रविवार, 22 मार्च 2026
The News Air
No Result
View All Result
  • होम
  • राष्ट्रीय
  • पंजाब
  • राज्य
    • हरियाणा
    • चंडीगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • राजस्थान
  • अंतरराष्ट्रीय
  • सियासत
  • नौकरी
  • LIVE
  • बिज़नेस
  • काम की बातें
  • स्पेशल स्टोरी
  • टेक्नोलॉजी
  • खेल
  • लाइफस्टाइल
    • हेल्थ
    • धर्म
    • मनोरंजन
  • WEB STORIES
  • होम
  • राष्ट्रीय
  • पंजाब
  • राज्य
    • हरियाणा
    • चंडीगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • राजस्थान
  • अंतरराष्ट्रीय
  • सियासत
  • नौकरी
  • LIVE
  • बिज़नेस
  • काम की बातें
  • स्पेशल स्टोरी
  • टेक्नोलॉजी
  • खेल
  • लाइफस्टाइल
    • हेल्थ
    • धर्म
    • मनोरंजन
  • WEB STORIES
No Result
View All Result
The News Air
No Result
View All Result

The News Air - Breaking News - Six Day War 1967: इजराइल ने सिर्फ 6 दिन में तीन देशों को कैसे हराया

Six Day War 1967: इजराइल ने सिर्फ 6 दिन में तीन देशों को कैसे हराया

मिस्र, सीरिया और जॉर्डन की संयुक्त सेना को धूल चटाकर इजराइल बना मिडिल ईस्ट की सबसे बड़ी सैन्य ताकत, 132 घंटों में बदल गया पूरे क्षेत्र का नक्शा

The News Air Team by The News Air Team
रविवार, 22 मार्च 2026
A A
0
Six Day War 1967
104
SHARES
691
VIEWS
ShareShareShareShareShare
Google News
WhatsApp
Telegram

Six Day War 1967: दुनिया के इतिहास में ऐसी बहुत कम जंगें हुई हैं जिन्होंने सिर्फ कुछ दिनों में किसी पूरे क्षेत्र की तस्वीर हमेशा के लिए बदल दी हो। जून 1967 में इजराइल ने ऐसा ही कर दिखाया जब उसने मात्र छह दिनों में मिस्र, सीरिया और जॉर्डन की तीन अरब सेनाओं को करारी शिकस्त दी। यह जंग 5 जून 1967 को शुरू हुई और 10 जून को संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से युद्धविराम लागू होने के साथ खत्म हो गई। इन 132 घंटों में इजराइल ने न सिर्फ अपने से कई गुना बड़ी सैन्य ताकत को परास्त किया, बल्कि अपने मूल आकार से चार गुना ज्यादा भूभाग पर कब्जा कर लिया और मिडिल ईस्ट की सबसे प्रमुख सैन्य शक्ति बनकर उभरा।

दशकों पुरानी दुश्मनी ने रखी थी Six Day War की नींव

Six Day War 1967 अचानक नहीं हुआ था। यह इजराइल और अरब देशों के बीच दशकों से चली आ रही राजनीतिक तनातनी और सैन्य टकराव का नतीजा था। इसकी जड़ें 1917 के बेलफोर घोषणापत्र में मिलती हैं, जब ब्रिटिश सरकार ने फिलिस्तीन में यहूदियों के लिए एक राष्ट्रीय घर बनाने का समर्थन किया था। इसके बाद बड़ी संख्या में यहूदी फिलिस्तीन आने लगे और दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान यह प्रवाह और तेज हो गया।

नवंबर 1947 में संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव 181 के तहत फिलिस्तीन को अरब और यहूदी राज्यों में बांटने का फैसला हुआ। फिलिस्तीन एक अरब भूमि थी और वहां रहने वाले मुसलमानों को उनके ही घरों से बेदखल किया जाने लगा। दूसरी तरफ, यहूदी इस क्षेत्र को अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अपनी पैतृक भूमि मान रहे थे।

1948 में जब इजराइल ने अपनी आजादी की घोषणा की तो मिस्र, जॉर्डन, सीरिया, लेबनान और इराक की सेनाओं ने मिलकर इजराइल पर हमला कर दिया। यह पहला अरब-इजराइल युद्ध था, जिसमें अरब गठबंधन की हार हुई। फरवरी और जुलाई 1949 के बीच दोनों पक्षों में अलग-अलग युद्धविराम समझौते हुए, जिनसे इजराइल और उसके पड़ोसियों के बीच एक अस्थायी सीमा तय हो गई। इसके बाद 1956 में स्वेज संकट के दौरान दूसरा बड़ा टकराव हुआ।

1950 के अंत और 1960 के शुरुआती सालों में स्थिति अपेक्षाकृत शांत रही, लेकिन राजनीतिक माहौल चाकू की नोक पर टिका हुआ था। अरब नेता 1948 की हार से तो परेशान थे ही, साथ ही हजारों फिलिस्तीनी शरणार्थियों की समस्या भी उनके सामने खड़ी थी। इजराइल को यकीन हो चुका था कि मिस्र और बाकी अरब देश उसके अस्तित्व के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं। इस आपसी अविश्वास ने एक और बड़ी जंग की जमीन तैयार कर दी थी।

सोवियत इंटेलिजेंस की गलत रिपोर्ट ने भड़काई आग

Six Day War 1967 को चिंगारी देने का काम सीमा विवादों की एक श्रृंखला ने किया। 1960 के मध्य में सीरिया समर्थित फिलिस्तीनी गुरिल्ला लड़ाकों ने इजराइली सीमा पर हमले शुरू कर दिए, जिसके जवाब में इजराइल डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने भी छापे मारने शुरू कर दिए।

अप्रैल 1967 में स्थिति और गंभीर हो गई जब इजराइल और सीरिया के बीच एक भयंकर हवाई और तोपखाने की लड़ाई हुई। इस टकराव में सीरिया के छह लड़ाकू विमान नष्ट हो गए। इसी दौरान सोवियत संघ ने मिस्र को एक खुफिया रिपोर्ट साझा की जिसमें दावा किया गया कि इजराइल सीरिया पर पूर्ण आक्रमण की तैयारी कर रहा है और अपनी सेना को उत्तरी सीमा की ओर ले जा रहा है।

यह खुफिया रिपोर्ट गलत थी, लेकिन इसने मिस्र के राष्ट्रपति गमाल अब्दुल नासिर को कार्रवाई के लिए मजबूर कर दिया। अपने सीरियाई सहयोगी की मदद के लिए नासिर ने मिस्र की सेना को सिनाई प्रायद्वीप की तरफ बढ़ने का आदेश दे दिया, जहां 1948 की जंग के बाद संयुक्त राष्ट्र शांति सेना तैनात थी। मिस्र की सेना ने इस यूएन शांति सेना को बाहर निकाल दिया।

स्ट्रेट ऑफ तीरान की नाकेबंदी ने बंद किए शांति के सभी रास्ते

22 मई 1967 को राष्ट्रपति नासिर ने एक और बड़ा कदम उठाया। उन्होंने लाल सागर और अकाबा की खाड़ी को जोड़ने वाले समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ तीरान पर इजराइली जहाजों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक लगा दी। एक हफ्ते बाद उन्होंने जॉर्डन के किंग हुसैन के साथ रक्षा समझौता भी कर लिया।

मिडिल ईस्ट की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति लिंडन बी. जॉनसन ने दोनों पक्षों को पहले गोली न चलाने की सलाह दी। साथ ही स्ट्रेट ऑफ तीरान को फिर से खोलने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुद्री अभियान का प्लान बनाने की कोशिश भी की, लेकिन यह प्लान कभी बन ही नहीं पाया।

जून 1967 की शुरुआत में इजराइली नेतृत्व ने फैसला कर लिया कि वो अरब सैन्य जमावड़े का जवाब देने के लिए अब पहले खुद हमला करेंगे। इस बार वो दुश्मन की तरफ से पहला वार होने का इंतजार नहीं करेंगे, बल्कि “पहले हमला करो” (Preemptive Strike) की रणनीति अपनाएंगे। यह फैसला पूरे मिडिल ईस्ट का इतिहास बदलने वाला साबित हुआ।

ऑपरेशन फोकस: 200 विमानों ने मिस्र की 90% वायुसेना तबाह कर दी

5 जून 1967 की सुबह इजराइल ने “ऑपरेशन फोकस” (Operation Focus) शुरू किया, जो Six Day War 1967 का सबसे निर्णायक हमला साबित हुआ। करीब 200 इजराइली लड़ाकू विमानों ने उड़ान भरी और भूमध्य सागर होते हुए उत्तर की तरफ से मिस्र पहुंच गए।

मिस्र की सेना पूरी तरह चकित रह गई। उन्हें इजराइल की इस योजना की भनक तक नहीं लगी थी। इजराइली विमानों ने इस हैरतअंगेज हमले का पूरा फायदा उठाया और 18 अलग-अलग हवाई अड्डों पर धावा बोल दिया। इस एक ही हमले में मिस्र की लगभग 90 प्रतिशत वायुसेना जमीन पर ही तबाह कर दी गई। उड़ान भरने से पहले ही विमान नष्ट हो गए।

मिस्र में मिली इस अभूतपूर्व सफलता के बाद इजराइल ने अपने हमलों का दायरा बढ़ा दिया और जॉर्डन, सीरिया और इराक की वायुसेनाओं पर भी ऐसे ही हमले किए। दिन खत्म होते-होते मिडिल ईस्ट के आसमान पर पूरी तरह इजराइली पायलटों का कब्जा हो चुका था। हवाई श्रेष्ठता (Air Superiority) हासिल होते ही इजराइल की जीत लगभग तय हो चुकी थी।

सिनाई प्रायद्वीप और गाजा पर इजराइल का कब्जा

5 जून को ही मिस्र में जमीनी युद्ध भी शुरू हो गया। हवाई हमलों के साथ-साथ इजराइली टैंक और पैदल सेना ने भी आक्रमण शुरू कर दिया। देखते ही देखते मिस्र के सिनाई प्रायद्वीप और गाजा पट्टी पर इजराइली सेना का दबदबा कायम हो गया।

मिस्र की सेना ने पूरी ताकत से इजराइली हमले का सामना किया, लेकिन फील्ड मार्शल अब्दुल हकीम आमेर के द्वारा दिए गए सामान्य वापसी (General Retreat) के आदेश ने सब कुछ बिगाड़ दिया। इस अचानक वापसी के आदेश से मिस्र की सेना में अफरातफरी मच गई और इसके बाद इजराइली सेना के हाथों उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा। सैकड़ों सैनिक मारे गए और हजारों को कैदी बनाया गया।

जेरूसलम पर कब्जा: जज के सामने इतिहास ने करवट बदली

इसी बीच जॉर्डन को मिस्र की जीत की झूठी रिपोर्टें मिलीं, जिनके आधार पर जॉर्डन ने दूसरा मोर्चा खोलते हुए जेरूसलम में इजराइली ठिकानों पर गोलाबारी शुरू कर दी। यह जॉर्डन की सबसे बड़ी गलती साबित हुई।

इजराइल ने इसका जवाब पूर्वी जेरूसलम और वेस्ट बैंक पर विनाशकारी जवाबी हमले से दिया। 7 जून 1967 को इजराइली सैनिकों ने जेरूसलम के पुराने शहर (Old City of Jerusalem) पर कब्जा कर लिया, जो अब तक जॉर्डन का हिस्सा हुआ करता था। इजराइली सैनिकों ने वेस्टर्न वॉल (जिसे विलिंग वॉल भी कहते हैं) पर प्रार्थना करके अपनी जीत का जश्न मनाया। वेस्टर्न वॉल जेरूसलम के पुराने शहर में स्थित यहूदियों का सबसे पवित्र तीर्थस्थल है।

यह पल Six Day War 1967 का सबसे भावनात्मक क्षण माना जाता है। सदियों बाद यहूदी अपने सबसे पवित्र स्थल पर वापस पहुंचे थे और यह एक ऐसा बदलाव था जिसके परिणाम आज तक देखने को मिल रहे हैं।

गोलन हाइट्स पर कब्जा: छठे दिन आखिरी लड़ाई

Six Day War 1967 की अंतिम लड़ाई इजराइल की उत्तर-पूर्वी सीमा पर सीरिया के साथ हुई। 9 जून 1967 को भारी हवाई बमबारी के बीच इजराइली टैंक और पैदल सेना सीरिया के भारी किलेबंद क्षेत्र में घुस गई। इस क्षेत्र को गोलन हाइट्स के नाम से जाना जाता है।

गोलन हाइट्स एक ऊंचा पठारी इलाका है, जहां से सीरिया लंबे समय से इजराइली बस्तियों पर गोलाबारी करता रहा था। अगले ही दिन यानी 10 जून को गोलन हाइट्स पर भी इजराइल का कब्जा हो गया। इसी दिन संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से युद्धविराम (Ceasefire) लागू कर दिया गया और Six Day War 1967 का अंत हो गया।

132 घंटे, 20,000 अरब सैनिक: जंग के चौंकाने वाले आंकड़े

Six Day War 1967 के नतीजे हर पैमाने पर चौंकाने वाले थे। मात्र एक हफ्ते से भी कम समय में एक छोटे से देश ने मिस्र की गाजा पट्टी और सिनाई प्रायद्वीप, जॉर्डन का वेस्ट बैंक और पूर्वी जेरूसलम, और सीरिया के गोलन हाइट्स पर कब्जा कर लिया। इस जीत के बाद इजराइल का आकार तीन गुना बढ़ गया।

132 घंटे चली इस लड़ाई में करीब 20,000 अरब सैनिक और 800 इजराइली सैनिक मारे गए। अरब नेता अपनी इस भयंकर हार पर स्तब्ध थे। मिस्र के राष्ट्रपति नासिर ने तो अपना इस्तीफा दे दिया, हालांकि मिस्र की जनता ने सड़कों पर उतरकर उनके समर्थन में प्रदर्शन किया, जिसके बाद उन्होंने वापस अपना पद संभाला। दूसरी तरफ इजराइल में जश्न का माहौल था और राष्ट्रीय गौरव चरम पर था।

खारतूम के ‘तीन ना’: अरब देशों का आक्रामक रुख

Six Day War 1967 में मिली शर्मनाक हार के बाद अरब नेता अगस्त 1967 में सूडान की राजधानी खारतूम में एकत्र हुए। यहां उन्होंने एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया जिसे “खारतूम रिजॉल्यूशन” या “तीन ना” (Three No’s) के नाम से जाना जाता है: इजराइल के साथ ना शांति, ना मान्यता, ना बातचीत।

इसका मतलब था कि अरब देश न तो इजराइल को एक देश के रूप में मान्यता देंगे, न उसके साथ कोई बातचीत करेंगे और न ही शांति स्थापित करने का कोई प्रयास करेंगे। इस आक्रामक रुख का सीधा नतीजा यह हुआ कि 1973 में अरब देशों और इजराइल के बीच एक और बड़ी जंग हुई, जिसे योम किपुर युद्ध कहा जाता है।

शरणार्थी संकट और कब्जे वाले इलाकों की समस्या आज भी कायम

Six Day War 1967 की सबसे दर्दनाक विरासत फिलिस्तीनी शरणार्थी संकट है। वेस्ट बैंक और गाजा पट्टी पर कब्जा होने से 10 लाख से ज्यादा फिलिस्तीनी अरब इजराइल राज्य का हिस्सा बन गए। बाद में हजारों लोग इजराइली शासन छोड़कर भागे, जिससे शरणार्थी संकट और भयावह हो गया और इसी वजह से पूरे क्षेत्र में राजनीतिक अस्थिरता और हिंसा की स्थिति बनी रही।

1967 के बाद से अरब-इजराइल संघर्ष को खत्म करने की हर कोशिश में मुख्य मुद्दा Six Day War के दौरान कब्जा किए गए इलाकों का ही रहा है। 1982 में मिस्र के साथ शांति संधि करते हुए इजराइल ने सिनाई प्रायद्वीप लौटा दिया और 2005 में गाजा पट्टी से भी पीछे हट गया। लेकिन गोलन हाइट्स और वेस्ट बैंक पर आज भी इजराइल का कब्जा बना हुआ है और वहां इजराइली बस्तियों की स्थापना लगातार जारी है। यही कब्जा किए गए इलाकों का मुद्दा किसी भी अरब-इजराइल शांति वार्ता में सबसे बड़ी रुकावट बना हुआ है।

यह भी पढे़ं 👇

Diego Garcia

Iran ने Diego Garcia पर दागी Missile: हिंद महासागर तक फैला युद्ध का दायरा

रविवार, 22 मार्च 2026
Trump NATO Iran War

Trump ने NATO Allies को बताया ‘कायर’: Strait of Hormuz पर बड़ा तनाव

रविवार, 22 मार्च 2026
Dawood Ibrahim

Dawood Ibrahim की Official Report से बड़ा खुलासा: ISI कनेक्शन और D Company का सच

रविवार, 22 मार्च 2026
Gulf Nations Iran War

Gulf Nations Iran War: हमलों के बावजूद खाड़ी देश ईरान से क्यों नहीं लड़ रहे?

रविवार, 22 मार्च 2026
आज भी प्रासंगिक क्यों है Six Day War 1967

आज 50 साल से ज्यादा गुजर जाने के बाद भी Six Day War 1967 के प्रभाव मिडिल ईस्ट की हर राजनीतिक और सैन्य गतिविधि में दिखाई देते हैं। 1967 में इजराइल की जो प्रभावशाली स्थिति मिडिल ईस्ट में बनी, वह आज भी कायम है। फिलिस्तीन मुक्ति संगठन (PLO) जहां शांतिपूर्ण तरीके से इस संघर्ष को सुलझाना चाहता है, वहीं हमास जैसे उग्रवादी संगठन फिलिस्तीन में एक स्वतंत्र इस्लामिक राज्य की स्थापना चाहते हैं।

मई 2021 में हमास ने इजराइल पर रॉकेट हमले किए, जिसके जवाब में इजराइल ने भी हवाई हमले किए। और हाल ही में फरवरी 2026 में अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान पर बड़ा हवाई अभियान शुरू किया, जिसमें B-2, B-52 जैसे रणनीतिक बमवर्षक विमानों से लेकर F-35 लड़ाकू विमानों तक सब कुछ दांव पर लगा दिया गया। ईरान ने इसके जवाब में सैकड़ों ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जो सिर्फ इजराइल ही नहीं बल्कि पश्चिम एशिया में फैले अमेरिकी ठिकानों तक पहुंचीं।

ठीक जैसे 1967 में तनाव सालों तक धीरे-धीरे बढ़ता रहा और फिर अचानक एक ऐसी जंग छिड़ी जिसने सब कुछ बदल दिया, वैसे ही आज का संकट भी एक बार फिर मिडिल ईस्ट के नक्शे को बदलने की ताकत रखता है। इतिहास गवाह है कि इस क्षेत्र में कोई भी जंग सिर्फ सैन्य जीत-हार तक सीमित नहीं रहती, उसके राजनीतिक और मानवीय परिणाम पीढ़ियों तक झेलने पड़ते हैं।


मुख्य बातें (Key Points)
  • Six Day War 1967 में इजराइल ने 5 से 10 जून के बीच मात्र छह दिनों में मिस्र, सीरिया और जॉर्डन की तीन अरब सेनाओं को हराकर अपने आकार से चार गुना ज्यादा भूभाग पर कब्जा किया और मिडिल ईस्ट की सबसे बड़ी सैन्य ताकत बनकर उभरा।
  • ऑपरेशन फोकस में इजराइल के करीब 200 लड़ाकू विमानों ने मिस्र की लगभग 90% वायुसेना को जमीन पर ही तबाह कर दिया, जिसके बाद जॉर्डन, सीरिया और इराक की वायुसेनाओं को भी नष्ट किया गया।
  • 132 घंटों की लड़ाई में करीब 20,000 अरब और 800 इजराइली सैनिक मारे गए, इजराइल ने गाजा, सिनाई, वेस्ट बैंक, पूर्वी जेरूसलम और गोलन हाइट्स पर कब्जा कर लिया।
  • Six Day War 1967 की विरासत आज भी कायम है: कब्जा किए गए इलाकों का मुद्दा, फिलिस्तीनी शरणार्थी संकट और इजराइल-अरब संघर्ष की जड़ें इसी युद्ध में हैं, जो 2026 के ईरान-अमेरिका संघर्ष तक जारी हैं।

FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1: Six Day War 1967 में इजराइल ने कौन-कौन से इलाकों पर कब्जा किया था?

A: इजराइल ने मिस्र से गाजा पट्टी और सिनाई प्रायद्वीप, जॉर्डन से वेस्ट बैंक और पूर्वी जेरूसलम, और सीरिया से गोलन हाइट्स पर कब्जा किया। बाद में सिनाई मिस्र को लौटाया गया और 2005 में गाजा से भी पीछे हटे, लेकिन वेस्ट बैंक और गोलन हाइट्स पर अभी भी इजराइल का कब्जा है।

Q2: Six Day War क्यों हुआ था?

A: इसकी मुख्य वजहें थीं: सीरिया समर्थित फिलिस्तीनी गुरिल्लाओं के सीमा पर हमले, सोवियत संघ की गलत खुफिया रिपोर्ट जिसने मिस्र को उकसाया, राष्ट्रपति नासिर द्वारा स्ट्रेट ऑफ तीरान की नाकेबंदी, और जॉर्डन-मिस्र रक्षा समझौता। इन सबके बाद इजराइल ने पहले हमला करने (Preemptive Strike) का फैसला किया।

Q3: Six Day War 1967 ने मिडिल ईस्ट की राजनीति पर क्या असर डाला?

A: इस युद्ध ने मिडिल ईस्ट का नक्शा पूरी तरह बदल दिया। इजराइल क्षेत्रीय महाशक्ति बनकर उभरा, फिलिस्तीनी शरणार्थी संकट गहरा हुआ, अरब देशों ने “तीन ना” (ना शांति, ना मान्यता, ना बातचीत) की नीति अपनाई, और 1973 का योम किपुर युद्ध इसी का नतीजा था। कब्जा किए गए इलाकों का विवाद आज तक जारी है।

Previous Post

Trump ने NATO Allies को बताया ‘कायर’: Strait of Hormuz पर बड़ा तनाव

Next Post

Iran ने Diego Garcia पर दागी Missile: हिंद महासागर तक फैला युद्ध का दायरा

The News Air Team

The News Air Team

द न्यूज़ एयर टीम (The News Air Team) अनुभवी पत्रकारों, विषय विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं का एक समर्पित समूह है, जो पाठकों तक सटीक, निष्पक्ष और त्वरित समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी टीम राजनीति, सरकारी योजनाओं, तकनीक और जन-सरोकार से जुड़े मुद्दों पर गहराई से विश्लेषण कर तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग करती है। 'द न्यूज़ एयर' का मुख्य उद्देश्य डिजिटल पत्रकारिता के उच्चतम मानकों को बनाए रखना और समाज के हर वर्ग को जागरूक करना है। हम हर खबर को पूरी पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ आप तक पहुँचाते हैं, ताकि आपको मिले केवल भरोसेमंद जानकारी।

Related Posts

Diego Garcia

Iran ने Diego Garcia पर दागी Missile: हिंद महासागर तक फैला युद्ध का दायरा

रविवार, 22 मार्च 2026
Trump NATO Iran War

Trump ने NATO Allies को बताया ‘कायर’: Strait of Hormuz पर बड़ा तनाव

रविवार, 22 मार्च 2026
Dawood Ibrahim

Dawood Ibrahim की Official Report से बड़ा खुलासा: ISI कनेक्शन और D Company का सच

रविवार, 22 मार्च 2026
Gulf Nations Iran War

Gulf Nations Iran War: हमलों के बावजूद खाड़ी देश ईरान से क्यों नहीं लड़ रहे?

रविवार, 22 मार्च 2026
Aadhaar App Pre-install

Aadhaar App Pre-install पर बड़ा विवाद: Apple-Samsung ने सरकार को दिया झटका

रविवार, 22 मार्च 2026
Qatar LNG Capacity

Qatar LNG Capacity पर Iran Attack: भारत के लिए 5 साल का बड़ा संकट

रविवार, 22 मार्च 2026
Next Post
Diego Garcia

Iran ने Diego Garcia पर दागी Missile: हिंद महासागर तक फैला युद्ध का दायरा

0 0 votes
Rating
Subscribe
Notify of
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments
The News Air

© 2026 The News Air | सटीक समाचार। सर्वाधिकार सुरक्षित।

GN Follow us on Google News

  • About
  • Editorial Policy
  • Privacy & Policy
  • Disclaimer & DMCA Policy
  • Contact

हमें फॉलो करें

No Result
View All Result
  • प्रमुख समाचार
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • सियासत
  • राज्य
    • पंजाब
    • चंडीगढ़
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • महाराष्ट्र
    • पश्चिम बंगाल
    • उत्तर प्रदेश
    • बिहार
    • उत्तराखंड
    • मध्य प्रदेश
    • राजस्थान
  • काम की बातें
  • नौकरी
  • बिज़नेस
  • टेक्नोलॉजी
  • मनोरंजन
  • धर्म
  • हेल्थ
  • स्पेशल स्टोरी
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
  • WEB STORIES

© 2026 The News Air | सटीक समाचार। सर्वाधिकार सुरक्षित।