World News 24 March 2026: आज की ख़बरें विदेश की पूरी दुनिया में हलचल मचाने वाली रहीं। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत और 5 दिन के सीजफायर का ऐलान किया, तो दूसरी तरफ ईरान ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि कोई बातचीत नहीं हो रही। यूरोप में हंगरी पर रूस को खुफिया जानकारी लीक करने के आरोप लगे, उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन ने परमाणु हथियारों पर बड़ा ऐलान किया और इटली में प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को जनमत संग्रह में करारी हार का सामना करना पड़ा। आइए World News की इन सभी बड़ी खबरों को विस्तार से समझते हैं।
Iran-US Ceasefire: ट्रंप ने किया 5 दिन के सीजफायर का ऐलान, ईरान बोला कोई बातचीत नहीं
मिडिल ईस्ट की जंग में एक नया और चौंकाने वाला मोड़ आ गया है। डोनाल्ड ट्रंप ने एकतरफा रूप से 5 दिन के सीजफायर का ऐलान कर दिया है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के साथ सैन्य अभियान को पूरी तरह रोकने के लिए “सार्थक बातचीत” हो रही है। उन्होंने युद्ध विभाग को ईरानी बिजली संयंत्रों और ऊर्जा ढांचे के खिलाफ सभी हमलों को 5 दिनों के लिए रोकने का निर्देश भी दे दिया।
लेकिन ट्रंप के इस दावे ने उन्हीं पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्योंकि ईरान ने साफ कह दिया कि अमेरिका के साथ उसकी कोई बातचीत नहीं हो रही है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालीबाफ ने सीधे तौर पर कहा कि “अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं हुई है। यह फर्जी खबरें वित्तीय और तेल बाजारों में हेरफेर करने और अमेरिका-इजराइल के फंसे दलदल से बचने के लिए फैलाई जा रही हैं।”
गालीबाफ ने यह भी कहा कि “ईरानी जनता हमलावरों को पूर्ण और दंडात्मक सजा देने की मांग करती है। इस लक्ष्य की प्राप्ति तक सभी ईरानी अधिकारी, सर्वोच्च नेता और जनता एकजुट खड़े हैं।”
सीजफायर के ऐलान के बावजूद ईरान पर हमले जारी: यह कैसा युद्ध विराम?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि ट्रंप के सीजफायर के ऐलान के बावजूद हमले रुके नहीं। ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी ने बताया कि ट्रंप द्वारा बिजली के बुनियादी ढांचे पर हमला करने से पीछे हटने के कुछ ही घंटों बाद अमेरिका और इजराइल ने दो गैस संयंत्रों और एक पाइपलाइन पर हमले किए।
इन हमलों में इस्फहान के गैस प्रशासन भवन, गैस दबाव नियंत्रण केंद्र और खुर्रमशहर बिजली संयंत्र की गैस पाइपलाइन को निशाना बनाया गया। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि आखिर यह कैसा युद्ध विराम है? क्या ट्रंप वाकई हमले रोकना चाहते हैं या फिर वे ईरान जंग से पल्ला झाड़ने की तैयारी में हैं? क्या वे इस जंग में इजराइल को अकेला छोड़ने वाले हैं?
ईरान का जवाबी हमला: ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस फोर की 78वीं वेव
ईरान ने भी पीछे हटने से साफ इनकार कर दिया है। ईरानी सेना की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने चेतावनी दी है कि “अमेरिका को बचाने की अंतिम समय सीमा नजदीक आ रही है। अमेरिका को इस दलदल से निकलने के लिए ज्यादा समय नहीं बचा है।”
ईरान ने ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस फोर की 78वीं वेव का ऐलान कर दिया। जिसके तहत संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और कुवैत में रात भर सायरन बजते रहे। सऊदी अरब ने कहा कि उसने अपने पूर्वी हिस्से में 20 से ज्यादा ड्रोन को रोका है। कुवैत में कुछ ऊर्जा ढांचे प्रभावित हुए और आंशिक बिजली कटौती हुई।
इजराइली अधिकारियों ने बताया कि ईरान ने रात भर इजराइल पर मिसाइलों की बौछार की। आधी रात से सात बार हमले किए गए। तेल अवीव में इमारतें क्षतिग्रस्त हुईं, गाड़ियां जलकर खाक हो गईं। ईरान से दागी गई एक क्लस्टर मिसाइल ने हाइफा के पास स्थित नशेर शहर को भी निशाना बनाया। यानी ईरान ने अपने दुश्मनों की नींद पूरी तरह उड़ा दी है।
Strait of Hormuz पर ट्रंप ने छोड़ी जिम्मेदारी: क्या अमेरिका मिडिल ईस्ट से भाग रहा है?
ट्रंप की बैकफुट रणनीति का एक और बड़ा संकेत तब मिला जब उन्होंने जलडमरूमध्य होर्मुज (Strait of Hormuz) को लेकर ऐलान किया कि अमेरिका इसका इस्तेमाल नहीं करता, इसलिए जो देश इसका इस्तेमाल करते हैं उन्हें ही इसकी सुरक्षा और निगरानी करनी होगी।
यह बयान बेहद अहम है क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की तेल सप्लाई का सबसे अहम रास्ता है। अगर अमेरिका इसकी सुरक्षा से हाथ पीछे खींचता है, तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल की कीमतों पर पड़ेगा। इराक से तो अमेरिकी सेना पहले ही निकल चुकी है। ऐसे में सवाल गहरा रहा है कि क्या अमेरिका पूरे मिडिल ईस्ट से भागने का प्लान बना रहा है?
यूरोपीय संघ ने की शांति की अपील: बातचीत की मेज पर लौटें अमेरिका और ईरान
इस बीच यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लायन ने अमेरिका और ईरान दोनों से बातचीत की मेज पर लौटने की अपील की है। उन्होंने कहा कि “होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की ईरान की कोशिशों की निंदा की जानी चाहिए। बढ़ते वैश्विक आर्थिक तनाव को रोकने के लिए युद्ध का अंत जरूरी है। हम सभी गैस और तेल की कीमतों पर पड़ने वाले प्रभावों को महसूस कर रहे हैं।”
चीन, रूस और भारत जैसे देश तो पहले से ही बातचीत से समाधान की बात कह रहे हैं। अब यूरोपीय संघ ने भी यही मांग रखी है। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या अमेरिका और ईरान एक मेज पर आ पाएंगे? क्या ईरान तीसरी बार अमेरिका पर भरोसा कर पाएगा? अगर युद्ध विराम की दिशा में कोई ठोस कदम उठता है तो यह सिर्फ मिडिल ईस्ट में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए राहत भरा होगा।
Hungary-Russia Spy Leak: हंगरी पर यूरोपीय संघ की खुफिया जानकारी रूस को लीक करने का आरोप
यूरोप में एक बड़ा अंदरूनी टकराव भड़क गया है। यूरोपीय संघ (EU) ने रूस को खुफिया जानकारी लीक करने के आरोपों को लेकर हंगरी से जवाब मांग लिया है। यह कदम अमेरिकी मीडिया आउटलेट वाशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के बाद उठाया गया।
21 मार्च को वाशिंगटन पोस्ट ने दावा किया कि हंगरी के विदेश मंत्री पीटर सिजार्टो यूरोपीय संघ की बैठकों के दौरान नियमित रूप से अपने रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव को फोन करके बैठक में चर्चा किए गए विषयों और संभावित अगले कदमों की सीधी रिपोर्ट देते थे। हालांकि सिजार्टो ने इन आरोपों को फर्जी बताकर खारिज कर दिया।
जर्मनी और पोलैंड ने जताई कड़ी नाराजगी, EU ने मांगा स्पष्टीकरण
इस विवाद पर यूरोप के कई ताकतवर देशों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। जर्मनी ने इन आरोपों को “बेहद गंभीर” बताते हुए कहा कि “यूरोपीय संघ के अंदर होने वाली चर्चाएं, जिसमें विदेश मंत्रियों की बैठकें भी शामिल हैं, पूरी तरह गोपनीय हैं। हम किसी भी उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं करेंगे।”
पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने एक्स (X) पर लिखा कि “वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट किसी के लिए भी आश्चर्य की बात नहीं होनी चाहिए। यही एक कारण है कि मैं केवल तभी बोलता हूं जब बिल्कुल जरूरी हो और उतना ही बोलता हूं जितना जरूरी हो।”
यूरोपीय आयोग की प्रवक्ता अनीता हिपर ने भी कहा कि “सदस्य देशों के बीच भरोसे का रिश्ता यूरोपीय संघ के कामकाज के लिए मौलिक है। हमें उम्मीद है कि हंगरी सरकार इस पर स्पष्टीकरण देगी।”
हंगरी और EU के बीच पहले से है तनाव: ऊर्जा संकट ने बढ़ाई मुश्किलें
यह पूरा मामला ऐसे वक्त में सामने आया है जब हंगरी और यूरोपीय संघ के बीच पहले से तनाव जारी है। ब्रूसेल्स के कई अधिकारी इस बात से नाराज हैं कि हंगरी ने पिछले हफ्ते EU नेताओं की बैठक में यूक्रेन को 90 अरब यूरो का कर्ज देने से इनकार किया।
रूस-यूक्रेन युद्ध में जहां पूरा यूरोप यूक्रेन के समर्थन में खड़ा है और रूस पर सख्त आर्थिक प्रतिबंध लगाए गए हैं, वहीं हंगरी लगातार रूस के पक्ष में वकालत करता आया है। 9 मार्च 2026 को हंगरी ने यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लायन को खत लिखकर रूसी तेल और गैस पर लगे प्रतिबंधों की समीक्षा और उन्हें निलंबित करने की मांग भी की थी। ईरान जंग के चलते दुनियाभर में ऊर्जा संकट गहराया है, जिसका असर यूरोप पर भी पड़ रहा है।
इन आरोपों के बाद हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बन ने अपने विदेश मंत्री की फोन टैपिंग के मामले में जांच के आदेश दिए हैं। इस जांच से क्या निकलकर आता है यह आने वाले वक्त में ही साफ होगा, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम से यूरोप में अंदरूनी टकराव और गहराता जा रहा है।
North Korea Nuclear Program: किम जोंग उन ने संसद में दिया दमदार भाषण, परमाणु ताकत बढ़ाने का ऐलान
अमेरिका ने ईरान पर हमले की जो वजह बताई वो थी ईरान का परमाणु कार्यक्रम। अमेरिका नहीं चाहता कि दुनिया में कोई नया देश परमाणु बम बनाए, क्योंकि किसी भी देश के पास परमाणु बम होने का मतलब है कि अमेरिका की भी हिम्मत नहीं होगी कि वह उस पर हमला करे। अगर ईरान या वेनेजुएला के पास परमाणु बम होता, तो क्या अमेरिका उन पर हमला करने की हिम्मत जुटा पाता? शायद नहीं।
यही कारण है कि उत्तर कोरिया के सुप्रीम लीडर किम जोंग उन ने सुप्रीम पीपल्स असेंबली यानी उत्तर कोरिया की संसद में बोलते हुए बड़ा ऐलान किया। किम ने साफ कहा कि “हम अपने परमाणु कार्यक्रम को नहीं छोड़ेंगे। इसमें किसी भी तरह का बदलाव नहीं करेंगे। उत्तर कोरिया परमाणु शक्ति संपन्न देश है। हमारे परमाणु हथियारों ने युद्ध को रोका है, जिससे देश को अपनी ऊर्जा, आर्थिक विकास और लोगों के जीवन स्तर को सुधारने पर केंद्रित करने में मदद मिली है।”
किम ने रक्षा बजट 16% बढ़ाया, दक्षिण कोरिया को बताया सबसे बड़ा दुश्मन
किम जोंग उन ने रक्षा बजट में करीब 16% की बढ़ोतरी का ऐलान भी कर दिया है। इस बजट में परमाणु युद्ध लड़ने की क्षमताओं के विस्तार के लिए विशेष रूप से फंड आवंटित किया गया है। यह साफ संकेत है कि उत्तर कोरिया अपने परमाणु कार्यक्रम को अब और तेज करने वाला है।
किम ने अमेरिका को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि “उत्तर कोरिया को कोई भी देश धमका नहीं सकता, बल्कि उत्तर कोरिया ही जरूरत पड़ने पर किसी भी देश को धमकी दे सकता है।” दक्षिण कोरिया को सबसे बड़ा दुश्मन बताते हुए किम ने चेतावनी दी कि अगर उसकी तरफ से उत्तर कोरिया की संप्रभुता का उल्लंघन करने की कोई भी कोशिश हुई तो जवाब “बिना किसी हिचकिचाहट और बेरहमी” से दिया जाएगा।
हाल ही में जापान की तरफ एक के बाद एक 10 बैलिस्टिक मिसाइलें दागकर किम ने साबित कर दिया कि वे अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया के गठबंधन से डरते नहीं हैं। किम ने साफ संदेश दिया कि “अगर ट्रंप ईरान के बाद उत्तर कोरिया को निशाना बनाने की सोच रहे हैं तो यह उनकी बहुत बड़ी भूल होगी।” अमेरिका को भी पता है कि उत्तर कोरिया के पास ऐसी मिसाइलें हैं जो अमेरिका में कहीं भी मार कर सकती हैं।
Italy Referendum: PM Giorgia Meloni को जनमत संग्रह में करारी हार, 54% ने कहा ‘No’
इटली से एक बड़ी राजनीतिक खबर आई है। इटली में अगले साल राष्ट्रीय चुनाव होने वाले हैं, लेकिन उससे पहले प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के नेतृत्व वाली दक्षिणपंथी सरकार को जनता से करारा झटका लग गया है।
इटली में न्यायिक सुधारों को लेकर जनमत संग्रह (Referendum) कराया गया, जिसमें मतदाताओं ने सरकार के खिलाफ वोट किया। इटली के गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक सरकार के खिलाफ ‘No’ के पक्ष में लगभग 54% वोट पड़े, जबकि सुधारों के समर्थन में ‘Yes’ को केवल 46% मत मिले। दो दिनों तक चले इस मतदान में उम्मीद से कहीं ज्यादा 59% टर्नआउट रहा।
न्यायिक सुधार पर जनता की ‘ना’ से मेलोनी की कुर्सी खतरे में?
यह जनमत संग्रह इटली की न्यायिक व्यवस्था में बड़े बदलावों से जुड़ा था। प्रस्तावित सुधारों में जज और प्रॉसिक्यूटर के करियर को अलग करने का प्रावधान शामिल था, ताकि वे एक-दूसरे की भूमिका में अदला-बदली न कर सकें। लेकिन जनता ने इन सुधारों को सिरे से नकार दिया।
मेलोनी की इस विफलता से न सिर्फ उनके प्रशासन पर दबाव बढ़ा है, बल्कि उनकी विदेश नीति की भी निंदा शुरू हो गई है। 2022 के बाद पहली बार मेलोनी को किसी चुनाव में झटका लगा है। जानकारों का मानना है कि जनमत संग्रह में मिली हार से मेलोनी को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक झटका लग सकता है। अगर मतदाताओं का मूड इसी तरह बना रहा तो आने वाले राष्ट्रीय चुनावों में मेलोनी की कुर्सी भी जा सकती है।
Colombia Air Force Plane Crash: 66 लोगों की मौत, बचाव कार्य जारी
कोलंबिया में वायुसेना का एक विमान क्रैश हो गया, जिसमें 66 लोगों की जान चली गई है। विमान में 114 कोलंबियाई सैनिक और 11 क्रू मेंबर सवार थे। हादसे के बाद राहत और बचाव कार्य जारी है। हादसे की वजहों पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं और जांच के आदेश दिए गए हैं।
Imran Khan की जेल में हुई एक और सर्जरी, शहबाज सरकार पर गंभीर आरोप
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की जेल में एक और सर्जरी हुई है। वे आंख की गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। इमरान खान के परिवार और समर्थकों ने शहबाज शरीफ सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि जेल में उचित चिकित्सा सुविधा नहीं दी जा रही।
Zelensky का बड़ा दावा: रूस दे रहा ईरान को खुफिया मदद
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने एक बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि रूस ईरान को खुफिया मदद दे रहा है और “हमारे पास इस बात के सबूत हैं।” जेलेंस्की का यह दावा मिडिल ईस्ट और रूस-यूक्रेन दोनों संघर्षों को एक-दूसरे से जोड़ता है।
EU-Australia Free Trade Deal: रक्षा साझेदारी की भी हुई घोषणा
यूरोपीय संघ और ऑस्ट्रेलिया ने मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके साथ ही एक नई रक्षा साझेदारी की भी घोषणा की गई। यूरोपियन यूनियन की अध्यक्ष ने कहा कि “लेनदेन से ज्यादा भरोसा जरूरी है।” बदलते वैश्विक परिदृश्य में यह समझौता दोनों पक्षों के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है।
Sharks Blood Cocaine: शार्क के खून में मिले कोकीन और कैफीन, वैज्ञानिक भी हैरान
World News में आज सबसे हैरान करने वाली खबर समुद्र की गहराइयों से आई। बहामास के एलोथरा द्वीप के पास एक चौंकाने वाली रिसर्च हुई, जिसने वैज्ञानिकों की भी नींद उड़ा दी। बायोलॉजिस्ट नताशा बोसनिक और उनकी टीम ने जब 85 शार्क के खून के नमूने लिए, तो नतीजे बेहद हैरान करने वाले निकले।
एनवायरमेंटल पॉल्यूशन नाम की मैगजीन में प्रकाशित इस रिसर्च के मुताबिक लगभग एक-तिहाई शार्क के शरीर में कैफीन और दर्द निवारक दवाओं के अंश मिले हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि एक शार्क के खून में कोकीन तक की पुष्टि हुई।
इंसानों की आधुनिक जीवनशैली बन रही समुद्री जीवों की जान का खतरा
सवाल यह है कि यह सब हो कैसे रहा है? वैज्ञानिकों के मुताबिक इसकी कई वजहें हैं। सबसे पहली वजह है सीवेज का पानी: शहरों की गंदगी, दवाइयां और रसायन सीवेज के जरिए सीधे समुद्र तक पहुंच रहे हैं। दूसरी वजह है पर्यटन का बढ़ता दखल: पुराने मछली फार्मों के पास आने वाले गोताखोर अक्सर पानी में पेशाब करते हैं या कचरा फेंकते हैं। तीसरी वजह है अनजाना शिकार: शार्क समुद्र में तैरती चीजों को काटती हैं और अनजाने में इन रसायनों को निगल लेती हैं।
अभी यह पूरी तरह साफ नहीं है कि इन दवाओं से शार्क की सेहत पर क्या असर पड़ेगा, लेकिन वैज्ञानिकों ने उनके मेटाबॉलिज्म यानी पाचन प्रक्रिया में बदलाव जरूर देखा है। भविष्य में इनका व्यवहार भी बदल सकता है, जो पूरे समुद्री इकोसिस्टम के लिए बेहद खतरनाक होगा। ऊपर से साफ दिखने वाला समंदर अंदर ही अंदर हमारे फैलाए जहर से जूझ रहा है। अगर समय रहते सीवेज सिस्टम और इंसानी आदतों को नहीं बदला गया तो इन समुद्री जीवों की जान पर बन आएगी।
मुख्य बातें (Key Points)
- Iran-US Conflict: ट्रंप ने 5 दिन के सीजफायर का ऐलान किया लेकिन ईरान ने बातचीत के दावे को फर्जी बताया; ऐलान के बावजूद हमले जारी रहे; ईरान ने ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस फोर की 78वीं वेव लॉन्च की।
- Hungary Spy Leak: वाशिंगटन पोस्ट के दावे के बाद यूरोपीय संघ ने हंगरी से जवाब मांगा; जर्मनी-पोलैंड ने कड़ी प्रतिक्रिया दी; विक्टर ऑर्बन ने फोन टैपिंग की जांच के आदेश दिए।
- North Korea: किम जोंग उन ने परमाणु कार्यक्रम मजबूत करने, रक्षा बजट 16% बढ़ाने और दक्षिण कोरिया को “सबसे बड़ा दुश्मन” बताने का ऐलान किया।
- Italy Referendum: PM मेलोनी को जनमत संग्रह में हार; 54% ने न्यायिक सुधारों के खिलाफ वोट किया; 2022 के बाद पहली चुनावी विफलता।







