Swiggy Snacc Shutdown: लिस्टेड फूडटेक कंपनी स्विगी (Swiggy) ने अपने स्टैंडअलोन 15-मिनट फूड डिलीवरी ऐप Snacc (स्नैक) को बंद करने का फैसला किया है। यह ऐप लॉन्च होने के एक साल से भी कम समय में ही बंद कर दिया गया। कंपनी को इस बिजनेस को ग्रो करने में काफी दिक्कत आ रही थी और प्रॉफिट नहीं हो पा रहा था। Snacc को जनवरी 2025 में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर बेंगलुरु और गुरुग्राम में लॉन्च किया गया था। इस ऐप के जरिए ब्रेकफास्ट आइटम, कॉफी, बेकरी प्रोडक्ट, स्नैक्स, कोल्ड ड्रिंक और ऐसे ही कई सामान 15 मिनट में डिलीवर किए जाते थे।
क्यों बंद करना पड़ा Snacc ऐप?
सूत्रों के मुताबिक, कंपनी को Snacc के बिजनेस को बढ़ाने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। एक इंटरनल ईमेल में स्विगी ने कहा कि Snacc के लिए प्रोडक्ट मार्केट फिट बनाना शुरू हो गया था, लेकिन बड़े इकोनॉमिक्स की वजह से बिजनेस को बढ़ाना काफी मुश्किल हो गया। यानी, हालांकि ऐप को यूजर्स का रिस्पॉन्स अच्छा मिल रहा था, लेकिन इसे प्रॉफिटेबल बनाना चुनौतीपूर्ण साबित हुआ। इसलिए कंपनी ने Snacc को बंद करने का फैसला किया।
हालांकि, Snacc के लिए काम करने वाले कर्मचारियों को बिजनेस के दूसरे हिस्सों में शामिल कर लिया जाएगा, यानी उनकी नौकरी नहीं जाएगी। फिलहाल इस पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
क्विक कॉमर्स की रेस में क्यों पिछड़ा Swiggy?
Snacc को लॉन्च करने के पीछे स्विगी का मकसद था कि वह 10-15 मिनट में खाना पहुंचाने के बढ़ते ट्रेंड में अपनी पकड़ मजबूत कर सके। उस समय स्विगी के कॉम्पिटिटर ब्लिंकिट (Blinkit) ने भी 15 मिनट में खाना डिलीवरी करने के लिए एक अलग ऐप ‘बिस्त्रो’ (Bistro) लॉन्च किया था। वहीं, जोमैटो (Zomato) ने भी ‘ज़पो कैफे’ (Zomato Cafe) शुरू किया था। लेकिन इस रेस में स्विगी को सफलता नहीं मिली और बढ़ते नुकसान के बीच कंपनी ने Snacc को बंद करने का फैसला लिया।
स्विगी के बढ़ते नुकसान के आंकड़े
Snacc को बंद करने के पीछे की एक बड़ी वजह कंपनी का बढ़ता वित्तीय नुकसान भी है। हाल ही में जारी तीसरी तिमाही (Q3) के नतीजों के मुताबिक, स्विगी का कंसोलिडेटेड नेट लॉस साल-दर-साल 33% बढ़कर ₹1,655 करोड़ हो गया है। वहीं, कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू 54% बढ़कर ₹6,148 करोड़ रहा। यानी रेवेन्यू बढ़ने के बावजूद नुकसान में इजाफा हो रहा है।
सबसे ज्यादा नुकसान इंस्टामार्ट (Instamart) को हुआ है। रेवेन्यू में 76% की बढ़ोतरी के बावजूद इंस्टामार्ट का लॉस 50% बढ़कर ₹791 करोड़ (पिछले साल यह ₹1,016 करोड़ था) हो गया। यह आंकड़े बताते हैं कि क्विक कॉमर्स सेगमेंट में प्रॉफिट हासिल करना कितना मुश्किल हो रहा है।
प्लेटफॉर्म इनोवेशन सेगमेंट का बुरा हाल
Swiggy के प्लेटफॉर्म इनोवेशन सेगमेंट, जिसमें Snacc जैसे वेंचर शामिल थे, का हाल और भी बुरा है। इस सेगमेंट का रेवेन्यू सालाना दर साल 59% घटकर सिर्फ ₹9 करोड़ रह गया है। वहीं, इस सेगमेंट का घाटा चार गुना बढ़कर ₹40 करोड़ हो गया है। यह साफ संकेत है कि Snacc जैसे प्रयोग कंपनी पर भारी पड़ रहे थे और इसे बंद करना ही एकमात्र विकल्प बचा था।
स्विगी के फैसले का क्या होगा असर?
Snacc को बंद करने का फैसला स्विगी के लिए एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है। कंपनी अब अपने मुख्य बिजनेस पर फोकस करना चाहती है और उन हिस्सों से पीछे हट रही है जहां मुनाफा कमाना मुश्किल हो रहा है। इस फैसले से कंपनी को अपने खर्चों पर कंट्रोल पाने में मदद मिलेगी।
हालांकि, यूजर्स के लिए यह थोड़ा निराशाजनक हो सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जो बेंगलुरु और गुरुग्राम में Snacc के जरिए 15 मिनट में स्नैक्स और ड्रिंक्स मंगवाते थे। लेकिन कंपनी के लिए यह एक जरूरी कदम था ताकि वह अपने संसाधनों को सही दिशा में लगा सके।
क्या है 15-मिनट डिलीवरी का भविष्य?
Snacc के बंद होने से यह सवाल भी उठता है कि आखिर 15-मिनट फूड डिलीवरी का भविष्य क्या है? फिलहाल ब्लिंकिट का बिस्त्रो और जोमैटो का ज़पो कैफे अभी भी काम कर रहे हैं, लेकिन यह देखना होगा कि वे कितना कारोबार बचा पाते हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि 10-15 मिनट में खाना पहुंचाना एक मुश्किल बिजनेस मॉडल है, क्योंकि इसमें लॉजिस्टिक्स और ऑपरेशनल कॉस्ट बहुत ज्यादा आती है। अगर कंपनियां इसे स्केल नहीं कर पातीं, तो उनके लिए इसे जारी रखना मुश्किल हो जाता है।
मुख्य बातें (Key Points)
स्विगी ने अपना 15-मिनट फूड डिलीवरी ऐप Snacc बंद कर दिया, जो बेंगलुरु और गुरुग्राम में चल रहा था।
Snacc को जनवरी 2025 में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लॉन्च किया गया था, लेकिन प्रॉफिट न होने के कारण इसे एक साल से भी कम समय में बंद करना पड़ा।
कंपनी का Q3 में नेट लॉस 33% बढ़कर ₹1,655 करोड़ हो गया, जबकि रेवेन्यू 54% बढ़ा।
प्लेटफॉर्म इनोवेशन सेगमेंट (जिसमें Snacc शामिल था) का रेवेन्यू 59% घटकर ₹9 करोड़ रह गया।
Snacc के कर्मचारियों को कंपनी के दूसरे विभागों में शामिल किया जाएगा, उनकी नौकरी नहीं जाएगी।








