Tarique Rahman Humayun Kabir Ganges Water Treaty India Bangladesh : बांग्लादेश में 12 फरवरी को हुए आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने 299 सीटों में से 200 से ज्यादा सीटें जीतकर जबरदस्त बहुमत हासिल किया। BNP के चेयरमैन तारीक रहमान ने 17 फरवरी को 17 साल के निर्वासन के बाद प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। लेकिन शपथ ग्रहण की तैयारियों के बीच ही तारीक रहमान के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर ने भारत के खिलाफ ऐसे बयान दिए हैं जिनसे भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव और बढ़ता दिख रहा है।
हुमायूं कबीर ने द हिंदू अखबार को दिए इंटरव्यू में 1996 की गंगा जल संधि पर ऐसी टिप्पणी की जो भारत के लिए सीधी चुनौती मानी जा रही है।
‘गंगा जल संधि पर भारतीय राज्यों की प्राथमिकता अब खत्म’
हुमायूं कबीर ने साफ कहा कि 1996 की गंगा जल संधि को दिसंबर 2026 तक रिन्यू करने का फैसला बांग्लादेश अपने राष्ट्रीय हित के आधार पर लेगा। कबीर ने कहा—”पहले बांग्लादेश को अक्सर उन भारतीय राज्यों के हितों के बारे में बताया जाता रहा है जो नदी जल समझौते से जुड़े हैं। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। हम ऐसे तरीके से आगे बढ़ेंगे जिससे हमारा राष्ट्रीय हित पूरा हो।”
यह बयान इसलिए अहम है क्योंकि गंगा जल संधि भारत और बांग्लादेश के बीच सबसे महत्वपूर्ण द्विपक्षीय समझौतों में से एक है। इस संधि के तहत फरक्का बैराज पर गंगा के पानी का बंटवारा तय किया गया था। अगर बांग्लादेश इसे रिन्यू न करे या शर्तों में बड़ा बदलाव मांगे, तो दोनों देशों के बीच गंभीर विवाद खड़ा हो सकता है।
भारत पर लगाया ‘कट्टरपंथी’ होने का आरोप
कबीर यहीं नहीं रुके। उन्होंने भारत पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि “भारत में सांप्रदायिक हिंसा चिंता का विषय है। बांग्लादेश के लोगों को लगता है कि भारत एक चिढ़ वाला समाज बनता जा रहा है और वहां कट्टरपंथी बयानबाजी के सहारे चुनाव जीते जा रहे हैं।”
दिलचस्प बात यह है कि कबीर ने बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी की चुनावी हार की तुलना भारत से करते हुए कहा कि “बांग्लादेश में जमात इस्लामी इसलिए सत्ता में नहीं आ सकी क्योंकि उसने कट्टरपंथी बयानबाजी का सहारा लिया। ऐसी बयानबाजी से बांग्लादेश में कभी चुनाव नहीं जीता जा सकता, लेकिन भारत में लोग इसके पक्ष में वोट दे रहे हैं।”
हिंदुओं पर हिंसा पर चुप, भारत पर उपदेश
सबसे विवादास्पद बात यह रही कि अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर हिंदुओं पर सांप्रदायिक हिंसा हुई। हिंदू युवक दीपू दास की हत्या हुई, मंदिरों पर हमले किए गए। लेकिन हुमायूं कबीर ने इस मुद्दे पर चुप्पी साधते हुए उलटा भारत पर सांप्रदायिकता का आरोप लगा दिया।
यह बयान इसलिए और तीखी प्रतिक्रिया का कारण बन रहा है क्योंकि जिस देश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हमले हुए, वहां के नए शासन के सलाहकार भारत को सांप्रदायिकता का पाठ पढ़ा रहे हैं।
BSF पर भी उठाए सवाल
कबीर ने सीमा सुरक्षा बल (BSF) पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि BSF पर बांग्लादेशी नागरिकों की हत्या के आरोप लगते रहे हैं और ऐसी घटनाएं दोनों देशों के रिश्तों पर असर डालती हैं। हालांकि यह सर्वविदित है कि बांग्लादेशी घुसपैठिए अवैध तरीके से भारत में घुसने की कोशिश करते हैं और BSF सीमा सुरक्षा के लिए तैनात है।
‘शेख हसीना अब नहीं, भारत नई हकीकत स्वीकारे’
कबीर ने भारत को सीधा संदेश देते हुए कहा कि “भारत को बांग्लादेश की वर्तमान राजनीतिक सच्चाई स्वीकार कर लेनी चाहिए कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और आवामी लीग अब देश की राजनीति में मौजूद नहीं हैं।”
यह बयान इस ओर इशारा है कि भारत के साथ बांग्लादेश का जो संबंध शेख हसीना के दौर में था, अब उस रूप में नहीं रहेगा। तारीक रहमान की सरकार भारत से अलग तरह का रिश्ता रखना चाहती है और गंगा जल संधि इसकी पहली परीक्षा हो सकती है।
‘जानें पूरा मामला’
तारीक रहमान BNP की संस्थापक और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे हैं। 2008 में भ्रष्टाचार के आरोपों में उन्हें लंदन में निर्वासन में जाना पड़ा। 17 साल बाद अब वे बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री बने हैं। BNP पारंपरिक रूप से पाकिस्तान के करीब मानी जाती रही है और शेख हसीना की आवामी लीग की तुलना में भारत से इसके रिश्ते हमेशा तनावपूर्ण रहे हैं। जमात-ए-इस्लामी ने इस बार 299 में से सिर्फ 7 सीटें जीतीं, जो बांग्लादेश की जनता का कट्टरपंथ के खिलाफ फैसला माना जा रहा है।
मुख्य बातें (Key Points)
- तारीक रहमान के विदेश सलाहकार हुमायूं कबीर ने 1996 की गंगा जल संधि रिन्यू पर भारत को चेताया, कहा—अब बांग्लादेश का राष्ट्रीय हित प्राथमिकता होगी।
- कबीर ने भारत पर सांप्रदायिकता और कट्टरपंथी बयानबाजी से चुनाव जीतने का आरोप लगाया, जबकि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हिंसा पर चुप रहे।
- BNP ने 299 में से 200+ सीटें जीतीं, तारीक रहमान ने 17 साल के निर्वासन के बाद PM पद की शपथ ली।
- कबीर ने भारत से कहा कि शेख हसीना और आवामी लीग की राजनीतिक समाप्ति की नई हकीकत स्वीकारें।








