US India Tariff News: क्या अमेरिका एक बार फिर भारत पर टैरिफ (Tariff) बढ़ाने की तैयारी कर रहा है? और क्या इसके पीछे रूस से तेल खरीदने का मुद्दा सिर्फ एक बहाना है? ये सवाल तब उठे हैं जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) पर भारत को निशाना बनाने के आरोप खुद एक अमेरिकी सांसद ने लगाए हैं। दरअसल, अमेरिकी कांग्रेस के सदस्य ब्रैड शर्मन (Brad Sherman) ने राष्ट्रपति ट्रंप पर गंभीर आरोप लगाते हुए एक चौंकाने वाला बयान दिया है। शर्मन ने ट्रंप प्रशासन के प्रस्तावित टैरिफ कदम की कड़ी आलोचना करते हुए इसे गलत करार दिया है।
शर्मन का दावा है कि ट्रंप प्रशासन रूस से तेल आयात को आधार बनाकर भारत पर आर्थिक दबाव बनाने की योजना बना रहा है। उन्होंने कहा कि भारत अपनी जरूरत का केवल करीब 31 प्रतिशत तेल ही रूस (Russia) से खरीदता है, फिर भी उसे टैरिफ के दायरे में लाया जा रहा है। अपनी बात का उदाहरण देते हुए उन्होंने हंगरी और चीन के रूस से तेल खरीद का जिक्र किया, जिन पर ऐसी कोई पाबंदी नहीं लगाई गई है।
ब्रैड शर्मन ने क्या कहा?
अमेरिकी कांग्रेस के सांसद ब्रैड शर्मन ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में साफ तौर पर लिखा, “राष्ट्रपति ट्रंप भारत पर बहुत ज्यादा टैरिफ लगाने के बहाने ढूंढ रहे हैं। उनका दावा है कि यह रूसी तेल आयात करने के बारे में है।” शर्मन ने आगे सवाल उठाया कि अगर यह सच है तो हंगरी, जो अपना 90 प्रतिशत कच्चा तेल बिना किसी टैरिफ के रूस से आयात करता है, उस पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? वहीं चीन, जो रूस का सबसे बड़ा तेल खरीदार है, उस पर भी रूसी तेल खरीदने से जुड़े प्रतिबंध नहीं लगाए गए हैं। हालांकि, यह अलग बात है कि किसी अन्य व्यापारिक कारणों से चीन पर अलग टैरिफ जरूर लगे हैं, लेकिन रूस से तेल खरीदने के लिए ये टैरिफ चीन पर नहीं हैं।
रूसी तेल का मुद्दा क्यों है अहम?
शर्मन ने सीधे तौर पर यह कहा है कि अमेरिका बार-बार यह तर्क देता है कि भारत रूस से तेल खरीदता है, इसलिए वह उस पर टैरिफ लगा रहा है, लेकिन यह सिर्फ एक बहाना है। अगर बात सिर्फ कच्चे तेल की होती तो चीन और हंगरी पर ऐसी कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई? यह बयान ऐसे समय में आया है जब रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में रूसी तेल की खरीद एक बड़ा भू-राजनीतिक (जियोपॉलिटिकल) मुद्दा बना हुआ है। अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद भी कई देश रूस से तेल खरीद जारी रखे हुए हैं, जिससे अमेरिकी नीति पर सवाल उठ रहे हैं।
भारत को अपना सहयोगी बताते हुए उठाया सवाल
ब्रैड शर्मन ने भारत को अमेरिका का साथी (सहयोगी) बताते हुए कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप भारत पर भारी टैरिफ लगाने के लिए बहाने तलाश रहे हैं। जब दूसरे देशों को छूट मिल रही है, तो अमेरिका के एक सहयोगी देश भारत को निशाना बनाना गलत है।” उनका यह बयान अमेरिकी प्रशासन के उस दावे पर सीधा सवाल है जिसमें वह कहता है कि वह भारत के साथ मजबूत रिश्ते चाहता है।
ट्रंप और भारत का नया समीकरण क्या है?
गौरतलब है कि हाल ही में राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत के साथ एक बड़ी ट्रेड डील का ऐलान किया था। उन्होंने कहा था कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के साथ उनकी बातचीत सकारात्मक रही और दोनों देशों के बीच व्यापारिक समझौते के तहत भारत पर लगने वाले 25 प्रतिशत टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। ऐसे में शर्मन के बयान ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीति क्या है? क्या वह भारत के साथ अपने रिश्तों में उतार-चढ़ाव पैदा करना चाहता है?
शर्मन के इस बयान ने एक बार फिर इस बहस को तेज कर दिया है कि क्या अमेरिका की टैरिफ नीति में भारत को सिंगल आउट किया जा रहा है। अगर बात सिर्फ रूसी तेल की होती तो हंगरी और चीन जैसे देशों को इससे बाहर क्यों रखा गया? यह वह सवाल है जो अमेरिकी सांसद ने सीधे तौर पर ट्रंप प्रशासन से पूछा है।
मुख्य बातें (Key Points)
अमेरिकी सांसद ब्रैड शर्मन (Brad Sherman) ने राष्ट्रपति ट्रंप (President Trump) पर भारत को निशाना बनाने का आरोप लगाया है।
शर्मन का कहना है कि रूसी तेल खरीद को लेकर भारत पर टैरिफ लगाना सिर्फ एक बहाना है।
उन्होंने हंगरी (90% रूसी तेल) और चीन (सबसे बड़ा खरीदार) पर ऐसी कोई पाबंदी न होने की बात कही।
शर्मन ने भारत को अमेरिका का सहयोगी बताते हुए इस तरह के टैरिफ को गलत करार दिया।
हाल ही में ट्रंप ने भारत के साथ ट्रेड डील का ऐलान किया था, जिसमें टैरिफ घटाने की बात कही गई थी।








