West Bengal SIR final voter list 2026: चुनाव आयोग (Election Commission) ने पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद अद्यतन मतदाता सूचियों का चरणबद्ध प्रकाशन शुरू कर दिया है। शनिवार को बांकुड़ा, कूचबिहार और अलीपुरद्वार समेत कई जिलों में संशोधित सूचियों की हार्ड कॉपी जारी की गईं। प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, बांकुड़ा जिले में SIR प्रक्रिया शुरू होने के बाद से लगभग 1.18 लाख नाम हटाए गए हैं, जबकि नदिया जिले में लगभग 2.71 लाख नामों की कटौती की गई है।
यह प्रक्रिया अप्रैल में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले बेहद अहम मानी जा रही है। हालांकि, अभी तक ये सूचियां निर्धारित ईसी पोर्टल और मोबाइल एप्लिकेशन पर ऑनलाइन उपलब्ध नहीं हो पाई हैं।
बांकुड़ा में 1.18 लाख नाम हटे, नदिया में 2.71 लाख
एक वरिष्ठ जिला अधिकारी के अनुसार, SIR प्रक्रिया शुरू होने से पहले बांकुड़ा में कुल मतदाता संख्या 30,33,830 थी। दिसंबर में प्रकाशित मसौदा सूची में यह संख्या घटकर 29,01,009 हो गई थी। सुनवाई और जांच के बाद अगले चरण में लगभग 4,000 अतिरिक्त नाम हटाए गए, जबकि फॉर्म 6 के तहत कुछ हजार नए मतदाता जोड़े गए। अब अंतिम सूची में कुल मतदाता संख्या लगभग 29.15 लाख हो गई है, यानी शुरुआत से कुल मिलाकर करीब 1.18 लाख नामों की कटौती हुई है।
बांग्लादेश की सीमा से लगे नदिया जिले में सबसे ज्यादा हलचल देखी गई। पिछले साल 4 नवंबर को SIR प्रक्रिया शुरू होने पर यहां कुल मतदाता 44.18 लाख थे। 16 दिसंबर को मसौदा सूची प्रकाशित होने के बाद यह संख्या घटकर 42,02,261 हो गई थी। अब फाइनल लिस्ट में कुल मतदाता संख्या 41.45 लाख रह गई है, यानी कुल 2.71 लाख नाम हटाए गए हैं।
कोलकाता में भी बड़ी कटौती
उत्तर कोलकाता में, जिसमें टीएमसी के कब्जे वाली सात विधानसभा सीटें शामिल हैं, SIR प्रक्रिया के दौरान कुल 4.07 लाख नाम हटाए गए। इनमें से 3.90 लाख नाम मसौदा स्तर पर और 17,000 नाम अंतिम सूची में हटाए गए।
चुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक, मामलों के निपटारे के दौरान ERO/AERO द्वारा हटाए गए लगभग 6 लाख नामों को ‘डिलीटेड’ के रूप में चिह्नित किया जाएगा, जबकि 60 लाख से अधिक नामों को ‘अंडर एडज्यूडिकेशन’ यानी विचाराधीन के रूप में रखा जाएगा। प्रकाशन के बाद 7.08 करोड़ मतदाताओं को तीन श्रेणियों में बांटा जाएगा: ‘स्वीकृत’, ‘हटाए गए’ और ‘विचाराधीन’।
सियासी बयानबाजी तेज
फाइनल मतदाता सूची जारी होने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। टीएमसी विधायक पारेश राम दास ने कहा, “भाजपा पश्चिम बंगाल में SIR कराकर और कानूनी भारतीय मतदाताओं को सूची से हटाकर चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है। लेकिन भाजपा अपने उद्देश्य में सफल नहीं होगी, और मुझे यकीन है कि टीएमसी एक बार फिर बंगाल में चुनाव जीतेगी।”
भाजपा की ओर से अभी आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन पार्टी सूत्रों का कहना है कि वे हटाए गए नामों की सूची की बारीकी से जांच करेंगे और किसी भी अनियमितता को लेकर चुनाव आयोग से शिकायत करेंगे।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
अद्यतन मतदाता सूची जारी होने के मद्देनजर पश्चिम बंगाल सरकार ने पूरे राज्य में सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक सहित वरिष्ठ अधिकारी राज्य सचिवालय में स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। नदिया जिले में पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने रूट मार्च किया।
लोगों में उत्सुकता, ऑनलाइन लिस्ट का इंतजार
बांकुड़ा, उत्तर 24 परगना और कोलकाता के कुछ हिस्सों में जिला चुनाव कार्यालयों और साइबर कैफे के बाहर लंबी कतारें देखी गईं, क्योंकि मतदाता यह जांचने के लिए उत्सुक थे कि उनका नाम अद्यतन सूची में है या नहीं। हार्ड कॉपी नोटिस बोर्ड पर लगाई गईं, जिन्हें देखने के लिए लोगों की भीड़ जुट गई। कई लोग अपने नाम ढूंढने के लिए अधिकारियों की मदद लेते दिखे। चूंकि अद्यतन सूची अभी पूरी तरह से ऑनलाइन उपलब्ध नहीं है, इसलिए साइबर कैफे में भी भीड़ बढ़ गई है।
‘जानें पूरा मामला’
यह SIR प्रक्रिया 2002 के बाद पश्चिम बंगाल में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर की गई संशोधन प्रक्रिया है। यह पिछले साल 4 नवंबर को गणना फॉर्म वितरित करने के साथ शुरू हुई थी। आयोग ने इस अभ्यास को प्रोविजनल रूप से पूरा करने में 116 दिन का समय लिया। दूसरे चरण में 1.67 करोड़ मतदाताओं की सुनवाई हुई, जिनमें से 1.36 करोड़ ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ और 31 लाख बिना उचित मैपिंग वाले थे। अप्रैल में होने वाले चुनाव से पहले यह फाइनल मतदाता सूची राजनीतिक दलों के लिए बेहद अहम है, और हटाए गए लाखों नामों को लेकर सियासत गरमाना तय है।
मुख्य बातें (Key Points)
चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में SIR के बाद फाइनल मतदाता सूची का चरणबद्ध प्रकाशन शुरू किया।
बांकुड़ा जिले में 1.18 लाख, नदिया जिले में 2.71 लाख और उत्तर कोलकाता में 4.07 लाख नाम हटाए गए।
हटाए गए नामों में मृत, प्रवासी, डुप्लीकेट और अज्ञात मतदाता शामिल हैं, जबकि नए नाम फॉर्म 6 से जोड़े गए।
टीएमसी ने आरोप लगाया कि भाजपा चुनाव प्रभावित करने के लिए SIR का इस्तेमाल कर रही है, वहीं भाजपा सूची की जांच करेगी।
ऑनलाइन लिस्ट अभी उपलब्ध नहीं, लोग हार्ड कॉपी देखने के लिए जिला कार्यालयों और साइबर कैफे में उमड़ रहे हैं।








