Ujjain Borewell Rescue ऑपरेशन शुक्रवार 10 अप्रैल को 20 घंटे से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी जारी है। उज्जैन से करीब 75 किलोमीटर दूर बड़नगर के झालरिया गाँव में बीती रात करीब 8 बजे ढाई साल का मासूम भागीरथ देवासी एक बोरवेल में गिर गया। तब से लेकर अब तक SDRF और NDRF की टीमें युद्ध स्तर पर उसे बचाने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिली है।
‘कैसे हुआ हादसा: भेड़ ने गिराया पत्थर, बच्चे ने बाल्टी समझकर डाला पैर’
Ujjain Borewell Rescue से जुड़ी सबसे दर्दनाक बात यह है कि यह हादसा एक छोटी सी लापरवाही से हो गया। बोरवेल के ऊपर एक 5-10 किलो का पत्थर रखा था जो ढक्कन का काम कर रहा था। परिवार के सदस्यों के अनुसार एक भेड़ ने उस पत्थर को गिरा दिया। जब पत्थर हट गया तो ढाई साल के मासूम भागीरथ ने उसे बाल्टी समझकर अपना पैर अंदर डाल दिया और फिसलकर बोरवेल में गिर गया। उसकी माँ दौड़कर आई लेकिन तब तक बच्चा काफी नीचे जा चुका था। भागीरथ के पिता प्रवीण देवासी राजस्थान के पाली जिले के रहने वाले हैं और भेड़ चराने के लिए परिवार के साथ इस इलाके में आए हुए थे।
’70 फीट गहराई पर फंसा बच्चा, ऑक्सीजन भेजी जा रही’
Ujjain Borewell Rescue टीम ने सबसे पहले बच्चे की लोकेशन का पता लगाया। भागीरथ 70 फीट की गहराई पर फंसा हुआ है। रेस्क्यू टीम ने सबसे पहली प्राथमिकता ऑक्सीजन सप्लाई को दी ताकि बच्चे को सांस लेने में कोई दिक्कत न हो। पाइप के जरिए लगातार ऑक्सीजन भेजी जा रही है। कैमरे के जरिए भी बच्चे की स्थिति पर नजर रखी जा रही है ताकि रेस्क्यू में कोई गलती न हो।
‘भोपाल और इंदौर से पहुंची टीमें, आधुनिक मशीनें लगाई गईं’
Ujjain Borewell Rescue ऑपरेशन को तेज करने के लिए भोपाल और इंदौर से भी आधुनिक संसाधनों के साथ रेस्क्यू टीमें पहुंची हैं। SDRF और NDRF के जवान बोरवेल के बगल में समानांतर गड्ढा (Parallel Pit) खोदकर बच्चे तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन जमीन में कठोर चट्टानें होने के कारण खुदाई में भारी मुश्किलें आ रही हैं। हैमर मशीन, पोकलेन और JCB जैसी भारी मशीनें लगातार काम कर रही हैं।
’20 घंटे बीते, सफलता अब तक नहीं’
20 घंटे से ज्यादा समय बीत चुका है और Ujjain Borewell Rescue ऑपरेशन में अब तक सफलता हाथ नहीं लगी है। पूरा झालरिया गाँव और आसपास के इलाके के लोग बच्चे की सलामती के लिए दुआ कर रहे हैं। उज्जैन जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद हैं और रेस्क्यू ऑपरेशन की निगरानी कर रहे हैं। हर बीतता मिनट परिवार और पूरे देश के लिए बेचैनी बढ़ा रहा है।
‘खुले बोरवेल: बार-बार दोहराई जा रही त्रासदी’
यह पहली बार नहीं है जब कोई मासूम बच्चा खुले बोरवेल में गिरा हो। देशभर में ऐसी घटनाएं बार-बार हो रही हैं और हर बार सवाल उठता है कि खुले बोरवेल को ढकने और बंद करने के नियमों का पालन क्यों नहीं होता। Ujjain Borewell Rescue जैसे मामले इस बात की याद दिलाते हैं कि प्रशासन को बंद पड़े और खुले बोरवेल की पहचान कर उन्हें तुरंत बंद कराना चाहिए, ताकि कोई और मासूम इस त्रासदी का शिकार न बने।
‘जानें पूरा मामला’
भागीरथ देवासी एक भेड़ चराने वाले परिवार का बच्चा है जो राजस्थान के पाली जिले से भेड़ चराने के लिए मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के बड़नगर तहसील के झालरिया गाँव में आया हुआ था। बीती रात 8 बजे जब एक भेड़ ने बोरवेल के ऊपर रखे पत्थर को गिरा दिया, तो बच्चे ने उसे बाल्टी समझकर पैर डाला और फिसलकर 70 फीट गहरे बोरवेल में जा गिरा। तब से SDRF, NDRF और स्थानीय प्रशासन युद्ध स्तर पर Ujjain Borewell Rescue ऑपरेशन चला रहे हैं।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
- उज्जैन के बड़नगर के झालरिया गाँव में ढाई साल का भागीरथ देवासी 70 फीट गहरे बोरवेल में फंसा
- भेड़ ने पत्थर गिराया, बच्चे ने बाल्टी समझकर पैर डाला और फिसल गया
- भोपाल-इंदौर से SDRF-NDRF टीमें पहुंचीं, ऑक्सीजन सप्लाई जारी, समानांतर गड्ढा खोदा जा रहा
- 20 घंटे बाद भी रेस्क्यू ऑपरेशन में अब तक सफलता नहीं मिली













