Tarique Rahman Oath Ceremony: बांग्लादेश की सियासत में बड़े बदलाव के बीच अब कूटनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। ढाका से आई एक बड़ी खबर ने नई दिल्ली की राजनीतिक और रणनीतिक हलकों में चर्चा छेड़ दी है। बांग्लादेश ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के अगले प्रधानमंत्री तारिक रहमान के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने का न्योता दिया है।
ढाका से यह औपचारिक निमंत्रण 14 फरवरी को देर रात भारतीय पक्ष को सौंपा गया। यह निमंत्रण ऐसे समय पर आया है जब तारिक रहमान की पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी बीएनपी ने आम चुनाव में प्रचंड जीत दर्ज की है और अब सत्ता संभालने की तैयारी कर रही है। लेकिन सवाल यह है कि क्या प्रधानमंत्री मोदी इस शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगे?
PM मोदी के जाने की संभावना कम
फिलहाल प्रधानमंत्री मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने की संभावना कम मानी जा रही है। वजह है उनका पहले से तय अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम। 17 फरवरी को मुंबई में प्रधानमंत्री मोदी की फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों के साथ द्विपक्षीय बैठक प्रस्तावित है।
मैक्रों अगले हफ्ते भारत में आयोजित होने वाले एआई इंपैक्ट समिट में भाग लेने आ रहे हैं। ऐसे में कूटनीतिक प्राथमिकताओं को देखते हुए पीएम मोदी का ढाका जाना मुश्किल माना जा रहा है। फ्रांस भारत का महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है और राष्ट्रपति मैक्रों की यात्रा पहले से निर्धारित है।
उपराष्ट्रपति या विदेश मंत्री जा सकते हैं
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अगर प्रधानमंत्री मोदी खुद नहीं जाते हैं तो भारत की ओर से किसी वरिष्ठ प्रतिनिधि, संभवतः उपराष्ट्रपति या विदेश मंत्री को शपथ ग्रहण समारोह में भेजा जा सकता है।
इससे भारत एक संतुलित संदेश देना चाहता है। एक तरफ वो बांग्लादेश के साथ रिश्तों को सुधारने की प्राथमिकता दिखाना चाहता है तो दूसरी ओर जल्दबाजी में किसी राजनीतिक संकेत से बचना भी चाहता है। वरिष्ठ प्रतिनिधि भेजना यह दर्शाएगा कि भारत बांग्लादेश के साथ संबंधों को महत्व देता है।
पिछले डेढ़ साल में रिश्तों में ठंडापन
दरअसल पिछले डेढ़ साल में भारत-बांग्लादेश संबंधों में कुछ ठंडापन देखने को मिला। राजनीतिक अस्थिरता, सीमाई और रणनीतिक मुद्दों को लेकर दोनों देशों के रिश्ते निचले स्तर पर पहुंचे थे।
बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल का दौर रहा। अवामी लीग सरकार के दौरान कई मुद्दों पर मतभेद बढ़े। सीमा पार घुसपैठ, व्यापार असंतुलन, और तीस्ता जल बंटवारे जैसे मुद्दे अनसुलझे रहे। ऐसे में नई सरकार के गठन के साथ यह अवसर भी है कि दोनों देश अपने संबंधों को नई दिशा दें।
16 फरवरी को होगा शपथ ग्रहण समारोह
तारिक रहमान के शपथ ग्रहण समारोह को लेकर ढाका में व्यापक कूटनीतिक तैयारियां चल रही हैं। जानकारी के मुताबिक 16 फरवरी को क्षेत्रीय नेताओं को आमंत्रित किया जाएगा।
बांग्लादेश दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन यानी सार्क के सदस्य देशों के ज्यादातर नेताओं को बुलाने पर विचार कर रहा है। बता दें कि सार्क की स्थापना की पहल तारिक रहमान के पिता और पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान ने की थी। इसलिए यह समारोह तारिक रहमान के लिए विशेष महत्व रखता है।
चीन, मलेशिया, सऊदी, तुर्की को भी निमंत्रण
सिर्फ सार्क ही नहीं बल्कि चीन, मलेशिया, सऊदी अरब और तुर्की जैसे देशों के राष्ट्राध्यक्षों या सरकार प्रमुखों को भी निमंत्रण भेजने की योजना है।
इससे साफ है कि नई सरकार अपनी विदेश नीति के संकेत शपथ ग्रहण मंच से ही देना चाहती है। जहां क्षेत्रीय संतुलन और वैश्विक साझेदारियां दोनों पर जोर रहेगा। चीन का नाम विशेष रूप से ध्यान देने योग्य है क्योंकि यह भारत के लिए रणनीतिक चिंता का विषय है।
भारत के लिए रणनीतिक क्षण
भारत के लिए यह एक रणनीतिक क्षण है। एक ओर बांग्लादेश उसके लिए पूर्वी सीमाओं पर सबसे अहम पड़ोसी है तो दूसरी ओर क्षेत्र में चीन की बढ़ती सक्रियता भी एक बड़ा कारक है।
बांग्लादेश भारत के लिए भौगोलिक, सामरिक और आर्थिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। 4,096 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करने वाले ये दोनों देश एक-दूसरे के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। चीन की बेल्ट एंड रोड पहल के तहत बांग्लादेश में उसके बढ़ते प्रभाव को भारत चिंता से देख रहा है।
सोच-समझकर उठाया जाएगा कदम
ऐसे में नई दिल्ली कोई भी कदम बेहद सोच-समझकर उठाना चाहती है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि भारत इस निमंत्रण का क्या जवाब देता है।
क्या प्रधानमंत्री मोदी ढाका जाकर नई सरकार के साथ रिश्तों की नई शुरुआत करेंगे या फिर वरिष्ठ प्रतिनिधि भेजकर एक संतुलित और सावधानी भरा संदेश देंगे। दोनों ही विकल्पों के अपने-अपने संदेश हैं। पीएम मोदी का जाना मजबूत राजनीतिक संदेश होगा, जबकि प्रतिनिधि भेजना एक सुरक्षित कूटनीतिक कदम होगा।
पूरे दक्षिण एशिया की कूटनीति पर असर
बांग्लादेश की सत्ता परिवर्तन की यह घड़ी सिर्फ ढाका की राजनीति नहीं बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की कूटनीति को नई दिशा दे सकती है।
दक्षिण एशिया में पहले से ही जटिल भू-राजनीतिक समीकरण हैं। भारत-पाकिस्तान तनाव, चीन की बढ़ती मौजूदगी, और अमेरिका की इंडो-पैसिफिक रणनीति – इन सबके बीच बांग्लादेश में नई सरकार का गठन क्षेत्रीय समीकरणों को प्रभावित करेगा। तारिक रहमान की विदेश नीति किस दिशा में जाती है, यह आने वाले महीनों में स्पष्ट होगा।
मुख्य बातें (Key Points)
• बांग्लादेश ने PM मोदी को तारिक रहमान के शपथ ग्रहण समारोह (16 फरवरी) में शामिल होने का निमंत्रण दिया, 14 फरवरी देर रात औपचारिक न्योता भेजा गया।
• PM मोदी के जाने की संभावना कम – 17 फरवरी को फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों से मुंबई में मुलाकात पहले से तय, एआई इंपैक्ट समिट में हिस्सा लेंगे मैक्रों।
• भारत की ओर से उपराष्ट्रपति या विदेश मंत्री भेजे जा सकते हैं, संतुलित संदेश देने की कोशिश।
• सार्क देशों के अलावा चीन, मलेशिया, सऊदी अरब, तुर्की के नेताओं को भी बुलावा, नई सरकार शपथ मंच से ही विदेश नीति के संकेत देना चाहती है।








