UP Global MedTech Hub बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। जनवरी 2026 में लखनऊ में आयोजित UP HealthTech Conclave 1.0 ने यह साफ कर दिया कि उत्तर प्रदेश अब सिर्फ इलाज का बाजार नहीं रहना चाहता, बल्कि मेडिकल टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और मैन्युफैक्चरिंग का ग्लोबल हब बनना चाहता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंच से ऐलान किया कि प्रदेश को वैश्विक स्तर का मेडिकल टेक्नोलॉजी हब बनाया जाएगा। 35 करोड़ से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जरूरतों को संभालने वाला यह राज्य अब नीति, निवेश और इनोवेशन के सहारे एक नई दिशा तय कर रहा है।
‘कंज्यूमर मार्केट’ से ‘प्रोड्यूसर स्टेट’ बनने की तैयारी
अक्सर लोग सोचते हैं कि भारत का सबसे बड़ा हेल्थकेयर मार्केट दिल्ली, मुंबई या चेन्नई होगा, लेकिन असलियत यह है कि 35 करोड़ से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जरूरतों का भार उठाने वाला राज्य उत्तर प्रदेश है। यह सिर्फ आबादी का आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह एक विशाल बाजार है। लेकिन सरकार की मंशा सिर्फ इस बाजार में मरीज बनकर रहने की नहीं है।
UP HealthTech Conclave 1.0 का मुख्य संदेश यही था कि उत्तर प्रदेश अब ‘कंज्यूमर मार्केट’ से आगे बढ़कर ‘प्रोड्यूसर स्टेट’ बनना चाहता है। यानी वह सिर्फ इलाज का केंद्र नहीं, बल्कि मेडिकल टेक्नोलॉजी, फार्मा मैन्युफैक्चरिंग और रिसर्च का गढ़ बनेगा।
जब सरकार सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि सिस्टम बदलने की बात करे, तो समझो बदलाव आ रहा है
उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं की बात अक्सर सिर्फ आंकड़ों तक सीमित रह जाती है। लेकिन जब मुख्यमंत्री खुद मंच से ग्लोबल मेडटेक हब बनाने की बात करें, जब 1 लाख करोड़ के निवेश का रोडमैप हो, जब रोबोटिक सर्जरी छोटे शहरों तक पहुंचने की बात हो, तो यह सिर्फ सरकारी घोषणा नहीं, बल्कि एक स्ट्रैटेजिक शिफ्ट है। यह बदलाव सीधा आम आदमी से जुड़ा है। बरेली, मुरादाबाद, कानपुर जैसे शहरों में अब हाई-एंड सर्जरी मेड इन इंडिया रोबोट से होगी, तो इसका मतलब है कि महानगरों का एकाधिकार खत्म हो रहा है।
81 मेडिकल कॉलेज और 5.5 करोड़ आयुष्मान कार्ड: संख्या नहीं, सामाजिक सुरक्षा का ढांचा
2017 से पहले उत्तर प्रदेश में सरकारी और निजी क्षेत्र मिलाकर सिर्फ 40 मेडिकल कॉलेज हुआ करते थे। आज यह संख्या बढ़कर 81 हो गई है, जिसमें दो एम्स भी शामिल हैं। यह सिर्फ संख्या का खेल नहीं है। इसका मतलब है डॉक्टरों की उपलब्धता में इजाफा, मेडिकल सीटों का विस्तार और रिसर्च कैपेसिटी में बढ़ोतरी।
एक समय था जब गंभीर बीमारी का मतलब आम आदमी के लिए आर्थिक बर्बादी हुआ करता था। लेकिन आज प्रदेश ने 5.5 करोड़ आयुष्मान गोल्डन कार्ड जारी किए हैं। हर परिवार को 5 लाख रुपये तक की मुफ्त चिकित्सा सुविधा देने वाली यह योजना हेल्थ सेक्टर में सामाजिक सुरक्षा का एक मजबूत ढांचा तैयार कर रही है।
बीमारियों पर काबू: जेई मौतों में 99% की कमी
उत्तर प्रदेश में एक समय ऐसा भी था जब इंसेफेलाइटिस (जेई), डेंगू और मलेरिया हर मानसून में संकट बन जाते थे। हर साल सैकड़ों मासूम बच्चे इस बीमारी की भेंट चढ़ जाते थे। लेकिन सरकारी आंकड़े बताते हैं कि जेई से होने वाली मौतों में 99% की कमी आई है। मातृ और शिशु मृत्यु दर में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। यह सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, बल्कि हजारों परिवारों की जिंदगी से जुड़ी सच्चाई है।
जेवर में मेडिकल डिवाइस पार्क, रोबोटिक सर्जरी का दौर
UP HealthTech Conclave 1.0 में सबसे बड़ी घोषणा जेवर में 350 एकड़ में बनने वाले मेडिकल डिवाइस पार्क को लेकर रही। यहां ग्लोबल मेडटेक कंपनियां आएंगी, स्टार्टअप्स होंगे और निवेशक होंगे। ‘मेक इन इंडिया’ को हेल्थ टेक सेक्टर में उतारने की यह बड़ी पहल है।
कॉन्क्लेव में डॉ. ज्योति यादव ने स्पष्ट कहा कि हर अस्पताल में एचएमआईएस (हॉस्पिटल मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम) अनिवार्य होगा। डेटा संचालित हेल्थ सिस्टम से बेहतर निर्णय, बेहतर इलाज और कम कागजी बोझ होगा। मरीज की जानकारी अब एक क्लिक पर हर डॉक्टर को उपलब्ध होगी।
पीपीपी मॉडल के तहत सरकारी अस्पतालों में रोबोटिक सर्जरी की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। एसएस इनोवेशंस का ‘मंत्रा’ रोबोट अब बरेली, मुरादाबाद और कानपुर के निजी अस्पतालों में भी उपलब्ध होगा। यह पूरी तरह मेड इन इंडिया है। यानी अब हाई-एंड सर्जरी सिर्फ महानगरों तक सीमित नहीं रहेगी।
विजन 2047: 1 लाख करोड़ का निवेश और तीन चरणों का लक्ष्य
उत्तर प्रदेश सरकार ने हेल्थ सेक्टर के लिए विजन 2047 तैयार किया है। अगले 10 वर्षों में 1 लाख करोड़ रुपये का निवेश होगा। यह निवेश चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा:
2030 तक: राष्ट्रीय औसत की बराबरी
2035 तक: देश का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला राज्य
2047 तक: वैश्विक स्तर पर उत्तर प्रदेश
डॉक्टर रेशियो पर भी फोकस है। फिलहाल प्रति 1000 जनसंख्या पर 0.42 डॉक्टर हैं। लक्ष्य है:
2030 तक: 1 डॉक्टर प्रति 1000
2035 तक: 1.5 से 2 डॉक्टर
2047 तक: 2.5 से 3 डॉक्टर प्रति 1000 जनसंख्या
प्राइमरी हेल्थ केयर सिस्टम को मजबूत करने के लिए 25,000 से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर बनाए जाएंगे। इससे 3.5 करोड़ से अधिक लोग टेलीमेडिसिन सेवा से लाभान्वित होंगे।
रिकॉर्ड बजट पुश: 55,820 करोड़ का स्वास्थ्य निवेश
2026-27 के बजट में उत्तर प्रदेश को स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए 55,820 करोड़ रुपये मिले हैं। इसे महज खर्च न समझा जाए, यह हेल्थ कैपिटल इन्वेस्टमेंट है। यही वह स्ट्रैटेजिक शिफ्ट है जो उत्तर प्रदेश को दूसरे राज्यों से अलग बनाता है।
आम आदमी पर क्या असर?
इस पूरे प्लान का सबसे बड़ा फायदा आम आदमी को होगा। जहां एक तरफ आयुष्मान कार्ड से इलाज मुफ्त होगा, वहीं रोबोटिक सर्जरी जैसी सुविधाएं छोटे शहरों में भी उपलब्ध होंगी। डॉक्टरों की संख्या बढ़ने से मरीजों को इंतजार नहीं करना पड़ेगा। टेलीमेडिसिन से दूर-दराज के गांवों में बैठे लोग भी विशेषज्ञ डॉक्टरों से सलाह ले सकेंगे। मेडिकल डिवाइस पार्क बनने से दवाइयों और उपकरणों की कीमतों में कमी आ सकती है क्योंकि अब वे देश में ही बनेंगे। यानी सस्ता और बेहतर इलाज, यही इस विजन की असली ताकत है।
‘जानें पूरा मामला’
उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर हमेशा सवाल उठते रहे हैं। 2017 से पहले प्रदेश में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं का भी अभाव था। इंसेफेलाइटिस जैसी बीमारियों ने हजारों बच्चों की जान ली। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर दिया। मेडिकल कॉलेज खोले गए, आयुष्मान योजना लागू की गई और बीमारियों पर काबू पाया गया। अब सरकार अगले चरण में प्रवेश कर रही है, जहां वह सिर्फ इलाज नहीं, बल्कि मेडिकल टेक्नोलॉजी के निर्माण और इनोवेशन पर काम कर रही है। UP HealthTech Conclave 1.0 इसी दिशा में उठाया गया एक बड़ा कदम है।
मुख्य बातें (Key Points)
सीएम योगी आदित्यनाथ ने UP HealthTech Conclave 1.0 में UP को ग्लोबल मेडटेक हब बनाने का ऐलान किया।
प्रदेश में 81 मेडिकल कॉलेज (2 एम्स सहित) और 5.5 करोड़ आयुष्मान कार्ड जारी।
जेई मौतों में 99% की कमी, मातृ-शिशु मृत्यु दर में सुधार।
जेवर में 350 एकड़ का मेडिकल डिवाइस पार्क, मेड इन इंडिया रोबोटिक सर्जरी छोटे शहरों तक पहुंचेगी।
विजन 2047 के तहत 1 लाख करोड़ निवेश, 2026-27 के बजट में 55,820 करोड़ स्वास्थ्य के लिए आवंटित।








