Winter Health Tips India: सर्दियों का मौसम कुछ लोगों के लिए बेहद खूबसूरत होता है लेकिन अस्थमा और सांस के मरीजों के लिए यह समय काफी मुश्किल भरा हो जाता है। वहीं इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से 14 लोगों की मौत और 1400 से ज्यादा लोगों के बीमार होने की खबर ने देशभर में हड़कंप मचा दिया है। आज हम आपको बताएंगे कि सर्दियों में अस्थमा क्यों बढ़ता है, दूषित पानी से कैसे बचें और अपनी पसंदीदा बिरयानी को हेल्दी कैसे बनाएं ताकि आप बिना किसी गिल्ट के इसका मजा ले सकें।
सर्दियों में अस्थमा क्यों बढ़ जाता है?
अस्थमा असल में क्या होता है?
धरमशिला नारायणा हॉस्पिटल, दिल्ली के पल्मोनोलॉजी विभाग के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. नितिन राठी बताते हैं कि अस्थमा बेसिकली सांस की नलियों की एलर्जी होती है। जब मरीज एयर पोल्यूशन, स्मोकिंग, पॉलन ग्रेंस, धूल-मिट्टी या डस्ट के संपर्क में आता है तो सांस की नलियों में सूजन पैदा हो जाती है जिसके कारण नलियां छोटी हो जाती हैं और उसमें बलगम फंसने लगता है।
इससे खांसी होती है, काला-पीला-नीला बलगम आता है, सांस फूलता है, आंखों से पानी आता है और दिल की गति बढ़ जाती है। जब भी इस तरह के लक्षण दिखें तो नजदीकी डॉक्टर के पास जाएं। वो कुछ साधारण टेस्ट जैसे चेस्ट एक्सरे, पीएफटी और सीबीसी कराएंगे। पीएफटी से पता चलता है कि सांस की नलियों में कितनी सूजन है और किस तरह का इलाज चाहिए चाहे वो टेबलेट के फॉर्म में हो, इन्हेलर में हो या नेबुलाइजर में।
सर्दियों में अस्थमा गंभीर क्यों हो जाता है?
डॉ. नितिन राठी के मुताबिक सर्दियों में हवा का तापमान कम हो जाता है जिससे एयर कंडेंस यानी घनी हो जाती है और वातावरण में हवा नहीं चलती। जब हवा नहीं चलेगी तो जिन चीजों से एलर्जी है जैसे डस्ट पार्टिकल, एयर पोल्यूशन, पॉलन ग्रेंस या स्मोकिंग ये हवा में ज्यादा कंसंट्रेट हो जाते हैं। इनडायरेक्ट तरीके से कहें तो AQI लेवल बढ़ जाता है।
जब हम इन कंडेंस चीजों को ज्यादा कंसंट्रेशन में इनहेल करते हैं तो अस्थमा और एलर्जी के कारण लक्षण भी कठिन हो जाते हैं। इसके अलावा सर्दियों में शरीर का मेटाबॉलिज्म भी धीमा हो जाता है, एक्टिविटी कम हो जाती है और एक्सरसाइज भी कम होती है। इसीलिए अस्थमा सर्दियों में गंभीर हो जाता है।
सीवियर अस्थमा से कैसे बचें?
डॉ. नितिन राठी के अनुसार इस मौसम में सीवियर अस्थमा से बचने के लिए सबसे पहले आउटडोर एक्टिविटी कम से कम करें। अगर बाहर जाना जरूरी है तो N95 मास्क जरूर पहनें जो NIOSH अप्रूव्ड और टाइटली फिटेड होना चाहिए।
घर में धूप-बत्ती, अगरबत्ती जलाने से बचें। कुछ लोग गर्मी सेकने के लिए कोयला या लकड़ी जलाते हैं जो नहीं करना चाहिए। झाड़ू लगाने की जगह वैक्यूम क्लीनर का इस्तेमाल करें। इनडोर एक्सरसाइज करें जैसे प्राणायाम और अनुलोम-विलोम। डाइट हेल्दी रखें और खूब पानी पिएं।
जो अस्थमा के मरीज हैं उन्हें पता होना चाहिए कि कौन सी मेडिसिन रेगुलर है और कौन सी इमरजेंसी में लेनी है।
अस्थमा के गंभीर लक्षण कैसे पहचानें?
डॉ. राठी बताते हैं कि अगर आपकी डेली रूटीन की एक्टिविटी जैसे नहाना, लैट्रिन जाना या सीढ़ी चढ़ना में ज्यादा एफर्ट लगने लगे, खांसी ज्यादा आए, बुखार हो या बलगम जो सफेद होता है वो पीला होने लगे तो समझ लीजिए कि अस्थमा अटैक आ रहा है।
घर में एक बेसलाइन पल्स ऑक्सीमीटर होना चाहिए। अगर ऑक्सीजन का लेवल कम है, दिल की गति ज्यादा है या बीपी असामान्य है तो ये गंभीर अस्थमा के लक्षण हैं। ऐसे में तुरंत इमरजेंसी मेडिसिन और नेबुलाइजर लें। 10-15-20 मिनट बाद भी आराम न मिले तो तुरंत नजदीकी हेल्थ फैसिलिटी जाएं।
दूषित पानी जानलेवा क्यों है?
इंदौर में क्या हुआ?
देश का सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से कम से कम 14 लोगों की मौत हो चुकी है। 1400 से ज्यादा लोग बीमार हैं और 200 के करीब अस्पताल में भर्ती हैं। हालांकि मध्य प्रदेश सरकार का कहना है कि दूषित पानी से चार मौतें हुई हैं जबकि इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव यह संख्या 10 बता रहे हैं।
भागीरथपुरा में लोगों के बीमार पड़ने की शुरुआत 29 दिसंबर 2025 से हुई। उल्टी और दस्त की वजह से लोग अस्पताल में भर्ती होने लगे। इलाके के लोग पिछले डेढ़ साल से पानी में बदबू और कड़वाहट की शिकायत कर रहे थे लेकिन प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाया।
पानी दूषित कैसे हुआ?
जांच में सामने आया कि नर्मदा नदी से आने वाली पानी की मेन पाइपलाइन में लीकेज हो गया। जहां लीकेज हुआ उसके ठीक ऊपर एक शौचालय बना हुआ है और दोनों के बीच कोई सेफ्टी टैंक नहीं है। इस वजह से सीवर का पानी सीधे पीने के पानी में मिल गया।
राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय दुबे के मुताबिक अब पूरी पाइपलाइन की जांच हो रही है और एक कंट्रोल रूम भी बनाया गया है। राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) ने भी इस मामले का संज्ञान लेते हुए दो हफ्ते में रिपोर्ट मांगी है।
सीवेज के पानी में क्या-क्या होता है?
किम्स हॉस्पिटल, ठाणे के इंटरनल मेडिसिन कंसल्टेंट डॉ. अनिकेत मुले बताते हैं कि सीवेज के पानी में इंसानों और जानवरों का मल-मूत्र, घर का गंदा पानी और फैक्ट्रियों का कचरा होता है।
इसमें हानिकारक बैक्टीरिया पाए जाते हैं जैसे ई. कोलाई, साल्मोनेला, शिगेला और वाइब्रियो कोलेरी जिससे हैजा होता है। वायरस भी होते हैं जैसे हेपेटाइटिस A, हेपेटाइटिस E, रोटा वायरस और नोरो वायरस। साथ ही पैरासाइट्स, कीड़ों के अंडे और हानिकारक केमिकल्स जैसे अमोनिया, नाइट्रेट्स, डिटर्जेंट, कीटनाशक और सीसा या आर्सेनिक जैसे हैवी मेटल्स भी होते हैं। इनमें से कई स्मेल या टेस्ट से पहचाने नहीं जा सकते।
दूषित पानी पीने से क्या होता है?
दूषित पानी पीने से उल्टी, दस्त, टाइफाइड, हैजा और हेपेटाइटिस A या E इंफेक्शन हो सकता है। कई दिनों तक ऐसा पानी पीने से शरीर डिहाइड्रेट हो जाता है और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो जाती है जिससे थकान, सुस्ती और चक्कर आते हैं। लिवर और किडनी को भी नुकसान पहुंचता है।
बच्चों का विकास रुक जाता है और कुपोषण होता है। वयस्कों का इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है। अगर सही समय पर इलाज न मिले तो हैजा या टाइफाइड से मौत भी हो सकती है। बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से बीमार लोगों को सबसे ज्यादा खतरा होता है।
किन लक्षणों पर तुरंत डॉक्टर के पास जाएं?
अगर आपको लग रहा है कि पानी गंदा है, अचानक हल्के दस्त लग गए हैं, पेट दर्द या ऐंठन है, उबकाई आ रही है, बहुत कमजोरी है, सिरदर्द है, हल्का बुखार है, मुंह सूख रहा है और खूब प्यास लग रही है तो बिना देर किए डॉक्टर के पास जाएं।
अगर दूषित पानी पीने के बाद दस्त और उल्टी हो तो तुरंत ORS पिएं। हल्का और सादा खाना खाएं। अगर दस्त या उल्टी जारी रहे, स्टूल में खून आए, बुखार या चक्कर आए तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।
पानी को सुरक्षित कैसे रखें?
पानी का स्वाद, रंग बदला हुआ लगे, बदबू आए या कण दिखें तो इस्तेमाल न करें। पीने, खाना पकाने, दांत साफ करने और फल-सब्जियां धोने के लिए उबला और साफ पानी ही इस्तेमाल करें। घर की पानी की टंकी नियमित साफ करें। नल से गंदा पानी आए तो प्रशासन को बताएं।
जिस इलाके में अक्सर दूषित पानी आता है वहां पानी को 10-15 मिनट उबालें। RO या UV प्यूरीफायर लगवाएं। प्रशासन की सलाह पर क्लोरीन टेबलेट का इस्तेमाल करें। साफ पानी को ढके हुए बर्तन में रखें।
बिरयानी को हेल्दी कैसे बनाएं?
भारतीयों को बिरयानी कितनी पसंद है?
Swiggy की “How India Swiggy Report 2025” के मुताबिक साल 2025 में 9 करोड़ से ज्यादा बिरयानी ऑर्डर की गई यानी हर मिनट करीब 194 बिरयानी। 5 करोड़ से ज्यादा ऑर्डर के साथ चिकन बिरयानी सबसे आगे रही।
बिरयानी को हेल्दी बनाने के टिप्स
डाइट्स एंड मोर, नई दिल्ली की फाउंडर डाइटिशियन श्रेया कतियाल बताती हैं कि बिरयानी बनाते समय सफेद चावल की जगह ब्राउन राइस इस्तेमाल करें जिसमें फाइबर ज्यादा होता है। चावल कम और सब्जियां ज्यादा डालें जैसे गाजर, बींस, मटर, फूलगोभी और पालक।
प्रोटीन के लिए सोया चंक्स, काबुली चना, टोफू, मशरूम, पनीर और राजमा डालें। नॉनवेज बिरयानी में चिकन ब्रेस्ट और मछली अच्छे ऑप्शन हैं। फुल फैट दही की जगह लो फैट या फैट फ्री दही इस्तेमाल करें।
तेल और मसालों का सही इस्तेमाल
बिरयानी में तेल और घी कम डालें। एक से दो चम्मच सरसों का तेल, मूंगफली का तेल या ऑलिव ऑयल काफी है। घी भी एक चम्मच पर्याप्त है। ऊपर से डालने वाले प्याज को ज्यादा तेल में भूनने की जगह हल्का भूनें या एयर फ्रायर में भूनें। इससे कैलोरी और फैट कम होता है जो दिल के लिए अच्छा है।
मसालों में लौंग, इलायची और अदरक जरूर डालें जिससे हाजमा सुधरता है। लाल मिर्च कम करें वरना एसिडिटी हो सकती है।
बिरयानी कब और कैसे खाएं?
बिरयानी को सलाद और रायते के साथ खाएं। प्याज, खीरे, टमाटर का सलाद बनाएं और नींबू डालें। खीरे का रायता भी अच्छा ऑप्शन है। इससे हाजमा सुधरता है और पेट भारी नहीं लगता। सलाद और रायता खाने से पेट जल्दी भर जाता है और ओवर ईटिंग नहीं होती।
बिरयानी दोपहर या शाम को खाएं। उसके बाद चलेंगे-फिरेंगे तो चावल पचेगा। देर रात खाकर लेट जाएंगे तो हेल्दी होने के बावजूद नुकसान होगा। प्लेट भर-भर कर न खाएं बल्कि लिमिटेड पोर्शन खाएं।
मुख्य बातें (Key Points)
- सर्दियों में AQI बढ़ने और हवा के कंडेंस होने से अस्थमा के लक्षण गंभीर हो जाते हैं इसलिए N95 मास्क पहनें, आउटडोर एक्टिविटी कम करें और इनडोर एक्सरसाइज करें।
- इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से 14 मौतें और 1400+ बीमार हुए क्योंकि पाइपलाइन लीकेज से सीवेज पानी पीने के पानी में मिल गया।
- दूषित पानी पीने से हैजा, टाइफाइड, हेपेटाइटिस हो सकता है इसलिए पानी उबालकर पिएं, RO/UV प्यूरीफायर लगवाएं और गंदे पानी की शिकायत तुरंत करें।
- बिरयानी को हेल्दी बनाने के लिए ब्राउन राइस, ज्यादा सब्जियां, कम तेल-घी इस्तेमाल करें और दोपहर या शाम को लिमिटेड पोर्शन में खाएं।







