Donald Trump US Super Power : अमेरिका की सुपर पावर छवि को लगे झटकों और चीन के उभार से कम हुए दबदबे की भरपाई के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आक्रामक रणनीति अपना रहे हैं। पहले उन्होंने टैरिफ (आयात शुल्क) को ‘हथियार’ बनाया और अब खुद को ‘ईसाइयों का रक्षक’ बताकर परमाणु हथियारों की नई भूख जाहिर कर रहे हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह रुख “अमेरिका फर्स्ट” की पुरानी नीति का ही एक नया और ज्यादा आक्रामक संस्करण है।
टैरिफ को बनाया हथियार
ट्रंप ने जनवरी 2025 में सत्ता संभालते ही ‘अमेरिका फर्स्ट’ की नीति लागू की। 2 अप्रैल को ‘लिबरेशन डे’ घोषित कर सभी देशों पर 10% शुल्क लगा दिया। उनका मकसद व्यापार घाटे को खत्म करना था। ट्रंप ने वैश्वीकरण की जगह ‘मेड इन अमेरिका’ पर जोर दिया।
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि इन नीतियों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था को ‘अल्पकालिक लाभ’ तो दिया, लेकिन अमेरिका ने एक विश्वसनीय सहयोगी की भूमिका खो दी, जिससे वैश्विक व्यापार में अविश्वास और अस्थिरता पैदा हुई।
खुद को बताया ‘ईसाइयों का रक्षक’
बतौर राष्ट्रपति दूसरी पारी में ट्रंप ने धर्म और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को मजबूती से उठाया है। उन्होंने ‘क्रिश्चियन मूल्यों’ की रक्षा को देशभक्ति का प्रतीक बताया है।
ट्रंप ने नाइजीरिया में कट्टरपंथी इस्लामिक आतंकियों के हाथों ईसाइयों की हत्या के मुद्दे को जोर-शोर से उठाया है। उन्होंने कहा कि यदि नाइजीरियाई सरकार ईसाइयों की हत्या जारी रखने देती है, तो अमेरिका तुरंत सभी सहायता बंद कर देगा और वहां जाकर इस्लामिक आतंकवादियों को खत्म कर देगा। इस बयान से ट्रंप ने खुद को वेटिकन सिटी की तरह ईसाई आस्था के रक्षक के तौर पर पेश किया है।
परमाणु परीक्षण की नई ‘भूख’
ट्रंप की परमाणु हथियारों की भूख भी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन गई है। उन्होंने 33 साल के अंतराल के बाद अमेरिकी एजेंसियों को एक बार फिर एटम बम की टेस्टिंग करने को कहा है। 30 अक्टूबर को ट्रुथ सोशल पर ट्रंप ने घोषणा की कि रूस और चीन टेस्ट कर रहे हैं, इसलिए हम भी शुरू करेंगे।
ट्रंप ने कहा, “आपको अपने आयुध भंडारों की विश्वसनीयता की पुष्टि करनी चाहिए, अन्यथा आपको वास्तव में पता नहीं चलेगा कि वे काम करते हैं या नहीं।” माना जा रहा है कि रूस द्वारा हाल ही में विकसित की गईं परमाणु ऊर्जा से चलने वाली ‘बुरेवेस्टनिक’ क्रूज मिसाइल और ‘पोसाइडन’ अंडरवाटर ड्रोन ने ट्रंप की चिंता बढ़ा दी है।
मुख्य बातें (Key Points):
- डोनाल्ड ट्रंप ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के तहत अमेरिकी सुपर पावर स्टेटस को फिर से मजबूत करने में जुटे हैं।
- उन्होंने टैरिफ को हथियार बनाया, ‘मेड इन अमेरिका’ पर जोर दिया और वैश्विक व्यापार में अस्थिरता पैदा की।
- ट्रंप ने खुद को ‘ईसाइयों का रक्षक’ बताते हुए नाइजीरिया में ईसाइयों की हत्या पर सैन्य कार्रवाई की धमकी दी है।
- रूस-चीन का हवाला देते हुए ट्रंप ने 33 साल बाद अमेरिका को दोबारा परमाणु परीक्षण करने का आदेश दिया है।








