Vande Mataram Row ने एक बार फिर देश की सियासत को गर्मा दिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 6 फरवरी 2026 को एक अधिसूचना जारी कर स्कूलों और सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम के छह छंदों वाले पूरे गीत को गाना या बजाना अनिवार्य कर दिया है। इस फैसले के बाद मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने की चेतावनी दी है, जबकि उत्तर प्रदेश में सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेता एक-दूसरे पर हमलावर हो गए हैं।
नई अधिसूचना के मुताबिक, अब सरकारी कार्यक्रमों और स्कूलों में वंदे मातरम का गायन या वादन अनिवार्य होगा। वंदे मातरम के पूरे छह छंद गाए जाएंगे, जिनकी अवधि 3 मिनट 10 सेकंड होगी। अगर किसी सरकारी कार्यक्रम में राष्ट्रगान भी होना है तो पहले वंदे मातरम गाया जाएगा और फिर राष्ट्रगान। वंदे मातरम के गायन या वादन के दौरान सावधान की मुद्रा में खड़ा होना अनिवार्य होगा, हालांकि सिनेमाघरों में फिल्म के दौरान बजने पर यह अनिवार्य नहीं होगा।
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने ठोका ऐतराज, कहा- कोर्ट जाएंगे
केंद्र के इस फैसले के बाद मुस्लिम संगठनों ने सख्त आपत्ति जताई है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने की चेतावनी दी है। बोर्ड का कहना है कि वंदे मातरम की कुछ पंक्तियां इस्लामी आस्था से टकराती हैं। उन्होंने 1937 के ऐतिहासिक संदर्भ का हवाला देते हुए कहा कि उस वक्त मौलाना अबुल कलाम आजाद, हुसैन अहमद मदनी और हसरत मोहानी जैसे बड़े उलेमा ने कांग्रेस को लिखकर आपत्ति जताई थी, जिसके बाद कांग्रेस ने एक प्रस्ताव पास कर वंदे मातरम की उन पंक्तियों को हटा दिया था, जो मुस्लिम आस्था के खिलाफ थीं।
बोर्ड के एक प्रवक्ता ने कहा, “जिन पंक्तियों में मां दुर्गा, सरस्वती और जननी की उपासना है, वह हमारी आस्था से टकराती हैं। 1937 में कांग्रेस ने इसे मान लिया था। अब सरकार इसे अनिवार्य कर रही है, यह गलत है। हम इसके खिलाफ कोर्ट जाएंगे।”
यूपी में सियासी घमासान: योगी बोले- विरोध करने वालों को धक्का देकर बाहर करो
इस मुद्दे पर उत्तर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिना नाम लिए समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा, “बाबर की कब्र में सजदा करने वाले और वंदे मातरम का विरोध करने वाले, माफियाओं की कब्र पर फातिहा पढ़ने वाले कह रहे हैं कि हम वंदे मातरम नहीं गाएंगे। हिंदुस्तान का खाएंगे और वंदे मातरम नहीं गाएंगे?” उन्होंने कहा, “जो व्यक्ति वंदे मातरम का विरोध करता है, कान पकड़कर उसे धक्का देकर बाहर करना चाहिए। वंदे मातरम का जो विरोध करेगा, वो वहीं जाए जहां उसको यह विरोध के स्वर दिखाई देते हैं। हिंदुस्तान की धरती पर उसको रहने का कोई अधिकार नहीं बनता।”
वहीं, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पलटवार करते हुए कहा, “बीजेपी ने कभी वंदे मातरम नहीं गाया। वे समाजवादी पार्टी से इसलिए घबराए हुए हैं क्योंकि हम एकजुट होकर लगातार जोड़ रहे हैं। बीजेपी जब कमजोर होती है, तो कमिलर (कमीनेपन का) रास्ता बनाती है।” उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे फैसले लेती है।
कांग्रेस सांसद का बयान भी आया सामने
इस मसले पर कांग्रेस के एक सांसद ने भी बयान दिया है। उन्होंने कहा, “वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने पर सरकार की ओर से कई आयोजन हो रहे हैं। सिक्के और डाक टिकट जारी किए गए हैं। लेकिन इसे अनिवार्य बनाने की जरूरत क्यों पड़ी? 78 साल की आजादी के बाद भी अगर हमें इसे अनिवार्य करना पड़ रहा है, तो इसका मतलब है कि लोक भावना बनाने की कोशिशें नाकाम रहीं। कुछ लोग इस धरती को मातृभूमि मानने को तैयार नहीं।”
‘जानें पूरा मामला’
6 फरवरी 2026 को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गजट नोटिफिकेशन जारी कर वंदे मातरम के गायन को लेकर नया प्रोटोकॉल तय किया। इसके तहत स्कूलों में रोज और सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम के छह छंद (3 मिनट 10 सेकंड) गाना या बजाना अनिवार्य है। अगर राष्ट्रगान भी होना है तो पहले वंदे मातरम गाया जाएगा। गायन के दौरान सावधान मुद्रा में खड़ा होना अनिवार्य है, लेकिन सिनेमाघरों में यह अनिवार्य नहीं होगा। इस फैसले के बाद मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कानूनी लड़ाई की चेतावनी दी है, जबकि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव के बीच जुबानी जंग जारी है। 1937 में भी वंदे मातरम की कुछ पंक्तियों पर मुस्लिम नेताओं ने आपत्ति जताई थी, जिसके बाद कांग्रेस ने उन पंक्तियों को हटाने का प्रस्ताव पारित किया था।
मुख्य बातें (Key Points)
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 6 फरवरी को अधिसूचना जारी कर स्कूलों और सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम के छह छंद अनिवार्य किए।
गायन की अवधि 3 मिनट 10 सेकंड होगी, राष्ट्रगान से पहले गाया जाएगा वंदे मातरम।
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई की चेतावनी दी, 1937 के ऐतिहासिक संदर्भ का दिया हवाला।
योगी आदित्यनाथ ने विरोध करने वालों पर हमला बोलते हुए कहा कि उन्हें धक्का देकर बाहर करना चाहिए।
अखिलेश यादव ने पलटवार करते हुए बीजेपी पर असली मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया।








