Skill India Digital Hub : देश में कौशल विकास को डिजिटल बनाने की दिशा में उठाया गया एक बड़ा कदम अब रंग ला रहा है। सितंबर 2023 में लॉन्च किए गए स्किल इंडिया डिजिटल हब (SIDH) ने अब तक 1.5 करोड़ से अधिक उम्मीदवारों को अपने प्लेटफॉर्म से जोड़ा है। यह डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना प्रशिक्षण, मूल्यांकन और प्रमाणन को एक ही मंच पर लाने का काम कर रही है।
कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के तहत शुरू किए गए इस प्लेटफॉर्म ने महज दो साल से भी कम समय में देशभर के युवाओं को रोजगार के नए अवसरों से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई है। लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, यह प्लेटफॉर्म न केवल युवाओं को प्रशिक्षण दे रहा है, बल्कि उन्हें डिजिटल रूप से सत्यापित प्रमाणपत्र भी मुहैया करा रहा है।
एक प्लेटफॉर्म, अनेक सुविधाएं
स्किल इंडिया डिजिटल हब की खासियत यह है कि यह प्रशिक्षण से लेकर प्रमाणन तक की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल रूप से संभालता है। पहले जहां युवाओं को अलग-अलग जगहों पर जाकर अपना नामांकन, प्रशिक्षण और प्रमाणपत्र लेना पड़ता था, वहीं अब सब कुछ एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है।
इस प्लेटफॉर्म पर उम्मीदवार कौशल विकास पाठ्यक्रमों की खोज कर सकते हैं, डिजिटल नामांकन करा सकते हैं, मूल्यांकन में शामिल हो सकते हैं और प्रमाणन प्राप्त कर सकते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि यहां से मिलने वाले प्रमाणपत्र डिजिटल रूप से सत्यापन योग्य और पोर्टेबल होते हैं, जिन्हें कहीं भी दिखाया जा सकता है।
7000 से अधिक प्रशिक्षण प्रदाता जुड़े
13 सितंबर 2023 को शुरू हुए इस प्लेटफॉर्म से अब तक 7,000 से अधिक प्रशिक्षण प्रदाता जुड़ चुके हैं। इसके अलावा 70 से अधिक मूल्यांकन एजेंसियां, 68,000 से अधिक नियोक्ता और उद्योग भागीदार भी इस मंच का हिस्सा बन चुके हैं।
यह आंकड़े साफ बताते हैं कि सरकार की यह पहल कितनी तेजी से आगे बढ़ रही है। जब इतनी बड़ी संख्या में प्रशिक्षण प्रदाता और नियोक्ता एक प्लेटफॉर्म पर आते हैं, तो युवाओं के लिए अवसरों की संभावनाएं कई गुना बढ़ जाती हैं।
बड़े डिजिटल सिस्टम्स से जुड़ा है प्लेटफॉर्म
स्किल इंडिया डिजिटल हब को देश के कुछ सबसे बड़े राष्ट्रीय डिजिटल सिस्टम्स के साथ जोड़ा गया है। इनमें डिजिलॉकर, ई-श्रम, राष्ट्रीय कैरियर सेवा (NCS), यूआईडीएआई और सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (PFMS) शामिल हैं।
इन सिस्टम्स के साथ जुड़ने से प्लेटफॉर्म की पहुंच और विश्वसनीयता दोनों बढ़ी है। उदाहरण के लिए, ई-श्रम पोर्टल के साथ एकीकरण से असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों और गिग वर्कर्स को भी कौशल विकास के अवसर मिल रहे हैं।
पारदर्शिता और विश्वसनीयता में इजाफा
डिजिटल रूप से सत्यापित प्रमाणपत्रों और सुरक्षित डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए इस प्लेटफॉर्म ने मूल्यांकन और प्रमाणन प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई है। अब किसी भी युवा के पास जो सर्टिफिकेट होगा, उसे कहीं भी ऑनलाइन वेरीफाई किया जा सकता है।
इससे नकली प्रमाणपत्रों की समस्या पर भी लगाम लगी है। नियोक्ताओं को भी अब किसी उम्मीदवार की योग्यता की जांच करने में आसानी हो रही है।
चतरा संसदीय क्षेत्र में कौशल विकास की रफ्तार
झारखंड के चतरा संसदीय क्षेत्र में भी कौशल विकास कार्यक्रमों ने गति पकड़ी है। 31 दिसंबर 2025 तक प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) 4.0 के तहत 1590 उम्मीदवारों को प्रशिक्षित और प्रमाणित किया जा चुका है।
इसी अवधि में पीएम विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत 1327 उम्मीदवारों को प्रशिक्षण मिला है। यह योजना पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों के लिए खासतौर पर बनाई गई है।
ITI में 16,180 प्रशिक्षुओं ने लिया नामांकन
चतरा लोकसभा क्षेत्र में 32 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) हैं। पिछले पांच वर्षों के दौरान इन ITI में कुल 16,180 प्रशिक्षुओं ने नामांकन करवाया है। यह संख्या दर्शाती है कि पारंपरिक तकनीकी शिक्षा की मांग अभी भी बरकरार है।
इन ITI में शिल्पकार प्रशिक्षण योजना (CTS) के तहत विभिन्न ट्रेड्स में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। फिटर, इलेक्ट्रीशियन, वेल्डर जैसे कोर्स युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं।
सौर ऊर्जा में उद्यमिता का प्रशिक्षण
चतरा संसदीय क्षेत्र के लातेहार जिले में 2024-26 के दौरान सौर ऊर्जा आधारित उद्यमिता पर विशेष फोकस रहा है। उद्यमिता कौशल विकास कार्यक्रम (ESDP) के तहत 28 लाभार्थियों को सोलर एनर्जी से जुड़े बिजनेस की ट्रेनिंग दी गई है।
यह पहल उस समय में खासतौर पर अहम है जब देश स्वच्छ ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ रहा है। सोलर पैनल इंस्टॉलेशन, मेंटेनेंस और रिपेयर जैसे क्षेत्रों में रोजगार की संभावनाएं तेजी से बढ़ रही हैं।
476 प्रशिक्षुओं ने पूरा किया अपरेंटिसशिप
राष्ट्रीय शिक्षुता प्रोत्साहन योजना (NAPS) के तहत चतरा संसदीय क्षेत्र में 31 दिसंबर 2025 तक 476 प्रशिक्षुओं ने अपना प्रशिक्षण पूरा कर लिया है। अपरेंटिसशिप ऐसा प्रशिक्षण है जो युवाओं को सीधे उद्योग के माहौल में सीखने का मौका देता है।
इस दौरान प्रशिक्षुओं को स्टाइपेंड भी मिलता है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत होती है। कई कंपनियां अपने अपरेंटिस को ट्रेनिंग के बाद नौकरी भी दे देती हैं।
जन शिक्षण संस्थान के तहत 2939 को मिला प्रशिक्षण
लातेहार जिले में जन शिक्षण संस्थान (JSS) के तहत 31 दिसंबर 2025 तक 2939 उम्मीदवारों को प्रशिक्षित और प्रमाणित किया गया है। जन शिक्षण संस्थान मुख्य रूप से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में कौशल विकास का काम करते हैं।
इन संस्थानों की खासियत यह है कि ये स्थानीय जरूरतों के हिसाब से कोर्स तैयार करते हैं। जैसे किसी इलाके में कृषि आधारित उद्योग ज्यादा हैं तो वहां उससे संबंधित स्किल्स सिखाए जाते हैं।
गिग वर्कर्स के लिए भी खुले दरवाजे
सरकार ने माना है कि श्रम बाजार में गिग वर्कर्स का महत्व तेजी से बढ़ रहा है। हालांकि उनके लिए कोई अलग या विशिष्ट प्राथमिकता श्रेणी तो निर्धारित नहीं की गई है, लेकिन वे मौजूदा कौशल विकास योजनाओं के तहत शामिल हैं।
स्किल इंडिया डिजिटल हब को ई-श्रम पोर्टल के साथ जोड़ा गया है, जो असंगठित श्रमिकों का राष्ट्रीय डेटाबेस है। इस एकीकरण से गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को कौशल विकास के अवसरों तक पहुंचने में मदद मिल रही है।
NSQF के अनुरूप पाठ्यक्रम
स्किल इंडिया डिजिटल हब पर उपलब्ध कोर्स राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क (NSQF) के अनुरूप हैं। इसका मतलब यह है कि यहां से मिलने वाली ट्रेनिंग उद्योग के मानकों के हिसाब से है।
NSQF एक ऐसा फ्रेमवर्क है जो विभिन्न स्तरों पर योग्यता को परिभाषित करता है। इससे नियोक्ताओं को यह समझने में आसानी होती है कि किसी व्यक्ति के पास कितनी स्किल है।
डिजिटल रिकॉर्ड से बढ़ी रोजगारपरकता
गिग और असंगठित क्षेत्र के श्रमिक अब अपने कौशल और प्रमाणपत्रों का डिजिटल रिकॉर्ड रख सकते हैं। यह सुविधा उनकी रोजगारपरकता में सुधार लाने में मददगार साबित हो रही है।
जब किसी व्यक्ति के पास अपनी स्किल्स का डिजिटल प्रूफ होता है, तो उसे नौकरी ढूंढने में आसानी होती है। कई ऐप-बेस्ड कंपनियां अब इन डिजिटल सर्टिफिकेट्स के आधार पर लोगों को काम दे रही हैं।
विभिन्न योजनाओं का व्यापक नेटवर्क
स्किल इंडिया मिशन के तहत कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय कई योजनाएं चला रहा है। इनमें प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY), जन शिक्षण संस्थान (JSS), राष्ट्रीय शिक्षुता प्रोत्साहन योजना (NAPS) और शिल्पकार प्रशिक्षण योजना (CTS) प्रमुख हैं।
इन योजनाओं के माध्यम से कौशल विकास केंद्रों का एक विशाल नेटवर्क देशभर में फैला हुआ है। यह नेटवर्क यह सुनिश्चित करता है कि दूरदराज के इलाकों में रहने वाले युवाओं को भी प्रशिक्षण के अवसर मिलें।
निगरानी और जवाबदेही में सुधार
डिजिटल प्लेटफॉर्म की वजह से अब कौशल विकास कार्यक्रमों की निगरानी और कार्यान्वयन में काफी सुधार आया है। हर प्रशिक्षण प्रदाता, हर कोर्स और हर उम्मीदवार का डेटा सिस्टम में दर्ज होता है।
इससे सरकार को यह ट्रैक करने में आसानी होती है कि कौन सी योजना कितनी सफल है और कहां सुधार की जरूरत है। पारदर्शिता बढ़ने से फर्जीवाड़े की गुंजाइश भी कम हुई है।
बड़े पैमाने पर सेवाओं का वितरण
स्किल इंडिया डिजिटल हब की मदद से अब बड़े पैमाने पर कौशल विकास, प्रमाणन और रोजगार मिलान सेवाओं का वितरण हो रहा है। यह प्लेटफॉर्म न केवल कुशल और पारदर्शी है, बल्कि जवाबदेह भी है।
जब लाखों युवा एक साथ एक प्लेटफॉर्म पर आते हैं, तो स्केल की इकोनॉमी काम करती है। सरकार कम खर्च में ज्यादा लोगों तक पहुंच सकती है।
क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध सेवाएं
प्लेटफॉर्म की एक बड़ी खासियत यह है कि यह विभिन्न भाषाओं में उपलब्ध है। इससे देश के हर कोने में रहने वाले युवा अपनी भाषा में कोर्स खोज सकते हैं और नामांकन करा सकते हैं।
भाषा की बाधा को दूर करने से उन युवाओं को भी मौका मिल रहा है जो अंग्रेजी या हिंदी में सहज नहीं हैं। यह सच्चे अर्थों में डिजिटल इंक्लूजन का उदाहरण है।
निर्बाध और सुरक्षित पहुंच
कई केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों और राष्ट्रीय डिजिटल प्रणालियों के साथ एकीकरण के माध्यम से यह प्लेटफॉर्म निर्बाध और सुरक्षित पहुंच को सक्षम बनाता है। डेटा की सुरक्षा को लेकर विशेष ध्यान रखा गया है।
यूआईडीएआई से जुड़ाव की वजह से आधार-आधारित ऑथेंटिकेशन होता है, जिससे धोखाधड़ी की संभावना नहीं रहती। डिजिलॉकर के साथ जुड़ने से सर्टिफिकेट्स की सुरक्षित स्टोरेज भी हो जाती है।
जानें पूरा मामला
स्किल इंडिया डिजिटल हब को सितंबर 2023 में एक विशिष्ट उद्देश्य के साथ लॉन्च किया गया था – देश में कौशल विकास को डिजिटल बनाना और एक ही प्लेटफॉर्म पर सभी सेवाएं उपलब्ध कराना। पहले की व्यवस्था में प्रशिक्षण, मूल्यांकन और प्रमाणन की प्रक्रिया बिखरी हुई थी।
युवाओं को अलग-अलग जगहों पर जाना पड़ता था, कागजी कार्रवाई ज्यादा थी और पारदर्शिता की कमी थी। इन सभी समस्याओं का समाधान करने के लिए ही यह डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना बनाई गई। कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री जयंत चौधरी ने लोकसभा में यह जानकारी एक लिखित उत्तर में साझा की।
मुख्य बातें (Key Points)
• स्किल इंडिया डिजिटल हब से 1.5 करोड़ से अधिक उम्मीदवार, 7000 से अधिक प्रशिक्षण प्रदाता और 70 से अधिक मूल्यांकन एजेंसियां जुड़ चुकी हैं
• प्लेटफॉर्म को डिजिलॉकर, ई-श्रम, एनसीएस, यूआईडीएआई और पीएफएमएस जैसे राष्ट्रीय डिजिटल सिस्टम्स के साथ एकीकृत किया गया है
• चतरा संसदीय क्षेत्र में पीएमकेवीवाई 4.0 के तहत 1590 और पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत 1327 उम्मीदवारों को प्रशिक्षित किया गया है
• गिग वर्कर्स और असंगठित क्षेत्र के श्रमिक भी ई-श्रम एकीकरण के माध्यम से कौशल विकास कार्यक्रमों का लाभ उठा सकते हैं








