Ration Card Update 2026: गुजरात (Gujarat) में डिजिटल करेंसी के जरिए गरीबों को राशन वितरण की प्रणाली शुरू होने के बाद अब उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में भी इस योजना को लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है। केंद्रीय खाद्य एवं रसद मंत्रालय की टीम ने यूपी के बाराबंकी (Barabanki) जिले में प्राथमिक सर्वेक्षण कर मोबाइल डेटा कलेक्शन पूरा कर लिया है। माना जा रहा है कि प्रदेश में इस प्रणाली को लागू करने के लिए बाराबंकी को मॉडल जिला (पायलट प्रोजेक्ट) के तौर पर चुना जा सकता है।
गरीबों के राशन वितरण में पारदर्शिता लाने और आम जनता की सुविधा के लिए तैयार की गई यह डिजिटल करेंसी प्रणाली एटीएम (ATM) की तर्ज पर काम करेगी। इसके तहत राशन कार्ड धारक निर्धारित तिथि में कहीं से भी अपना राशन प्राप्त कर सकेंगे, जिससे कोटेदारों पर निर्भरता और अनियमितताओं की संभावना कम हो जाएगी।
क्या है डिजिटल राशन योजना?
इस योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को ई-रुपी (e-RUPI) या इसी तरह की डिजिटल करेंसी के जरिए सीधे मशीन से अपना राशन प्राप्त करने की सुविधा मिलेगी। यह प्रणाली पूरी तरह से ऑटोमेटेड होगी, जिसमें लाभार्थी अपना आधार कार्ड या राशन कार्ड मशीन पर स्कैन करके निर्धारित मात्रा में गेहूं, चावल और अन्य सामग्री ले सकेंगे। गुजरात के गांधीनगर (Gandhinagar) में 15 फरवरी 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने इस डिजिटल करेंसी वितरण व्यवस्था का शुभारंभ किया था। अब उत्तर प्रदेश सरकार को यह व्यवस्था लागू करनी है।
बाराबंकी को क्यों चुना गया?
सूत्रों के मुताबिक, यूपी के खाद्य एवं रसद राज्य मंत्री सतीश शर्मा (Satish Sharma) का गृह जनपद बाराबंकी होने की वजह से यहां पायलट प्रोजेक्ट पर काम शुरू करवाए जाने की संभावना है। इस हाईटेक योजना की दिशा में खाद्य मंत्री का जिला होने से बाराबंकी महत्वपूर्ण हो गया है। केंद्रीय खाद्य एवं रसद मंत्रालय की ओर से चार टीमें यूपी के सिर्फ बाराबंकी ही भेजी गई थीं। इन टीमों ने करीब 15 दिनों तक गोपनीय तरीके से अलग-अलग व्यवस्थाओं का अध्ययन कर इनपुट जुटाए और अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंप दी है।
टीमों ने कोटेदारों और लाभार्थियों के बीच स्मार्टफोन और कीपैड मोबाइल के प्रयोग का औसत भी निकाला है, ताकि यह आकलन किया जा सके कि डिजिटल प्रणाली को लागू करने में कितनी तकनीकी चुनौतियां आ सकती हैं।
बाराबंकी के आंकड़े
बाराबंकी जिले में कुल 10,380 कोटेदार (राशन विक्रेता) हैं, जिनके माध्यम से लगभग 6.42 लाख लाभार्थियों को राशन वितरित किया जाता है। पायलट प्रोजेक्ट के तहत इतनी बड़ी आबादी को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाना एक चुनौतीपूर्ण काम होगा, लेकिन अगर यह सफल रहा तो पूरे प्रदेश में इस मॉडल को लागू किया जा सकता है।
क्या है पृष्ठभूमि?
देशभर में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में पारदर्शिता लाने के लिए केंद्र सरकार लगातार प्रयास कर रही है। गुजरात में शुरू की गई डिजिटल करेंसी प्रणाली उसी दिशा में एक बड़ा कदम है। इसका मकसद राशन वितरण में होने वाली घर-तौली (कम वजन), गुणवत्ता में हेराफेरी और फर्जी कोटेदारों की समस्या को खत्म करना है। इस प्रणाली के लागू होने से लाभार्थी सीधे मशीन से राशन ले सकेंगे, जिससे बिचौलियों की भूमिका खत्म हो जाएगी।
विश्लेषण: डिजिटल इंडिया की नई पहल
डिजिटल करेंसी से राशन वितरण की यह योजना ‘डिजिटल इंडिया’ के विजन को साकार करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। अगर यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो यह पूरे देश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की तस्वीर बदल सकता है। इससे न सिर्फ भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी, बल्कि गरीबों को उनका हक भी सही समय पर और सही मात्रा में मिलेगा। बाराबंकी को इसके लिए चुना जाना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां के नतीजों के आधार पर पूरे प्रदेश में इसकी रूपरेखा तैयार की जा सकेगी। हालांकि, इसे लागू करने में तकनीकी चुनौतियां, इंटरनेट कनेक्टिविटी और लोगों की डिजिटल साक्षरता जैसे मुद्दे भी सामने आ सकते हैं, जिन पर सरकार को काम करना होगा।
मुख्य बातें (Key Points)
उत्तर प्रदेश (UP) में डिजिटल करेंसी से राशन वितरण की योजना पर काम शुरू।
बाराबंकी (Barabanki) को पायलट प्रोजेक्ट के लिए चुने जाने की संभावना, यहां 6.42 लाख लाभार्थी।
केंद्रीय खाद्य मंत्रालय की टीम ने 15 दिनों तक सर्वे कर रिपोर्ट सौंपी।
यह प्रणाली एटीएम की तर्ज पर काम करेगी, ई-रुपी से सीधे मशीन से मिलेगा राशन।
गुजरात के गांधीनगर में 15 फरवरी 2026 को अमित शाह (Amit Shah) ने इसका शुभारंभ किया था।








