UPI Payment को लेकर देशभर में चल रही चर्चाओं पर अब सरकार ने अपना रुख बिल्कुल साफ कर दिया है। यूपीआई से लेनदेन पर किसी तरह की फीस नहीं लगेगी। यह बात सोमवार को वित्तीय सेवा सचिव एम नागराजू ने स्पष्ट शब्दों में कही। उन्होंने बताया कि यूपीआई की बढ़ती लागत का बोझ सरकार खुद उठाएगी, ताकि आम लोगों पर कोई अतिरिक्त भार न पड़े।
कैश से आगे निकला UPI, बढ़ा सरकार पर खर्च
देश में यूपीआई से होने वाला लेनदेन अब कैश के मुकाबले कई गुना बढ़ चुका है। डिजिटल भुगतान के इस बढ़ते इस्तेमाल से सिस्टम की लागत भी बढ़ी है। इसी वजह से पिछले कई महीनों से यह चर्चा चल रही थी कि यूपीआई सर्विस पर फीस लग सकती है। लेकिन अब सरकार ने इस पर विराम लगा दिया है।
2026-27 के बजट में ₹2000 करोड़ की सब्सिडी
वित्तीय सेवा सचिव ने बताया कि यूपीआई को सपोर्ट करने के लिए वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में ₹2000 करोड़ का प्रावधान किया गया है। यह रकम यूपीआई ट्रांजैक्शन पर आने वाले खर्च को सब्सिडी के तौर पर दी जाएगी, जिससे यूजर्स के लिए लेनदेन मुफ्त बना रहेगा।
वित्त मंत्री की घोषणा से तस्वीर साफ
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026-27 में यूपीआई और RuPay डेबिट कार्ड के लिए ₹2000 करोड़ की सब्सिडी की घोषणा की है। इससे पहले 2025-26 के संशोधित अनुमान में यह राशि सिर्फ ₹196 करोड़ थी। बढ़ी हुई सब्सिडी साफ संकेत देती है कि सरकार डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना चाहती है।
साइबर फ्रॉड पर भी सरकार का भरोसा
साइबर धोखाधड़ी को लेकर पूछे गए सवाल पर एम नागराजू ने कहा कि बैंकों की गड़बड़ी के कारण होने वाला साइबर फ्रॉड 3% से भी कम है। उन्होंने जोर दिया कि लोगों की सतर्कता से इस समस्या से काफी हद तक निपटा जा सकता है।
आम यूजर्स के लिए क्या मतलब
इस फैसले का सीधा फायदा उन करोड़ों लोगों को मिलेगा जो रोजमर्रा की जिंदगी में Google Pay, PhonePe और Paytm जैसे ऐप्स से भुगतान करते हैं। अब उन्हें न तो फीस की चिंता करनी होगी और न ही कैश की जरूरत पड़ेगी।
आगे की तैयारी भी शुरू
‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को लेकर बैंकों के लिए एक उच्च अधिकार प्राप्त समिति बनाने का भी प्रस्ताव है। फिलहाल इसके नियम और शर्तें तैयार की जाएंगी, उसके बाद समिति का गठन किया जाएगा।
मुख्य बातें (Key Points)
- यूपीआई लेनदेन आगे भी पूरी तरह मुफ्त रहेगा
- सरकार यूपीआई की लागत का बोझ खुद उठाएगी
- बजट 2026-27 में ₹2000 करोड़ की सब्सिडी का प्रावधान
- साइबर धोखाधड़ी 3% से भी कम, सतर्कता जरूरी








