Vaibhav Sooryavanshi Century U19 WC भारतीय क्रिकेट के उभरते हुए सितारे वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Sooryavanshi) ने शुक्रवार को आईसीसी (ICC) अंडर-19 वर्ल्ड कप के खिताबी मुकाबले में इंग्लैंड के खिलाफ अपनी बल्लेबाजी से आग लगा दी। बाएं हाथ के इस आक्रामक सलामी बल्लेबाज ने महज 55 गेंदों पर अपना शतक पूरा किया, जो इस टूर्नामेंट के इतिहास की सबसे यादगार पारियों में से एक बन गई है। वैभव की इस पारी की बदौलत भारत ने फाइनल में अपनी स्थिति बेहद मजबूत कर ली है।
इस ऐतिहासिक पारी के दौरान वैभव ने मैदान के चारों ओर छक्कों की बारिश कर दी। उन्होंने 20वें ओवर की आखिरी गेंद पर एक रन लेकर अपना शतक पूरा किया। वैभव की इस पारी में 8 शानदार चौके और 8 गगनचुंबी छक्के शामिल रहे। इस धमाकेदार प्रदर्शन के साथ ही वह अंडर-19 वर्ल्ड कप के इस संस्करण में सबसे ज्यादा छक्के लगाने वाले बल्लेबाज भी बन गए हैं। पूरे टूर्नामेंट में उनके नाम अब 20 से ज्यादा छक्के दर्ज हो चुके हैं।
‘अंडर-19 फाइनल में शतक जड़ने वाले तीसरे भारतीय’
वैभव सूर्यवंशी ने इस शतक के साथ ही एक विशिष्ट क्लब में अपनी जगह बना ली है। वह अंडर-19 वर्ल्ड कप के फाइनल में शतक बनाने वाले भारत के केवल तीसरे बल्लेबाज बन गए हैं। उनसे पहले यह कारनामा साल 2012 में उन्मुक्त चंद और साल 2018 में मनजोत कालरा ने किया था। वैभव की पारी की रफ्तार का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने अपना अर्धशतक 32 गेंदों में पूरा किया था, लेकिन अगले 50 रन बनाने के लिए उन्होंने महज 23 गेंदें खेलीं। उनकी इस निडर बल्लेबाजी ने इंग्लैंड के गेंदबाजों को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया।
‘बिहार के समस्तीपुर में जश्न का माहौल, आतिशबाजी और मिठाइयां’
जैसे ही वैभव का शतक पूरा हुआ, उनके गृह नगर बिहार के समस्तीपुर (Samastipur) जिले के ताजपुर में जश्न का सैलाब उमड़ पड़ा। स्थानीय लोगों ने सड़कों पर उतरकर पटाखे फोड़े और एक-दूसरे को मिठाइयां खिलाकर खुशी का इजहार किया। समस्तीपुर के लोगों का कहना है कि वैभव बिहार के युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद जिस तरह से वैभव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है, वह कड़ी मेहनत और अटूट जुनून की मिसाल है। उनके पिता संजीव सूर्यवंशी, जो खुद क्रिकेटर बनने का सपना देखते थे, आज अपने बेटे की इस उपलब्धि पर बेहद भावुक और गौरवान्वित हैं।
’12 साल की उम्र में रणजी डेब्यू और लारा-पंत को मानते हैं आदर्श’
27 मार्च 2011 को जन्मे वैभव सूर्यवंशी की क्रिकेट यात्रा किसी फिल्म की कहानी जैसी है। उनके पिता ने 4-5 साल की उम्र से ही उनकी प्रतिभा को पहचान लिया था और ट्रेनिंग शुरू कर दी थी। वैभव ने जनवरी 2024 में तब सुर्खियां बटोरी थीं, जब उन्होंने महज 12 साल 284 दिन की उम्र में बिहार के लिए रणजी ट्रॉफी (Ranji Trophy) में डेब्यू किया। वह 1986 के बाद प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेलने वाले सबसे युवा भारतीय खिलाड़ी बने। वह दिग्गज ब्रायन लारा और ऋषभ पंत (Rishabh Pant) को अपना आदर्श मानते हैं, और उनकी बल्लेबाजी में इन दोनों सितारों की आक्रामकता साफ झलकती है।
‘भारतीय क्रिकेट का भविष्य सुरक्षित हाथों में’
एक वरिष्ठ डिजिटल न्यूज़ संपादक के रूप में इस प्रदर्शन का विश्लेषण करें तो वैभव सूर्यवंशी केवल एक प्रतिभाशाली खिलाड़ी नहीं, बल्कि आधुनिक क्रिकेट की उस नस्ल का प्रतिनिधित्व करते हैं जो किसी भी दबाव में झुकना नहीं जानती। फाइनल जैसे बड़े मंच पर 180 के स्ट्राइक रेट से शतक जड़ना उनके मानसिक कौशल (Mental Toughness) को दर्शाता है। आईपीएल नीलामी में भारी बोली लगने के बाद उन पर उम्मीदों का बोझ था, जिसे उन्होंने इस शतकीय पारी से धो डाला है। बिहार जैसे राज्य से निकलकर विश्व पटल पर छा जाना यह संकेत है कि भारतीय क्रिकेट का ‘नर्सरी सिस्टम’ अब छोटे शहरों और गांवों तक पहुंच चुका है।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
वैभव सूर्यवंशी ने अंडर-19 वर्ल्ड कप फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ 55 गेंदों में शतक जड़ा।
वह उन्मुक्त चंद और मनजोत कालरा के बाद फाइनल में शतक जड़ने वाले तीसरे भारतीय बने।
वैभव ने अपनी पारी में 8 चौके और 8 छक्के मारे, टूर्नामेंट में कुल 20+ छक्के लगाए।
12 साल की उम्र में रणजी ट्रॉफी डेब्यू करने वाले वह सबसे युवा भारतीय खिलाड़ियों में शामिल हैं।
उनके गृह नगर समस्तीपुर (बिहार) में शतक के बाद ऐतिहासिक जश्न और आतिशबाजी हुई।








