SIR Form Process: देश के 9 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में चुनाव आयोग ने एक बड़ा अभियान छेड़ दिया है, जिसे लेकर हर घर में चर्चा गर्म है। क्या आपके दरवाजे पर भी ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ यानी SIR का फॉर्म पहुंचा है और आप इसे भरने में पसीने छूट रहे हैं? सावधान हो जाइए, क्योंकि इस फॉर्म में की गई एक छोटी सी गलती या लापरवाही आपका नाम वोटर लिस्ट से हमेशा के लिए गायब कर सकती है।
‘क्या है SIR और क्यों मचा है हड़कंप’
सोशल मीडिया से लेकर गांव के चौपालों तक SIR की चर्चा है, लेकिन आधे-अधूरे ज्ञान ने लोगों को तनाव में डाल दिया है। दरअसल, SIR एक विशेष चुनावी प्रक्रिया है, जिसका मकसद देश की मतदाता सूची को पूरी तरह ‘साफ-सुथरा’ बनाना है।
इस प्रक्रिया के जरिए नए वोटर्स को जोड़ा जाएगा, पुरानी गलतियों को सुधारा जाएगा और सबसे अहम—जिन लोगों की मौत हो चुकी है, जो जगह छोड़ चुके हैं या जिनके नाम दो बार दर्ज हैं (डुप्लीकेट), उन्हें लिस्ट से बाहर किया जाएगा। इसलिए, अगर आप चाहते हैं कि आपका वोट सुरक्षित रहे, तो इस फॉर्म को गंभीरता से लेना होगा।
‘फॉर्म का पहला हिस्सा: सिर्फ फोटो का काम’
SIR फॉर्म को तीन मुख्य भागों में बांटा गया है। पहला भाग ‘एन्यूमरेशन फॉर्म’ है, जो आपके लिए सबसे राहत वाला हिस्सा है। इस प्री-फिल्ड सेक्शन में आपका नाम, पता, EPIC नंबर, सीरियल नंबर और क्यूआर कोड जैसी जानकारी पहले से ही भरी हुई मिलेगी।
आपको बस इतना करना है कि अपनी एक हालिया (Latest) पासपोर्ट साइज फोटो इस पर लगानी है। ध्यान रहे, फोटो बिल्कुल साफ होनी चाहिए ताकि सिस्टम में आपका रिकॉर्ड अपडेटेड रहे। इसमें आपको पेन चलाने की कोई खास जरूरत नहीं है।
‘दूसरा हिस्सा: अपनी पर्सनल कुंडली बताएं’
दूसरे भाग में आपको अपनी व्यक्तिगत जानकारी देनी होगी। सबसे पहले अपनी जन्मतिथि (Date of Birth) को DD/MM/YYYY फॉर्मेट में लिखें। इसके बाद अपना मोबाइल नंबर दर्ज करें, जो भविष्य में आपके वोटर आईडी से लिंक हो जाएगा।
यहां आपसे आधार नंबर भी मांगा जाएगा, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है—चुनाव आयोग ने साफ किया है कि आधार नंबर देना पूरी तरह ‘ऑप्शनल’ (वैकल्पिक) है, अनिवार्य नहीं। अंत में, आपको अपने माता-पिता या पति/पत्नी का नाम और उनका 10 अंकों वाला EPIC (वोटर आईडी) नंबर भरना होगा।
‘तीसरा हिस्सा: सबसे बड़ा कन्फ्यूजन यहां है’
फॉर्म का तीसरा भाग सबसे पेचीदा है, जिसे ‘SIR 2002-03’ आधार कहा जा रहा है। इसे दो कॉलम में बांटा गया है। बायां कॉलम (Left Column) उन लोगों के लिए है जिनका नाम 2002-03 की SIR लिस्ट में पहले से मौजूद था। उन्हें अपना और अपने माता-पिता का पुराना विवरण भरना होगा।
वहीं, दायां कॉलम (Right Column) उन लोगों के लिए है जिनका नाम उस पुरानी लिस्ट में नहीं था। ऐसे लोगों को अपनी पहचान साबित करने के लिए अपने किसी करीबी रिश्तेदार (माता, पिता, दादा, दादी) का ब्यौरा देना होगा, जिनका नाम उस लिस्ट में था। यहां रिश्तेदार का EPIC नंबर और रिश्ता बिल्कुल सही भरना जरूरी है, वरना फॉर्म रिजेक्ट हो सकता है।
‘ऑनलाइन भरने का आसान तरीका’
अगर आप कागज-कलम के झंझट से बचना चाहते हैं, तो यह काम ऑनलाइन भी हो सकता है। सीधा voters.gov.in पर जाएं और ‘Fill Enumeration Form’ पर क्लिक करें। अपने मोबाइल या EPIC नंबर से लॉग-इन करें।
सारी डिटेल्स चेक करें, अगर कुछ गलत है तो उसे सुधारें और अंत में आधार ई-साइन (Aadhaar e-Sign) के जरिए सबमिट कर दें। सबमिट करने के बाद स्टेटस जरूर चेक करें कि फॉर्म ‘प्रोसेसिंग’ में है या ‘सबमिटेड’ हो चुका है।
‘जानें पूरा मामला’
यह पूरी कवायद मतदाता सूची के शुद्धिकरण के लिए की जा रही है। बीएलओ (BLO) घर-घर जाकर जानकारी सत्यापित कर रहे हैं। पहचान के लिए 13 दस्तावेजों को मान्यता दी गई है, जिसमें पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, और 10वीं-12वीं की मार्कशीट शामिल हैं। याद रखें, सिर्फ आधार कार्ड के दम पर आपका नाम लिस्ट में नहीं जोड़ा जाएगा, यह केवल एक सहायक दस्तावेज है।
मुख्य बातें (Key Points)
SIR का मकसद मतदाता सूची से डुप्लीकेट और गलत नामों को हटाना है।
फॉर्म के पहले हिस्से में केवल नई फोटो लगानी है, बाकी जानकारी पहले से भरी होगी।
आधार नंबर देना अनिवार्य नहीं है, यह पूरी तरह वैकल्पिक है।
फॉर्म का तीसरा हिस्सा 2002-03 की सूची के आधार पर वंश वृक्ष/रिश्तेदारी साबित करने के लिए है।
voters.gov.inपर जाकर फॉर्म को ऑनलाइन भी भरा और जमा किया जा सकता है।








