Strait of Hormuz में ईरान और अमेरिका के बीच जारी भीषण तनाव के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। सऊदी अरब से करीब 1,35,335 मेट्रिक टन कच्चा तेल (Crude Oil) लेकर चला लाइबेरियाई झंडे वाला तेल टैंकर ‘शेन लोंग’ खतरनाक Strait of Hormuz को सफलतापूर्वक पार करते हुए 11 मार्च को मुंबई के बंदरगाह पर सुरक्षित पहुंच गया। इस जहाज के भारतीय मूल के कप्तान सुशांत सिंह संधू ने ईरान के चक्रव्यूह को भेदते हुए यह कारनामा कर दिखाया, जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
ईरान ने दी थी Strait of Hormuz बंद करने की खुली धमकी
यह पूरा घटनाक्रम इसलिए बेहद गंभीर है क्योंकि ईरान ने कुछ दिन पहले खुलेआम ऐलान किया था कि वह चीन को छोड़कर किसी भी अन्य देश के जहाजों को Strait of Hormuz से गुजरने नहीं देगा। ईरान की तरफ से यह भी साफ किया गया था कि अमेरिका और इजराइल से संबंधित देशों के जहाजों को डुबो दिया जाएगा।
ईरान ने इस धमकी को अमल में भी लाकर दिखाया। बुधवार को भारत की ओर आ रहे एक थाईलैंड के जहाज पर ईरान ने मिसाइल से हमला कर दिया। इस हमले के बाद Strait of Hormuz से गुजरने वाले हर जहाज के लिए खतरा कई गुना बढ़ गया था और भारत की तेल आपूर्ति पर गहरा संकट मंडराने लगा था।
जयशंकर की कूटनीति ने बदला पूरा खेल
इस गंभीर स्थिति में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 10 मार्च को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास आराघची से सीधी बातचीत की। दोनों नेताओं के बीच यह वार्ता ऐसे नाजुक दौर में हुई जब भारत की ऊर्जा सुरक्षा दांव पर लगी हुई थी।
सूत्रों के मुताबिक, इस बातचीत में Strait of Hormuz से भारतीय जहाजों के सुरक्षित आवागमन को लेकर गहन चर्चा हुई। माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच संभवत: कोई डील भी हुई, हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन इस बातचीत का सबसे बड़ा नतीजा यह रहा कि तेल से भरा जहाज भारत सुरक्षित पहुंच गया।
ऐसे भारतीय कप्तान ने भेदा ईरान का चक्रव्यूह
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर कप्तान सुशांत सिंह संधू ने यह खतरनाक सफर कैसे पूरा किया? इसकी कहानी किसी रोमांचक मिशन से कम नहीं है।
1 मार्च को सऊदी अरब के रास तनूरा बंदरगाह पर इस जहाज ‘शेन लोंग स्वेजमैक्स’ में कच्चा तेल लोड किया गया। 3 मार्च को जहाज ने अपनी यात्रा शुरू की और Strait of Hormuz की तरफ बढ़ने लगा।
8 मार्च को इस जहाज की आखिरी लोकेशन Strait of Hormuz के अंदर दर्ज की गई। इसके बाद हुआ कुछ ऐसा जिसने सबको चौंका दिया: जहाज अचानक रडार से पूरी तरह गायब हो गया।
दरअसल, खतरे को भांपते हुए कप्तान सुशांत सिंह संधू ने जहाज का AIS यानी ऑटोमेटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (Automatic Identification System) बंद कर दिया। इससे जहाज किसी भी ट्रैकिंग रडार में नजर नहीं आ रहा था। करीब 24 घंटे तक जहाज पूरी तरह ‘डार्क मोड’ में रहा।
9 मार्च को जहाज दोबारा ट्रैकिंग डेटाबेस पर दिखाई देने लगा। तब तक वह Strait of Hormuz का सबसे खतरनाक इलाका पार कर चुका था। कप्तान की इसी सूझबूझ ने ईरान के चक्रव्यूह को भेद दिया।
11 मार्च को मुंबई पहुंचा तेल जहाज: जानें पूरी टाइमलाइन
11 मार्च को दोपहर 1 बजे यह तेल टैंकर मुंबई पहुंचा। शाम 6 बजे इसे जवाहर द्वीप पर बर्थ किया गया। जहाज में लदे 1,35,335 मेट्रिक टन कच्चे तेल को मुंबई के आसपास स्थित रिफाइनरियों में भेजा जाएगा, जहां इसे रिफाइन किया जाएगा।
यह जहाज इसलिए भी खास है क्योंकि ईरान-अमेरिका युद्ध शुरू होने के बाद Strait of Hormuz को पार करके भारत पहुंचने वाला यह पहला तेल टैंकर था। भारत के लिए यह एक बड़ी कूटनीतिक जीत मानी जा रही है।
अभी पूरी तरह नहीं टला संकट: 28 भारतीय जहाज अब भी फंसे
हालांकि एक जहाज के सुरक्षित पहुंचने से राहत जरूर मिली है, लेकिन भारत के लिए संकट अभी पूरी तरह टला नहीं है। Strait of Hormuz के आसपास अभी भी 28 भारतीय झंडे वाले जहाज फंसे हुए हैं। ये जहाज ईरान की धमकियों के चलते आगे बढ़ने में असमर्थ हैं।
हालांकि भारत ने अपनी कूटनीति और रणनीति के जरिए अब तक देश महिमा, स्वर्ण कमल और विश्व प्रेरणा समेत सात जहाजों को अरब सागर के सुरक्षित जल क्षेत्र में पहुंचा दिया है। इन जहाजों में रखा तेल और उन पर सवार चालक दल दोनों सुरक्षित बताए जा रहे हैं।
आम भारतीय पर क्या पड़ेगा असर
भारत अपनी कुल तेल जरूरत का करीब 85 फीसदी हिस्सा आयात करता है और इसका बड़ा हिस्सा Strait of Hormuz से होकर गुजरता है। अगर यह जलमार्ग लंबे समय तक बाधित रहता है तो देश में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं, महंगाई और बढ़ सकती है और आम आदमी की जेब पर सीधा बोझ पड़ सकता है। इसलिए इस तेल टैंकर का सुरक्षित पहुंचना न सिर्फ कूटनीतिक बल्कि आर्थिक नजरिए से भी भारत के लिए बड़ी राहत है।
आगे क्या होगा: सबकी नजर जयशंकर-ईरान वार्ता पर
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास आराघची के बीच जो बातचीत हुई है, उसका लंबे समय तक क्या नतीजा निकलता है। क्या ईरान Strait of Hormuz में भारतीय जहाजों को सुरक्षित गुजरने की अनुमति देता रहेगा? क्या बाकी 28 फंसे जहाज भी सुरक्षित निकल पाएंगे? ये सवाल फिलहाल अनुत्तरित हैं, लेकिन भारत की कूटनीतिक सक्रियता इस बात का संकेत जरूर देती है कि सरकार इस संकट को गंभीरता से ले रही है और हर संभव कोशिश कर रही है।
क्या है पूरी पृष्ठभूमि
ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच बढ़ते तनाव ने दुनिया के सबसे अहम तेल मार्ग Strait of Hormuz को युद्धक्षेत्र में बदल दिया है। दुनिया के कुल तेल व्यापार का करीब 20 फीसदी इसी जलडमरूमध्य से गुजरता है। ईरान ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों पर दबाव बनाने के लिए इस मार्ग को बंद करने की धमकी दी। भारत, जो ईरान और अमेरिका दोनों के साथ संतुलित रिश्ते बनाए रखता है, इस संकट में कूटनीतिक रास्ते से समाधान निकालने की कोशिश कर रहा है। 10 मार्च को जयशंकर-आराघची वार्ता इसी दिशा में उठाया गया एक अहम कदम था, जिसका तात्कालिक नतीजा तेल टैंकर ‘शेन लोंग’ के सुरक्षित आगमन के रूप में सामने आया।
मुख्य बातें (Key Points)
- Strait of Hormuz को पार कर लाइबेरियाई झंडे वाला तेल टैंकर ‘शेन लोंग’ 1,35,335 मेट्रिक टन सऊदी क्रूड ऑयल लेकर 11 मार्च को मुंबई पहुंचा।
- भारतीय कप्तान सुशांत सिंह संधू ने जहाज का AIS सिस्टम बंद कर करीब 24 घंटे रडार से गायब रहकर ईरान के चक्रव्यूह को भेदा।
- विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 10 मार्च को ईरानी विदेश मंत्री अब्बास आराघची से बातचीत की, जिसे इस कूटनीतिक सफलता की बड़ी वजह माना जा रहा है।
- अभी भी 28 भारतीय जहाज Strait of Hormuz के आसपास फंसे हुए हैं, हालांकि 7 जहाजों को सुरक्षित जल क्षेत्र में पहुंचाया जा चुका है।








