NBWL Standing Committee Meeting के तहत 19 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति की 88वीं बैठक आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री Bhupender Yadav ने की। इस दौरान संरक्षित क्षेत्रों और उनके आसपास सार्वजनिक उपयोगिता, रक्षा और अवसंरचना विकास से जुड़े कुल 70 प्रस्तावों पर विस्तार से विचार किया गया।
बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि विकास कार्यों को आगे बढ़ाते हुए वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरणीय सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।
कब, कहाँ और क्यों हुई यह अहम बैठक
राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में आयोजित इस बैठक का उद्देश्य वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत आने वाले मामलों में संतुलित निर्णय लेना था। समिति ने संरक्षित वन क्षेत्रों, वन्यजीव अभयारण्यों, बाघ अभ्यारण्यों और पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्रों के आसपास प्रस्तावित विकास कार्यों की गहन समीक्षा की।
सार्वजनिक उपयोगिता से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा
बैठक में जिन प्रमुख प्रस्तावों पर विचार हुआ, उनमें जल जीवन मिशन के तहत पेयजल आपूर्ति, प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की सुविधाएं, सड़कों का चौड़ीकरण, 4G मोबाइल टावरों की स्थापना और बिजली ट्रांसमिशन लाइनों का निर्माण शामिल है। इन सभी योजनाओं को स्थानीय समुदायों की जरूरतों और पारिस्थितिक संतुलन को ध्यान में रखकर परखा गया।
मध्य प्रदेश की सिंचाई परियोजना पर खास फोकस
समिति ने मध्य प्रदेश की एक मध्यम सिंचाई परियोजना से जुड़े प्रस्तावों पर भी विस्तार से चर्चा की। इस परियोजना का उद्देश्य बुंदेलखंड क्षेत्र में पेयजल और सिंचाई जल की उपलब्धता बढ़ाना है, साथ ही वन्यजीवों और घड़ियालों के लिए बेहतर जल प्रबंधन सुनिश्चित करना भी इसका अहम पहलू है।
रणनीतिक और रक्षा आवश्यकताओं पर संतुलित निर्णय
बैठक में लद्दाख और सिक्किम जैसे सीमावर्ती और उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में प्रस्तावित 17 रक्षा संबंधी अवसंरचना परियोजनाओं पर भी विचार किया गया। समिति ने राष्ट्रीय सुरक्षा की जरूरतों को स्वीकार करते हुए यह सुनिश्चित किया कि सभी परियोजनाएं वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा मानकों के अनुरूप ही आगे बढ़ें।
नीतियों और निगरानी तंत्र की समीक्षा
स्थायी समिति ने पिछली बैठकों में लिए गए फैसलों पर की गई कार्रवाई रिपोर्ट की समीक्षा की। इसमें नीतिगत सुधारों, प्रक्रियाओं के सरलीकरण और ‘परिवेश पोर्टल’ को और प्रभावी बनाने पर विशेष जोर दिया गया, ताकि स्वीकृत परियोजनाओं की निगरानी मजबूत हो सके।
विश्लेषण
यह बैठक इस बात का संकेत है कि सरकार विकास और संरक्षण को एक-दूसरे का विरोधी नहीं, बल्कि पूरक मानकर आगे बढ़ रही है। एक तरफ बुनियादी ढांचे और राष्ट्रीय सुरक्षा की जरूरतें हैं, तो दूसरी तरफ वन्यजीव और पर्यावरण की रक्षा। 88वीं बैठक में जिस तरह संतुलन पर जोर दिया गया, वह आने वाले समय में विकास परियोजनाओं के लिए एक स्पष्ट दिशा तय करता है।
क्या है पृष्ठभूमि
राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत गठित एक वैधानिक निकाय है। इसका मुख्य उद्देश्य सरकार को वन्यजीव और वन संरक्षण से जुड़े मामलों में सलाह देना और यह सुनिश्चित करना है कि विकास गतिविधियां टिकाऊ और संतुलित तरीके से आगे बढ़ें।
मुख्य बातें (Key Points)
- NBWL की स्थायी समिति की 88वीं बैठक नई दिल्ली में हुई
- 70 सार्वजनिक उपयोगिता और रणनीतिक प्रस्तावों पर विचार
- पेयजल, स्वास्थ्य, सड़क और संचार परियोजनाओं पर चर्चा
- लद्दाख और सिक्किम में 17 रक्षा अवसंरचना प्रस्तावों की समीक्षा
- संरक्षण और विकास के संतुलन पर सरकार का स्पष्ट रुख








