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The News Air - Breaking News - Sheetala Ashtami 2026 : शीतला माता की कहानी, पूजा विधि और जरूरी नियम, भूलकर भी न करें ये काम

Sheetala Ashtami 2026 : शीतला माता की कहानी, पूजा विधि और जरूरी नियम, भूलकर भी न करें ये काम

शीतला सप्तमी और अष्टमी पर माता शीतला की पूजा में दीपक-अगरबत्ती न जलाएं, ताजा खाना न बनाएं: जानें शुभ उपाय, मंत्र और व्रत कथा

The News Air Team by The News Air Team
बुधवार, 11 मार्च 2026
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Sheetala Ashtami 2026
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Sheetala Ashtami 2026 और शीतला सप्तमी का पावन पर्व इस बार 10 और 11 मार्च 2026 को पूरे देश में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार शीतला सप्तमी का व्रत चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि यानी 10 मार्च को रखा जा रहा है, जबकि Sheetala Ashtami Kab Hai 2026 का जवाब है 11 मार्च 2026। ये दोनों दिन आरोग्य, स्वच्छता और शीतलता की देवी शीतला माता (Shitala Mata) को समर्पित हैं। धार्मिक मान्यता है कि इन दिनों माता शीतला की सच्चे मन से पूजा करने और शीतला माता की कहानी (Shitala Mata Ki Katha) सुनने वाले परिवार को रोगों से सुरक्षा मिलती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है। जाने-माने ज्योतिषाचार्य डॉ. गौरव कुमार दीक्षित ने बताया है कि इन दिनों कौन से उपाय शुभ माने जाते हैं और किन कामों से बचना जरूरी है।

Shitala Mata की पूजा क्यों है इतनी खास?

माता शीतला को हिंदू धर्म में रोगों से रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। खासकर चेचक, खसरा, फोड़े-फुंसी और त्वचा से जुड़ी बीमारियों से बचाव के लिए Shitala Mata की पूजा सदियों से की जाती रही है। होली के ठीक बाद जब मौसम बदलता है और गर्मी शुरू होती है, तब शरीर में संक्रमण और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ठीक इसी समय शीतला सप्तमी और Sheetala Ashtami 2026 का व्रत आता है, जो स्वास्थ्य और स्वच्छता का संदेश देता है।

लोग इन दिनों माता शीतला की पूजा कर उनसे अपने परिवार के स्वास्थ्य और खुशहाली का आशीर्वाद मांगते हैं। कई परिवारों में सप्तमी को व्रत रखा जाता है तो कई जगहों पर अष्टमी को “बसोड़ा” के रूप में मनाया जाता है। दोनों ही दिन माता शीतला की कृपा प्राप्त करने के लिए बेहद शुभ माने गए हैं।

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शीतला माता की कहानी (Sheetala Ashtami Ki Kahani): जानें व्रत कथा का महत्व

Sheetala Ashtami Ki Kahani और शीतला माता की कहानी का पाठ इस पर्व का सबसे अहम हिस्सा माना जाता है। Shitala Mata Ki Katha के अनुसार माता शीतला गधे पर सवार होकर आती हैं और उनके हाथों में झाड़ू, नीम के पत्ते, कलश और सूप होता है। झाड़ू स्वच्छता का प्रतीक है, नीम रोगों से बचाव का, कलश शीतलता का और सूप अन्न के शोधन का।

ज्योतिषाचार्य डॉ. दीक्षित के अनुसार Sheetala Ashtami 2026 और सप्तमी के दिन शीतला माता की व्रत कथा और स्तोत्र का पाठ करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है। मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से शीतला माता की कहानी सुनता और सुनाता है, उसके परिवार पर माता की विशेष कृपा बनी रहती है और घर में कोई भी सदस्य गंभीर रोगों से पीड़ित नहीं होता। इसीलिए पूजा के बाद परिवार के सभी सदस्यों को एक साथ बैठकर Shitala Mata Ki Katha अवश्य सुननी चाहिए।

शीतला सप्तमी और Sheetala Ashtami 2026 के शुभ उपाय

ज्योतिषाचार्य डॉ. गौरव कुमार दीक्षित बताते हैं कि शीतला सप्तमी और Sheetala Ashtami 2026 के दिन कुछ खास उपाय करने से Shitala Mata की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इन उपायों को श्रद्धा और विश्वास के साथ करने से परिवार में आरोग्य और समृद्धि का वरदान मिलता है।

सबसे पहले सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और माता शीतला की विधिवत पूजा करें। पूजा में माता को मीठे चावल का भोग लगाना चाहिए। ये चावल गुड़ या गन्ने के रस से बनाए जाते हैं। बसोड़ा यानी बासी भोजन का भोग लगाना इस पर्व की सबसे खास परंपरा है।

पूजा के दौरान Shitala Mata को नीम के पत्ते जरूर अर्पित करें। धार्मिक मान्यता है कि नीम के पत्तों से माता शीतला अत्यंत प्रसन्न होती हैं। इसके साथ ही नीम में प्राकृतिक रूप से एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं, जिससे त्वचा संबंधी रोगों से रक्षा मिलती है।

इस शक्तिशाली मंत्र का 108 बार करें जाप

Sheetala Ashtami 2026 और शीतला सप्तमी के दिन ‘ॐ ह्रीं श्रीं शीतलायै नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करना बेहद शुभ माना जाता है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार इस मंत्र के जाप से Shitala Mata की विशेष कृपा बरसती है और घर में नकारात्मक ऊर्जा दूर होकर सकारात्मक वातावरण बनता है। इसके अलावा शीतला माता की कहानी यानी व्रत कथा और स्तोत्र का पाठ करने से भी परिवार में शांति और समृद्धि आती है।

जरूरतमंद लोगों को भोजन, कपड़े या अनाज का दान करना भी इस दिन अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। मान्यता है कि शीतला सप्तमी और Sheetala Ashtami 2026 पर किया गया दान कई गुना फल देता है और दान करने वाले के परिवार को सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है।

संतान सुख के लिए करें यह खास उपाय

जो लोग संतान सुख की कामना रखते हैं, उन्हें Sheetala Ashtami 2026 या शीतला सप्तमी के दिन Shitala Mata को दही और चावल का भोग लगाना चाहिए। ज्योतिषाचार्य डॉ. दीक्षित बताते हैं कि धार्मिक मान्यता के अनुसार सच्चे मन से यह उपाय करने पर माता शीतला भक्त की कामना को अवश्य स्वीकार करती हैं। यह उपाय विशेष रूप से उन दंपतियों के लिए बताया गया है जो लंबे समय से संतान प्राप्ति की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

शीतला सप्तमी और अष्टमी पर भूलकर भी न करें ये काम

Sheetala Ashtami 2026 और शीतला सप्तमी के दिन कुछ ऐसे सख्त नियम हैं जिनका पालन करना बेहद जरूरी माना जाता है। इन नियमों को तोड़ना अशुभ माना गया है और ऐसा करने से Shitala Mata नाराज हो सकती हैं।

ताजा भोजन नहीं बनाना है: यह इस पर्व का सबसे अहम नियम है। शीतला सप्तमी और अष्टमी पर घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता और ताजा भोजन नहीं पकाया जाता। पूजा और भोजन के लिए खाना एक दिन पहले ही तैयार कर लिया जाता है। अगले दिन उसी बासी भोजन (बसोड़ा) का भोग माता को लगाया जाता है और परिवार के सभी सदस्य वही भोजन ग्रहण करते हैं। इसीलिए इस पर्व को कई जगहों पर “बसोड़ा” भी कहा जाता है।

सिलाई-कढ़ाई और सुई-कैंची का इस्तेमाल वर्जित: इस दिन सुई, कैंची या किसी भी नुकीली चीज का उपयोग करने से बचना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से Shitala Mata का कोप हो सकता है।

तामसिक भोजन और नशे से परहेज: शीतला सप्तमी और Sheetala Ashtami 2026 पर प्याज, लहसुन, मांस-मछली जैसे तामसिक भोजन और किसी भी प्रकार के नशे से पूरी तरह दूर रहना चाहिए। इस दिन सात्विक आचरण रखना जरूरी माना जाता है।

दीपक और अगरबत्ती न जलाएं: यह नियम बहुत से लोगों को आश्चर्य में डालता है, लेकिन Shitala Mata की पूजा में दीपक या अगरबत्ती नहीं जलाई जाती। माता शीतला “शीतलता” की देवी हैं, इसलिए उनकी पूजा में आग या गर्मी पैदा करने वाली किसी भी चीज का उपयोग वर्जित माना गया है।

स्वच्छता, संयम और स्वास्थ्य का संदेश देता है यह पर्व

ज्योतिषाचार्य डॉ. गौरव कुमार दीक्षित कहते हैं कि Sheetala Ashtami 2026 और शीतला सप्तमी का पर्व सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह हमें स्वच्छता, संयम और स्वास्थ्य का गहरा संदेश देता है। बदलते मौसम में जब बीमारियों का खतरा बढ़ता है, तब यह व्रत हमें खान-पान में संयम और शरीर की साफ-सफाई पर ध्यान देने की प्रेरणा देता है। शीतला माता की कहानी (Shitala Mata Ki Katha) भी यही सिखाती है कि जो परिवार स्वच्छता और संयम से रहता है, उस पर माता की कृपा सदैव बनी रहती है।

आज के समय में जब प्रदूषण और बदलती जीवनशैली ने बीमारियों को बढ़ा दिया है, तब Shitala Mata जैसी देवी की पूजा और उनसे जुड़े नियमों का पालन करना और भी प्रासंगिक हो जाता है। माता शीतला की सच्चे मन से पूजा करने, शीतला माता की कहानी सुनने और व्रत के नियमों का पालन करने से परिवार में सुख, शांति और निरोगी जीवन का आशीर्वाद प्राप्त होता है।


मुख्य बातें (Key Points)
  • Sheetala Ashtami 2026 11 मार्च को है, जबकि शीतला सप्तमी 10 मार्च को मनाई जा रही है। दोनों दिन Shitala Mata की पूजा का विशेष महत्व है।
  • इन दिनों ताजा भोजन नहीं बनाना, सुई-कैंची का इस्तेमाल न करना और दीपक-अगरबत्ती न जलाना जरूरी नियम हैं।
  • ‘ॐ ह्रीं श्रीं शीतलायै नमः’ मंत्र का 108 बार जाप, नीम के पत्ते चढ़ाना, मीठे चावल का भोग लगाना और शीतला माता की कहानी (Shitala Mata Ki Katha) का पाठ करना शुभ माना जाता है।
  • संतान सुख के लिए माता को दही और चावल का भोग लगाने का विशेष उपाय बताया गया है।

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1: Sheetala Ashtami Kab Hai 2026?

शीतला अष्टमी 2026 में 11 मार्च को मनाई जाएगी। यह चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को पड़ती है। शीतला सप्तमी 10 मार्च को है और दोनों ही दिन माता शीतला की पूजा की जाती है।

Q2: शीतला माता की कहानी (Shitala Mata Ki Katha) का क्या महत्व है?

शीतला माता की व्रत कथा का पाठ करने से माता शीतला प्रसन्न होती हैं और परिवार को रोगों से सुरक्षा मिलती है। मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से Shitala Mata Ki Katha सुनता और सुनाता है, उसके घर में सुख-शांति और स्वास्थ्य बना रहता है।

Q3: Sheetala Ashtami 2026 पर क्या खाना चाहिए और क्या नहीं?

शीतला अष्टमी और सप्तमी पर ताजा भोजन नहीं बनाया जाता। एक दिन पहले बना हुआ बासी भोजन (बसोड़ा) खाया जाता है। माता को मीठे चावल और दही-चावल का भोग लगाया जाता है। तामसिक भोजन और नशे से पूरी तरह परहेज रखना चाहिए।

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