Punjab Former Chief Secretary Corruption Case: पंजाब के पूर्व चीफ सेक्रेटरी और रिटायर्ड आईएएस अधिकारी विजय कुमार जंजुआ (VK Janjua) की मुश्किलें बढ़ गई हैं। केंद्र सरकार ने उनके खिलाफ 2009 के 2 लाख रुपये रिश्वत मामले में मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है। यह मामला उस वक्त का है जब वह इंडस्ट्री एवं कॉमर्स विभाग के डायरेक्टर कम सेक्रेटरी के पद पर तैनात थे। उस समय पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने उन्हें रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा था।
केंद्र सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (DoPT) ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 और 13(2) के तहत मुकदमा चलाने की मंजूरी दी है। आदेश में कहा गया है कि जांच में प्रथम दृष्टया पर्याप्त सबूत मिले हैं। केंद्र ने यह मंजूरी पंजाब सरकार की सिफारिश, केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) की सलाह और जांच रिपोर्ट की समीक्षा के बाद दी है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला अकाली-भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान 9 नवंबर 2009 को पंजाब विजिलेंस ब्यूरो, मोहाली में दर्ज एफआईआर नंबर 9 से जुड़ा है। शिकायतकर्ता, लुधियाना निवासी तुलसी राम मिश्रा ने आरोप लगाया था कि उनके प्लॉट के साथ लगती खाली जमीन के आवंटन के लिए 5 लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई थी।
शिकायतकर्ता का कहना था कि वह वर्ष 2001 से जमीन आवंटन के लिए आवेदन कर रहे थे, लेकिन हर बार यह कहकर मना कर दिया जाता था कि जमीन उपलब्ध नहीं है। शिकायत की जांच के दौरान विजिलेंस ने ट्रैप (रंगे हाथों पकड़ने) की योजना बनाई। 9 नवंबर 2009 को शिकायतकर्ता ने फीनॉल्फथेलिन पाउडर लगे 2 लाख रुपये आरोपी को दिए। छापेमारी के दौरान जब उनके हाथ धुलवाए गए तो घोल का रंग गुलाबी हो गया, जिससे रिश्वत लेने की पुष्टि हुई। टीम ने मौके से नकदी, संबंधित फाइलें और गाड़ी की लॉगबुक भी जब्त की थी।
अब क्यों मिली मंजूरी?
2010 में पंजाब के तत्कालीन राज्यपाल ने अभियोजन की मंजूरी दे दी थी, लेकिन 2015 में ट्रायल कोर्ट ने जंजुआ को डिस्चार्ज कर दिया क्योंकि चूंकि वह आईएएस अधिकारी थे, इसलिए मंजूरी केंद्र सरकार से होनी चाहिए थी। 2016 में शिकायतकर्ता ने हाईकोर्ट में अपील की। 2018 में पंजाब सरकार ने केंद्र से मंजूरी की मांग वापस ले ली।
2023 में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को निर्देश दिया कि सभी दस्तावेज केंद्र को भेजे जाएं, और केंद्र को 3 महीने में फैसला करने को कहा। 2025 में हाईकोर्ट ने देरी के लिए पंजाब सरकार पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया और एक महीने में फाइल भेजने का आदेश दिया। यह फाइल 28 नवंबर 2025 को केंद्र को भेजी गई, जिसके बाद अब केंद्र ने मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है।
कौन हैं वीके जंजुआ?
वीके जंजुआ 1989 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। 2022 में जब पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार बनी, तो तत्कालीन चीफ सेक्रेटरी अनिरुद्ध तिवारी को हटाकर उन्हें पंजाब का 41वां चीफ सेक्रेटरी बनाया गया था। वह उस समय जेल और चुनाव के स्पेशल चीफ सेक्रेटरी थे।
जंजुआ ने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज, चंडीगढ़ से बी-टेक किया है और एक इंजीनियर के तौर पर भी काम किया है। वह पहले IRS (इंडियन रेवेन्यू सर्विस) में चुने गए थे, फिर 1989 में IAS में सिलेक्ट हुए। उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी से एलएलबी और इग्नू से एमबीए किया है। अमेरिका की ड्यूक यूनिवर्सिटी से इंटरनेशनल डेवलपमेंट पॉलिसी में एमए भी किया है। फतेहगढ़ साहिब के डीसी रहते हुए उन्होंने प्रिज्म सॉफ्टवेयर तैयार कराया था, जिससे पंजाब में संपत्ति के रिकॉर्ड डिजिटल करने की शुरुआत हुई।
जंजुआ का बयान- मुझे फंसाया गया था
अपने खिलाफ भ्रष्टाचार के इस मामले में वीके जंजुआ पहले दावा कर चुके हैं कि उन्हें खनन माफिया और शिकायतकर्ता द्वारा रची गई साजिश के तहत फंसाया गया था। उन्होंने कहा था कि जिस वक्त उनसे लुधियाना में मिलने की बात कही गई, वे वहां मौजूद थे। उनसे प्लॉट आवंटित करने के लिए कहा गया, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया क्योंकि नियमों के मुताबिक यह संभव नहीं था।
विश्लेषण: 17 साल पुराने केस में नई मोड़
वीके जंजुआ का यह मामला 17 साल पुराना है और इसमें कई कानूनी उतार-चढ़ाव आए हैं। एक समय ट्रायल कोर्ट से डिस्चार्ज होने के बाद अब केंद्र सरकार की मंजूरी से उनके खिलाफ मुकदमा चलेगा। यह मामला सियासी तौर पर भी अहम है क्योंकि जंजुआ को AAP सरकार ने सीएस बनाया था। हालांकि, यह केस उस समय का है जब वह आईएएस अधिकारी थे और उनकी नियुक्ति का इस केस से कोई लेना-देना नहीं है। लेकिन विपक्ष इस मुद्दे को सरकार के खिलाफ हथियार बना सकता है। फिलहाल, केंद्र की मंजूरी के बाद अब स्पेशल कोर्ट में इस मामले की सुनवाई शुरू होगी और कानून अपना काम करेगा।
मुख्य बातें (Key Points)
पंजाब के पूर्व चीफ सेक्रेटरी वीके जंजुआ पर 2009 के 2 लाख रुपये रिश्वत मामले में मुकदमा चलेगा।
केंद्र सरकार के DoPT ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अभियोजन की मंजूरी दे दी।
मामला 2009 का है, जब विजिलेंस ने उन्हें रंगे हाथों पकड़ा था।
2022 में AAP सरकार आते ही उन्हें चीफ सेक्रेटरी बनाया गया था।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद फाइल 28 नवंबर 2025 को केंद्र भेजी गई थी, अब मंजूरी मिली।








