Vande Bharat Sleeper Food Menu: भारतीय रेलवे ने यात्रियों की भारी मांग और तीखी आलोचनाओं के बाद आखिरकार एक बड़ा यू-टर्न ले लिया है। अब हावड़ा-कामाख्या रूट पर चलने वाली देश की प्रीमियम वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में सफर का असली स्वाद यानी ‘नॉन-वेज’ खाना वापस आ गया है, जिससे खाने के शौकीन यात्रियों के चेहरे खिल उठे हैं।
रेलवे का यू-टर्न: जनता की मांग के आगे झुका सिस्टम
लॉन्च होने के महज एक महीने के अंदर ही, IRCTC ने अपनी भोजन नीति में बड़ा बदलाव किया है। हावड़ा-कामाख्या-हावड़ा वंदे भारत स्लीपर ट्रेन (Train No: 27575/27576) में अब यात्रा करने वाले मुसाफिर टिकट बुक करते समय ही वेज और नॉन-वेज खाने के विकल्प में से चुनाव कर सकेंगे।
यह फैसला तब लिया गया जब यात्रियों ने सोशल मीडिया और रेलवे प्लेटफॉर्म पर नॉन-वेज खाना न मिलने को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी। बंगाल और पूर्वोत्तर के लोगों के लिए मछली और मांस उनके भोजन का मुख्य हिस्सा है, और ट्रेन में ये विकल्प न होने से वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे थे।
अश्विनी वैष्णव का हस्तक्षेप और मेन्यू में बदलाव
रविवार, 1 फरवरी को रेल मंत्री Ashwini Vaishnaw ने खुद सामने आकर स्थिति को संभाला। उन्होंने आश्वासन दिया था कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में जल्द ही नॉन-वेज खाने का विकल्प शुरू किया जाएगा।
इससे पहले आईआरसीटीसी द्वारा जारी मेन्यू में मछली और मांस पूरी तरह गायब थे, जिसे लेकर काफी विवाद हुआ था। अब आईआरसीटीसी ने बयान जारी कर कहा है कि पूर्वोत्तर भारत और बंगाल की समृद्ध खानपान परंपराओं का सम्मान करते हुए, ट्रेन के ऑनबोर्ड मेन्यू में असली क्षेत्रीय स्वाद (Authentic Regional Taste) शामिल किया गया है।
थाली में क्या परोसा जाएगा?
खाने के शौकीनों के लिए यह खबर किसी दावत से कम नहीं है। नए प्रावधानों के तहत, यात्रियों को अब ‘वेजिटेरियन पनीर मसाला’ या ‘नॉन-वेज चिकन डिश’ चुनने का मौका मिलेगा।
नॉन-वेज थाली की खासियत: इसमें आपको बंगाली या असमिया स्टाइल में बना चिकन मिलेगा। इसमें 70 ग्राम ग्रेवी और 50 से 60 ग्राम बोनलेस चिकन होगा।
अन्य व्यंजन: बाकी मेन्यू वैसा ही रहेगा, जिसमें जीरा कॉर्न पुलाव, तवा पराठा, मिक्स दाल, असमिया स्टाइल बीन्स और मीठे में रसगुल्ला शामिल है।
राजनीति और ‘प्लेटों की पुलिसिंग’
यह मामला केवल खाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने राजनीतिक रंग भी ले लिया था। पश्चिम बंगाल में यह मुद्दा गरमा गया था। सत्ताधारी Trinamool Congress ने केंद्र की भारतीय जनता पार्टी पर आरोप लगाया था कि वे लोगों की प्लेटों की पुलिसिंग (Food Policing) कर रहे हैं और उनकी खाने की आदतों को कंट्रोल करने की कोशिश कर रहे हैं। इस विवाद के बाद रेलवे का यह कदम डैमेज कंट्रोल और यात्रियों की सुविधा दोनों के रूप में देखा जा रहा है।
आम यात्री पर असर (Human Impact)
रेलवे के इस फैसले से यात्रियों को अपनी पसंद का खाना चुनने की आजादी मिली है। लंबी दूरी की यात्रा में अपनी संस्कृति और स्वाद के अनुसार भोजन मिलना न केवल सफर को आरामदायक बनाता है, बल्कि यात्रियों को यह एहसास भी दिलाता है कि उनकी पसंद का सम्मान किया जा रहा है।
‘जानें पूरा मामला’
17 जनवरी को प्रधानमंत्री Narendra Modi ने इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाई थी और 22 जनवरी से इसकी रेगुलर सर्विस शुरू हुई थी। लेकिन शुरुआत से ही प्रीमियम ट्रेन होने के बावजूद नॉन-वेज न मिलने की शिकायतें आ रही थीं। अब रेलवे ने सुधार करते हुए चिकन डिश को शामिल कर लिया है, जिसका क्षेत्र के यात्रियों ने गर्मजोशी से स्वागत किया है।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
ट्रेन: हावड़ा-कामाख्या वंदे भारत स्लीपर (27575/27576)।
बदलाव: अब टिकट बुकिंग के समय नॉन-वेज (चिकन) चुनने का विकल्प।
मात्रा: 70 ग्राम ग्रेवी के साथ 50-60 ग्राम बोनलेस चिकन।
कारण: यात्रियों की शिकायत और सांस्कृतिक खानपान का सम्मान।








