Uzair Baloch का नाम सुनते ही कराची की गलियों में आज भी सन्नाटा पसर जाता है। कराची के लियारी इलाके का यह वो खूनी डॉन है, जिसके ऊपर 198 कत्लों के आरोप हैं और ये आरोप किसी और ने नहीं, खुद उज़ैर ने इन्वेस्टिगेशन के दौरान कबूल किए हैं। पाकिस्तान आर्मी ने उस पर जासूसी के आरोप लगाए कि वह भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ (RAW) और ईरानी इंटेलिजेंस के लिए काम करता था। आज यह शख्स कराची सेंट्रल जेल में बंद है, लेकिन उसकी कहानी इतनी खतरनाक है कि बॉलीवुड फिल्म “धुरंधर” में भी इसे दिखाया गया है।
लियारी की गलियों में पैदा हुआ एक ट्रांसपोर्टर का बेटा
11 जनवरी 1970 को कराची के लियारी इलाके में उज़ैर जान बलोच का जन्म हुआ। बलोच कम्युनिटी का यह इलाका उनका गढ़ माना जाता था। उज़ैर के परिवार में कुछ लोग क्रिमिनल एक्टिविटीज में जरूर थे, लेकिन उसके पिता फैज मोहम्मद, जिन्हें लोग “मामा फैजू” कहते थे, एक लोकल ट्रांसपोर्टर थे। उनका अपना बिजनेस था और क्रिमिनल दुनिया से उनका कोई लेना-देना नहीं था।
उज़ैर का पूरा खानदान ईरान के सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांत से ताल्लुक रखता था। परिवार के कई सदस्य ईरान में ही रहते थे, और यही ईरान कनेक्शन आगे चलकर उज़ैर की जिंदगी का सबसे बड़ा ट्विस्ट बनने वाला था।
पढ़ाई छोड़ी, राजनीति चुनी: शुरुआत में नेता बनना चाहता था Uzair Baloch
1992 में उज़ैर ने लियारी के एक लोकल स्कूल से मैट्रिकुलेशन पास की और उसके बाद गवर्नमेंट डिग्री साइंस कॉलेज में ग्रेजुएशन के लिए एडमिशन ले लिया। लेकिन लियारी का माहौल कुछ ऐसा था कि पढ़ाई में दिमाग लगा नहीं। धीरे-धीरे उसने पढ़ाई के साथ-साथ अपने परिवार का ट्रांसपोर्ट और जमीन का बिजनेस संभालना शुरू कर दिया।
1997 में उज़ैर की शादी समीना से हुई। 1999 में पहली बेटी और 2002 में बेटा पैदा हुआ। इस दौरान Uzair Baloch की क्रिमिनल एक्टिविटीज शुरू नहीं हुई थीं। उसका सपना था नेता बनना, राजनीति में आना। 2001 में उसने लियारी के म्युनिसिपल इलेक्शन में मेयर पद के लिए इंडिपेंडेंट कैंडिडेट के तौर पर चुनाव लड़ा, लेकिन पाकिस्तान पीपल्ज पार्टी (PPP) के उम्मीदवार हबीब हसन ने उसे बड़े अंतर से हरा दिया।
पिता का बेरहमी से कत्ल: जिसने बदल दी उज़ैर की पूरी ज़िंदगी
2000 के शुरुआती सालों में लियारी में दो गैंग्स के बीच दशकों पुरानी दुश्मनी अपने चरम पर पहुंच चुकी थी। ड्रग ट्रेड, लैंड ग्रैबिंग और एक्सटॉर्शन के लिए सड़कों पर खून बहता था। इस खूनी जंग के दो सबसे बड़े नाम थे: अरशद पप्पू (हाजी लालू का बेटा, जो 70-80 के दशक का कुख्यात ड्रग लॉर्ड था) और रहमान डकैत (उज़ैर का फर्स्ट कज़िन)।
जनवरी 2003 में वो हादसा हुआ जिसने उज़ैर बलोच को हमेशा के लिए बदल दिया। उज़ैर के पिता फैज मोहम्मद का ट्रांसपोर्ट का काम अरशद पप्पू गैंग के इलाके में पड़ता था। एक्सटॉर्शन के पैसे न देने पर अरशद पप्पू गैंग के लोगों ने मामा फैजू को लियारी के चाकीवारा इलाके से किडनैप कर लिया। बेरहमी से टॉर्चर करने के बाद उनकी हत्या कर दी गई और लाश को एक बोरी में भरकर फेंक दिया गया। उस दौर में लियारी की हर अगली गली में बोरियों में लाशें मिलना आम बात हो गई थी।
कोर्ट से न्याय नहीं मिला तो चुन लिया अपराध का रास्ता
उज़ैर ने शुरू में अपने पिता के कत्ल का केस कोर्ट में लड़ने की कोशिश की। लेकिन अरशद पप्पू गैंग की लगातार धमकियां आ रही थीं और पुलिस-कोर्ट दोनों ने उसकी अनदेखी की। इसी निराशा ने उज़ैर को अपराध की दुनिया में धकेल दिया। रहमान डकैत, जो उज़ैर का फर्स्ट कज़िन था, उसने ही पहली बार ऑफर दिया कि अगर बदला लेना है तो मेरे गैंग में आ जाओ, नेता-मंत्री बनने का सपना छोड़ दो।
2003 में ही Uzair Baloch ने रहमान डकैत का गैंग ज्वाइन कर लिया। यहीं से एक ट्रांसपोर्टर के बेटे का खूनी डॉन बनने का सफर शुरू हुआ।
PPP ने बचाया, चौधरी असलम की गिरफ्त से छूटा
उसी 2003 में लियारी में एक नए SSP CID चौधरी असलम तैनात हुए, जिन्होंने गैंग्स पर क्रैकडाउन शुरू किया। शुरुआत में ही Uzair Baloch चौधरी असलम के हाथ लग गया। सुजावल से कराची के रास्ते में उसे गिरफ्तार किया गया। लेकिन हैरानी की बात यह थी कि महज दो घंटे में ही PPP के कुछ लोग आए और उज़ैर को जेल से छुड़ाकर ले गए।
यही वो पल था जब Uzair Baloch के मन में PPP के लिए एक अंधी वफादारी पैदा हो गई। उसने तय कर लिया कि जो भी PPP कहेगी, वो करेगा। और PPP ने भी उसका भरपूर इस्तेमाल करना शुरू कर दिया।
2003 से 2009: ब्लडबाथ का दौर और रहमान डकैत का एनकाउंटर
2003 से 2009 के बीच उज़ैर और रहमान डकैत ने अरशद पप्पू गैंग के खिलाफ खूनी जंग छेड़ दी। लियारी की सड़कों पर हर दिन खून बहता था, गैंग वॉर होता था। अरशद पप्पू और उसके कई साथी मारे गए।
इसी बीच 2006 में जब पुलिस ने लियारी में ऑपरेशन शुरू किया तो Uzair Baloch ईरान भाग गया, जहां उसके पुराने रिश्तेदार रहते थे। ईरान में उसने पासपोर्ट और नेशनल आईडी कार्ड बनवाया। 2010 में इस पासपोर्ट को रिन्यू भी कराया। ईरान में उसने ऐसे नेटवर्क और कनेक्शन बनाए जो आगे चलकर उसकी जासूसी के आरोपों का आधार बने।
2008 के आसपास रहमान डकैत ने अपनी क्रिमिनल पावर को राजनीतिक ताकत में बदलने के लिए पीपल्स अमन कमेटी (PAC) बनाई। ऑफिशियली यह बलोच कम्युनिटी की सेवा का दावा करती थी, लेकिन असल में यह एक्सटॉर्शन, ड्रग स्मगलिंग, किडनैपिंग, मर्डर और टारगेट किलिंग का पूरा रैकेट चलाती थी।
PPP ने PAC को इसलिए सपोर्ट किया क्योंकि इससे उसे दो फायदे मिलते थे: पहला, राइवल पार्टी MQM के लोगों को मारने के लिए आर्म्ड सपोर्ट। दूसरा, लियारी का वोट बैंक। बदले में PAC को PPP से राजनीतिक प्रोटेक्शन मिलता था।
9 अगस्त 2009 को कराची पुलिस ने एक विवादास्पद एनकाउंटर में रहमान डकैत को मार गिराया। कई रिपोर्ट्स में इसे फर्जी एनकाउंटर बताया गया। कहा जाता है कि PPP के ही लोगों ने रहमान डकैत को बुलाकर फंसाया और पुलिस ने फेक एनकाउंटर में उसे मार दिया। रहमान डकैत पर 85 से ज्यादा गंभीर क्राइम केस दर्ज थे।
रहमान डकैत की मौत के बाद: लियारी का नया बादशाह बना Uzair Baloch
रहमान डकैत की मौत ने लियारी में एक पावर वैक्यूम पैदा कर दिया। सबकी निगाहें उज़ैर बलोच पर टिकी थीं क्योंकि वह रहमान का करीबी रिश्तेदार और गैंग का सेकंड-इन-कमांड बन चुका था। रहमान की मौत के बाद Uzair Baloch ने PAC की लीडरशिप संभाल ली और लियारी का नया डॉन बन गया।
उज़ैर का राइट हैंड बना बाबा लाडला, जो लंबे समय तक उसका सबसे भरोसेमंद साथी रहा। लेकिन 2013 में दोनों के बीच दरार पड़ गई और बाद में वे एक-दूसरे के जानी दुश्मन बन गए।
2010 के बाद लियारी पूरी तरह वॉर ज़ोन बन चुका था। पुलिस रिकॉर्ड्स बताते हैं कि गैंग वॉर में RPG से फायरिंग हुई, हैंड ग्रेनेड फेंके गए और हैवी वेपन्स का इस्तेमाल हुआ। PAC का नेटवर्क लियारी से निकलकर मालीर, ओल्ड गोलीमार, मवाच गोथ और सिंध-बलूचिस्तान के कई इलाकों तक फैल गया।
PPP और उज़ैर का गठजोड़: पुलिस ट्रांसफर से लेकर टिकट तक
जॉइंट इन्वेस्टिगेशन टीम (JIT) की रिपोर्ट, पाकिस्तानी रेंजर्स के ऑफिशियल इंटरव्यूज और दस्तावेजों के अनुसार PPP के कई बड़े नेताओं ने Uzair Baloch का इस्तेमाल किया। लियारी के MLA नबील गबोल, सांसद जुल्फिकार मिर्जा और कई मंत्रियों के नाम सामने आए।
एक पूर्व रेंजर सेक्टर कमांडर ने टीवी इंटरव्यू में कहा कि PPP की नेता फरियाल तालपुर और सिंध के एक मुख्यमंत्री ने उज़ैर बलोच के घर आकर लंच और डिनर किया। 2013 के चुनाव में लियारी से कौन कैंडिडेट खड़ा होगा, यह भी Uzair Baloch की मर्जी से तय हुआ।
सिंध पुलिस में कम से कम सात SHO और एक SP का ट्रांसफर उज़ैर के कहने पर हुआ। सिंध फिशरीज में भ्रष्टाचार से उसने करोड़ों रुपये कमाए। एक साल में उसने 11 ट्रेडर्स को इसलिए मरवा दिया क्योंकि वे राइवल पार्टी के लिए काम करते थे।
भुट्टो हाउस में झड़प: जब दोस्ती दुश्मनी में बदली
2011 में एक ऐसी घटना हुई जिसने PPP और Uzair Baloch के रिश्ते में दरार डाल दी। आसिफ अली ज़रदारी के भाई उज़ैर मुजफ्फर टापी के साथ भुट्टो फैमिली हाउस में उज़ैर बलोच की झड़प हो गई। दरअसल उज़ैर को 25 करोड़ के कॉन्ट्रैक्ट दिए जा रहे थे, लेकिन उसने इन्हें इसलिए ठुकरा दिया क्योंकि इनमें लियारी के विकास का कहीं जिक्र नहीं था। उज़ैर चाहता था कि गैंगस्टर करियर खत्म होने के बाद वह सीधा पॉलिटिशियन बने, और इसके लिए लियारी में उसकी छवि एक लीडर की होनी चाहिए थी।
इसी वक्त से PPP के लिए Uzair Baloch “एसेट” से “लायबिलिटी” में बदलने लगा। उधर उज़ैर ने भी देखा कि उसके गैंग पर अचानक पुलिस ऑपरेशन बढ़ गए, उसके लोग गिरफ्तार होने लगे। उसका शक सीधा PPP पर गया।
PPP नेता की हत्या और ऑपरेशन लियारी
अप्रैल 2012 में एक बड़ा इंसिडेंट हुआ। तत्कालीन प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी की कन्विक्शन के खिलाफ PPP एक रैली निकाल रही थी। इस रैली को लीड कर रहे PPP नेता मलिक मोहम्मद खान को उज़ैर बलोच गैंग के लोगों ने गोली मारकर हत्या कर दी। शक की सुई लियारी के MLA नबील गबोल पर गई, जिसने कथित तौर पर बलोच गैंग का इस्तेमाल करके अपने ही पार्टी लीडर को खत्म कराया ताकि कोई और नेता उभरकर सामने न आए।
इसके बाद तत्कालीन इंटीरियर मिनिस्टर रहमान मलिक ने ऑपरेशन लियारी को हरी झंडी दे दी। 27 अप्रैल 2012 को चौधरी असलम ने लियारी टास्क फोर्स बनाकर ऑपरेशन शुरू किया। लेकिन पहला फेज पुलिस के लिए भयावह साबित हुआ। Uzair Baloch के गैंगस्टर्स ने तंग गलियों का फायदा उठाते हुए पुलिस पर RPG और स्नाइपर से हमले किए। आठ दिनों तक अंधाधुंध फायरिंग हुई, कई नागरिक मारे गए, लेकिन उज़ैर बलोच हाथ नहीं आया। वह एक बार फिर ईरान भाग गया।
10 साल बाद लिया खूनी बदला: अरशद पप्पू की दर्दनाक मौत
मार्च 2013 में Uzair Baloch ने वो काम किया जिसने उसे रहमान डकैत से भी ज्यादा ब्रूटल साबित कर दिया। 2012 में एक कोर्ट ने अरशद पप्पू को उज़ैर के पिता फैज मोहम्मद के कत्ल के केस में सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था। इसके बाद उज़ैर ने 10 साल पुराना बदला लेने का फैसला किया।
16-17 मार्च की दरमियानी रात को अरशद पप्पू अपने भाई यासिर अराफात और ट्रस्टेड साथी जुम्मा शेरा के साथ कराची के डिफेंस एरिया में एक फ्लैट पर फैमिली गैदरिंग में था। करीब 20 लोगों ने वहां धावा बोला। एफआईआर में मुख्य नाम Uzair Baloch, उसके भाई जुबैर बलोच और बाबा लाडला का दर्ज हुआ। तीनों को वहां से उठा ले जाया गया, बेरहमी से टॉर्चर किया गया, कत्ल करके शव के टुकड़े कर दिए गए। रिपोर्ट्स बताती हैं कि Uzair Baloch ने बाबा लाडला के साथ मिलकर अरशद पप्पू के सिर से लियारी की गलियों में फुटबॉल खेला। यही वो वाकया है जिसने उसे लियारी के इतिहास का सबसे खूंखार अपराधी बना दिया।
दुबई एयरपोर्ट से गिरफ्तारी और रहस्यमयी पाकिस्तान वापसी
ऑपरेशन लियारी का दूसरा फेज शुरू हुआ, इस बार रेंजर्स को लगाया गया। Uzair Baloch समझ गया कि इस बार चौधरी असलम छोड़ेंगे नहीं। वह फिर ईरान भाग गया। पाकिस्तान सरकार ने उसके खिलाफ रेड वारंट जारी किया और उसके सिर पर लाखों का इनाम रखा।
ईरान में उज़ैर चाबहार में रुका, जहां हाजी नासिर नामक व्यक्ति ने उसे सेफ हाउस दिया और ईरानी इंटेलिजेंस अफसरों से मिलवाया। JIT रिपोर्ट में यही कनेक्शन दर्ज है।
29 दिसंबर 2014 को इंटरपोल रिकॉर्ड के अनुसार Uzair Baloch को दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर गिरफ्तार कर लिया गया जब वह मस्कट से दुबई लौट रहा था। उस पर 50 से अधिक एक्सटॉर्शन, टारगेट किलिंग और आतंकी गतिविधियों के चार्ज थे। करीब एक साल वह UAE की कस्टडी में रहा।
जनवरी 2016 में अचानक पाकिस्तानी रेंजर्स ने घोषणा की कि उन्होंने कराची के बाहर एक ऑपरेशन में उज़ैर को पकड़ लिया है। लेकिन असल में माना जाता है कि ISI ने खुफिया तरीके से दुबई से पहले ही उसे पाकिस्तान मंगवा लिया था।
जासूसी के आरोप: भारत की RAW और ईरानी इंटेलिजेंस का कनेक्शन
2017 में पाकिस्तान आर्मी ने एक बड़ा ट्विस्ट लाते हुए ऐलान किया कि Uzair Baloch को ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट और पाकिस्तान आर्मी एक्ट 1952 के तहत जासूसी (Espionage) के चार्ज में गिरफ्तार किया जा रहा है और उसकी कस्टडी अब मिलिट्री कस्टडी में बदली जा रही है।
पाकिस्तान सरकार का दावा था कि Uzair Baloch ने भारत की खुफिया एजेंसी RAW और ईरानी इंटेलिजेंस के साथ मिलकर काम किया। चाबहार में ईरान में उसकी मौजूदगी को कुलभूषण जाधव केस से जोड़कर देखा गया। हालांकि कई विशेषज्ञ इसे पाकिस्तान की उस पुरानी आदत का हिस्सा मानते हैं जहां हर बड़े क्रिमिनल केस में भारत का नाम घसीटा जाता है।
JIT रिपोर्ट का खुलासा: PPP नेताओं के नाम आए सामने
सिंध होम डिपार्टमेंट ने पुलिस, रेंजर्स और इंटेलिजेंस अफसरों की एक जॉइंट इन्वेस्टिगेशन टीम बनाई जिसने Uzair Baloch से पूछताछ की। 2016 में JIT ने अपनी रिपोर्ट पेश की, लेकिन शुरू में इसे सार्वजनिक नहीं किया गया। बाद में फेडरल मिनिस्टर अली ज़ैदी ने इस्लामाबाद में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके JIT रिपोर्ट का एक हिस्सा सार्वजनिक किया।
रिपोर्ट के अनुसार Uzair Baloch ने कबूल किया कि PPP के नेताओं ने उससे हत्याएं कराईं, एक्सटॉर्शन कराया, लैंड ग्रैबिंग कराई और राजनीतिक विरोधियों को खत्म कराया। पुलिस की पोस्टिंग-ट्रांसफर तक PPP उससे कराती थी।
कोर्ट से बरी होता जा रहा है: क्या छूट जाएगा 198 कत्लों का आरोपी?
Uzair Baloch के ऊपर दर्जनों मुकदमे चल रहे हैं, लेकिन एक-एक करके वह बरी होता जा रहा है। मार्च 2024 में एंटी टेररिज्म कोर्ट ने उसे एक पुराने पुलिस हमले के केस में सबूतों की कमी के चलते छोड़ दिया। 2012 और 2016 के केसों में भी यही हुआ। दिसंबर 2025 में कराची की एक कोर्ट ने बलूचिस्तान से कराची तक हथियारों की स्मगलिंग नेटवर्क के केस में भी उसे बरी कर दिया।
गवाह या तो उसके खौफ से कोर्ट आते ही नहीं, या आकर अपने बयानों से मुकर जाते हैं। फिलहाल उसके ऊपर सिर्फ मिलिट्री का जासूसी वाला केस चल रहा है और Uzair Baloch इस समय कराची सेंट्रल जेल में बंद है।
लियारी से लेकर ईरान तक: कैसे काम करता था Uzair Baloch का नेटवर्क
Uzair Baloch की ताकत सिर्फ हथियारों में नहीं, बल्कि उसके फैले हुए नेटवर्क में थी। एक तरफ लियारी से लेकर मालीर, ओल्ड गोलीमार, मवाच गोथ और सिंध-बलूचिस्तान तक उसका क्रिमिनल नेटवर्क फैला हुआ था। दूसरी तरफ ईरान के चाबहार में उसके सेफ हाउस और इंटेलिजेंस कनेक्शन थे। PPP के बड़े नेता उसकी मेज पर बैठकर खाना खाते थे, सिंध पुलिस के अफसरों का ट्रांसफर उसके इशारे पर होता था, और इलेक्शन में कौन टिकट पर लड़ेगा, यह भी वही तय करता था। यह एक ऐसे अपराधी की कहानी है जिसने सियासत, अपराध और जासूसी के तीनों धागों को एक साथ थाम लिया था।
मुख्य बातें (Key Points)
- Uzair Baloch कराची के लियारी इलाके का कुख्यात डॉन है, जिसने खुद 198 कत्लों में शामिल होना कबूल किया।
- पाकिस्तान आर्मी ने उस पर भारतीय खुफिया एजेंसी RAW और ईरानी इंटेलिजेंस के लिए जासूसी करने का आरोप लगाया।
- PPP के कई बड़े नेताओं ने कथित तौर पर उज़ैर का इस्तेमाल हत्या, एक्सटॉर्शन और राजनीतिक विरोधियों को खत्म करने के लिए किया।
- कई केसों में सबूतों की कमी और गवाहों के मुकरने से वह बरी होता जा रहा है, फिलहाल कराची सेंट्रल जेल में बंद है।






