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US Trade Deal: किसानों के साथ विश्वासघात? कपास आयात पर पीयूष गोयल के बयान से बवाल, AIKS ने मांगा इस्तीफा

अमेरिका से कच्चे कपास के आयात की घोषणा से किसान संगठन भड़के, आल इंडिया किसान सभा ने केंद्रीय मंत्री पर देशद्रोह का आरोप लगाते हुए इस्तीफे की मांग की।

The News Air Team by The News Air Team
शनिवार, 14 फ़रवरी 2026
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US Trade Deal
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US Trade Deal India के तहत कपास आयात को लेकर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के बयान ने सियासी हलचल तेज कर दी है। अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) ने मंत्री के बयान को किसान विरोधी और देशद्रोही करार दिया है। संगठन ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों के हितों से समझौता करते हुए अमेरिकी किसानों को फायदा पहुंचा रही है और मांग की है कि पीयूष गोयल तुरंत इस्तीफा दें।

दरअसल, पीयूष गोयल ने हाल ही में कहा था कि “भारत के पास अमेरिका से कच्चा कपास खरीदने की सुविधा होगी, जिसके बदले में भारत के तैयार टेक्सटाइल उत्पादों को शून्य प्रतिशत पारस्परिक टैरिफ पर अमेरिका में निर्यात किया जाएगा।” उन्होंने यह भी कहा कि जब भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौता (FTA) अंतिम रूप लेगा, तो भारत को बांग्लादेश को दी गई रियायतों की तरह ही फायदा मिलेगा।

AIKS का आरोप- किसानों से सीधा विश्वासघात

आल इंडिया किसान सभा ने इस बयान को पूरी तरह किसान विरोधी और अत्याचारपूर्ण बताया है। संगठन का कहना है कि अमेरिका से कच्चे कपास का आयात घरेलू बाजार में पहले से ही गिर रहे कपास के भाव को और नीचे ले जाएगा। इससे संकटग्रस्त कपास क्षेत्र में कर्ज का बोझ बढ़ेगा और किसानों की आत्महत्या की घटनाओं में भी इजाफा होगा।

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AIKS का कहना है कि यह बयान उन झूठों को बेनकाब करता है कि “कृषि अमेरिकी व्यापार समझौते के दायरे से बाहर है” और “प्रधानमंत्री कभी किसानों के हितों से समझौता नहीं करेंगे।” संगठन ने आरोप लगाया कि भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार अमेरिकी साम्राज्यवाद के सामने घुटने टेक रही है।

किसानों पर क्या होगा असर?

AIKS के मुताबिक, यह कदम सरकार द्वारा घरेलू उद्योगपतियों को अमेरिका से कपास आयात करने के लिए प्रोत्साहित करने जैसा है, जबकि भारतीय किसानों को सीधे वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करने के लिए छोड़ दिया गया है। बिना प्रभावी बाजार समर्थन के भारतीय कपास किसानों के लिए ऐसी प्रतिस्पर्धा में टिक पाना लगभग नामुमकिन होगा।

किसान संगठन ने उस तर्क को भी खारिज कर दिया है कि कुल अमेरिकी निर्यात सीमित है और भारत आयात शुल्क हटाने से घरेलू खपत पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने केरल में रबर किसानों के साथ हुए हालात का उदाहरण देते हुए कहा कि आसियान-भारत एफटीए के बाद वहां किसान बर्बाद हो गए थे।

आंकड़ों के आईने में पूरा मामला

भारत में 2025-26 के लिए कपास उत्पादन का अनुमान 29.22 मिलियन गांठ है, जबकि अमेरिका का उत्पादन 14.41 मिलियन गांठ (भारत के उत्पादन का लगभग आधा) है। भारत ने 30 सितंबर 2025 से 31 दिसंबर 2025 की अवधि के लिए कपास पर आयात शुल्क पहले ही शून्य कर दिया था। इस दौरान अमेरिका से भारत में कपास का निर्यात 95% बढ़ गया था।

AIKS का कहना है कि अगर भारतीय किसानों को अप्रतिबंधित वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए खोल दिया गया, तो वे अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और चीन जैसे भारी सब्सिडी वाले और तकनीकी रूप से उन्नत कपास उत्पादकों के सामने टिक नहीं पाएंगे। इसका नतीजा यह होगा कि पहले से संकट में घिरे कपास किसान खेती छोड़ने को मजबूर हो जाएंगे। याद रहे कि भारत में किसान आत्महत्याओं में सबसे ज्यादा संख्या महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना और मध्य प्रदेश जैसे कपास उगाने वाले राज्यों से आती है।

‘जानें पूरा मामला’

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में घोषणा की कि भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते के तहत भारत अमेरिका से कच्चा कपास आयात करेगा और बदले में भारतीय टेक्सटाइल उत्पादों को अमेरिका में शून्य शुल्क पर निर्यात किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि भारत को बांग्लादेश की तर्ज पर रियायतें मिलेंगी। इस बयान पर आल इंडिया किसान सभा ने कड़ा ऐतराज जताया है। संगठन का कहना है कि इससे घरेलू कपास बाजार पर दबाव बढ़ेगा, किसानों की आय घटेगी और वे कर्ज के बोझ तले दब जाएंगे। AIKS ने पीयूष गोयल के इस्तीफे की मांग करते हुए कपास गांवों में व्यापक विरोध प्रदर्शन और अभियान चलाने की अपील की है।

मुख्य बातें (Key Points)
  • पीयूष गोयल के अमेरिका से कच्चा कपास आयात वाले बयान पर AIKS ने कड़ा विरोध जताया।

  • किसान संगठन ने मंत्री पर देशद्रोह और किसानों से विश्वासघात का आरोप लगाते हुए इस्तीफे की मांग की।

  • AIKS का कहना है कि अमेरिकी कपास आयात से घरेलू भाव गिरेंगे, कर्ज बढ़ेगा और किसान आत्महत्याएं बढ़ेंगी।

  • 2025 के अंत में शून्य आयात शुल्क की अवधि में अमेरिका से भारत में कपास निर्यात 95% बढ़ गया था।

  • संगठन ने कपास गांवों में व्यापक विरोध प्रदर्शन और अभियान चलाने की अपील की है।

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