Ethereum के को-फाउंडर ने अपने वॉलेट से क्यों बेच दिए Rs 32 करोड़ से अधिक के डॉज मीमकॉइन?

Ethereum के को-फाउंडर Vitalik Buterin ने Small Doge, Baby Shiba, and Kishu Inu जैसे डॉगकॉइन क्रिप्टोकैट्स अपने वॉलेट से खाली कर दिए हैं।  हाल के दिनों में Buterin ने कथित तौर पर अपने वॉलेट से लगभग 4.3 मिलियन डॉलर (लगभग 32 करोड़ रुपये से अधिक) कीमत के डॉज-थीम वाले मीम-कॉइन बेचे हैं। इनमें से कुछ कॉइन का इस्तेमाल Proof of Humanity की UBI इनिशिएटिव से टोकन खरीदने और उन्हें “बर्न” करने के लिए किया गया था (बर्न यानि उन्हें प्रचलन से बाहर कर देना)। Proof of Humanity जो है वो Klerosand Democracy Earth के सहयोग से मनुष्यों के लिए एक Ethereum ब्लॉकचेन-आधारित सोशल वैरीफिकेशन सिस्टम है। इसका मेन टोकन UBI है।

रूसी क्रिप्टोकरेंसी पॉइनियर ने बड़ी संख्या में 6 डॉग कॉइन्स को बेच दिया, जो उनके इथेरियम वॉलेट में गिफ्ट में दिए गए थे। Aidi Inu, Jejudoge और HuskyToken भी उन कॉइन में शामिल थे जिनका उन्होंने ट्रेड किया। ट्रांजेक्शन एक डीसेंट्रेलाइज्ड एक्सचेंज Uniswap के माध्यम से किए गए।

चूंकि ये डॉग कॉइन्स मार्केट शेयर के मामले में खास (niche) हैं, इसलिए उनके प्राइस लिक्विडिटी की कमी से प्रभावित होते हैं। Bitcoinuponly की एक रिपोर्ट के अनुसार, Buterin द्वारा जमा किया गया कुल अमाउंट फुल मार्केट प्राइस के बजाय 1.8 मिलियन डॉलर (लगभग 13 करोड़ रुपये) के करीब आ गया।

हाल के दिनों में कई डॉग कॉइन के प्राइस में बड़ी गिरावट देखी गई है। Baby Shibu की कीमत में सबसे बदतर 72 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। कॉइन वर्तमान में 0.00000183 डॉलर (लगभग 0.00014 रुपये) पर ट्रेड कर रहा है।
Buterin अपने डॉग कॉइन्स को फंड के लिए स्वैप करने के लिए जाने जाते हैं जो वह कम्यूनिटी सर्विस से जुड़े एरिया में इन्वेस्ट करते हैं।

इससे पहले मई में, जब दुनिया कोरोनावायरस महामारी की भयानक दूसरी लहर की चपेट में थी, Buterin ने अपना वॉलेट खाली कर दिया था और भारत के COVID राहत कोष में 1 बिलियन डॉलर (लगभग 7,485 करोड़ रुपये) शीबा इनु टोकन दान कर दिए थे।
एक्सचेंजों पर लिक्विडिटी समाप्त होने के बाद उन्होंने अभी-अभी डॉग कॉइन्स दिए हैं।
Etherscan के उनके ट्रांजेक्शन डेटा से पता चलता है कि उन्होंने Proof of Humanity के यूबीआई टोकन सप्लाई के 8% को खरीदने और बर्न करने में लगभग 200,000 डॉलर (लगभग 1 करोड़ रुपये) खर्च किए हैं।

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