नई दिल्ली (New Delhi), 03 फ़रवरी (The News Air): Dowry Law यानी दहेज प्रतिषेध अधिनियम (Dowry Prohibition Act, 1961) को खत्म करने की मांग वाली एक जनहित याचिका (PIL) सोमवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में खारिज कर दी गई। जस्टिस बीआर गवई (Justice B.R. Gavai) और जस्टिस केवी चंद्रन (Justice K.V. Chandran) की बेंच ने इस याचिका को सिर्फ 2 मिनट में खारिज कर दिया और कहा, “यह संसद का विषय है, कोर्ट इसमें हस्तक्षेप नहीं करेगा।”
क्या Dowry Law का हो रहा गलत इस्तेमाल? जानिए कोर्ट में क्या हुआ!
SC ने कहा – ‘Dowry Law हटाने का फैसला संसद का काम!’
👉 किसने दायर की थी याचिका?
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याचिका रूपसी सिंह (Roopsee Singh) नाम की महिला ने दायर की थी।
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इसमें Dowry Act के Section 2, Section 3 और Section 4 को खत्म करने की मांग की गई थी।
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उनका तर्क था कि यह कानून अब महिलाओं के बजाय पुरुषों के उत्पीड़न का हथियार बन रहा है।
क्या Dowry Law अब बेजा इस्तेमाल का जरिया बन गया है? जानिए पूरा विवाद!
Dowry Act के किन Sections को हटाने की मांग की गई थी?
1️⃣ Section 2:
👉 इसमें दहेज की परिभाषा दी गई है कि कौन-सी संपत्ति या गिफ्ट Dowry (दहेज) माना जाएगा।
2️⃣ Section 3:
👉 Dowry लेने और देने पर सजा का प्रावधान करता है।
👉 दोषी पाए जाने पर 5 साल तक की जेल और 15,000 रुपये जुर्माने का प्रावधान है।
3️⃣ Section 4:
👉 Dowry मांगने पर सजा का प्रावधान करता है।
👉 दोषी पाए जाने पर 6 महीने से 2 साल तक की सजा हो सकती है।
क्या इन Sections के चलते निर्दोष पुरुष झूठे मुकदमों में फंस रहे हैं? पढ़ें एक्सपर्ट्स की राय!
SC ने 2 मिनट में क्यों खारिज की याचिका?
Supreme Court ने याचिका खारिज करते हुए कहा,
👉 “यह संसद का विषय है। कोई भी कानून बनाना या हटाना हमारी जिम्मेदारी नहीं है।”
👉 “अगर इस कानून से किसी को समस्या है तो उन्हें सांसदों से बात करनी चाहिए।”
👉 “हम इसमें दखल नहीं देंगे!”
क्या यह पुरुषों के हक के लिए बड़ा झटका है? जानिए समाज का नजरिया!
Bangalore Engineer Suicide: क्या Dowry Law के दुरुपयोग का मामला था?
- हाल ही में Bangalore (बेंगलुरु) में एक 30 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर अतुल सुभाष (Atul Subhash) ने आत्महत्या कर ली थी।
- अतुल ने एक वीडियो रिकॉर्ड कर कहा – ‘मेरी सैलरी लाखों में है, मैं दहेज क्यों मांगूंगा?’
- उनकी पत्नी ने उन पर Dowry Harassment और Domestic Violence का केस दर्ज किया था।
- पुलिस की पूछताछ और कानूनी दबाव से परेशान होकर अतुल ने आत्महत्या कर ली।
क्या इस तरह के झूठे मामलों के चलते Dowry Law को संशोधित करने की जरूरत है?
क्या Dowry Law का गलत इस्तेमाल हो रहा है?
कई रिपोर्ट्स में सामने आया है कि:
✅ 50% से ज्यादा Dowry Cases फर्जी साबित होते हैं।
✅ कई पुरुषों को झूठे केस में फंसाकर वसूली की जाती है।
✅ दहेज उत्पीड़न केस में तुरंत गिरफ्तारी के चलते पुरुषों का मानसिक तनाव बढ़ रहा है।
क्या अब Dowry Law में बदलाव की जरूरत है? जानिए संसद में क्या हो सकता है!
सरकार का पक्ष – ‘महिलाओं की सुरक्षा के लिए Dowry Law जरूरी!’
महिला संगठनों का कहना है कि:
👉 “दहेज प्रताड़ना के मामले अभी भी बहुत ज्यादा हैं!”
👉 “अगर कानून कमजोर हुआ तो असली पीड़िताओं को न्याय नहीं मिलेगा।”
👉 “अगर Dowry Cases में कोई निर्दोष है, तो अदालत में उसे बचाव का मौका मिलता है।”
क्या Dowry Law का कमजोर होना महिलाओं के लिए नुकसानदायक होगा?
क्या होगा आगे? संसद में जा सकता है मामला!
✅ अगर इस मामले पर ज्यादा बहस होती है, तो सरकार Dowry Act में संशोधन कर सकती है।
✅ सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद याचिकाकर्ता संसद में इस मुद्दे को उठा सकती हैं।
✅ पुरुष अधिकार संगठनों (Men’s Rights Organizations) का कहना है कि इस कानून का दुरुपयोग रोका जाना चाहिए।
आपका क्या कहना है? क्या Dowry Law को खत्म किया जाना चाहिए या इसमें संशोधन होना चाहिए? कमेंट में अपनी राय दें!
“क्या दहेज कानून का गलत इस्तेमाल हो रहा है? SC के फैसले के बाद बढ़ी बहस!”








