतियों में बदलाव करते हुए साफ कर दिया है कि अब यूरोप को अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद उठानी होगी और उसने अपने परमाणु कार्यक्रम में विस्तार का ऐलान भी कर दिया है।
क्यूबा ने अमेरिका को दिखाई आंख: दूतावास का डीजल भी रोका
World News 21 March 2026 में क्यूबा का अमेरिका के खिलाफ सख्त रुख भी बड़ी खबर बना। ट्रंप खुलेआम कह रहे हैं कि बहुत जल्दी क्यूबा पर अमेरिका का कब्जा होगा, चाहे “फ्रेंडली टेकओवर” हो या जबरन। लेकिन क्यूबा ने साफ कर दिया है कि अमेरिका की मनमानी नहीं चलेगी।
क्यूबा के राष्ट्रपति मिगेल डियाज-कैनल ने कहा कि अमेरिका के क्रमिक प्रशासनों ने छह दशकों से ज्यादा समय से क्यूबा को अलग-थलग करने की कोशिश की है। अब वो आर्थिक कमजोरी को क्यूबा पर कब्जा करने के लिए एक बहाने के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। लेकिन सबसे खराब हालात में भी एक बात तय है कि क्यूबा में किसी भी बाहरी हमलावर को अटूट प्रतिरोध का सामना करना पड़ेगा।
क्यूबा ने सबसे पहले उन खबरों को खारिज किया जिनमें कहा जा रहा था कि हवाना अपने राष्ट्रपति के भविष्य को लेकर अमेरिका से बातचीत कर रहा है। उप विदेश मंत्री कार्लोस फर्नांडिस डी कोसियो ने साफ कहा कि क्यूबा की राजनीतिक व्यवस्था बातचीत के लिए नहीं है और ना ही राष्ट्रपति का पद अमेरिका के साथ बातचीत के अधीन है। सरकार में फेरबदल पर कोई चर्चा नहीं होगी। दरअसल न्यूयॉर्क टाइम्स ने दावा किया था कि ट्रंप डियाज-कैनल को पद से हटाने के लिए दबाव डाल रहे हैं।
इतना ही नहीं, क्यूबा ने हवाना स्थित अमेरिकी दूतावास की डीजल आयात करने की अपील भी ठुकरा दी। दूतावास अपने जनरेटर के लिए डीजल इंपोर्ट करना चाहता था क्योंकि क्यूबा में लंबे समय से जारी बिजली कटौती से दूतावास का काम बुरी तरह प्रभावित हो रहा था। इसके बाद अमेरिका अपने कर्मचारियों की संख्या में कटौती पर विचार करने को मजबूर हो गया है।
पाकिस्तान में भीतरी टकराव: सेना और ISI में भारी दरार
World News 21 March 2026 में पाकिस्तान से भी बड़ी खबर आई है। पाकिस्तान के दो सबसे ताकतवर पावर सेंटर यानी सेना और आईएसआई (ISI) के बीच टकराव अब चरम पर पहुंच गया है। पाकिस्तानी सेना ने आतंकवादी घटनाओं का ठीकरा ISI पर फोड़ते हुए इसे खुफिया तंत्र की विफलता करार दिया है, जबकि ISI ने इसे मानने से इंकार कर दिया है।
इस बीच चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने ISI के साथ बैठक में वरिष्ठ खुफिया अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी है। कहा जा रहा है कि मुनीर ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तानी सेना की करारी हार से बेहद नाराज हैं। उन्होंने ISI को धमकी देते हुए कहा कि अपने प्रदर्शन में सुधार करें, नहीं तो गंभीर नतीजे भुगतने होंगे।
मुनीर की इस चेतावनी से ISI के अंदर बेचैनी बढ़ गई है। पाकिस्तान के सैन्य और खुफिया नेतृत्व में फेरबदल की अटकलें भी तेज हो गई हैं और कई वरिष्ठ अधिकारियों की नौकरी पर तलवार लटक रही है। पाकिस्तान इस वक्त कई मोर्चों पर बुरी तरह घिरा हुआ है। भारत-पाकिस्तान सीमा पर तनाव बरकरार है तो पश्चिमी सीमा पर अफगानिस्तान के साथ टकराव ने युद्ध का रूप ले लिया था। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब आंतरिक स्थिरता ही नहीं रहेगी तो पाकिस्तान बाहरी चुनौतियों का सामना कैसे करेगा।
60 साल में पहली बार अल अक्सा मस्जिद ईद पर बंद: मध्य पूर्व में सन्नाटा
इस युद्ध का सबसे दिल दहलाने वाला असर ईद के मौके पर दिखा। 60 साल में पहली बार यरूशलम में अल अक्सा मस्जिद ईद पर बंद रही। ईरान में बाजार सूने पड़े रहे। UAE, कतर और कुवैत में खुले मैदान में नमाज पर रोक लगा दी गई। युद्ध ने करोड़ों मुसलमानों की ईद की खुशियां छीन लीं।
भारत ने अफगानिस्तान को भेजी मदद: ढाई टन दवाइयां और मेडिकल उपकरण
भारत ने अफगानिस्तान की तरफ मदद का हाथ बढ़ाया है। काबुल में ढाई टन दवाइयों और मेडिकल उपकरणों की खेप भेजी गई है। यह कदम ऐसे वक्त में आया है जब पाकिस्तान ने हवाई हमले में अफगानिस्तान पर बम बरसाए थे। भारत ने मानवीय आधार पर यह मदद भेजकर अफगानिस्तान के साथ अपने रिश्तों को और मजबूत किया है।
भारत की बड़ी महत्वाकांक्षा: छठवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान प्रोग्राम में शामिल होने की तैयारी
World News 21 March 2026 में भारत से जुड़ी एक और बड़ी खबर यह रही कि भारत यूरोप के सबसे घातक छठवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान प्रोग्राम में शामिल होना चाहता है। संसद में पेश की गई 2026 की रक्षा बजट रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ। अगर भारत इस प्रोग्राम में शामिल होता है तो चीन और पाकिस्तान दोनों को बड़ी चुनौती मिलेगी और भारत की वायु सेना दुनिया की सबसे ताकतवर वायु सेनाओं में शामिल हो जाएगी।
रूस ने ईरान से धोखेबाजी की रिपोर्ट को बताया फर्जी
रूस ने ईरान के साथ धोखेबाजी करने वाली खबरों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि राष्ट्रपति पुतिन के दूत ने अमेरिका के सामने एक डील का प्रस्ताव रखा था। लेकिन रूस ने इस रिपोर्ट को फर्जी बताया है। ईरान-रूस संबंध इस युद्ध में बेहद अहम हैं और ऐसी खबरें इन दोनों देशों के बीच दरार डालने की कोशिश मानी जा रही हैं।
बदलता वर्ल्ड ऑर्डर: अमेरिका की “सुप्रीम पावर” वाली छवि पर सवाल
आज की इन तमाम खबरों को एक साथ देखें तो एक बात साफ दिखती है कि दुनिया का वर्ल्ड ऑर्डर तेजी से बदल रहा है। अमेरिका जो दशकों से दुनिया की एकमात्र सुपरपावर माना जाता रहा, उसकी छवि अब धूमिल होती दिख रही है। ईरान के सामने बैकफुट पर आना, नाटो सहयोगियों से टकराव, क्यूबा जैसे छोटे देश का खुली चुनौती देना और पाकिस्तान जैसे पुराने सहयोगी की आंतरिक बिखराव: ये सब संकेत हैं कि दुनिया अब एक नई व्यवस्था की तरफ बढ़ रही है। भारत के लिए यह स्थिति चुनौतियों के साथ-साथ अवसर भी लेकर आ रही है, खासकर रक्षा और ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर।
मुख्य बातें (Key Points)
- ईरान ने डिएगो गार्सिया पर मिसाइलें दागीं और 70वीं हमले की लहर में 55 से ज्यादा अमेरिकी-इजराइली ठिकाने निशाना बनाए। ईरान ने चेतावनी दी कि दुश्मन दुनिया में कहीं भी सुरक्षित नहीं।
- Trump ने बड़ा U-Turn लिया: ईरानी तेल पर 30 दिनों की प्रतिबंध छूट दी और कहा कि 4-6 हफ्तों में युद्ध खत्म हो सकता है। NATO को “कागजी शेर” और सहयोगियों को “कायर” बताया।
- क्यूबा ने अमेरिकी दूतावास का डीजल रोका और ट्रंप की “कब्जे” की धमकी के खिलाफ सख्त रुख अपनाया। सरकार बदलने की किसी भी बातचीत से इंकार किया।
- पाकिस्तान में सेना-ISI टकराव चरम पर: आसिम मुनीर ने ISI को सख्त चेतावनी दी। भारत छठवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान प्रोग्राम में शामिल होने की तैयारी कर रहा है।








