SIR Deadline Extended: देश भर में मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) को लेकर मचे बवाल और बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) पर काम के जानलेवा दबाव के बीच चुनाव आयोग ने एक बड़ा कदम उठाया है। 12 राज्यों में चल रही इस प्रक्रिया की समय सीमा को तत्काल प्रभाव से बढ़ा दिया गया है, जिससे चुनावी ड्यूटी में लगे कर्मचारियों को थोड़ी राहत मिली है।
सरकार का यह फैसला ऐसे वक्त में आया है, जब कई जिलों से बीएलओ द्वारा काम के बोझ के चलते आत्महत्या करने और दिल का दौरा पड़ने जैसी बेहद दुखद खबरें सामने आ रही थीं।
‘तारीखों में हुआ बड़ा बदलाव’
चुनाव आयोग ने एसआईआर (SIR) प्रक्रिया के तहत फॉर्म जमा करने की आखिरी तारीख को 7 दिन के लिए आगे बढ़ा दिया है। अब फॉर्म जमा करने की अंतिम तिथि 4 दिसंबर नहीं, बल्कि 11 दिसंबर होगी।
इसके साथ ही पूरी प्रक्रिया का शेड्यूल बदल गया है। पहले जहां 9 दिसंबर 2025 को मसौदा मतदाता सूची (Draft Voter List) जारी होनी थी, अब इसे 16 दिसंबर 2025 को प्रकाशित किया जाएगा। दावे और आपत्ति दर्ज कराने का समय भी अब 16 दिसंबर 2025 से 15 जनवरी 2026 तक कर दिया गया है। अंतिम सूची का प्रकाशन, जो 7 फरवरी 2026 को होना था, अब 14 फरवरी 2026 को होगा।
‘बीएलओ की मौत से हड़कंप’
चुनाव आयोग के इस फैसले के पीछे बीएलओ (BLO) पर पड़ रहे अत्यधिक दबाव को मुख्य वजह माना जा रहा है। 4 दिसंबर की डेडलाइन पूरा करने के चक्कर में कई कर्मचारियों की जान पर बन आई थी।
उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में 46 वर्षीय शिक्षक और बीएलओ सर्वेश सिंह ने आत्महत्या जैसा खौफनाक कदम उठा लिया। उन्होंने अपने सुसाइड नोट में साफ लिखा कि उन्हें 7 अक्टूबर को बीएलओ बनाया गया था और एसआईआर का टारगेट पूरा न होने के कारण वे भारी तनाव में थे, जिस कारण वे जान देने को मजबूर हुए।
‘अखिलेश और ममता ने साधा निशाना’
इस मुद्दे पर राजनीति भी गरमा गई है। उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव ने बीएलओ की मौतों को लेकर सरकार को घेरा और एसआईआर प्रक्रिया को फेल बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना ट्रेनिंग के कर्मचारियों पर काम थोपा गया है और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि किसी का वोट न कटे।
वहीं, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को चिट्ठी लिखकर सिस्टम की खामियां गिनाईं। उन्होंने कहा कि 3 साल का काम जबरदस्ती 3 महीने में थोपा जा रहा है। उन्होंने जलपाईगुड़ी के माल इलाके में एक आंगनबाड़ी वर्कर की आत्महत्या का जिक्र किया, जिसने एसआईआर के दबाव में जान दे दी।
‘सिस्टम फेल और सर्वर डाउन’
विपक्ष का आरोप है कि बीएलओ को न तो सही ट्रेनिंग दी गई और न ही ऑनलाइन फॉर्म भरने के लिए सर्वर ठीक से काम कर रहा है। ममता बनर्जी ने कहा कि टाइमलाइन नामुमकिन है और यह सिर्फ कागजी काम नहीं, बल्कि लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ है।
फिलहाल, सरकार द्वारा बढ़ाई गई एक हफ्ते की मोहलत को बीएलओ के लिए एक संजीवनी के रूप में देखा जा रहा है। अब देखना यह होगा कि इस अतिरिक्त समय में अधिकारी काम के दबाव को कितना कम कर पाते हैं।
जानें पूरा मामला
देश के 12 राज्यों, जिनमें उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल प्रमुख हैं, में विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) अभियान चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना है। हालांकि, कम समय और अधिक काम के कारण बीएलओ मानसिक तनाव का शिकार हो रहे थे, जिसके विरोध में विपक्षी दल और कर्मचारी संगठन आवाज उठा रहे थे।
मुख्य बातें (Key Points)
एसआईआर फॉर्म जमा करने की आखिरी तारीख अब 4 दिसंबर से बढ़ाकर 11 दिसंबर कर दी गई है।
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट अब 16 दिसंबर 2025 को और फाइनल लिस्ट 14 फरवरी 2026 को आएगी।
यूपी के मुरादाबाद में बीएलओ सर्वेश सिंह ने काम के दबाव में सुसाइड नोट लिखकर आत्महत्या की।
अखिलेश यादव और ममता बनर्जी ने बीएलओ पर अमानवीय काम का बोझ डालने का आरोप लगाया।








